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Showing posts from June, 2023

आर‌एस‌एस-भाजपा का पसमांदा मुस्लिम फार्मूला : विभाजन और नफ़रत की खतरनाक साज़िश

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आर‌एस‌एस-भाजपा का पसमांदा मुस्लिम फार्मूला : विभाजन और नफ़रत की खतरनाक साज़िश ************************ जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। भारतीय जनता पार्टी या यह कहें कि आर‌एस‌एस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छत्रछाया वाली केन्द्र सरकार में इनके 300 के क़रीब लोकसभा सांसद हैं। यह सीटें कुछ राज्यों में तो अधिक से अधिक हैं, ख़ासकर उत्तर भारत के राज्यों में। अब इन राज्यों में एक भी सीट नहीं बढ़ सकती। जहां तक दक्षिण भारत का सवाल है तो वहां पहले से ही लोग इस नफरती हांडी को नहीं चढ़ा रहे हैं, जो बांकी टेड़ी हांडी कर्नाटक में चढ़ी हुई थी उसे वहां के जागरूक मतदाताओं ने कुछ दिनों पहले फोड़ कर फेंक दिया है। इसके अलावा महंगाई, बेरोजगारी और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण से देश में जो माहौल पिछले कुछ बरसों में बना है उससे जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। ऐसे में यह तय है कि भाजपा की लोकसभा सीटें निश्चित रूप से घटेंगी और यह 200 से भी नीचे जा सकती हैं। इस सम्भावित खतरे और सत्ता जाने के डर से आर‌एस‌एस-भाजपा ने एक नया फार्मूला इजाद किया है, वो है "पसमांदा मुस्लिम" का। यानी इन्होंने अपनी विभाजनकारी और...

सीएम गहलोत का जातीय जनगणना कराने का पत्र ?

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सीएम गहलोत का जातीय जनगणना कराने का पत्र ? ************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गत दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा है, जिसमें जातीय जनगणना कराने की मांग की गई है, जो बहुत ही अच्छी बात है। जातीय जनगणना की मांग दशकों से देश में हो रही है, अन्तिम जातीय जनगणना आजादी से पहले 1931 में हुई थी। जातीय जनगणना नहीं होने का सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी वर्ग को हो रहा है, क्योंकि एससी-एसटी की जातीय जनगणना तो पहले से हो रही है और सामान्य वर्ग के अधिकतर लोग जातीय जनगणना के खिलाफ हैं। जातीय जनगणना से यह पता चल जाएगा कि देश में कौनसी जाति और वर्ग की कितनी आबादी है तथा इससे विकास योजनाओं और आरक्षण बढ़ाने घटाने में मदद मिलेगी। जो लोग जातीय जनगणना के खिलाफ हैं वे नहीं चाहते कि ओबीसी वर्ग की जातियों का विकास हो और उनका आरक्षण बढ़ाया जाए। कर्नाटक चुनाव के दौरान कांग्रेस के नेताओं ने जातीय जनगणना की बात खुले मंच से कही है तथा पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने "जिसकी जितनी आबादी उतनी उसकी हिस्सेदारी" वाले समाजवाद...

सोशलिस्टों का इतिहास...

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सोशलिस्टों का इतिहास... ******************* प्रोफेसर राजकुमार जैन आजाद हिंदुस्तान में समय-समय पर मुख्तलिफ नामों से बनी सोशलिस्ट पार्टियों की जननी "कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी" का जन्म 17 मई 1934 को काशी विद्यापीठ के आचार्य नरेंद्र देव की सदारत में पटना के  अंजुमन इस्लामिया हॉल में मुल्कभर से आए सौ लोगों के सम्मेलन में हुआ था। हालांकि इससे पहले भी कई सूबों में स्थानीय स्तर पर इसकी शुरुआत हो चुकी थी। सवाल पैदा होता है कि महात्मा गांधी की रहनुमाई तथा कांग्रेस पार्टी के झंडे के नीचे ब्रितानिया हुकूमत के खिलाफ आजादी के लिए जब लड़ाई जारी थी तो कांग्रेस को ही अपना नेता व पार्टी मानते हुए सोशलिस्टों ने कांग्रेस के अंदर ही सोशलिस्ट पार्टी क्यों बनाई ? सवाल वाजिब है। इसका कारण 1930 का दंडी मार्च और 1932 का सविनय अवज्ञा आंदोलन खत्म होने के बाद गांधीजी भी निराश होने लगे थे। आंदोलन न होने की वजह से लोगों में निराशा भर रही थी। कांग्रेस में उस समय दो विचार के लोग थे। नरम पंथी बनाम गरम पंथी, नरमपंथी जी हजूरी करके स्वराज चाहते थे। पुरानी स्वराज्य पार्टी को दोबारा जिंदा कर चुनाव लड़ने और काउंसि...