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Showing posts from April, 2021

चेयरमैन साहब तुम बहुत याद आओगे !!

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चेयरमैन साहब तुम बहुत याद आओगे !! 😥😥😥😥😥😥😥😥😥😥😥 पूर्व सभापति टोंक अजमल साहब नहीं रहे ******************************** एक बेमिसाल शख्सियत के धनी, हर वक्त हंसी मजाक करने वाले, रात की महफिल के सरदार, दोस्तों पर जमकर खर्च करने वाले, एक हंसमुख चेहरा, हमारे सीनियर साथी अजमल साहब उर्फ चेयरमैन साहब हमारे बीच नहीं रहे। बड़े दुख के साथ यह जुमले लिख रहा हूँ। कोरोना ने पिछले एक साल में हमारे एक दर्जन से ज्यादा साथियों व बुजुर्गों को हम से छीन लिया, जिनको हम आज भी याद करके भावुक हो जाते हैं। इस पीड़ा में एक इजाफा आज (27 अप्रैल 2021 को) और हो गया। हमारे साथी अजमल साहब इस दुनिया से विदा हो गए। अजमल साहब टोंक नगर परिषद के सभापति भी रहे हैं। वे साथियों में चेयरमैन साहब के नाम से मशहूर थे। हम अक्सर उनके साथ होटल फिरोज एम डी रोड जयपुर में बैठते थे। लेकिन बाबा रियाजुद्दीन कुरैशी (रियाज बाबा) साहब के इन्तकाल के बाद यहाँ बैठना कम हो गया था, क्योंकि इस महफिल की रौनक चली गई थी। रही कसर कमबख्त कोरोना ने पूरी कर दी और साल भर से यह महफिल और फीकी हो गई। देर रात तक चलने वाली इस महफिल में जिस दिन अजमल भा...

दो मई के बाद देश में बहुत कुछ नया होगा !

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दो मई के बाद देश में बहुत कुछ नया होगा ! --------------------------------------------------- दो मई को बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का परिणाम आएगा। इसके बाद सियासी तौर पर देश में बहुत कुछ नया होगा, कुछ मजबूरी में नया होगा और कुछ अति उत्साह व लालच में नया होगा। यह दिन यह भी तय कर देगा कि देश में सेक्यूलरिज्म जिन्दा रहेगा या फासीवाद और तेजी से मजबूत होगा। ********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। दो मई को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पांडिचेरी के विधानसभा चुनाव की मतगणना होगी। मतगणना के दिन किसी की हार और किसी की जीत होती है। लेकिन इस बार हार जीत के अलावा बहुत कुछ नया भी होगा। यह नया विशेष रूप से बंगाल के परिणाम के कारण होगा। बंगाल को लेकर जिस तरह से भाजपा और टीएमसी ने माहौल बनाया है, उससे बाकी राज्यों का चुनावी माहौल देशभर में ज्यादा चर्चा का विषय नहीं बना है। सब जगह बंगाल चुनाव और उसके परिणाम पर ही चर्चा हो रही है। सबसे पहले चर्चा करें असम की। यहाँ भाजपा की सरकार है और चुनाव में कांग्रेस गठबंधन से उसका सीधा मुकाबला था। चर्चा दोनों की ह...

कोरोना और उसकी सच्चाई ?

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कोरोना और उसकी सच्चाई ? *********************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। साल 2019 के आखिर में दुनिया ने एक शब्द सुना "कोरोना"। देखते ही देखते इस वायरस की चपेट में पूरी दुनिया आ गई। इसकी दहशत इस कदर हुई कि एक इन्सान दूसरे इन्सान से दूर भागने लगा। पहली बार सभी हवाई जहाज जमीन पर खड़े कर दिए गए। ट्रेनों और बसों का संचालन रोक दिया गया। पूरी दुनिया में लाॅकडाउन या कर्फ्यू लगा दिया गया। लोग घरों में कैद हो गए। कोरोना ने पूरी दुनिया को बदल दिया। इससे लाखों लोग मारे गए, पूरी दुनिया की अर्थ व्यवस्था चौपट हो गई। असंख्य लोग बेरोजगार हो गए। इतना होने के बाद भी कोरोना शान्त नहीं हुआ और इसकी चपेट में अब भी लाखों लोग आ रहे हैं। इन दिनों इसकी दूसरी लहर चल रही है। हमारे देश में जनवरी-फरवरी 2021 में कोरोना कुछ कमजोर पड़ा था, लेकिन मार्च के बाद हालात वापस खराब हो गए। पूरे देश में कोरोना को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है। अस्पतालों में बैड फुल हो चुके हैं। ऑक्सीजन, इंजेक्शन, वेंटिलेटर आदि की किल्लत व कालाबाजारी हो रही है। अब सवाल यह है कि आखिर यह कोरोना है क्या चीज़ ? इस सवाल का जवाब सीधा...

जब रोम जल रहा था, तो नीरो बांसुरी बजा रहा था, कुछ ऐसा ही आधुनिक भारत में हो रहा है !

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जब रोम जल रहा था, तो नीरो बांसुरी बजा रहा था, कुछ ऐसा ही आधुनिक भारत में हो रहा है ! ----------------------------------------------------- एक ने पूरा साल रविन्द्र नाथ टैगोर की नकल करने में निकाल दिया, तो दूसरे ने गांधी का मुखौटा पहनकर अपनी सरकार बचाने में, जनता के मुद्दों से दोनों को ही कोई लेना देना नहीं है, परिणाम सबके सामने है। कोरोना महामारी विकराल रूप धारण कर चुकी है। बैड, ऑक्सीजन, इंजेक्शन, वेंटिलेटर आदि के लिए लोग धक्के खा रहे हैं। हर राज्य का कमोबेश एक जैसा हाल है, आखिर ध्वस्त होती इस व्यवस्था का जिम्मेदार कौन है ? ********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। जब रोम जल रहा था, तो नीरो बांसुरी बजा रहा था। यह कहावत आज भारतीय शासकों पर पूरी तरह से चरितार्थ हो रही है। चाहे प्रधानमंत्री हों या किसी राज्य के मुख्यमंत्री, मन्त्री और अधिकारी। मार्च 2020 में देशभर में यह कहकर लाॅकडाउन लगाया गया था कि एक तो कोरोना का खात्मा किया जाएगा और दूसरा मेडिकल सुविधाओं में सुधार पैदा किया जाएगा। एक साल बाद न तो कोरोना का खात्मा हुआ और ना ही मेडिकल सुविधाओं में कोई विशेष स...

36 कौमों के तथाकथित नेता अशोक गहलोत ने कैसे क्रेश किया 36 कौमों के नेताओं को ?

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36 कौमों के तथाकथित नेता अशोक गहलोत ने कैसे क्रेश किया 36 कौमों के नेताओं को ? --------------------------------------------------- राजस्थान की कांग्रेस में अशोक गहलोत के उदय के साथ ही विभिन्न समुदायों से सम्बंधित कांग्रेसी नेताओं को एक-एक कर सियासी हाशिये पर लगाया गया, ताकि वे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच सकें। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी बचे हुए या नई पीढ़ी के सिर उठाने वाले नेताओं को क्रेश करना जारी रहा। दर्जनों नाम हैं इस लिस्ट में, आखरी नाम सचिन पायलट का है, जिनका सियासी प्लेन अगस्त 2020 में क्रेश कर दिया गया। जाट, ब्राह्मण, बणिये, राजपूत, मुस्लिम, एससी, एसटी, गुर्जर आदि समुदायों से सम्बंधित इन नेताओं को आज सियासी मैदान में लोग एक तरह से भूल गए हैं।  ************************************* जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर प्रदेश को संचालित कर रहे हैं। इस ढाई साल में प्रदेश को ढंग से संचालित करने की बजाए वे पूरी ताकत इस बात में लगा रहे हैं कि कुर्सी कैसे बची रहे। नतीजा साफ है प्रदेश में क़ानून व्यवस्था चौ...

भारत-पाकिस्तान की नजदीकियां एक अच्छी खबर

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भारत-पाकिस्तान की नजदीकियां एक अच्छी खबर *********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। पिछले दिनों यह खबरें मीडिया की सुर्खियां बनी कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के रास्ते खुल रहे हैं और दोनों मुल्क एक दूसरे के नजदीक आने के लिए तैयार होते जा रहे हैं। यह खबर बहुत अच्छी है और इससे दोनों मुल्कों को फायदा होगा। यह जग जाहिर है कि पाकिस्तान हमारे मुल्क के खिलाफ़ आतंकी साजिशें करता है और उसने आतंकी हमलों में हमारा काफी नुकसान भी किया है। पिछले दो तीन साल में हुई आतंकी घटनाओं से हमारे बीच दूरियां और बढी हैं तथा यह कहें तो गलत नहीं होगा कि दोनों मुल्कों के बीच बातचीत व ताल्लुक एक तरह से खत्म हो गए थे। पिछले दिनों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और वहाँ के सेनापति जनरल बाजवा ने शान्ति, भाईचारे और एक दूसरे की तरक्की की बात की। इसके बाद खबर आई कि भारत पहली बार पाकिस्तान में युद्धाभ्यास करेगा। यानी पाकिस्तान की जमीन पर भारतीय फौज और पाकिस्तानी फौज के बीच दोस्ताना जंग होगी। चर्चा इस बात की भी है भारत और पाकिस्तान के बीच ताल्लुक सुधारने के पीछे अरब देश, अमेरिका, रूस और...

राजस्थान विधानसभा उप चुनाव : हनुमान बेनीवाल और ओवैसी के पास एक मौका था, जो उन्होंने गंवा दिया !

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राजस्थान विधानसभा उप चुनाव : हनुमान बेनीवाल और ओवैसी के पास एक मौका था, जो उन्होंने गंवा दिया ! *********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान की तीन विधानसभा सीटों पर 17 अप्रैल को उप चुनाव होने जा रहे हैं। सुजानगढ, राजसमन्द और सहाड़ा। एक सीट वल्लभनगर बाकी है, जिस पर चुनाव की घोषणा नहीं हुई है। इन चारों सीटों के विधायकों का निधन होने के कारण यह खाली हो गई थीं। जिन तीन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस, प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा ने एड़ी चौटी का जोर लगा रखा है। लेकिन चुनाव को त्रिकोणीय बनाने के लिए सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी अपनी पार्टी के उम्मीदवार मैदान में उतार रखे हैं।  इन उप चुनावों का परिणाम क्या होगा ? इस सवाल का जवाब तो मतगणना के दिन ही मालूम होगा, लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि हनुमान बेनीवाल और असदुद्दीन ओवैसी के पास यह एक मौका था, जिसे उन्होंने गंवा दिया। कई बार यह खबरें चर्चा में रही हैं कि ओवैसी राजस्थान आना चाहते हैं और वे यहाँ की स्थानीय पार्टियों से गठबंधन भी करना चाहते हैं। ओवैसी ने छोटू भाई वसावा की भा...

ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक वोटर को क्यों नजरअंदाज कर रहे हैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ?

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ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक वोटर को क्यों नजरअंदाज कर रहे हैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ? ********************************* जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद ओबीसी समुदाय से हैं और ओबीसी, एससी, एसटी व अल्पसंख्यक वोटर कांग्रेस का प्रमुख वोट है तथा विधानसभा चुनाव 2018 का बारीकी व ईमानदारी से अध्ययन किया जाए तो मालूम चलेगा कि कांग्रेस की सभी 106 सीटें इसी वोटर ने जीतवाई हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री गहलोत को इस वोटर की बजाए ईडब्ल्यूएस वोटर की ज्यादा फिक्र हो रही है। इसकी वजह साफ है कि चार विधानसभा सीटों पर उप चुनाव हैं, जिनमें से तीन पर 17 अप्रैल को होंगे तथा गहलोत की रणनीति यह है कि ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर) वर्ग के गुणगान कर या उन्हें अतिरिक्त सुविधाएं देकर उनके वोट ले लिए जाएं, ताकि उप चुनावों में आसानी से जीत हासिल हो सके। ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में प्रमुख रूप से ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत आदि समुदाय आते हैं। मुख्यमंत्री गहलोत ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण के लोगों को 7 अप्रैल को मन्त्रिमण्डल बैठक कर सरकारी नौकरी की उम्र सीमा में छूट देने की घोषणा की। इसक...

राजस्थान उप चुनाव में सिर्फ जीत का तिकड़म, जनहित के मुद्दों से दूर भागती कांग्रेस व भाजपा !

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राजस्थान उप चुनाव में सिर्फ जीत का तिकड़म, जनहित के मुद्दों से दूर भागती कांग्रेस व भाजपा ! ************************************ जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। 17 अप्रैल को राजस्थान की तीन विधानसभा सीटों पर उप चुनाव हो रहे हैं। मुख्य रूप से तीन पार्टियां मैदान में हैं। सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस, प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा और सांसद हनुमान बेनीवाल की आरएलपी। कौन जीतेगा और कौन हारेगा तथा कौन किसके लिए वोट काटू साबित होगा और कौन भितरघात कर अपनी पार्टी से हिसाब चुकता करेगा ? इन सवालों का जवाब तो मतगणना के दिन आएगा। लेकिन तीनों पार्टियों ने जीत के लिए जोर लगा रखा है। इन चुनावों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया की प्रतिष्ठा दांव पर है।  इन तीनों सीटों में से सुजानगढ व सहाड़ा दो सीटें कांग्रेस के पास थीं, इसलिए हर हाल में कांग्रेस इन्हें जीतना चाहती है तथा राजसमन्द भाजपा के पास थी, इसलिए भाजपा किसी भी हाल में यह सीट खोना नहीं चाहती। लेकिन यह चुनाव दोनों ही पार्टियां कांग्रेस व भाजपा जनहित के मुद्दों की बजाए तिकड़म से जीतन...