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Showing posts from November, 2021

ढाढी-मिरासी समुदाय को एमबीसी आरक्षण देने का मामला

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ढाढी-मिरासी समुदाय को एमबीसी आरक्षण देने का मामला ----------------------------------------------------- राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया दिशा निर्देश *********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। गाने बजाने की पारम्परिक कलाकार क़ौम ढाढी-मिरासी जो कि राजस्थान के बहुत से गांव कस्बों में आबाद है तथा यह बहुत ही पिछड़ा समुदाय है। धरातल की सच्चाई यह है कि शिक्षा, रोजगार, खेती और कारोबार की दृष्टि से यह समुदाय प्रदेश का सबसे पिछड़ा समुदाय है, इसके बावजूद इस समुदाय को अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) में शामिल नहीं किया गया है। विचित्र बात यह है कि जिन जातीय वर्गों को एमबीसी में शामिल किया गया है, उनके यहाँ शादी ब्याह के मौके पर इस समुदाय से जुड़े लोग गाना बजाना करते हैं और उनसे कुछ नेग-इनाम पाकर अपना पेट पालते हैं, इसके बावजूद ढाढी-मिरासी समुदाय को राजस्थान सरकार ने एमबीसी में शामिल नहीं किया है, जो इस समुदाय के साथ घौर अन्याय है। इसी मुद्दे से जुडे़ मामले में राजकुमार मिरासी ने एक पीआईएल राजस्थान हाईकोर्ट में लगाई थी। जिस पर गत दिनों हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश...
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मुख्यमंत्री गहलोत ने शिक्षक सम्मान समारोह में क्यों किया डोटासरा को जलील ? ------------------------------------------------------- मुख्यमंत्री ने पहली किस्त में वरिष्ठ आईएएस कुंजीलाल मीणा व भवानी सिंह देथा को भरी मीटिंग में फटकार लगाई थी और दूसरी किस्त में पीसीसी अध्यक्ष व तत्कालीन शिक्षा मन्त्री गोविन्द सिंह डोटासरा को जलील किया, क्या मुख्यमंत्री सामान्य जातियों के अधिकारियों व मन्त्रियों को भी भरे मंच से ऐसा कहने की ताक़त रखते हैं ? ************************************ जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। जयपुर के ऐतिहासिक बिड़ला ऑडिटोरियम में 16 नवम्बर को आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा विभाग में तबादलों के नाम पर फैले भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने संबोधन के दौरान पूछा कि "क्या तबादले के लिए शिक्षकों को पैसे देने पड़ते हैं ?" इस पर सभी शिक्षकों ने हाथ उठा कर कहा "हाँ" देने पड़ते हैं। शिक्षकों की तरफ से आए इस उत्तर पर सीएम गहलोत ने कहा कि यह बहुत ही दुखदायी बात है। सीएम ने मंच पर बैठे शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा की ओर दे...

राजस्थान में ओवैसी को लेकर उत्साह और खलबली दोनों•••

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राजस्थान में ओवैसी को लेकर उत्साह और खलबली दोनों••• ----------------------------------------------------- क्या ओवैसी राजस्थान में कोई गठबंधन कर सत्ता में भागीदारी हासिल कर पाएंगे या वे कांग्रेस का पूरी तरह से सूपड़ा साफ़ कर भाजपा को विजय श्री दिलवाएंगे, या वे सियासी मुसलमानों को न घर का छोड़ेंगे और ना ही घाट का ? सवाल यह भी बनता है कि मुसलमान ओवैसी की तरफ एक उम्मीद की नज़र से क्यों देख रहा है ? ********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। पिछले ढाई महीने में एमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी का दो बार राजस्थान की राजधानी जयपुर में दौरा हुआ और दोनों ही बार यह दौरा पूरी तरह से गोपनीय रखा गया। लेकिन फिर भी सरकारी एजेंसियों और पत्रकारों ने दौरों की गोपनीयता का पूरी तरह से ऑपरेशन कर उनका खुलासा कर दिया। ओवैसी को हैदराबाद के बाहर पहले महाराष्ट्र में और बाद में बिहार में कामयाबी मिली। जिसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी को दूसरे राज्यों में भी फैलाना शुरू कर दिया। लेकिन बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने बुरी तरह से हार का सामना किया। इस चुनाव में अन्य प्रमुख पार्टियों के लिए एमआई...

एक मुलाकात : स्वतंत्रता आंदोलन के सिपाही भानु प्रकाश गोस्वामी जी से

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एक मुलाकात : स्वतंत्रता आंदोलन के सिपाही भानु प्रकाश गोस्वामी जी से गोपाल शरण  (राजस्थान समग्र सेवा संघ)  गांधियन संस्थान राजस्थान सम्रग सेवा संघ के साथी अनिल गोस्वामी के पिताजी 93 वर्षीय भानु प्रकाश गोस्वामी जी से उनके निवास वसुंधरा कॉलोनी जयपुर जाकर मिलने पर गौरव की अनुभूति हुई। गत दिनों हुई इस अल्पकालीन मुलाकात में ही उनका स्नेह व अपनत्व मिला और स्वतंत्रता आंदोलन के संस्मरण सुने। वे सचिवालय जयपुर से 1986 में उपशासन सचिव पद से रिटायर्ड हुए, जिस पद से मैं भी 2015 में सेवानिवृत्त हुआ, नौकरी के दौरान के संस्मरणों का भी आदान प्रदान हुआ।  यूपी के बुलंदशहर जिले की तहसील अनूपशहर के गांव रूठा में 1928 में जन्में आदरणीय भानु प्रकाश गोस्वामी जी, जब भारत में शिक्षित होना ही बड़ी बात थी, उनके गांव रूठा में स्कूल नहीं था, तो प्रारम्भिक शिक्षा 8 वीं तक जहांगीराबाद से की और आगे की पढ़ाई के लिए इंटर कॉलेज अनूपशहर ही था वहीं से इंटर करने के पश्चात मेरठ कॉलेज से एमए किया। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी (1941-47 तक) के संस्मरणों में गांधी जी, नेहरू जी, सरदार पटेल जी, मौलाना अब्दुल आजाद...

वल्लभनगर और धरियावद उप चुनाव

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वल्लभनगर और धरियावद उप चुनाव ---------------------------------------------- कांग्रेस व सीएम गहलोत की नहीं स्थानीय समीकरणों और सियासी खुन्नस की जीत हुई है ! ************************************ जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 02 नवम्बर को राजस्थान में दो विधानसभा सीटों पर हुए उप चुनाव का परिणाम आया। दोनों सीटों वल्लभनगर और धरियावद पर कांग्रेस की जीत हुई तथा भाजपा की शर्मनाक हार हुई। वल्लभनगर में भाजपा की जमानत भी ज़ब्त हो गई और वो चौथे नम्बर पर रही। धरियावद में भाजपा तीसरे नम्बर पर रही। इस चुनाव की विशेष बात यह रही कि दोनों सीटों पर तीसरी ताक़त के उम्मीदवार दूसरे नम्बर पर रहे। वल्लभनगर में आरएलपी उम्मीदवार उदयलाल डांगी दूसरे नम्बर पर रहे और धरियावद में बीटीपी के बागी व आदिवासी परिवार समर्थित थावरचन्द दूसरे नम्बर पर रहे। इस चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के गहलोत खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। गहलोत समर्थकों ने दोनों सीटों पर जीत का श्रेय मुख्यमंत्री गहलोत को दिया और उनकी बड़ी छवि निर्मित करने की कोशिश की कि गहलोत का जादू चल गया और भाजपा को चारों खाने चित्त करते हुए उन्होंने उसकी ज़मा...
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मदरसा पैराटीचर्स फुटबॉल क्यों बने ? **************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान में मदरसा पैराटीचर्स जो कि एक तरह से बन्धुआ मजदूरी वाली नौकरी करने को मजबूर हैं। सरकार उनका हर साल हजार पन्द्रह सौ रूपए तो बढा देती है, लेकिन उन्हें नियमित करने के लिए तैयार नहीं है। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और कांग्रेस ने विधनसभा चुनाव घोषणा पत्र में मदरसा पैराटीचर्स सहित सभी संविदाकर्मियों को नियमित करने का वादा किया था। घोषणा पत्र जारी करते समय सभी प्रमुख कांग्रेसी नेता मौजूद थे। इनमें विशेष रूप से अशोक गहलोत जो कि राज आने के बाद मुख्यमंत्री बने और सचिन पायलट जो कि तब पीसीसी अध्यक्ष थे और राज आने के बाद उप मुख्यमंत्री बने, भी मौजूद थे। हालांकि आज सचिन पायलट किसी भी पद पर नहीं हैं। आज विचित्र स्थिति यह पैदा हो गई है कि न तो मुख्यमंत्री गहलोत पैराटीचर्स को नियमित करना चाहते हैं और ना ही सचिन पायलट जो खुद की कुर्सी के लिए तो लड़ रहे हैं, लेकिन पैराटीचर्स के लिए मुंह खोलना भी उचित नहीं समझते। यही हाल कांग्रेस के दूसरे बड़े नेताओं, मन्त्रियों और विधायकों का है कि वे पैराटी...