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Showing posts from April, 2023

मुख्यमंत्री गहलोत को अपने अन्तिम कार्यकाल में "नाइन्साफी" का दाग़ हटाना चाहिए

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मुख्यमंत्री गहलोत को अपने अन्तिम कार्यकाल में "नाइन्साफी" का दाग़ हटाना चाहिए  ------------------------------------- विशेषकर रियायती दर पर आवन्टित ज़मीनों के मुद्दे पर, जो उन्होंने अपने तीन कार्यकाल में बिना भेदभाव के आवन्टित नहीं की हैं। इनमें मुस्लिम समुदाय के साथ पूरी तरह से भेदभाव बरता गया है। ************************* जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिसम्बर 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। यह उनका तीसरा कार्यकाल है और तीनों ही कार्यकालों में मंत्रिमंडल गठन, राजनीतिक नियुक्तियों, ट्रांसफर पोस्टिंग, वोट की राजनीति के लिए स्थापित बड़े नेताओं को हाशिए पर लगाने और रियायती दर पर जमीन आवन्टित करने आदि मुद्दों को लेकर गम्भीर सवाल खड़े होते रहे हैं। इन सब में इस लेख का प्रमुख मुद्दा रियायती दर पर ज़मीन आवन्टित करने का है, जिसमें गहलोत ने 15 बरसों में पूरी तरह से भेदभाव बरता है विशेषकर मुस्लिम समुदाय के साथ। अशोक गहलोत ने अपने इन तीन कार्यकालों में हर जिले में बड़ी संख्या में रियायती दर पर भूमि आवन्टित की है। कमोबेश सभी समाजों को जमीन दी ह...

कायमखानी क़ौम की बुजुर्ग शख्सियत हाजी रणजीत खां जी से एक ख़ास मुलाक़ात

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कायमखानी क़ौम की बुजुर्ग शख्सियत हाजी रणजीत खां जी से एक ख़ास मुलाक़ात --------------------------------------- उनकी जद्दोजहद और क़ौम की फलाहो बहबूदी के मुद्दे पर हुई विस्तार से चर्चा ************************* जोधपुर/जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। कायमखानी क़ौम की मशहूरो मारूफ बुजुर्ग शख्सियत रिटायर्ड सेल्स टैक्स ऑफिसर हाजी रणजीत खां जी पहाड़ान (पहाड़ियान) से 27 अप्रैल 2023 को एक ख़ास मुलाक़ात करने का मौका मिला। उनसे यह मुलाक़ात कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट जयपुर के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद खां चित्तौड़गढ़ और इक़रा पत्रिका के सम्पादक एम फ़ारूक़ ख़ान ने की। इस मुलाकात में उन्होंने अपनी ज़िन्दगी की जद्दोजहद और क़ौम की फिक्रमंदी के बारे में चर्चा की। हाजी साहब मूल रूप से कायमखानी क़ौम की एक तत्कालीन रियासत "सतावनी (डीडवाना क्षेत्र)" की राजधानी झाड़ौद गांव के निवासी हैं और वर्तमान में बीजेएस काॅलोनी जोधपुर में निवास करते हैं। वे राजस्थान कायमखानी शोध संस्थान के फाउंडर और वर्तमान में अध्यक्ष हैं। क़रीब 80 ईद देख चुके हाजी साहब आज भी पूरी तरह से एक्टिव हैं, इसके बावजूद कि उनकी तबीयत खरा...

कायमखानी क़ौम के लिए ऐतिहासिक दिन

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कायमखानी क़ौम के लिए ऐतिहासिक दिन ----------------------------------- कप्तान लियाकत अली ख़ान द्वारा कायमखानी इतिहास पर लिखी गई किताब का 16 अप्रैल को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने निवास पर किया विमोचन ************************ जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 16 अप्रैल 2023 इतवार का दिन कायमखानी क़ौम के लिए एक ऐतिहासिक दिन था। इस दिन कप्तान लियाकत अली ख़ान द्वारा कायमखानी इतिहास पर लिखी गई किताब का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने निवास पर विमोचन किया। कायमखानी क़ौम शौर्य, साहस, वफादारी और वतन प्रेमी के नाम से जानी जाती है। कायमखानी क़ौम की भारतीय सेना में कुछ कम्पनियां भी हैं। विभिन्न युद्धों और सैन्य ऑपरेशनों में करीब 225 कायमखानी वीर सैनिक देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं। छह कायमखानी वीर सैनिकों को वीर चक्र और चार को शौर्य चक्र जैसे सैन्य सम्मान से भारत सरकार द्वारा सम्मानित भी किया गया है। काफी कायमखानी सैनिकों को अन्य सैन्य अवार्ड भी दिए गए हैं। कायमखानी शहीद सैनिकों के नाम जयपुर के शहीद स्मारक, इंडिया गेट और वार मेमोरियल दिल्ली में दर्ज हैं। कायमखानियों ने हिसार, हांसी, फतेहाबाद...

मुल्क के इन हालात के लिए इतना मायूस होने की जरूरत नहीं है !

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मुल्क के इन हालात के लिए इतना मायूस होने की जरूरत नहीं है ! ************************* जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 1990 से मुल्क के जो हालात बदले हैं वे बेहद ख़तरनाक हैं, नफ़रत का बोलबाला बढ़ा है। पिछले कुछ बरसों से तो साम्प्रदायिक ताकतें खुलेआम संविधान, कानून व लोकतांत्रिक व्यवस्था को ललकार रही हैं। ध्रुवीकरण अपने चरम पर है। ऐसे हालात में संवैधानिक व्यवस्था और लोकतंत्र से मुहब्बत करने वाले लोग मायूस हैं। और इन मायूस लोगों में सबसे बड़ी तादाद किसी वर्ग या तबके की है, तो वो मुस्लिम समुदाय की है। मुसलमानों का आम तबका, कारोबारी, पढा लिखा, नौकरी पेशा, रिटायर्ड अफ़सर यानी हर मुसलमान एक तरह से मायूस है, वो तथाकथित सेक्यूलर ताकतों से अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहा है। बात अपनी जगह सच भी है, लेकिन इतनी सच भी नहीं है कि पूरी तरह से मायूस होकर दिशाहीनता का शिकार बना जाए। आज भी मुल्क में बेशुमार गैर मुस्लिम लोग हैं जो लोकतंत्र व संविधान की रक्षा की बात करते हैं, जो मुसलमानों के साथ होने वाली नाइन्साफी व ज्यादती के खिलाफ़ बेबाकी से अपनी आवाज़ बुलंद करते हैं। इसलिए दिशाहीन होने की बजाए अपनी सह...

बसपा, सीपीएम, रालोपा, आप, बीएपी आदि मिलकर मैदान में उतरें तो राजस्थान में एक "न‌ई सियासी इबारत" लिखी जा सकती है...

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बसपा, सीपीएम, रालोपा, आप, बीएपी आदि मिलकर मैदान में उतरें तो राजस्थान में एक "न‌ई सियासी इबारत" लिखी जा सकती है... ********************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान में हर विधानसभा चुनाव में तीसरी ताक़त वाली पार्टियों का वजूद रहा है, यानी कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ काफी सीटों पर एक मजबूत विकल्प रहा है। लेकिन तीन दशक पहले जनता दल के बिखराव और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण वाली राजनीति के बढ़ावे से यह विकल्प कमजोर हो गया है। फिर भी बसपा, सीपीएम, रालोपा जैसी पार्टियों ने पिछले तीन चार चुनावों में काफी सीटों पर मतदाता के सामने एक विकल्प पेश किया है। गत चुनाव में बीटीपी और आम आदमी पार्टी आदि भी कुछ सीटों पर एक विकल्प बनकर सामने आई थीं। इन पार्टियों का आपस में कोई गठबन्धन नहीं रहा और यह अपने अपने क्षेत्र में हाथ पैर मारती रही, फिर भी तीसरी ताकत वाली इन पार्टियों का 50 से अधिक सीटों पर मजबूत विकल्प था तथा इन सीटों पर इनको अच्छे खासे वोट मिले। कुछ सीटों पर तो जीत भी हु‌ई। इस कड़ी में अगर निर्दलीय उम्मीदवारों को शामिल कर लें तो यह संख्या काफी बढ़ जाती है, जहां मतदाताओं ने कां...

चूरू का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा ?

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चूरू का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा ? ********************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। इस वर्ष के अन्त में राजस्थान विधानसभा के चुनाव हैं। जिसके लिए सभी सीटों पर सियासी दांवपेंच और दावेदारी तेज हो गई है। इस बार कुछ सीटें सबसे हॉट रहने वाली हैं, क्योंकि यहां के नेता मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में हैं। इन्हीं सीटों में से एक है चूरू। जो राजधानी जयपुर से करीब 200 किलोमीटर उत्तर में है। इस सीट से वर्तमान में राजेंद्र राठौड़ विधायक हैं। राजेन्द्र राठौड़ भाजपा की सभी सरकारों में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं और कुछ दिनों पहले भाजपा ने उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बना‌ दिया है। उनका मुकाबला हमेशा कांग्रेस के उम्मीदवार से होता है और चुनाव आमने सामने का रहता है। वे 1990 से यहां से लगातार विधायक हैं। बीच में एक बार 2008 के चुनाव में उन्होंने पड़ौस की तारानगर सीट से चुनाव जीता था। सियासी गलियारों में तब यह चर्चा हुई थी कि उन्होंने मकबूल मंडेलिया के लिए यह सीट खाली की थी। उस चुनाव में मकबूल मंडेलिया चूरू से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीते थे। मकबूल मंडेलिया से राजेंद्र राठौड़ के व्यक्...

क्या विपक्ष का बिखराव सत्ता परिवर्तन ला सकता है ?

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क्या विपक्ष का बिखराव सत्ता परिवर्तन ला सकता है ? *********************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। एक साल बाद यानी अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव हैं। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के।‌ 90 करोड़ से ऊपर वोटर इसमें भाग लेंगे। जनता का बड़ा वर्ग वर्तमान केन्द्र सरकार की नीतियों से पीड़ित है, सत्ता परिवर्तन के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाएगा। लेकिन सत्ता किसको देगा ? विपक्ष को। तो अब सवाल यह है कि क्या विपक्ष सत्ता परिवर्तन लाने की हालत में है ? यहां यह भी स्पष्ट कर दें कि बिना विपक्षी पार्टियों के मजबूत गठबन्धन के सत्ता परिवर्तन असम्भव है। विपक्ष की हालत यह है कि सबसे बड़ी पार्टी कही जाने वाली कांग्रेस 543 लोकसभा सीटों में से 200 सीटों पर भी पहले और दूसरे नम्बर पर नहीं है। इसी तरह अन्य क्षेत्रीय दलों का भी बुरा हाल है, वे अपने राज्य के बाहर कोई खास वजूद नहीं रखते। न कांग्रेस सबको साथ लेकर मजबूत गठबन्धन बनाने की नीति पर काम कर रही है और ना ही अन्य विपक्षी पार्टियां गठबंधन को लेकर गम्भीर है। इस वर्ष कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना आदि राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हैं तथा...