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Showing posts from June, 2022

हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर नफ़रत कब तक ?

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हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर नफ़रत कब तक ? ******************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। कहने को भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और विश्व की सबसे ज्यादा युवा शक्ति भारत में है। प्राकृतिक संसाधनों की भी कोई कमी नहीं है, भू भाग भी काफी विशाल है। इन सबसे बड़ी और ताकतवर चीज़ कोई भारत में है, तो वो गंगा जमुनी तहजीब है, यानी मिलीजुली संस्कृति। लेकिन अब यह सबसे बड़ी ताक़त तेजी से कमजोर हो रही है। हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की दरार को एक सोची समझी साजिश के तहत पूरी ताक़त से चौड़ा किया जा है। देश की नई पीढ़ी को अच्छी शिक्षा और रोजगार की जरूरत है, उसे धार्मिक कट्टरता की अफीम पिलाई जा रही है। नई पीढ़ी सोशल मीडिया के जरिए पिलाई इस अफीम से अपाहिज होती जा रही है, उसकी सोचने समझने की शक्ति पर पर्दा डालकर गुमराह किया जा रहा है। कहने को हम यह भी कहते हैं कि हमारे देश के सबसे बड़े दुश्मन चीन और पाकिस्तान हैं। यह बात पूरी तरह से से सही भी है। लेकिन हमारा मानना है कि हमारे देश के चीन और पाकिस्तान से बड़े दुश्मन हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण करने वाले लोग हैं, चाहे वे कोई भी हों। जब तक इनकी ...

14 जून-नवाब क़ायम ख़ान डे और ददरेवा का नवाब क़ायम ख़ान मेमोरियल शहीद स्मारक

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14 जून-नवाब क़ायम ख़ान डे और ददरेवा का नवाब क़ायम ख़ान मेमोरियल शहीद स्मारक ********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 14 जून को हर साल कायमखानी क़ौम दुनिया में जहाँ जहाँ आबाद है, नवाब क़ायम ख़ान डे के तौर पर मनाती है। इस दिन कायमखानी क़ौम के बानी (संस्थापक) प्रथम पुरूष नवाब क़ायम ख़ान साहब शहीद हुए थे। उनकी जन्म स्थली ददरेवा (जिला चूरू) में नवाब क़ायम ख़ान मेमोरियल शहीद स्मारक (निशान ए क़ायम) बना हुआ है। 14 जून और ददरेवा का यह स्मारक कायमखानी क़ौम में आज बहुत मशहूर हो चुके हैं। लेकिन यह मशहूर कैसे हुए ? किन लोगों ने यह काम करने की शुरुआत की ? किन लोगों ने इन कामों को करने का सपना देखा ? किनके अथक प्रयासों व कड़ी मेहनत से आज यह काम क़ौम के सामने हैं, जिन पर पूरी कायमखानी क़ौम को फख्र है। उन लोगों को याद करना हमारे लिए बहुत जरूरी है, जिनमें से कुछ इस दुनिया से रुख़सत भी हो गए हैं। बाबू हिदायत खां जी इस्माईलखानी चूरू : एक ऐसी शख्सियत का नाम है, जिन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी कौम के लिए एक तरह से वक्फ कर दी थी। 14 जून को नवाब क़ायम ख़ान डे मनाने की शुरुआत सबसे पह...

सीएम गहलोत ने आनन-फानन में आरएएस अधिकारी अकील अहमद ख़ान का ट्रांसफर 550 किलोमीटर दूर क्यों किया ?

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सीएम गहलोत ने आनन-फानन में आरएएस अधिकारी अकील अहमद ख़ान का ट्रांसफर 550 किलोमीटर दूर क्यों किया ? -------------------------------------------------- दिन रात गहलोत और कांग्रेस को पानी पी पीकर खरी खौटी कहने वाले आरएसएस विचारधारा के अधिकारियों को जयपुर के विभिन्न दफ्तरों से हटाने या उन्हें बांसवाड़ा भेजने की हिम्मत क्या मुख्यमंत्री करेंगे, जो मलाईदार पदों पर बरसों से राजधानी में जमे हुए हैं ? --------------------------------------------------- सीईओ वक्फ बोर्ड से सीधे बांसवाड़ा बर्फ में लगाने वाले पद पर अकील अहमद ख़ान का ट्रांसफर किया, लेकिन अल्पसंख्यक मन्त्री, वक्फ बोर्ड चेयरमैन और मुस्लिम विधायकों व कांग्रेसी मुस्लिम नेताओं की खामोशी बहुत कुछ साबित करती है। मुस्लिम समुदाय में इस ट्रांसफर को लेकर गहलोत और कांग्रेसी मुस्लिम नेताओं के प्रति कड़ा रोष है, जो विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है। ********************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। तारीख 31 मई 2022, इस दिन राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने आनन-फानन में वक्फ बोर्ड सीईओ अकील अहमद खान का ट्रांसफर...

नवाब क़ायम ख़ान साहब का 603वां शहीद दिवस (नवाब क़ायम ख़ान डे) 14 जून को

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नवाब क़ायम ख़ान साहब का 603वां शहीद दिवस (नवाब क़ायम ख़ान डे) 14 जून को ---------------------------------------------------- राजस्थान कायमखानी महासभा (कायमखानी क़ौम की विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति) की क़ौम से गुज़ारिश ********************************* "कायमखानी क़ौम" चौहान वंश का एक प्रसिद्ध ख़ानदान है, जिसकी उत्पत्ति नवाब क़ायम ख़ान साहब के नाम पर हुई थी। उनके और उनके दो भाइयों नवाब जैनुद्दीन ख़ान साहब और नवाब जबरूद्दीन ख़ान (जुबैरूद्दीन ख़ान) साहब की औलाद को कायमखानी कहा जाता है, यह एक ऐतिहासिक तथ्य है। बहादुर, जांबाज, वतनपरस्त, वफादार और ईमानदार कायमखानी क़ौम के बानी (प्रथम पुरुष) दादा नवाब क़ायम ख़ान साहब (रहमतुल्लाह अलैह) के 603वें यौम ए शहादत (शहीद दिवस) को मनाने के लिए राजस्थान कायमखानी महासभा (कायमखानी क़ौम की विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति) क़ौम से कुछ ख़ास गुज़ारिश कर रही है। जो निम्नलिखित हैं:- (1) पिछले पांच साल में हम "नवाब क़ायम ख़ान डे" को बड़े कार्यक्रम के तौर पर नहीं मना पाए, क्योंकि तीन साल तो 14 जून रमजान में आया और 2020 व 21 में कोरोना महा...

मुसलमानों को करने योग्य जरूरी काम ?

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मुसलमानों को करने योग्य जरूरी काम ? ******************************* जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। मुल्क के हालात तेजी से बदल रहे हैं, साम्प्रदायिक ताकतें अपने नफ़रती एजेन्डे को तेजी से फैला रही हैं। बेरोजगारी, डूबते काम-धन्धे व कारोबार और आवारा सांड की तरह ताण्डव कर रही महंगाई के कारण 140 करोड़ भारतीयों में से अधिकतर यानी 95 फीसदी से ज्यादा लोग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। सत्ता के कर्णधारों को जनता की इस पीड़ा से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें तो सिर्फ सत्ता चाहिए, जो नफ़रत को हवा देकर व हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण से आसानी से मिल रही है, इस एजेन्डे पर वे अब पूरी ताक़त से और आगे बढ रहे हैं। "भारत" जिसे हम हमारा वतन कहते हैं, मादरे वतन कहते हैं, वतने अजीज कहते हैं, जिसको आज़ाद करवाने, यहाँ लोकतांत्रिक व संवैधानिक व्यवस्था स्थापित करने और ज़ुल्म व नाइन्साफी से सिसकती इन्सानियत के आंसू पौंछने में हमारे पुरखों का अहम योगदान रहा है। हमारे पुरखों की कुर्बानियां, उनकी कोशिश, उनके त्याग व तपस्या का इतिहास गवाह है। इस मिट्टी का कण कण हमारे पुरखों ख्वाज़ा मुईनुद्दीन चिश्ती ग़रीब...