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Showing posts from August, 2020

एक बुरी खबर : जी खान साहब का इन्तकाल 😭

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एक बुरी खबर : जी खान साहब का इन्तकाल 😭 ----------------------------------------------- आज इकरा पत्रिका के एक और सरपरस्त दुनिया से चले गए ****************************** सुबह-सुबह पानी पीने से भी पहले एक बुरी खबर सुनने को मिली, जी खान साहब दुनिया में नहीं रहे। उनके परिजनों के लिए तो यह खबर व पीड़ा दर्दनाक है ही, मेरे लिए भी बहुत पीड़ादायक है। क्योंकि मेरा दिली रिश्ता उनके साथ था। वे मुझे एक दादा, बाप, बड़े भाई, दोस्त और गुरू की तरह गाइड करते थे। उनका सैकड़ों बार मुझे कहा गया यह जुमला "फारूक साहब आप मुझे असलम व सलीम के बराबर लगते हो।" और मैं कहता था कि "यकीनन, लेकिन बराबर नहीं ज्यादा, क्योंकि मुझे तो लगता है कि आप अपने सगे पुत्रों से ज्यादा मुझे चाहते हो।" वे इकरा पत्रिका के सरपरस्त थे, जो आज सुबह हमें छोड़कर चले गए। इकरा पत्रिका ने आज सुबह एक सरपरस्त और खो दिया। इससे पहले इसी साल की शुरुआत में हमारे सरपरस्त आईजी लियाकत खान साहब का इन्तकाल हो गया था और उनसे पहले शब्बीर भाईजान (पूर्व अध्यक्ष मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी और फाउंडर मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी ज...

मदरसा बोर्ड एक्ट के नाम पर गहलोत सरकार का मदरसों व पैराटीचर्स के साथ एक नया फरेब ?

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मदरसा बोर्ड एक्ट के नाम पर गहलोत सरकार का मदरसों व पैराटीचर्स के साथ एक नया फरेब ? -------------------------------------------------- यह एक्ट मदरसों के कयाम के मकसद और उनकी रूह को खत्म कर देगा। इसके बावजूद बहुत से मुस्लिम रहनुमा और तन्जीमें इस एक्ट का स्वागत कर रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि कुछ मजहबी रहनुमाओं ने भी मुख्यमंत्री गहलोत को मुबारकबाद दी है। जिन मजहबी रहनुमाओं की यह जिम्मेदारी थी कि वे मदरसों की हिफाज़त करें, वे आज एक अदद राजनीतिक नियुक्ति और अपने छोटे मोटे मफाद के लिए उस मदरसा बोर्ड एक्ट की हिमायत कर रहे हैं, जो आगे चलकर मदरसों को बरबाद कर देगा। ----------------------------------------------------- मिल्ली काॅन्सिल, दावते इस्लामी, एसडीपीआई जैसे संगठनों ने इस एक्ट का स्वागत किया है, वहीं यह लेख लिखे जाने तक जमीअत उलमा ए हिन्द, जमाअत ए इस्लामी हिन्द, पाॅपुलर फ्रंट और तब्लीगी जमाअत जैसे संगठनों ने अपना कोई भी बयान जारी नहीं किया है। ----------------------------------------------------- यह एक्ट कमोबेश भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार के मदरसा बोर्ड एक्ट की काॅपी पेस्ट है, जो 201...

रहड़ ग्राम पंचायत के सरपंच सलीम खान कायमखानी का किया सम्मान

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रहड़ ग्राम पंचायत के सरपंच सलीम खान कायमखानी का किया सम्मान ---------------------------------------------- कायमखानी महासभा की भीलवाड़ा इकाई ने घर पर जाकर किया सम्मान ----------------------------------------------- सरपंच सलीम खान का एक ऐसा परिवार है, जिनके सदस्य दो ग्राम पंचायतों और शाहपुरा नगर पालिका से निर्वाचित पदाधिकारी रहे हैं, जिनके बारे में हर उस युवा को पढना चाहिए जो राजनीति के मैदान में उतरा हुआ है ?  ****************************** रहड़/शाहपुरा (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा पंचायत समिति की रहड़ ग्राम पंचायत के चौथी बार सरपंच निर्वाचित हुए सलीम खान कायमखानी का गत दिनों उनके निवास पर जाकर सम्मान किया गया। यह सम्मान राजस्थान कायमखानी महासभा की भीलवाड़ा जिला इकाई ने किया। जनवरी के अन्तिम सप्ताह में हुए चुनाव और मतगणना के बाद वे चौथी बार यहाँ के सरपंच निर्वाचित हुए थे। कायमखानी महासभा उनके सम्मान में बड़ा आयोजन करने की योजना बना चुकी थी, लेकिन कोरोना महामारी और लाॅकडाउन की वजह से यह आयोजन रद्द करना पड़ा और फिर गत दिनों उनके निवास पर जाकर सम्मान किया गया। यहा...

शहादत के अपमान पर जिला कलेक्टर झुन्झुनूं की लीपापोती क्यों ?

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शहादत के अपमान पर जिला कलेक्टर झुन्झुनूं की लीपापोती क्यों ? -------------------------------------------------- कोलिंडा गांव के शहीद सैनिक मोहसिन खान कायमखानी की शहादत पर जिला प्रशासन का रवैया बड़ा अफसोसनाक रहा, लेकिन उससे बड़ा अफसोस कायमखानी क़ौम के रहनुमाओं, पूर्व सैनिकों और अधिकारियों के रवैये पर भी है ! ******************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका 09-08-2020)। ईद के दिन यानी एक अगस्त को झुन्झुनूं जिले के कोलिंडा गांव के शहीद सैनिक मोहसिन खान कायमखानी (मोहसिम खान) को पैतृक गांव में सेना की टुकड़ी द्वारा सलामी देकर सुपुर्द ए खाक किया गया। वे पहले दिन 31 जुलाई को जम्मू-कश्मीर में देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। लेकिन उनको आखरी विदाई देने के लिए जिलाधिकारी के तौर कोई भी शरीक नहीं हुआ, ना जिला कलेक्टर, ना एसपी और ना ही एडीएम, एसडीएम वगैरह। 22 वर्षीय इस शहीद सैनिक की शहादत के अपमान को लेकर पूरी कायमखानी क़ौम में रोष व्याप्त है। लेकिन उसके रहनुमा इस शहादत के अपमान पर कुछ बोलने की बजाए, बोलने वालों को ही खामोश करने में लगे हुए हैं, जैसे मानों उन्हें खामोश करने के लिए क...

मास्टर अजीज साहब : यकीन नहीं हो रहा है कि आप दुनिया छोड़कर चले गए ?

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मास्टर अजीज साहब : यकीन नहीं हो रहा है कि आप दुनिया छोड़कर चले गए ? ********************************* तीन दिन हो गए दिल ही नहीं करता कुछ लिखें, क्योंकि सदमा भी इतना दर्दनाक था, जिसकी कभी तवक्को (कल्पना) भी नहीं की थी। मास्टर अजीज साहब (अजीजुर्रहमान जोधपुर) के इन्तकाल की खबर और वो भी मेरे द्वारा किए गए फोन पर उनकी बच्ची ने दी, सुनते ही मानों ज़मीन हिल गई हो। मैंने फोन मिलाकर ज्यों ही यह कहा कि कहाँ हो और क्या कर रहे हो ? तो सुबकते हुए उनकी बच्ची और हमारी लाडली भतीजी बुशरा ने कहा कि "अंकल पापा का इन्तकाल हो गया।" मैंने सोचा किसी और के इन्तकाल के बारे में कह रही है, तो दोबारा पूछा किसका इन्तकाल हो गया, तो कहा "मेरे पापा का" बस इस जुमले ने मानों अन्दर से तोड़ दिया। क्योंकि अजीज साहब पूरी तरह से तंदरुस्त थे और मुझसे सालभर छोटे थे। यानी 44 साल के भी नहीं हुए थे। हम दोनों में इतनी मुहब्बत थी कि दिल की हर बात करते थे, वे मेरे छोटे भाई की तरह थे और हर बात को गौर से सुनते थे और कुछ भी कह दो तो नाराज नहीं होते थे। हंसमुख और मिलनसार शख्सियत के धनी अजीज साहब बस व ट्रेन में सफर क...

गहलोत साहब आप श्रद्धांजलि और शुभकामना देने में भी भेदभाव क्यों करते हो ?

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गहलोत साहब आप श्रद्धांजलि और शुभकामना देने में भी भेदभाव क्यों करते हो ? ------------------------------------------------- न आपने शहीद मोहसिन खान कायमखानी की शहादत पर दो शब्द लिखे और ना ही शहीद अब्दुल लतीफ़ काठात की शहादत पर और ना ही सीकर में बुजुर्ग मुस्लिम ऑटो चालक के साथ हुई मारपीट पर, ऐसा भेदभाव क्यों, जबकि आप मुख्यमंत्री हैं ? ******************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। अशोक गहलोत साहब इस लेख के साथ आपके फेसबुक पेज की कुछ स्क्रीन शाॅट भी हैं, जो 31 जुलाई से 9 अगस्त तक के हैं। यह इसलिए कि आपके फेसबुक पेज पर शहीद की शहादत पर दो शब्द लिखने की जगह कम पड़ गई और सीकर में बुजुर्ग मुस्लिम ऑटो चालक के साथ हुई मारपीट पर निन्दा शब्द लिखने की आपको फुरसत ही नहीं मिली। वैसे आप जैसे 24 घण्टे सक्रिय रहने वाले और हर बात को देख परख कर निर्णय करने वाले व्यक्ति से यह उम्मीद तो की नहीं जा सकती कि आपके फेसबुक पेज को आपकी सहमति बगैर कोई और हैंडल कर रहा है ? फिर यह भेदभाव क्यों ? अब हम आपको उक्त तीनों वाकिये बताते हैं, जिनका जिक्र शीर्षक में किया गया है। पहला वाकिया 31 जुलाई का है। ...

शहीद मोहसिन खान कायमखानी की शहादत के अपमान पर जबरदस्त रोष

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 शहीद मोहसिन खान कायमखानी की शहादत के अपमान पर जबरदस्त रोष -------------------------------------------------- राजस्थान कायमखानी महासभा की भीलवाड़ा जिला इकाई ने झुन्झुनूं कलेक्टर और एसपी को हटाने के लिए दिया ज्ञापन ******************************** भीलवाड़ा (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। झुन्झुनूं जिले के कोलिंडा गांव के शहीद सैनिक मोहसिन खान कायमखानी (मोहसिम खान) की शहादत के अपमान को लेकर पूरे समाज में रोष व्याप्त है। कायमखानी क़ौम के संगठनों ने शहादत के इस अपमान पर झुन्झुनूं के जिला कलेक्टर और एसपी को तुरंत प्रभाव से हटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उक्त सन्दर्भ में लोग सरकार व प्रशासन को ज्ञापन दे रहे हैं और साथ ही इस मुद्दे को सोशल मीडिया के माध्यम से भी हाईलाईट कर रहे हैं। थार न्यूज़-इकरा पत्रिका ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया था। उल्लेखनीय है कि 31 जुलाई को जम्मू-कश्मीर में देश की रक्षा करते हुए झुन्झुनूं जिले के कोलिंडा गांव निवासी 22 वर्षीय सैनिक मोहसिन खान कायमखानी शहीद हो गया था और एक अगस्त को शहीद सैनिक को उनके पैतृक गांव में आखरी विदाई देते हुए सुपुर्द ए खाक...

राम मन्दिर बनाने की यात्रा : प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक ?

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राम मन्दिर बनाने की यात्रा : प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक ? ---------------------------------------------------- राम मन्दिर बनाने का रास्ता कांग्रेस ने तैयार किया, भाजपा ने तो सिर्फ सत्ता की फसल काटी ? ********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। 5 अगस्त 2020 के दिन भारतीय इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जाएगा। इस दिन अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण की नींव रखी जाएगी। नींव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रखेंगे। विध्वंस की गई बाबरी मस्जिद की जगह को गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में राम मन्दिर को दे दी थी। खैर, सुप्रीम का फैसला था, जो सबको मानना था, लेकिन मुसलमान इस फैसले से मायूस हुए, क्योंकि उन्हें ऐसे फैसले की कतई उम्मीद नहीं थी।  भाजपा का घोषित एजेंडा था बाबरी मस्जिद की जगह राम मन्दिर बनाने का और वो इस एजेंडे में सफल हो गई। साथ ही उसे राम मन्दिर आन्दोलन ने सत्ता के शीर्ष पर पूर्ण बहुमत से पहुंचा दिया। राम मन्दिर बनाने के नाम की सियासी फसल किसी पार्टी ने काटी है तो उसका नाम भाजपा है और जिस पार्टी की एकछत्र सत्ता का महल भरभ...