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Showing posts from August, 2022

कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति के प्रतिनिधि मंडल ने किया सीकर, झुन्झुनूं और चूरू जिलों का दौरा

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कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति के प्रतिनिधि मंडल ने किया सीकर, झुन्झुनूं और चूरू जिलों का दौरा ------------------------------------------ तीनों जिला कलेक्टर्स को फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द करने के मुद्दे पर दिया ज्ञापन ------------------------------------------ साथ ही झुन्झुनूं बीहड़ का नामकरण नवाब शम्स ख़ान साहब और फतेहपुर बीहड़ का नामकरण नवाब ज़लाल ख़ान साहब के नाम पर करने एवं दोनों कायमखानी शासकों के स्मारक बनाने के लिए भी दिया ज्ञापन *************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 30 अगस्त को राजस्थान कायमखानी महासभा की विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति के एक प्रतिनिधि मंडल ने सीकर, झुन्झुनूं और चूरू जिलों का दौरा किया। प्रतिनिधि मंडल ने इस दौरे में समिति से जुड़े स्थानीय कायमखानी सरदारों और कौम के दीगर मोअज्जिज सरदारों से मुलाक़ात की। साथ ही तीनों जिलों के कलेक्टर्स से भी मुलाकात की और उन्हें दो-दो मांग पत्र पेश किए।                                      इस दौरे म...

टूटी सड़कें, बहते सीवरेज और गन्दगी के ढेर से बदहाल राजस्थान की राजधानी

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टूटी सड़कें, बहते सीवरेज और गन्दगी के ढेर से बदहाल राजस्थान की राजधानी   ------------------------------------------ राजधानी में दो नगर निगम और छह कांग्रेसी विधायक, जिनमें तीन कैबिनेट मंत्री फिर भी विश्व प्रसिद्ध पिंक सिटी का बुरा हाल ? **************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर, जो कि पूरे विश्व में पिंक सिटी के नाम से प्रसिद्ध है। यहां हर साल हजारों पर्यटक देश विदेश से आते हैं। लेकिन इन दिनों यह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। टूटी सड़कों, बहते सीवरेज के गन्दे पानी और कचरे के ढेर की सड़ांध ने राजधानी में रहने वालों और यहां किसी काम से आने वालों का जीना दुभर कर रखा है। यह स्थिति तब है जब 2020 में विकास के नाम पर अशोक गहलोत सरकार ने राजधानी को दो नगर निगमों में विभाजित कर दिया, ग्रेटर और हैरिटेज। ग्रेटर नगर निगम में भाजपा का राज है और हैरिटेज में कांग्रेस का। ग्रेटर चूंकि अधिकतर न‌ए शहर का क्षेत्र है और हैरिटेज पुराने का। हैरिटेज क्षेत्र का हाल बहुत बुरा है। हर चौराहा और गली गन्दगी की गिरफ्त में है। नया शहर होते हु...

जालोर में दलित छात्र की हत्या ?

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जालोर में दलित छात्र की हत्या ? ************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। गत दिनों एक तरफ पूरा देश आजादी की 75 वीं वर्षगांठ को अमृत महोत्सव के तौर पर मना रहा था। दूसरी तरफ 76 वें स्वतंत्रता दिवस के ठीक दो दिन पहले 13 अगस्त को राजस्थान के जालोर जिले के सुराणा गांव में एक मासूम दलित छात्र की हत्या हो हो जाती है। इंद्र कुमार मेघवाल नामक कक्षा तीन के इस आठ वर्षीय छात्र को स्कूल के हैड मास्टर ने बड़ी बेरहमी से पीटा और कुछ दिनों अस्पताल में ज़िन्दगी व मौत की जंग लड़ते हुए यह मासूम हार गया। बताया जा रहा है कि इस मासूम ने हैड मास्टर की मटकी से पानी पी लिया था, जिससे उसने गुस्से में उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। यह भी बताया जा रहा है कि मटकी वाली बात सही नहीं है, बच्चों के आपस में झगड़ने पर हैड मास्टर ने पिटाई कर दी। सवाल यह नहीं है कि पिटाई का कारण क्या था ? सवाल यहां तीन हैं पहला हिंसक व नफरती मानसिकता का, दूसरा इस दर्दनाक पिटाई का और तीसरा इस मुद्दे पर जिस अंदाज में आवाज़ उठनी चाहिए थी, वो क्यों नहीं उठी ? यह जग जाहिर है कि सदियों से हमारे देश में शूद्र (दलित, आदिवासी और ओबी...

दलितों और आदिवासियों के लिए मोदी सरकार ने क्या किया ?

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दलितों और आदिवासियों के लिए मोदी सरकार ने क्या किया ? --------------------------------------------------- आरएसएस की छत्रछाया में पीएम मोदी के आठ साल के शासन में दलितों और आदिवासियों को क्या मिला ? कहने को पहले श्री रामनाथ कोविन्द के तौर पर दलित राष्ट्रपति और अब श्रीमती द्रोपदी मुर्मू जी के तौर पर आदिवासी राष्ट्रपति, कई मन्त्री और कुछ योजनाएं। लेकिन इन सबके बावजूद पिछले आठ साल में दलितों और आदिवासियों का कितना भला हुआ ? उस पर आज भी प्रश्न चिन्ह खड़ा है। ********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के शासन को आठ साल से अधिक हो गए हैं। पूर्ण बहुमत की सरकार है। आरएसएस की छत्रछाया है। रोटी रोजगार और महंगाई का हाल पूरे देश को मालूम है। थार न्यूज़ और इक़रा पत्रिका सहित कमोबेश सभी मीडिया संस्थान ने कई बार इस मुद्दे पर लिखा है, बोला है और अपनी स्टोरी प्रसारित की हैं। लेकिन आज की इस स्टोरी में मुद्दा दलितों और आदिवासियों का है। जिनके लिए मोदी सरकार ने क्या किया ? यह जग जाहिर है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में अच्छे खासे दलित और आदिवासी वोट भाजप...

शौहदा ए करबला से मुहब्बत और बुग्ज ?

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शौहदा ए करबला से मुहब्बत और बुग्ज ? ******************************* जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। मुहर्रम का महीना शुरू होते ही हर साल वाकिया ए करबला और ताजियेदारी को लेकर गैर जरूरी बहस शुरू हो जाती है। सोशल मीडिया के इस दौर में यह बहस और भी ज्यादा होने लगी है। कुछ लोग वाकिया ए करबला के बयान और ताजियेदारी को लेकर शिर्क व बिदअत (गैर इस्लामिक) कह कर माहौल खराब करते हैं। यह लोग बिना सिर पैर की मनगढ़ंत बातें वाकिया ए करबला को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल करते रहते हैं। यह एक तरह से बुग्ज (बैर/दुश्मनी) का प्रदर्शन है। हमारा मानना है कि शौहदा ए करबला और वाकिया ए करबला को याद करने के मुद्दे पर किसी को कोई भी नुक्ताचीनी नहीं करनी चाहिए। चाहे कोई कैसे भी इसे याद करे। सन 61 हिजरी में पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खानदान पर जबरदस्त ज़ुल्मो ज्यादती की गई थी, इतिहास इसका गवाह है। जालिम बादशाह यजीद ने इराक के मैदान ए करबला में पैगम्बर साहब के लाडले नवासे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम समेत पूरे ख़ानदान को कत्ल करवा दिया था। सवाल यह नहीं है कि उन्हें कत्ल क्यों किया गया ? भूखे प्यासे कत्ल...

राजस्थान कायमखानी महासभा और उसकी AGM के पीछे का षड्यंत्र ?

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राजस्थान कायमखानी महासभा और उसकी AGM के पीछे का षड्यंत्र ? ****************************** **** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। AGM (असेम्बली ऑफ जनरल मेम्बर/एनुअल जनरल मीटिंग या वार्षिक आम सभा) किसी भी संगठन/संस्था की रीढ़ होती है। संगठन की एक तरह से यही मालिक होती है। संगठन का हर पदाधिकारी एजीएम के प्रति उत्तरदायी होता है। ऐसा ही राजस्थान कायमखानी महासभा में भी है, जो 1979-80 में सोसायटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हुई थी। लेकिन दुर्भाग्य से राजनीतिक षड्यंत्र और कायमखानी क़ौम के प्रबुद्ध सरदारों की लापरवाही, खुदगर्जी या यह कहें कि "तुम मुझे हाजी साहब कहो और मैं तुम्हें काजी साहब कहूंगा" वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए पिछले 20 साल में न कभी एजीएम बुलाई गई और ना ही ईमानदारी से एजीएम बनाई गई। लेकिन इतना जरूर हुआ कि दो तीन बार चुनाव की नौटंकी हुई, चुनाव के नाम पर फसाद व फर्जीवाड़ा हुआ और मामला कोर्ट में पहुंच गया। नीयत में इधर भी खौट था और उधर भी। हाँ, यह कह सकते हो कि एक पक्ष की नीयत में दो आने खौट था और दूसरे पक्ष के चार आने, लेकिन खौट दोनों तरफ था। जो आज भी है, जिसका खामियाजा पूर...