चित्तौड़गढ़ अन्जुमन स्कूल में किया मुस्लिम शिक्षकों का सम्मान
चित्तौड़गढ़ अन्जुमन स्कूल में किया मुस्लिम शिक्षकों का सम्मान
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समाज व देश के उत्थान में शिक्षकों के योगदान और शिक्षा की अहमियत पर वक्ताओं ने दिया मोटिवेशन
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चित्तौड़गढ़ (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। स्वाभिमान की पहचान मेवाड़ धरा के ऐतिहासिक शहर चित्तौड़गढ़ में अन्जुमन मिल्लते इस्लामिया संस्थान एवं राजस्थान कायमखानी महासभा के संयुक्त तत्वावधान में यहां की अंजुमन स्कूल में 30 सितंबर मंगलवार को प्रथम मुस्लिम शिक्षक सम्मान समारोह एवं मोटिवेशन सेमिनार का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जाने वाले शिक्षाविद डॉक्टर वसीम खान चेयरमैन रविन्द्र नाथ टैगोर और विवेकानन्द ग्रुप ऑफ कॉलेज ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षाविद प्रोफेसर मुहम्मद हसन ने कार्यक्रम को सुशोभित किया। अतिविशिष्ट अतिथि के तौर पर राजस्थान यूनिवर्सिटी की रिटायर्ड एसोसिएट प्रोफेसर नसीम काजी तथा विशिष्ट अतिथि के तौर पर राजस्थान कायमखानी महासभा के चित्तौड़गढ़ जिलाध्यक्ष अल्लानूर खां रिटायर्ड लेखाधिकारी, इकरा पत्रिका के सम्पादक फारूक खान आदि शरीक हुए।
कार्यक्रम में चित्तौड़गढ़ तहसील व शहर के 116 मुस्लिम शिक्षकों का सम्मान किया गया। यह चित्तौड़गढ़ के इतिहास में प्रथम मुस्लिम शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम को प्रोफेसर मुहम्मद हसन, डॉक्टर वसीम खान, प्रोफेसर नसीम काजी, पत्रकार फारूक खान, रिटायर्ड लेखाधिकारी अल्लानूर खां, इमरान कायमखानी भीलवाड़ा आदि ने सम्बोधित किया तथा शिक्षकों और बच्चों को मोटिवेट किया। इमरान कायमखानी ने अंजुमन स्कूल में 51 हजार रुपए की डोनेशन भी दी।
समारोह को मुफ्ती उस्मान अशरफी अल अजहरी ने पवित्र क़ुरआन की तिलावत से शुरू किया। अन्जुमन के सदर इकबाल गुलशन, सेक्रेटरी एडवोकेट इरशाद अली, संरक्षक मोहम्मद खां कायमखानी और अन्य पदाधिकारियों ने माल्यार्पण, मोमेंटो आदि से सभी अतिथियों का स्वागत किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। मंच संचालन बहुत ही खूबसूरत अंदाज में कार्यक्रम प्रबंधक गुलाम रसूल खान और नाजिश परवीन ने किया।
स्वागत भाषण अन्जुमन के सदर इकबाल गुलशन ने दिया तथा कार्यक्रम संयोजक एवं भामाशाह प्रेरक मुबारक खान देशवाली ने अपने सम्बोधन में शिक्षकों और भामाशाहों को समाज विकास हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने और स्कूल को बुलंदियों तक पहुंचाने में जी-जान से जुटे अन्जुमन स्कूल के चेयरमैन अहसान अशरफी "गुरूजी" के स्कूल के प्रति समर्पण भाव से किए जा रहे प्रयासों की सभी ने सराहना की। गुरूजी ने भविष्य की कार्ययोजना और अब तक का प्रगति प्रतिवेदन समारोह में पेश किया।
समारोह में राजस्थान कायमखानी महासभा के चित्तौड़गढ़ जिलाध्यक्ष अल्लानूर खां रिटायर्ड लेखाधिकारी ने सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों में राजस्थान कायमखानी महासभा की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने आजदी से पहले स्थापित श्री महाराजा उम्मेद कायमखानी छात्रावास जोधपुर से लेकर आज चित्तौड़गढ़ की अन्जुमन स्कूल में कायमखानी क़ौम के योगदान को बताया तथा समाज सेवा के लिए सभी को प्रेरित किया।
इकरा पत्रिका के सम्पादक फारूक खान ने समारोह आयोजित करने की सोच और शिक्षकों के किए जा रहे सम्मान के लिए आयोजनकर्ताओं को बधाई दी तथा प्रोफेसर मुहम्मद हसन, प्रोफेसर नसीम काजी और डॉक्टर वसीम खान के जीवन संघर्ष एवं शिक्षा के प्रति इनके लगाव और शिक्षा के माध्यम से इस मुकाम तक पहुंचने की पूरी दास्तां बताई तथा उपस्थित शिक्षकों और बच्चों से इन महान हस्तियों से सबक हासिल कर देश व समाज को बुलंदियों तक पहुंचाने की बात कही।
डॉक्टर वसीम खान ने बहुत ही प्रेरणादायक और जोशिला भाषण देते हुए सभी को मोटिवेट किया। उन्होंने बताया कि मेरे व मेरे परिवार के पास कुछ नहीं था, मैं एक गरीब परिवार से हूं। लेकिन पढ़ने और पढ़कर पढ़ाने व देश समाज की सेवा करने के जज्बे ने मुझे गांव से उदयपुर यूनिवर्सिटी तक पहुंचाया। आज आपके सहयोग और मेरी जद्दोजहद से मैं 17-18 स्कूल व कॉलेज संचालित कर रहा हूं। शीघ्र ही हमारी यूनिवर्सिटी भी होगी, यह सब शिक्षा और संघर्ष के जरिए खुदा ने दिया है।
उन्होंने कहा कि आज हमारे स्कूल और कॉलेजों में दस हजार छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने उन दिनों को याद कर तत्कालीन शिक्षा मंत्री सीपी जोशी को धन्यवाद दिया कि जब 2002 में वे राजस्थान के शिक्षा मंत्री थे और मैंने दिल में ठान लिया था कि मैं एक कॉलेज शुरू करूंगा, लेकिन कॉलेज खोलने के लिए सरकार ने 25 लाख रूपए की एफडी शर्त लगा रखी थी और मेरे पास 25 हजार रूपए भी नहीं थे।
सीपी जोशी साहब हमारे प्रोफेसर रहे थे, मैं उनके पास गया और सारी मजबूरी बताई, उन्होंने कहा तू तो कॉलेज की फाइल लगा, सब हो जाएगा। जोशी साहब ने मेरे लिए उस शर्त में छूट दी और मैं कॉलेज शुरू कर सका, यह उनका बहुत बड़ा योगदान था। उन्होंने कहा कि तब मुझे इस्माईल साहब ने पांच लाख रूपए दिए थे, जो आज यहां शरीक हैं, मैं इनका भी शुक्रगुजार हूं।
प्रोफेसर नसीम काजी ने महिला शिक्षकों को विशेष तौर पर प्रोत्साहित किया और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी तथा बच्चों का सर्वांगीण विकास कैसे हो, उसके बारे में बारीकी से बताया। उन्होंने खुद की पढ़ाई, पढ़ाई छोड़ने और शादी के सात साल बाद दोबारा पढ़ाई शुरू करने, फिलोसॉफी में पीएचडी करने और महारानी कॉलेज जयपुर व राजस्थान यूनिवर्सिटी में पढ़ाने की जीवन यात्रा के बारे में बताया।
प्रोफेसर मुहम्मद हसन जिन्होंने नेरोबी जैसी विदेशी यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाया है और साथ ही राजस्थान की ऑफिसर ट्रेनिंग स्कूल (ओटीएस) में भी अधिकारियों को पढ़ाया है, उन्होंने समारोह की बहुत सराहना की। अपने जीवन संघर्ष के बारे में बताते हुए यहां तक पहुंचने में अपनी मां और शिक्षकों को उन्होंने विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि मेरे वालिद साहब का इन्तकाल तीन महीने की उम्र में हो गया था, लेकिन मेरी मां ने मुझे किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी।
उन्होंने कहा कि मेरी मां ने मुझे फ्रीडम दिया, सुविधाएं दी, जिससे मैं पढ़ सका और मेरे शिक्षकों ने मुझे पंख लगाए, जिससे मैं तालीम के मैदान में मनमर्जी की उड़ान भर सका। उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षक की बहुत बड़ी अहमियत है और इस बात को यहां सम्मानित होने वाले हर शिक्षक को हर वक्त याद रखना चाहिए, जिन बच्चों को आप पढ़ा रहे हैं, वे कच्ची मिट्टी हैं, जिनसे खूबसूरत मजबूत मटका बनाने की जिम्मेदारी आपकी है।
समारोह की समाप्ति पश्चात सभी ने सामूहिक भोजन किया, एक दूसरे से मुलाक़ात कर आपस में जान पहचान की और इस खूबसूरत व कामयाब कार्यक्रम की जमकर प्रशंसा की। इसके बाद मुस्लिम छात्र-छात्राओं एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों से कम्प्यूटर लैब में मुख्य अतिथि प्रोफेसर मुहम्मद हसन और अन्य अतिथियों ने मुलाकात की तथा तालीम और जीवन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
(02/10/2025)
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