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Showing posts from December, 2023

गहलोत की हेकड़ी और पाखंड के कारण बनी राजस्थान में भाजपा सरकार

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गहलोत की हेकड़ी और पाखंड के कारण बनी राजस्थान में भाजपा सरकार ********************** -अर्जुन देथा जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बने कई दिन हो गए, अब उसका सियापा हो रहा है। सबसे ज्यादा सियापा कांग्रेस पार्टी में हो रहा है, क्योंकि उन्हें लगता था कि राजस्थान में सरकार पुनः बनाई जा सकती थी। जिन कारणों को गिनाया जा रहा है, वो असली कारण हार के नहीं हैं। हार के असली कारण पर अभी भी कोई अंगुली नहीं रख रहा है। सब दाएं बाएं की बातें हो रही हैं। स्वयं अशोक गहलोत इसका कारण उनकी योजनाओं को जनता को नहीं समझा पाना और ध्रुवीकरण बता रहे हैं। इस हार का पहला पहला कारण आंशिक सत्य है, लेकिन दूसरा कारण सफेद झूठ है। यह चुनाव राजस्थान में हिंदू मुस्लिम ध्रुवीकरण का चुनाव कतई नहीं था, क्योंकि ऐसा कुछ वास्तव में जमीन पर था ही नहीं, वास्तविकता यह है कि इस चुनाव में भी राजस्थान के कई इलाकों में हिंदुओं ने मुसलमान को और मुसलमानों ने हिंदुओं को ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों अथवा भारतीय जनता पार्टी के कुछ चुनाव चिन्ह रहित विद्रोही उम्मीदवारों को वोट दिया है।...

वक्फ जायदाद, देवस्थान भूमि बनाम गुरूद्वारे और चर्च

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वक्फ जायदाद, देवस्थान भूमि बनाम गुरूद्वारे और चर्च *********************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। वक्फ जायदाद और देवस्थान भूमि पूरे देश में बड़े पैमाने पर खुर्द बुर्द हो रही हैं, जो धर्म के नाम पर हैं और इन्सानों के कल्याण के लिए हैं। वक्फ जायदाद इस्लाम धर्म से मुताल्लिक हैं और देवस्थान भूमि सनातन धर्म से सम्बन्धित हैं। वक्फ जायदाद की देखरेख मुसलमानों के हाथ में है, यानी इसके पदाधिकारी सभी मुसलमान होते हैं, चाहे वक्फ प्रबंध कमेटी के लोग हों या वक्फ बोर्ड के लोग। देवस्थान भूमि के जिम्मेदार सनातन धर्म को मानने वाले यानी हिन्दू धर्म से सम्बन्धित लोग होते हैं। धर्म और मानव कल्याण के लिए देशभर में लाखों जायदाद वक्फ और देवस्थान की हैं। लेकिन इनसे मानव कल्याण कम और इनके व्यवस्थापकों के धन में वृद्धि अधिक होती है। वक्फ जायदाद और देवस्थान भूमि की प्रबंध कमेटी बनाने, किरायेदारी करने आदि को लेकर जमकर हेराफेरी की जाती है। हेराफेरी भी व्यवस्थित रूप से होती है। पुराने किरायेदारों को खाली कराने, किराया बढ़ाने, किसी कोर्ट में चल रहे मुकदमे में ढंग से पैरवी नहीं करने आदि हथकंडों से यहां लूट...

एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर साहब : जिन्होंने पूरी ज़िन्दगी तालीम को बढ़ावा देने में लगा दी

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एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर साहब : जिन्होंने पूरी ज़िन्दगी तालीम को बढ़ावा देने में लगा दी -------------------------------- वे 27 नवम्बर को इस दुनिया से रूखसत हो ग‌ए ********************* जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान के मशहूरो मारूफ समाजी कारकुन एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर साहब इस दुनिया में नहीं रहे। 27 नवम्बर की सुबह उनका इन्तकाल हो गया और इसी दिन असर की नमाज के वक्त उन्हें घाटगेट कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। उनके जनाजे में जयपुर और जयपुर से बाहर के क‌ई समाजी और मजहबी जिम्मेदार शरीक हुए। एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर साहब एक बेमिसाल शख्सियत के मालिक थे, उन्होंने ऐसे लोगों की समाजी और सियासी पहचान क़ायम करवाई, जिनको उनके गली मोहल्ले से बाहर कोई जानता तक नहीं था। उनका ताल्लुक जयपुर के रामगंज इलाके और यहां की रहमानी बिरादरी से था। चार दशक पहले इस इलाके व बिरादरी में तालीम की बेहद कमी थी। यहां उन्होंने रहमानी मस्जिद में स्कूल शुरू करवाया और इस स्कूल को सीनियर सेकेंडरी तक स्थापित किया। यहां से बेशुमार बच्चे बच्चियां पढ़कर आज अपनी जिन्दगी संवार चुके हैं। काफी संख्...

जयपुर में अमीन कागजी और रफीक खान की ऐतिहासिक जीत

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जयपुर में अमीन कागजी और रफीक खान की ऐतिहासिक जीत ******************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के नतीजे 3 दिसम्बर को आए, इस दिन जयपुर के किशनपोल और आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जो उत्साह था, वो देखने लायक था। मतगणना के दिन सुबह से ही मौसम ठंडा और हल्की बूंदाबांदी का था जो रातभर जारी रहा। इस बूंदाबांदी वाले ठंडे मौसम में जब किशनपोल और आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्रों के नतीजे आए तथा अमीन कागजी और रफीक खान की जीत की घोषणा हुई तो उनके समर्थक जबरदस्त नारेबाजी के साथ खुशी से झूम उठे। दोनों के प्रधान कार्यालयों और घर पर देर रात तक उत्सव का माहौल बना रहा। दोनों सीटों पर भाजपा ने नए उम्मीदवार उतारे थे और यह दोनों उम्मीदवार आरएसएस की मनपसंद के थे तथा जयपुर शहर आरएसएस का मजबूत गढ़ माना जाता है। आरएसएस ने मजबूत रणनीति बनाई और पूरी तरह से चुनाव का ध्रुवीकरण करने का प्रयास किया। लेकिन उसे इन दोनों सीटों पर सफलता नहीं मिली। मुस्लिम बाहुल्य इन दोनों सीटों पर मुस्लिम समुदाय ने भी जबरदस्त उत्साह दिखाया और जमकर एकतरफा पोलिंग की, साथ ही सभी ज...

राजस्थान में कांग्रेस का यह हाल कैसे हुआ ?

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राजस्थान में कांग्रेस का यह हाल कैसे हुआ ? ------------------------------- कांग्रेस की इस हार का पहले से ही सबको मालूम था, सिर्फ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके कुछ चेलों ने सम्भावित जीत का भ्रम बना रखा था, जो 3 दिसम्बर को मतगणना के दिन टूट गया। ------------------------------ राजस्थान में न कांग्रेस हारी है और ना ही पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व, यहां तो सिर्फ अशोक गहलोत चुनाव हारे हैं, जिन्होंने कभी भी कांग्रेस को जीत नहीं दिलवाई। ******************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान में विधानसभा चुनाव के दिन बहुत से लोग मायूस हो गए, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि कांग्रेस जीत रही है और अशोक गहलोत चौथी बार मुख्यमंत्री बन रहे हैं, जबकि धरातल की सच्चाई कांग्रेस को चुनाव हरवा रही थी। लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके नजदीकी चेलों और उनके द्वारा स्थापित आईटी सेल कार्यकर्ता कांग्रेस को पूर्ण बहुमत के साथ चुनाव जितवा रहे थे। गहलोत खुद 156 सीटों से अधिक की जीत का दावा कर रहे थे। गहलोत और उनके चेलों ने पूरी तरह एक भ्रम बना रखा था, जो 3 दिसम्बर को मतगणना के दिन 12 बजे ही टूट गया, लोग न...

बिखरा हुआ और अवसरवादी विपक्ष बनाम लोकसभा चुनाव-2024

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बिखरा हुआ और अवसरवादी विपक्ष बनाम लोकसभा चुनाव-2024 ************************ जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 2024 के अगले लोकसभा चुनाव में क्या नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा हैट्रिक लगाएगी ? या भाजपा की जनविरोधी सरकार को विपक्ष उखाड़ देगा ? यह दोनों सवाल जागरूक मतदाताओं के दिमाग में सालभर से घूम रहे हैं, लेकिन अभी इन पर कुछ ज्यादा नहीं कहा जा सकता है। परन्तु इतना साफ है कि जनता रोटी रोजगार, महंगाई और बढ़ती नफ़रत से दुखी हो चुकी है और वो हर हाल में भाजपा सरकार से छुटकारा चाहती है। अगला सवाल यह है कि क्या विपक्ष जनता की इस भावना के लिए कोई ठोस रणनीति से प्रयास कर रहा है ? इस सवाल का जवाब है नहीं। अगर विपक्ष एकजुट होकर मजबूत रणनीति से चुनाव लड़ता, तो भाजपा 2019 का लोकसभा चुनाव हार जाती, क्योंकि करीब 61 प्रतिशत वोट उसके खिलाफ पड़े थे, जिनका विपक्षी पार्टियों ने बंटवारा कर दिया था। अब बात करें 2014 के लोकसभा चुनाव की, जिसमें पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनाई। इतनी बड़ी सफलता भाजपा को पहली बार मिली। जिसकी सबसे बड़ी वजह तत्कालीन यूपीए ...