त्यौहार : ईद उल अज़हा और रक्षाबंधन
त्यौहार : ईद उल अज़हा और रक्षाबंधन ****************************** जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। त्यौहार हर सभ्यता व संस्कृति में मनाए जाते हैं। दुनिया के हर कौने में त्यौहार मनाने का रिवाज (परम्परा) है। हर त्यौहार की अपनी अहमियत और एक सन्देश होता है। त्यौहार शान्ति, भाईचारे, त्याग, मान-सम्मान, संस्कार और सहयोग का सन्देश देते हैं। कुछ त्यौहार खुदाई (ईश्वरीय) हुक्म से मनाए जाते हैं, तो कुछ किसी महापुरुष रूपी राजा की विजय, राज तिलक आदि की खुशी में मनाए जाते हैं। कुछ त्यौहार किसी पैगम्बर, वली, पीर, फकीर, सन्त आदि के जन्म दिन या मृत्यु दिन के दिन की याद में मनाए जाते हैं। लेकिन आधुनिकता की चकाचौंध और परम्पराओं से दूर भागती नई पीढ़ी में त्यौहारों की खुशी और सन्देश की अहमियत घट रही है। जो एक सभ्य समाज के लिए शुभ संकेत नहीं है। त्यौहारों में एक चीज़ और है, किसी न किसी चीज़ की खरीदारी करनी पड़ती है, एक दूसरे को कोई तोहफा देना पड़ता है। इसलिए ग़रीब आदमी के लिए त्यौहार एक परेशानी भी बन जाते हैं। वो न अपने बच्चों को अच्छे और नए कपड़े दिलवा सकता है और ना ही घर पर आई बहन-बेटी को कोई महंगा तोहफा (साड़ी,...