Posts

Showing posts from January, 2023

कोई झूठ को सच का आईना तो दिखाए ?

Image
कोई झूठ को सच का आईना तो दिखाए ? ************************ वेदव्यास साहित्य को आज भी ‘सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् के पर्याय रूप में ही देखा जाता है। समय का सत्य, समाज का शिव और प्रकृति का सुन्दर ही इसकी विचारधारा है। हजारों वर्ष से शब्दों की यह महाभारत युद्ध और शांति के बीच जारी है। विकास के नए सोपान इसे ऊर्जा देते हैं और मनुष्य के नए संधान इसे प्रासंगिक बनाते हैं। यह साहित्य मनुष्य के द्वारा ही मनुष्य के लिए समाज और समय के बीच खड़ा रहता है। राजा और प्रजा के बीच, प्रकृति और मनुष्य के साथ, सूर्य और धूप के मध्य तथा जीवन और जगत के आमने-सामने यह साहित्य ही होता है। मनुष्य क्या सोचता है, मनुष्य क्यों सोचता है और मनुष्य किसके लिए सोचता है जैसी सभी जिज्ञासाएं इस साहित्य में ही निवास करती हैं। नाद ब्रह्म की तरह यह शब्द ब्रह्म मनुष्य के चेतन-अवचेतन का पर्याय है। वेद और पुराण की ऋचाएं, वाल्मीकि और महर्षी वेदव्यास की वाणी इसी का अनहदनाद है। इसका उद्गम मनुष्य का हृदय है और इसकी यात्रा समय का ओर-छोर है तो प्रतिफलन स्मृतियों का भाष्य है। साहित्य का यह प्रवाह मनुष्य के बिना कुछ भी नहीं है। यह संविधानों क...

कबीर की तरह जिए फकीरी अंदाज के साथी शरद यादव

Image
कबीर की तरह जिए फकीरी अंदाज के साथी शरद यादव -------------------------------------- अर्जुन देथा इस वक्त साथी शरद यादव का जाना देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। आज जहां देश में विपक्षी एकता की और जन पक्षीय मुहिम की सबसे ज्यादा जरूरत है साथी शरद यादव बड़ी भूमिका निभा सकते थे। देश के सभी विपक्षी दलों में उनके अच्छे रिश्ते और व्यावहारिक राजनीतिक संबंध थे। मेरा उनके साथ संबंध लगभग 50 बरस का होने आ गया, आधी जिंदगी तक घनिष्ठ राजनीतिक साथी की तरह संबंध रहा। एक समय ऐसा भी था कि कुछ वर्षों के लिए वे जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और मैं राजस्थान प्रदेश का अध्यक्ष था। रिश्ता इतना लंबा है कि मेरे सामने इस समय यह चुनौती है कि क्या लिखूं और क्या नहीं लिखूं। बहुत सारी  यात्राओं में और चुनावी सभाओं में, पार्टी सम्मेलनों में और कार्यकर्ता शिविरों में मैं उनके साथ रहा। उनकी सबसे बड़ी खूबी थी एकदम सादगी पूर्ण रहते थे। सटीक मुद्दे की बात करना और कभी कभी कड़वा बोल जाना भी उनकी खासियत थी। उनके छात्र जीवन के संघर्षों के कई किस्से वे फुर्सत के क्षणों में सुनाया करते थे। उनके दोनों पैर पुलिस की पिटाई से काफ...

ख़ान अब्दुल गफ्फार ख़ान, जिनका कर्ज हम कभी चुका नहीं पाएंगे

Image
ख़ान अब्दुल गफ्फार ख़ान, जिनका कर्ज हम कभी चुका नहीं पाएंगे *********************** प्रो फेसर राजकुमार जैन 34 साल पहले 20 जनवरी 1988 को खान अब्दुल गफ्फार खान जिन्हें सरहदी गांधी, बादशाह खान और बाचा खान के नाम से भी जाना जाता है का इंतकाल हुआ था। जंगे आजादी में महात्मा गांधी के सबसे बड़े सिपहसालार जिन्होंने आजादी और जम्हूरियत को कायम रखने के लिए हिंदुस्तान और पाकिस्तान की जेलों में लगभग 30  साल बिताए थे। जो कौम अपने पुरखों की कुर्बानियों को नजरअंदाज कर उन्हें भुला देती है उसका इतिहास भी वक्त रहते मिट जाता है। बादशाह खान हिंदुस्तान की आजादी की तारीख़ (इतिहास) की अमिट शख्सियत हैं। उनको याद करने का मतलब है अपनी जड़ों में झांकना तथा प्रेरणा लेना। इससे पूर्व एक श्रंखला इस विषय पर प्रकाशित की गई थी उसी का एक अंश खिराज ए अकीदत के तौर पर पेश करने की मंशा से प्रकाशित किया जा रहा है। हमें फ़ख्र है कि हमने उस महामानव से बात की है, महात्‍मा गांधी की जन्‍म शताब्‍दी के अवसर पर 1969 में भारत सरकार ने उन्‍हें पेशावर (पाकिस्‍तान) से हिंदुस्‍तान बुलवाया था। उनकी अगवानी करने के लिए हवाई अड्डे पर जयप्र...

ख्वाज़ा ग़रीब नवाज़ और उनका मिशन

Image
ख्वाज़ा ग़रीब नवाज़ और उनका मिशन --------------------------- 811 वें उर्स पर विशेष ******************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। हमारे प्रदेश राजस्थान का अजमेर शहर जो न सिर्फ पूरे देश में बल्कि पूरे विश्व में मशहूर है। इस शहर की प्रसिद्धि की सबसे बड़ी वजह या कहें कि सिर्फ एक ही वजह है, वो हैं ख्वाज़ा गरीब नवाज़। इस लेख में मैं ख्वाज़ा साहब का जीवन परिचय बताने की बजाए उनके मिशन पर प्रकाश डालने की कोशिश कर रहा हूं, जो उम्मीद है पाठकों को पसन्द आएगा। हजरत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती गरीब नवाज रहमतुल्लाह अलैह हमारे मुल्क में उस जमाने में आए थे, जब यहां शासक वर्ग और रसूखदार जनता पर जमकर अत्याचार करते थे। देश की केन्द्रीय शक्ति और शासन व्यवस्था एक तरह से तहस-नहस थी। छोटे-मोटे असंख्य राजा-रजवाड़ों ने मुल्क को टुकड़ों में बांटकर अपनी जागीर और रियासत बना रखा था। यह राजा-रजवाड़े हर छोटी मोटी बात पर एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए आपस में लड़ते-भिड़ते रहते थे। देश की जनता विभिन्न प्रकार के अत्याचारों की चक्की में पिसी जा रही थी। इन्सानियत सिसक-सिसक कर दम तोड़ रही थी। इन्सान-इन्सान में इतना भ...

अल्पसंख्यकों को लेकर गहलोत सरकार की नीयत ठीक नहीं है : अब्दुल सलाम जौहर

Image
अल्पसंख्यकों को लेकर गहलोत सरकार की नीयत ठीक नहीं है : अब्दुल सलाम जौहर ************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। मुस्लिम प्रोग्रेसिव फेडरेशन के संयोजक और जयपुर के जाने माने समाजसेवी अब्दुल सलाम जौहर ने गत दिनों थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका से बातचीत में राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार को अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों ख़ासकर मुसलमानों को लेकर गहलोत सरकार की नीयत ठीक नहीं है। उन्होंने वक्फ बोर्ड, मदरसा बोर्ड, पैराटीचर्स, उर्दू तालीम और अल्पसंख्यकों से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर साफ तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत साहब ने ऐसा कुछ नहीं किया जिसे देखकर कहा जा सके के उन्होंने अल्पसंख्यकों के साथ बराबरी का सुलूक किया है। उन्होंने कहा कि पांच साल होने को आ ग‌ए अभी तक मुख्यमंत्री किसी भी मुस्लिम डेलिगेशन से नहीं मिले हैं, पिछले कार्यकाल वाले गहलोत और इस कार्यकाल वाले गहलोत में बहुत फर्क है। लगता है कि कांग्रेस पार्टी मुसलमानों से दूर भाग रही है और यह रवैया कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित होगा। उन्होंने कहा कि पूरा कार्यकाल बीतने के कगार पर ...

न्यूज़ीलैंड की पीएम जैसिंडा अर्डर्न के इस्तीफे से क्या हमारे राजनेता भी सबक सीखेंगे ?

Image
न्यूज़ीलैंड की पीएम जैसिंडा अर्डर्न के इस्तीफे से क्या हमारे राजनेता भी सबक सीखेंगे ? ************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। न्यूजीलैंड की युवा प्रधानमंत्री ने 19 जनवरी को इस्तीफे की घोषणा की तो यह खबर पूरे विश्व में चर्चित होने लगी। वो इसलिए कि न तो उनका अपने देश में कोई बड़ा विरोध हो रहा है और ना ही कोई राजनीतिक संकट है, उल्टा उनकी प्रसिद्धि अपने देश में पीक (शिखर) पर है। फिर भी उन्होंने इस्तीफा दे दिया, क्यों ? उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा के साथ कहा कि "मेरे पास न्यूजीलैंड के विकास में योगदान देने के लिए अब कुछ नहीं बचा है, अब पद पर रही तो देश का नुक़सान होगा, मैं जितना कर सकती थी किया, अब यह जिम्मेदारी कोई और सम्भाले।" यह बात अपने आप में बहुत बड़ी है, क्योंकि उन्होंने अपने छह साल के कार्यकाल में न्यूजीलैंड के लिए हर क्षेत्र में बहुत कुछ किया है और जनता उनके काम से खुश भी है। यह उनका दूसरा कार्यकाल है। इस वक्त उनकी उम्र करीब 42 साल है और वे 2017 में 37 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बनीं थीं। वे तब विश्व की सबसे छोटी उम्र की राष्ट्र प्रमुख बनी थीं। ...

न‌ई पीढ़ी बनाम संस्कार, सहयोग और सेवा

Image
  न‌ई पीढ़ी बनाम संस्कार, सहयोग और सेवा ******************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका) आधुनिकता की चकाचौंध और बढ़ती भौतिकवादी सोच से बहुत सी चीजें मानव छोड़ता जा रहा है। न‌ई पीढ़ी का अजीब हाल है। वो एक कटी पतंग बनती जा रही है। परिवार, रिश्ते-नाते सब महदूद (सीमित) होते जा रहे हैं, मफाद परस्ती बढ़ती जा रही है। ऐसे में हर इन्सान परेशान है, जिसके पास अथाह सम्पत्ति, रहने के लिए आलीशान बंगला और चलने के लिए लग्जरी गाड़ी है वो भी परेशान है और जिसके पास कुछ भी नहीं है, वो भी परेशान है। सब्र (संतोष) का तो मानो इंतकाल ही हो गया है। जितने बड़े लोग हैं उतने ही उनके परिवार क्रेश होते जा रहे हैं, जितने बड़े अफसर उतने ही ज्यादा वे अपनों से कटे हुए हैं। इन्सानी रिश्ता सोशल मीडिया तक महदूद होता जा रहा है, गुड मॉर्निंग, गुड नाईट, बधाई, शुभकामना, मुबारकबाद, नमन, दुआ ए मग्फिरत, भावभीनी श्रद्धांजलि जैसे शब्द सोशल मीडिया पर दिन रात इधर से उधर चलते रहते हैं। इंटरनेट व टेक्नोलॉजी ने सम्पर्क बढ़ा दिया, इसने पूरी दुनिया को मुट्ठी में कर दिया, लेकिन बदले में दिलों को भी सिकोड़ दिया है। हर आदमी आज यह क...

"राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी के झगड़े का किस्सा पायलट नहीं है बल्कि गहलोत और वसुंधरा का भ्रष्टाचार है"

Image
  किस्सा मुख्यमंत्री की कुर्सी का... ------------------------------- "राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी के झगड़े का किस्सा पायलट नहीं है बल्कि गहलोत और वसुंधरा का भ्रष्टाचार है" ************************* जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। इमरजेंसी के दौरान एक फिल्म बनी थी, "किस्सा कुर्सी का" बताया जाता है कि यह फिल्म तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी की तानाशाही को लेकर बनी थी, जिसके सम्पूर्ण निगेटिव (फिल्म रील) को संजय गांधी ने दिल्ली मंगाकर जलवा दिया था। लेकिन राजस्थान में किस्सा कुर्सी का एक अजीब फिल्म है, जिसके बिना बने भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तथा इनके निकटतम लोगों में लगातार चार साल से दहशत का माहौल है। वो इसलिए कि पिछले 24 साल से राजस्थान में बारी बारी से इन्हीं का राज है तथा सत्ता के दुरुपयोग से दोनों खेमों ने अकूत सम्पत्ति बनाई है। राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी का किस्सा आमतौर पर इतना ही समझा जाता है कि "सचिन पायलट मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं और अशोक गहलोत उन्हें बनने नहीं देना चाहते हैं।...

कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति ने पेश किया मुख्यमंत्री और मंत्रियों को मांग पत्र

Image
कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति ने पेश किया मुख्यमंत्री और मंत्रियों को मांग पत्र ------------------------------------------ कायमखानी ऐतिहासिक धरोहरों के नामकरण और जयपुर में नवाब क़ायम खां स्मारक बनाने सहित विभिन्न मांगें की ज्ञापन में शामिल *************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका) । कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति ने 13 जनवरी को यहां शासन सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में मुख्यमंत्री के ज्वाइंट सेक्रेटरी वरिष्ठ आर‌एएस अधिकारी शाहीन अली खान के जरिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कायमखानी क़ौम से सम्बंधित आठ बिन्दुओं का एक मांग पत्र पेश किया। इस मांग पत्र के जरिए मुख्यमंत्री से मांग की गई कि इन मांगों के सन्दर्भ में बजट घोषणा कर कायमखानी क़ौम को अनुगृहीत करें। इस मांग पत्र की एक प्रति झुंझुनूं विधायक एवं परिवहन मंत्री बृजेन्द्र ओला और उदयपुरवाटी विधायक एवं सैनिक कल्याण मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा को भी पेश की गई। वंशावली संरक्षण समिति का प्रतिनिधि मण्डल समिति अध्यक्ष कप्तान फजरू खां के नेतृत्व में शासन सचिवालय गया। इस प्रतिनिधि मण्डल में समिति ...

आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस व भाजपा की नीतियां एक जैसी हैं !

Image
आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस व भाजपा की नीतियां एक जैसी हैं ! ************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। हमारा देश एक लोकतांत्रिक व्यवस्था वाला देश है और एक स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए यह आवश्यक है कि उस राष्ट्र के सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के उत्थान के लिए सरकार कोई खास प्रयास करे। यानी पिछड़ों और प्रताड़ित लोगों के लिए सीटें आरक्षित करे। इसीलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान में आरक्षण की व्यवस्था कायम की। यह आरक्षण सामाजिक रूप से पिछड़े एवं अछूत समझे जाने वाले लोगों के लिए तय किया गया। जिसमें दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े तबकों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई। जिसे एससी, एसटी और ओबीसी के नाम की श्रेणियों में बांटा गया है, हालांकि ओबीसी आरक्षण आजादी के चार दशक बाद वी पी सिंह की जनता दल सरकार ने दिया था। वर्तमान भाजपा सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े हुए सामान्य वर्ग के लोगों को भी ईडब्ल्यूएस श्रेणी बनाकर 10 प्रतिशत आरक्षण दे दिया है, यानी वर्तमान में देश की 95 प्रतिशत से अधिक आबादी आरक्षण के दायरे में है। आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था पर कई वर्षो...

दारूल उलूम गुलशन ए खदीजतुल कुबरा आवासीय बालिका मदरसा बाड़मेर

Image
दारूल उलूम गुलशन ए खदीजतुल कुबरा आवासीय बालिका मदरसा बाड़मेर *********************** बाड़मेर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। तालीम को फरोग देने और खासतौर पर बच्चियों को तालीम देने की बातें हर सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक प्रोग्राम में सुनने को मिलती हैं। आज हर गांव कस्बे में तालीमी इदारे खुले हुए हैं, जो तालीम देने का काम अपने अपने इलाके में कर रहे हैं। इन्हीं तालीमी इदारों में एक थार के रेगिस्तान के कदीमी शहर बाड़मेर में भी मौजूद है, जो दीनी व दुनियावी दोनों तालीम दे रहा है और वो भी बेटियों को।  इस इदारे का नाम है दारूल उलूम गुलशन ए खदीजतुल कुबरा आवासीय बालिका मदरसा बाड़मेर। यहां बच्चियों को बेहतरीन तालीम दी जाती है। यहां तालीमी खिदमत देने वाले और तमाम इंतजाम देखने वाले इस इदारे के नाजिम ए आला मौलाना मीर मोहम्मद अकबरी ने इक़रा पत्रिका को बताया कि इस वक्त इस इदारे में 126 बच्चियां मदरसे में रहकर पढ़ाई कर रही हैं और यहां कुल 175 बच्चियां पढ़ रही हैं। आवासीय तौर पर यहां रहकर तालीम लेने वाली सभी 126 बच्चियों का ख़र्चा इसी इदारे की जानिब से होता है। इन सभी बच्चियों का रहना, खाना, पढ़ना सब ...

राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जीते बिना 2024 जीतना कांग्रेस के लिए असम्भव होगा

Image
राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जीते बिना 2024 जीतना कांग्रेस के लिए असम्भव होगा ------------------------------------ और राजस्थान में अशोक गहलोत के रहते करारी हार तय है, पिछले 20 साल के विधानसभा और लोकसभा चुनाव इस दावे के गवाह हैं। ************************ जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राहुल गांधी कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जो कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक की पैदल भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हुए हैं। यह यात्रा निकालना उनका बहुत ही सराहनीय फैसला है। उनकी इस यात्रा से कांग्रेस की बासी कढ़ी में उबाल आ चुका है। जो मायूसी कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में पिछले आठ साल से दिलो दिमाग में घर कर चुकी थी, वो इस यात्रा से कम हुई है और बेहतर तो यह हो कि लोकसभा चुनाव 2024 तक यह यात्रा जारी रहे और उन सभी लोकसभा क्षेत्रों में भी जाए, जहां अभी तक यह यात्रा नहीं पहुंची है। कांग्रेस के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव जीतना बहुत जरूरी है और यह तभी सम्भव है जब विपक्ष का मजबूत गठबंधन हो और कांग्रेस के घर में ढंग से भारा-झाड़ी (साफ सफाई) हो, यानी गैर जरूरी और कुर्सी चिपकू नेताओं को पदों से हटाकर...