मुख्यमंत्री गहलोत को अपने अन्तिम कार्यकाल में "नाइन्साफी" का दाग़ हटाना चाहिए
मुख्यमंत्री गहलोत को अपने अन्तिम कार्यकाल में "नाइन्साफी" का दाग़ हटाना चाहिए ------------------------------------- विशेषकर रियायती दर पर आवन्टित ज़मीनों के मुद्दे पर, जो उन्होंने अपने तीन कार्यकाल में बिना भेदभाव के आवन्टित नहीं की हैं। इनमें मुस्लिम समुदाय के साथ पूरी तरह से भेदभाव बरता गया है। ************************* जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिसम्बर 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। यह उनका तीसरा कार्यकाल है और तीनों ही कार्यकालों में मंत्रिमंडल गठन, राजनीतिक नियुक्तियों, ट्रांसफर पोस्टिंग, वोट की राजनीति के लिए स्थापित बड़े नेताओं को हाशिए पर लगाने और रियायती दर पर जमीन आवन्टित करने आदि मुद्दों को लेकर गम्भीर सवाल खड़े होते रहे हैं। इन सब में इस लेख का प्रमुख मुद्दा रियायती दर पर ज़मीन आवन्टित करने का है, जिसमें गहलोत ने 15 बरसों में पूरी तरह से भेदभाव बरता है विशेषकर मुस्लिम समुदाय के साथ। अशोक गहलोत ने अपने इन तीन कार्यकालों में हर जिले में बड़ी संख्या में रियायती दर पर भूमि आवन्टित की है। कमोबेश सभी समाजों को जमीन दी ह...