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Showing posts from November, 2022

ख़ुदा के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं...

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ख़ुदा के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं... -------------------------------- सीआई फूल मोहम्मद हत्याकांड में डीएसपी सहित 30 लोगों को हुई उम्र कैद की सज़ा -------------------------------- हत्याकांड के बाद मरहूम जी ख़ान साहब के नेतृत्व में प्रदेश में निकाली थी "शहीद सीआई फूल मोहम्मद न्याय यात्रा" ********************** जयपुर/सवाई माधोपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। एक कहावत है कि ख़ुदा के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं। अगर प्रयास जारी रहे और तथ्यों के साथ मजबूती से अपना पक्ष रखा जाए, तो एक दिन न्याय जरूर मिलता है। यही कहावत चरितार्थ हुई शहीद सीआई फूल मोहम्मद केस में। करीब 11 साल बाद माननीय न्यायालय ने 18 नवम्बर को तत्कालीन डीएसपी सहित 30 लोगों को उम्र कैद की सज़ा दी है। वहीं 49 लोगों के खिलाफ सबूत नहीं मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया। बात 2011 की है, राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के मानटाउन थाना क्षेत्र के सूरवाल गांव में 17 मार्च को बुजुर्ग महिला दाखा देवी के हत्यारों को गिरफ्तार करने और उनके परिजनों को मुआवजे की मांग को लेकर लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान राजेश मीणा व बनवारी लाल म...

गुजरात विधानसभा चुनाव

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गुजरात विधानसभा चुनाव ------------------------------ क्या कांग्रेस यह बताने का कष्ट करेगी कि वो मिश्रा कमिशन और अल्पसंख्यक आरक्षण पर खामोश क्यों है ? ******************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखने वाली कांग्रेस पार्टी एक मुद्दे पर पूरी तरह से खामोश है और वो मुद्दा है अल्पसंख्यक आरक्षण का। केन्द्र सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आनन फानन में जनवरी 2019 में सामान्य वर्ग के पिछड़ों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने के लिए संविधान में संशोधन किया और फिर आर्थिक आधार के इस ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लागू कर दिया। इस पर कई सवाल उठे, जो आज भी उठ रहे हैं। लेकिन 7 नवम्बर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने इस आरक्षण पर मुहर लगा दी है। एकाध पार्टी को छोड़कर कमोबेश सभी पार्टियां इस आरक्षण के समर्थन में हैं, कुछ दिखावे के लिए सिर्फ किन्तु परन्तु कर रही हैं, लेकिन खुलकर वे भी विरोध में नहीं हैं। देश की दूसरी बड़ी पार्टी कांग्रेस भी इस आरक्षण के समर्थन में है। लेकिन कांग्रेस सहित बाकी विपक्षी पार्टियां अल्पसंख्यक आरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह से ख़ामोश हैं। वजह साफ है कि...

दीपावली की पूर्व संध्या पर इस बार भी शहीद स्मारक पर जलाया "एक दीया सद्भाव का"

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दीपावली की पूर्व संध्या पर इस बार भी शहीद स्मारक पर जलाया "एक दीया सद्भाव का" ----------------------------------------- समाजवादी, गांधीवादी, अम्बेडकरवादी व मार्क्सवादी कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने दिया गंगा जमुनी तहज़ीब को मज़बूत करने का सन्देश ************************* जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। यहाँ गवर्नमेंट हाॅस्टल पुलिस कमिश्नर ऑफिस के सामने स्थित शहीद स्मारक पर दीपावली की पूर्व संध्या पर 23 अक्टूबर को "एक दीया सद्भाव का" जलाया गया। यह कार्यक्रम इकरा पत्रिका के सम्पादक एम फारूक़ ख़ान की पहल पर वर्ष 2019 में शुरू किया गया था। जिसमें गंगा जमुनी तहजीब में विश्वास रखने वाले सभी साथी और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। विशेष तौर पर समाजवादी, गांधीवादी, अम्बेडकरवादी व मार्क्सवादी कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने एकजुट होकर गंगा जमुनी तहज़ीब को मज़बूत करने का सन्देश दिया। इस बार यह चौथा कार्यक्रम था। एक दीया सद्भाव का कार्यक्रम में सूर्यास्त होते ही सभी ने मिलकर दीये जलाए और एक दूसरे को दीपावली की बधाई दी तथा साम्प्रदायिक सद्भाव (गंगा जमुनी तहजीब) को...

"जुर्म 151 का और सज़ा 302 की ?"

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"जुर्म 151 का और सज़ा 302 की ?" --------------------------------------- गहलोत राज में एक उर्दू टीचर की शहादत का बेसब्री व बेशर्मी से इन्तज़ार करते सुलतानुल वक्त और दलालुल वक्त ?? ************************** जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान में गांधी के अनुयायी अशोक गहलोत का शासन है, जो खुद को गांधीवादी और लोकतन्त्रवादी मानते हैं। गांधीवाद और लोकतंत्र की रक्षा के लिए वे हर मंच से अपने विचारों का बखान करते हैं। जो अच्छी बात है, लेकिन अमली तौर पर उनके शासन में न गांधीवाद है और ना ही लोकतंत्र। हां, गांधीवाद व लोकतंत्र का स्वांग जरूर है। आपको लग रहा होगा कि उक्त जुमले बहुत कड़वे हैं, लेकिन मुद्दा ही ऐसा है, जो कड़वे जुमलों को कलमबंद करने पर मजबूर कर रहा है। हो सकता है कि आगे इससे भी कड़वे जुमले इस लेख में पढ़ने को मिलें, इसलिए दिल थामकर इस पूरे लेख को पढ़िए और फिर खुद की अंतरात्मा से पूछिए कि जुमले कड़वे हैं या सच्चाई की दर्दनाक दास्तां हैं। मुद्दा यह है कि राजस्थान में एक उर्दू शिक्षक ने गुनाह दफा 151 का किया है और उसे सज़ा दफा 302 में दी जा रही है और हैरानी इस बात की है...

राजस्थान विधानसभा चुनाव-2023 : कांग्रेस और भाजपा के जूतम पैजार से किस करवट बैठेगा सियासी ऊंट ?

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राजस्थान विधानसभा चुनाव-2023 : कांग्रेस और भाजपा के जूतम पैजार से किस करवट बैठेगा सियासी ऊंट ? ------------------------------------- जिस तरह गहलोत के बिना कांग्रेस अधूरी है, वैसे ही वसुंधरा के बिना भाजपा का भी कुछ नहीं बंटेगा   ------------------------------------- समाजवादी विचारधारा की पार्टियों का विलय कर देशभर में भाजपा को चुनौती देने से भी बदलेगा समीकरण  ************************ जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। एक साल बाद यानी नवम्बर-दिसम्बर 2023 में देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में विधानसभा चुनाव होंगे। 1993 से लगातार यहां यह ट्रेंड रहा है कि एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस। हर चुनाव में छोटे दलों ने समीकरण बनाने व बिगाड़ने का प्रयास किया है, लेकिन उन्हें कोई विशेष सफलता नहीं मिली है। अब अगले चुनाव में प्रदेश का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा, इसकी चर्चा सियासी गलियारों में तेज हो गई है। अगले चुनाव में कांग्रेस जहां सरकार को रिपीट करने का दावा कर रही है, वहीं भाजपा का दावा है कि वो कांग्रेस को 2013 से भी बुरी तरह हराकर सरकार बनाएगी, तब कांग्रेस को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत क...