Posts

Showing posts from March, 2023

गहलोत सरकार की योजनाएं सराहनीय या आफत ?

Image
गहलोत सरकार की योजनाएं सराहनीय या आफत ? ---------------------------------- राइट टू हैल्थ क़ानून और 19 न‌ए जिलों के सन्दर्भ में ********************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने आपको गांधी का अनुयायी कहते हैं और उन्होंने अपने 15 साल के कार्यकाल में क‌ई जनहित की योजनाएं शुरू की हैं और इनके लिए क़ानून बनाए हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह सब जनता के हित में हैं, लेकिन इनका क्रियान्वयन जनता के लिए आफ़त बन जाता है, क्योंकि इन योजनाओं को पूरी तरह से राजनीतिक चश्मे से तैयार किया जाता है और फिर लागू करने में ढिलाई बरती जाती है। ताज़ा मामले उनकी दो योजनाओं को लेकर हैं, जिनसे जनता पीड़ित है। पहला राइट टू हैल्थ क़ानून। कहा जा रहा है कि ऐसा कानून बनाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है। इस क़ानून से मरीज़ को शीघ्रता से, आसानी से और निशुल्क इलाज किसी भी सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में मिलेगा। लेकिन इस कानून के विरोध में प्रदेश के सभी डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए हैं, मरीज़ दर दर की ठोकरें खाकर तड़प रहे हैं, बिना इलाज मरने को मजबूर हैं। लेकिन सरकार कोई सख्...

वसुंधरा राजे को कमान नहीं मिली तो...

Image
वसुंधरा राजे को कमान नहीं मिली तो... ********************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव हैं और प्रदेश की राजनीतिक परम्परा के अनुसार हर बार शासन बदलता है, एक बार भाजपा दूसरी बार कांग्रेस तथा यह सिलसिला 1993 से लगातार चल रहा है। अभी कांग्रेस की सरकार है और राजनीतिक परम्परा के अनुसार अगली सरकार भाजपा की बननी चाहिए। लेकिन सियासी समीकरण दोनों पार्टियों के उलट पलट हैं। कांग्रेस जहां वापसी का खुलकर दावा कर रही है और इसके सन्दर्भ में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जनहित की क‌ई घोषणाएं बजट में की हैं, वहीं भाजपा पूरी तरह आश्वस्त है कि दिसम्बर में उसकी सरकार बनना तय है। इस बीच लगातार चार साल तीन महीने यानी जब से वर्तमान सरकार बनी है कांग्रेस व भाजपा में अंदरूनी जूतम पैजार चल रही है। भाजपा में जहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गुट बनाम अन्य सियासी अखाड़े में दांवपेंच अजमा रहे हैं, वहीं कांग्रेस में गहलोत बनाम पायलट का अखाड़ा बना हुआ है। सियासी पंडितों का मानना है कि अशोक गहलोत के रहते कांग्रेस की हर बार हार हुई है, जो इस बार भी लग रही है और पायलट ...

जाट महाकुंभ के सन्दर्भ में... कमेरे वर्ग के लिए समाजवाद ही एकमात्र रास्ता है

Image
जाट महाकुंभ के सन्दर्भ में... कमेरे वर्ग के लिए समाजवाद ही एकमात्र रास्ता है *********************** अर्जुन देथा जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। हाल ही में 5 मार्च को कमेरे वर्ग के एक हिस्से जाट समाज का कार्यक्रम "जाट महाकुंभ" के नाम से जयपुर में संपन्न हुआ। वहां एक महत्वपूर्ण मांग जाति आधारित जनगणना कराने और आबादी के अनुपात में आरक्षण बढ़ाने की उठाई गई, इसलिए आरक्षण का इतिहास और वर्तमान हालात को समझना आवश्यक है। पिछड़ा वर्ग अर्थात ओबीसी के आरक्षण का संपूर्ण आंदोलन हमारे देश में डॉक्टर राम मनोहर लोहिया जी के नेतृत्व में सोशलिस्ट पार्टी ने चलाया तथा अनेक लड़ाइयां लड़ी, बहुतेरी कुर्बानियां दी, उसके परिणाम स्वरूप 1990 की जनता दल नेतृत्व की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने राष्ट्रीय पैमाने पर ओबीसी आरक्षण लागू किया। इस आरक्षण देने के विरुद्ध देश में जो खूनी आंदोलन चलाया गया और नौजवानों की बलि दी गई यह सर्वविदित है। भारतीय जनता पार्टी जो कि पूर्व में जनसंघ के रूप में थी और कांग्रेस पार्टी प्रारंभ से आरक्षण के खिलाफ रहे। बीच-बीच में कभी-कभी बेमन से राजनीतिक मजबूरी के कारण इन दोनों पार्ट...

जुनैद-नासिर हत्याकांड पर कांग्रेसी नेताओं व गहलोत सरकार का रवैया सही नहीं है : जौहर

Image
जुनैद-नासिर हत्याकांड पर कांग्रेसी नेताओं व गहलोत सरकार का रवैया सही नहीं है : जौहर ---------------------------------- जयपुर/घाटमीका (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)।घाटमीका (भरतपुर) के दो युवकों जुनैद और नासिर को दरिंदगी के साथ क़त्ल किए जाने की आतंकी वारदात के मामले में कांग्रेसी नेताओं और राजस्थान की गहलोत सरकार के भेदभावपूर्ण रवैए को लेकर मुस्लिम समुदाय में कड़ी नाराजगी है। इस मामले में मुस्लिम प्रोग्रेसिव फेडरेशन के कन्वीनर अब्दुल सलाम जौहर ने 25 फरवरी को थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका के साथ बातचीत में पूरी बेबाकी से साथ सवाल खड़े किए और कांग्रेस लीडरशिप को इस भेदभावपूर्ण रवैए के लिए कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जून 2022 में उदयपुर में कन्हैयालाल के साथ जो दर्दनाक वारदात हुई और घाटमीका में जो वारदात हुई है, दोनों में कोई अन्तर नहीं है, दोनों ही वारदात आतंकी वारदात हैं। इसके बावजूद आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और अपराधियों की गिरफ्तारी तथा यहां तक के बड़े नेताओं द्वारा पीड़ितों के आंसू पौंछने को लेकर पूरी तरह से भेदभाव बरता गया है, क्या इसलिए के एक वारदात में कन्हैयालाल का क़त्ल...

मदरसा पैराटीचर्स के मानदेय बढ़ाने और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने पर खुशी और रोष दोनों

Image
मदरसा पैराटीचर्स के मानदेय बढ़ाने और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने पर खुशी और रोष दोनों ------------------------------------- इस कार्य के लिए जहां अल्पसंख्यक मामलात मंत्री सालेह मोहम्मद और सम्बंधित अधिकारियों की जमकर प्रशंसा की जा रही है, वहीं मदरसा बोर्ड चेयरमैन को पैराटीचर्स अपने लिए शुभ मान रहे हैं। *********************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान मदरसा बोर्ड से पंजीकृत मदरसों में शैक्षणिक सेवा देने वाले मदरसा पैराटीचर्स सहित समस्त संविदाकर्मी बरसों से नियमित करने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए लम्बे समय से विभिन्न प्रकार का आंदोलन चल रहा है। कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2018 के घोषणा पत्र में समस्त संविदाकर्मियों को नियमित करने का वादा भी किया था। इसके लिए सरकार ने प्रक्रिया शुरू की और संविदा नियम बनाए। लेकिन संविदाकर्मी इससे पूरी तरह खुश नहीं थे। इनके प्रतिनिधि क‌ई बार मुख्यमंत्री, सम्बंधित मंत्रियों, अधिकारियों आदि से मिले और अपनी मांग मनवाने की कोशिश की। 5 मार्च को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घोषणा की कि "ग्राम पंचायत सहायकों, शिक्षाकर्मियों, पैराटीच...

मुसलमानों के मौजूदा हालात के लिए सबसे ज्यादा मुस्लिम लीडरशिप जिम्मेदार

Image
मुसलमानों के मौजूदा हालात के लिए सबसे ज्यादा मुस्लिम लीडरशिप जिम्मेदार ************************ चौधरी अकबर क़ासमी जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। मुस्लिम लीडरशिप की सबसे ज़्यादा क़ाबिल ए तारीफ़ बात यह है कि उसको राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों के लिए कभी लड़ते हुए नहीं देखा गया है, क्योंकि जन आंदोलन से जन क्रान्ति पैदा होती है और जन क्रान्ति से आवाज़ों में गूंज पैदा होती है, गली गली शोर उठता है, जिस से नींदों में ख़लल पड़ता है और मुसलमानों को जन क्रांति की इसलिए भी ज़रूरत नहीं है कि यह दुआ वाली क़ौम है, यह क़ौम जब हाथ उठाती है तो इंसानों की तक़दीर तो क्या ज़मीन व आसमां के फ़ैसले भी तब्दील हो जाते हैं और फिर मज़लूमों का साथी ख़ुदा होता है जो ज़ालिमों को हलाक कर देता है। मुस्लिम लीडरशिप का पिछले 75 वर्षों से बड़ा अलमिया यह भी रहा है कि वह क़ौम को यह बताने में रूचि नहीं रखते कि यह क़ौम मज़लूम है या ग़ाफ़िल ? क्योंकि अगर क़ौम को ग़ाफ़िल कहा जाए तो फिर कई सवाल खड़े हो जाते हैं, जो ख़ुद मुस्लिम लीडरशिप पर भारी पड़ जाते हैं, जिनमें से एक सवाल यह भी है कि ग़ाफ़िल क़ौमों की उस वक्त तक ख़ुदा मदद नह...

तलाक़ की बढ़ती रफ़्तार से तबाह होता समाज

Image
तलाक़ की बढ़ती रफ़्तार से तबाह होता समाज ************************* जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। "तलाक़" एक बहुत ही बुरा लफ्ज़ है। इस लफ्ज़ के अमल (क्रियान्वयन) से बहुत से घर परिवार बरबाद हो चुके हैं और हो रहे हैं। पिछले दो दशक में तो तलाक़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है। हर समाज और हर गांव-कस्बे में तलाक़ के मामले आम हो ग‌ए हैं। सवाल यह है कि तलाक़ के बढ़ते मामलों के पीछे प्रमुख कारण क्या हैं ? मेरा यह मानना है कि इसके पीछे दस प्रमुख कारण हैं, हो सकता है कि और कारण भी हों। पहला कारण आधुनिकता के नाम पर खुदगर्ज़ी, दूसरा वेस्टर्न कल्चर की बढ़ती अय्याश ज़िन्दगी, तीसरा सदियों से चल रहे हमारे सामाजिक व पारिवारिक संस्कारों व बंधनों का तेज़ी से पतन, चौथा कारण दहेज़, गिफ्ट आदि का लेन देन और आवभगत को लेकर बखेड़ा, पांचवां प्यार मुहब्बत से मनमर्जी के किए रिश्ते, छठा कारण होने वाले रिश्तेदार की पृष्ठभूमि व उनके घर परिवार के संस्कार देखने की बजाए उनका धन व पद देखकर किया गया रिश्ता, सातवां संस्कारहीन उच्च शिक्षा, आठवां नशाखोरी, बदतमीजी और शक्लो सूरत (खूबसूरती) व धन का गुरूर, नौवां कारण ...