देश में बदलाव की तड़प है, लेकिन यह तभी सम्भव है जब विपक्षी दल एकजुट होकर चुनाव लड़ें
देश में बदलाव की तड़प है, लेकिन यह तभी सम्भव है जब विपक्षी दल एकजुट होकर चुनाव लड़ें ------------------------------------- अगर ऐसा नहीं हुआ तो मोदी की हैट्रिक को रोकना नामुमकिन है ************************ जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। लोकसभा चुनाव बहुत नजदीक आ चुके हैं, पूरे देश में बड़े स्तर पर इस बात की तड़प है कि बदलाव होना चाहिए। लेकिन यह बदलाव कैसे होगा ? इसका जवाब है कि विपक्षी दलों को एकजुट होकर जनहित के मुद्दों पर चुनाव लड़ना चाहिए। अगर वे भाजपा के बिछाए साम्प्रदायिक जाल में फंस गए और वोटों का बंटवारा कर बैठे तो फिर विपक्षी दलों का कुछ नहीं बंटना है। इ समें कोई दो राय नहीं है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से कद्दावर नेता भाजपा में कोई दूसरा नहीं हुआ है, यहां तक के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी नहीं। फिर अटल जी को किसी भी चुनाव में 200 सीट भी नहीं मिली और मोदी जी को 2014 में 282 और 2019 के चुनाव में 303 सीटें कैसे मिल गई ? इसका जवाब यह है कि कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार का दूसरा कार्यकाल एक नम्बर का नाकारा और भ्रष्ट था, वहां लीडरशिप नाम की कोई चीज़ नहीं...