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Showing posts from October, 2020

जयपुर नगर निगम चुनाव में जात-बिरादरी की औछी मानसिकता का सहारा लेते खुदगर्ज़ लोग !

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जयपुर नगर निगम चुनाव में जात-बिरादरी की औछी मानसिकता का सहारा लेते खुदगर्ज़ लोग ! ---------------------------------------------------- यह मुद्दा वैसे तो सभी इलाकों व क़ौमों का है, लेकिन सबसे हैरानी की बात मुस्लिम क़ौम को लेकर है, जहाँ एक तरफ इत्तेहाद की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ यह खतरनाक जहर फैलाने वाले भी मौजूद हैं और उन्हें कोई खरी-खौटी सुनाने वाला भी नहीं है। ******************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान के छह नगर निगमों में से तीन के चुनाव 29 अक्टूबर को हो चुके हैं और शेष तीन के एक नवम्बर को होंगे। लेकिन इन चुनावों में पार्षद बनने और प्रतिद्वंद्वी को पछाड़ खिलाने के लिए जिस तरह जात-बिरादरी की औछी राजनीति हुई है या हो रही है, वो बेहद शर्मनाक है। ऐसी घिनौनी सियासत के ध्वजवाहक जो अन्दरखाने इस जहर को फैला रहे हैं या उन्होंने फैलाया है, उनमें बहुतों ने ओपन में कहीं समाजसेवी का मुखौटा ओढ रखा है, तो कहीं सुधारवादी व बुद्धिजीवी का। लेकिन हकीकत यह है कि यह लोग सिर्फ फितनेबाज और खुदगर्ज़ हैं, जो खानदान, कबिले, जात, बिरादरी, गौत्र वगैरह के नाम पर सिर्फ अपना उ...

नगर निगम चुनाव में भाजपा का मुस्लिम उम्मीदवार उतारना मजबूरी, सोची समझी रणनीति या सम्मानजनक भागीदारी ?

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नगर निगम चुनाव में भाजपा का मुस्लिम उम्मीदवार उतारना मजबूरी, सोची समझी रणनीति या सम्मानजनक भागीदारी ? ********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान के तीन बड़े शहरों जयपुर, जोधपुर और कोटा में नव गठित छह नगर निगमों के चुनाव 29 अक्टूबर और एक नवम्बर को हैं। इन चुनावों में भाजपा ने अच्छी खासी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवार भी मैदान में उतारे हैं। जिसके बारे में सियासी चौपालों पर अलग-अलग राय है। कुछ लोग इसे भाजपा की मजबूरी बता रहे हैं, तो कुछ लोग एक सोची समझी रणनीति, तो कुछ लोग इसे सबका विश्वास व सबकी भागीदारी बता रहे हैं। लेकिन बात इतनी आसान भी नहीं है, जितनी सरलता से कही जा रही है। भाजपा जिसकी नीतियों व कार्यक्रमों को लेकर मुस्लिम समुदाय में यह खुली धारणा है कि भाजपा मुसलमानों की विरोधी है और उसे मुसलमानों का वजूद इस मुल्क पसंद नहीं है। मुस्लिम समुदाय में यह धारणा भाजपा के उत्थान, उसकी घोषित नीतियों व कार्यक्रमों तथा उसके नेताओं के भड़काऊ बयानों से स्थापित हुई है। बाबरी मस्जिद का विध्वंस और तब के साम्प्रदायिक दंगे, 2002 के गुजरात दंगे और मौजूदा मोदी स...

नगर निगम चुनाव में निर्दलीय व बागी उम्मीदवार बने कांग्रेस और भाजपा के लिए गलफांस

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नगर निगम चुनाव में निर्दलीय व बागी उम्मीदवार बने कांग्रेस और भाजपा के लिए गलफांस ********************************** जयपुर/जोधपुर/कोटा (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान में शीघ्रता से हो रहे नगर निगम चुनावों में कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व को बहुत से वार्डों में पार्टी उम्मीदवारों की जीत पर पानी फिरता नज़र आ रहा है। जिसकी वजह निर्दलीय और बागी उम्मीदवार हैं। जो मजबूती से न सिर्फ प्रचार कर रहे हैं, बल्कि लगातार जन सम्पर्क में जनहित के लिए किए गए अपने कार्यों को याद दिलाकर यह बता रहे हैं कि "हम आपके अपने हैं और बरसों से आपकी सेवा कर रहे हैं तथा हमारी पार्टी ने हमारे से साथ धोखा किया है। इसलिए आप हमें विजयी बनाएं ताकि हम नगर निगम में पहुंच कर पहले से ज्यादा आपकी सेवा कर सकें।" तीन शहरों की छह नगर निगमों में हो रहे चुनाव दो चरणों में हैं, पहले चरण में 29 अक्टूबर को और दूसरे चरण में एक नवम्बर को। प्रमुख रूप से इन चुनावों में दो ही पार्टी मैदान में हैं, यानी कांग्रेस व भाजपा तथा सियासी तौर पर दोनों ही पार्टियों के प्रदेश नेतृत्व का सब...

क्या नगर निगम चुनाव अशोक गहलोत के लिए जनमत संग्रह हैं ?

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क्या नगर निगम चुनाव अशोक गहलोत के लिए जनमत संग्रह हैं ? ------------------------------------------------- या वे हार का ठीकरा किसी और के सिर फोड़ने के लिए बलि के बकरे तलाश कर चुके हैं ? ******************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान में तीन नगर निगम की छह की गई, चुनाव टालने के लिए। हालांकि सरकार की तरफ से यही कहा गया कि जयपुर, जोधपुर और कोटा बड़े शहर हैं, यहाँ के विकास के लिए आवश्यक है कि इन नगर निगमों का विभाजन किया जाए। लेकिन हकीकत यह है कि इन तीनों नगर निगमों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बुरी हार नज़र आ रही थी, तो परिसीमन करने व लाॅटरी निकलने के बाद इन निगमों के विभाजन की घोषणा कर चुनाव रूकवा दिए गए, नहीं यह चुनाव नवम्बर 2019 में ही हो जाते। निगमों के विभाजन के बाद अप्रेल में चुनाव होने थे, जो कोरोना महामारी शुरू होने के कारण टल गए। सरकार लगातार किसी न किसी बहाने से चुनाव टालती रही, जब हाईकोर्ट ने चुनाव करवाने का आदेश दिया, तब भी उसे मानने की बजाए सुप्रीम कोर्ट गई। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की बात नहीं मानते हुए तुरंत चुनाव करवाने का आदेश दिया। सियासी...

17 अक्टूबर सर सय्यद डे

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17 अक्टूबर सर सय्यद डे ******************** "हिन्दू और मुसलमान मुल्क की दो आंखें हैं, अगर एक आंख में तकलीफ होती है, तो दूसरी सुकून से नहीं रह सकती।" -सर सैय्यद अहमद खान संस्थापक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी। ------------------------------------------------- "मुझे अंग्रेजों की हजार साल की गुलामी मंजूर है, लेकिन मुल्क के बंटवारे के बदले आजादी मंजूर नहीं है।" -मौलाना अबुल कलाम आजाद कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष। ***************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। यह दो महापुरुष वतन ए अजीज हिन्दुस्तान की अज़ीम शख्सियत रही हैं। जो किसी तआरूफ (परिचय) की मोहताज नहीं हैं। इन दोनों के कहे यह जुमले मैंने ऊपर लिखे हैं, हो सकता है कि शब्दों का कुछ हेरफेर हो। लेकिन ऐसी बातें मौलाना आजाद साहब और सर सैय्यद अहमद खान साहब कमोबेश हर मीटिंग में किया करते थे। भारत का मुसलमान इन दोनों महापुरुषों से बेहद लगाव रखता है।  लेकिन सच्चाई का एक पहलू यह भी है कि हमारी नस्लों में भी अजीब अजीब किस्म के जज़्बाती नौजवान आज कौम की रहनुमाई करने और उसे हक हकूक दिलवाने की जद्दोजह...

काश: आज कोई राम मनोहर लोहिया देश में होता ?

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काश: आज कोई राम मनोहर लोहिया देश में होता ? ------------------------------------------------- भारतीय लोकतंत्र आज केन्द्रीय तौर पर एक तरह से विपक्षहीन और अनाथ हो गया है, क्योंकि ज्यादातर विपक्षी नेता भ्रष्ट और अवसरवादी हैं, जनता का भरोसा उन पर से उठ चुका है ! ऐशोआराम की जिन्दगी और लूट के माल की रखवाली ने उनसे जद्दोजहद करने का माद्दा छीन लिया है ! बहुतों की सियासी हैसियत अपने राज्य में ही महदूद (सीमित) हो गई है। उनके लिए देश, जनता और जनहित के मुद्दों से पहले खुद का परिवार है। आज देश को फिर एक लोहिया की जरूरत है, लेकिन अफ़सोस कि लोहिया के चेलों ने ही उनके इन्कलाब को भुला दिया ! ------------------------------------------------ "जिन्दा क़ौमें सरकार बदलने के लिए पांच साल तक इन्तजार नहीं करती।" #डाॅक्टर राम मनोहर लोहिया ******************************* जयपुर (एम फारूक़ ख़ान)। डाॅक्टर राम मनोहर लोहिया एक महान समाजवादी नेता और भारतीय जनता के हीरो थे, खासकर गरीबों और पिछड़ों के। वे 23 मार्च 1910 को पैदा हुए थे। वे एक स्पष्ट विचार वाले फकीर राजनेता थे। उन्होंने जनहित के मुद्दों पर क...

यूसुफ बहलीम को बनाया बसपा का जोधपुर जिलाध्यक्ष

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यूसुफ बहलीम को बनाया बसपा का जोधपुर जिलाध्यक्ष ----------------------------------------------- बसपा नगर निगम की सभी 160 सीटों पर लड़ेगी चुनाव ****************************** जोधपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। गत दिनों जोधपुर में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें मोहम्मद यूसुफ बहलीम को जोधपुर शहर का जिलाध्यक्ष बनाया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश प्रभारी सुरेश आर्य, प्रदेशाध्यक्ष भगवान सिंह बाबा, प्रदेश महासचिव राजीव विश्नोई सहित कई वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता शरीक हुए। थार न्यूज़-इकरा पत्रिका से बातचीत में यूसुफ बहलीम ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस की नीतियां एक जैसी हैं और इन दोनों पार्टियों ने प्रदेश का बेड़ागरक कर दिया है। दोनों पार्टियों को दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों से कोई लेना देना नहीं है। दोनों पार्टियों के राज में इन वर्गों के साथ घौर अन्याय होता है, कांग्रेस का गहलोत राज इस बात का सबूत है कि बहुजन समाज की पीड़ा को यहाँ कोई तवज्जोह नहीं दी जाती है। इसलिए बसपा जनता के सामने एक विकल्प है, जिसे मजबूत करना चाहिए और इन दोनों प...

साहेब उर्दू को लेकर इतनी नाइन्साफी क्यों ?

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साहेब उर्दू को लेकर इतनी नाइन्साफी क्यों ? --------------------------------------------------- स्कूलों में एक अदद उर्दू टीचर नहीं होने की वजह से मजबूरन बच्चों को संस्कृत पढनी पड़ रही है। यह हाल पूरे राजस्थान का है, यहाँ तक कि पीसीसी अध्यक्ष और शिक्षा मन्त्री गोविन्द सिंह डोटासरा का विधानसभा क्षेत्र भी इस भेदभाव का शिकार है। ********************************* जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान की सरकारी स्कूलों में बरसों से उर्दू ज़बान को नजरअंदाज किया जा रहा है, चाहे सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की। वजह सिर्फ यह है कि सत्ताधीश एवं सरकारी तन्त्र उर्दू को मुसलमानों की भाषा समझते हैं। जबकि उर्दू भारत में पैदा हुई भाषा है और भारतीयों की गोद में पली बढ़ी है, एक से बढकर एक गैर मुस्लिम शायर व उर्दू भाषा के साहित्यकार हुए हैं, कुछ आज भी हैं। जिस ज़बान ने इन्कलाब जिंदाबाद और अंग्रेजों भारत छोड़ो जैसे नारे दिए, उसे आज यतीम और बेवा बना दिया गया है। भारतीय संविधान और शिक्षा नीति कहती है कि बच्चे को उसकी मातृ भाषा में शिक्षा दें, लेकिन उर्दू पढने वाले सभी बच्चे बच्चियों को यह सहूलत नहीं मिलत...

भारत का बहादुर और न्यायप्रिय शासक ; शेरशाह सूरी

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भारत का बहादुर और न्यायप्रिय शासक ; शेरशाह सूरी  ******************************** एम ताहिर खान भारत के सबसे बड़े राजमार्ग जीटी रोड या सड़क ए आजम के निर्माता और सूरी वंश के न्यायप्रिय व बहादुर शासक शेरशाह सूरी, जिन्होंने अपने पांच साल के छोटे से शासनकाल में भारत को चरमोत्कर्ष पर पहुंचा दिया। इतने कम समय में शेरशाह ने बहुत से विकास कार्य किए। शेरशाह सूरी एक जनप्रिय  शासक थे, जो बिना किसी भेदभाव के सभी के साथ समान व्यवहार किया करते थे।  शेरशाह सूरी का जन्म 1472 ईस्वी में पंजाब के होशियारपुर शहर में बजवाड़ा नामक स्थान पर हुआ था। इनका बचपन का नाम फरीद खान था। उनके पिता का नाम हसन खान सूरी था। जो सासाराम (बिहार) के जमींदार थे। शेरशाह सूरी में बचपन से ही एक बहादुर और न्यायप्रिय शासक के गुण थे। इतिहासकार डाॅक्टर पवित्र शर्मा की पुस्तक 'शेरशाह सूरी' के अनुसार लगभग ग्यारह वर्ष की उम्र में शेरशाह सूरी को लाहौर के गवर्नर ने उसके गुणों को देखकर उसे एक जागीर सौंपी थी।  जब शेरशाह की पढ़ाई पूरी हो गई थी...

प्रधान जी इस्लाम खां मेघरास ; एक सेवाभावी और मिलनसार शख्स जो इस दुनिया से चला गया

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प्रधान जी इस्लाम खां मेघरास ; एक सेवाभावी और मिलनसार शख्स जो इस दुनिया से चला गया ------------------------------------------------------- "बोल सको तो मीठा बोलो, कटु बोलना मत सीखो। लगा सको तो बाग लगाओ, आग लगाना मत सीखो।।" *********************************** मेघरास (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। भीलवाड़ा जिले का मेघरास गांव जिसकी पहचान प्रधान जी इस्लाम खां जी कायमखानी थे, जो 24 सितम्बर को इस दुनिया से चले गए। वे मेवाड़ इलाके में कायमखानी क़ौम के मजबूत स्तम्भ थे, जिनका सभी क़ौमों में अच्छा खासा रसूख था। वे एक सेवाभावी और मिलनसार शख्स थे, जिन्होंने क़ौमी खिदमत में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस्लाम खां जी ग्राम पंचायत मेघरास के सरपंच भी रहे हैं और बरसों तक इस ग्राम पंचायत में सरपंच इन्हीं के परिवार का सदस्य रहा है। वे दो बार सरपंच, एक बार बनेड़ा पंचायत समिति के उप प्रधान एवं कार्यवाहक प्रधान भी रहे हैं। वे राजस्थान युवा कायमखानी महासभा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे हैं। साथ ही कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट जयपुर के ट्रस्टी, राजस्थान कायमखानी शोध संस्थान जोधपुर के संस्थापक सदस्य और राजस्थान क...