कायमखानी क़ौम के अधिकारियों ने कोरोना महामारी में दिखाई अपनी लाजवाब काबिलियत

कायमखानी क़ौम के अधिकारियों ने कोरोना महामारी में दिखाई अपनी लाजवाब काबिलियत
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सिविल, पुलिस और मेडिकल अफसर इन कोरोना योद्धा कायमखानी अधिकारियों और कर्मचारियों की चारों ओर हो रही है प्रशंसा
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जयपुर (टीम इकरा पत्रिका)। शौर्य, साहस, वतन प्रेम, ईमानदारी और वफादारी की मिसाल कायमखानी कौम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कोरोना महामारी में कोरोना योद्धा बनकर जिस अन्दाज़ में कोरोना को चारों खाने चित किया है या पूरी तरह से नियंत्रित किया है, उसकी प्रशंसा पूरे प्रदेश में हो रही है। कुछ अधिकारियों की तो खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उच्चाधिकारी भी तारीफ़ कर चुके हैं तथा कुछ को मुख्यमंत्री एवं उच्चाधिकारियों ने कोरोना हाॅट स्पाॅट में स्पेशल ड्यूटी लगाकर इस महामारी को हराने के लिए फ्रंट लाइन पर लगाया है। जिसका नतीजा यह रहा कि इन इलाकों में या तो कोरोना खत्म हो गया या वो पूरी तरह से नियंत्रित हो गया है।

कायमखानी क़ौम एक राजवंशी क़ौम है और इसका पुश्तैनी पेशा राज कार्य, सैन्य सेवा व पुलिस सेवा है। पृथ्वीराज जी चौहान और गोगाजी चौहान के वंशज कायमखानी नवाबों ने करीब 350 साल तक विभिन्न रियासतों और ठिकानों पर राज किया है। भारतीय सेना में विभिन्न युद्धों एवं सैन्य ऑपरेशनों में कायमखानी कौम के दो सौ से अधिक वीर सैनिक शहीद हुए हैं। इसके अलावा छह कायमखानी सैनिकों को वीर चक्र और दो को शौर्य चक्र भी मिला है। साथ ही कई सैनिकों को सेना मेडल एवं दूसरे अवार्ड भी मिले हैं। इन सभी शहीदों के नाम ददरेवा (चूरू) स्थित दादा साहेब नवाब कायम ख़ान स्मारक पर लिखे हुए हैं। इनमें से काफी सैनिकों के नाम इन्डिया गेट, वार मेमोरियल दिल्ली और जयपुर के शहीद स्मारक पर भी लिखे हुए हैं।



कायमखानी अफसरों को सिविल, फौज, पुलिस और मेडिकल में जब भी अग्रिम पंक्ति में काम करने का मौका मिला है, उन्होंने अपनी योग्यता और क्षमता का लाजवाब प्रदर्शन किया है। जिसकी कई मिसाल हैं और इनमें एक प्रमुख मिसाल 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की है। इस युद्ध में विपरीत परिस्थितियों में दुश्मन से घिर कर कैप्टन मोहम्मद अय्यूब खान साहब ने अपनी छोटी सी टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए पाकिस्तान के कई टैंकों को अपने निशाने पर लेकर पाकिस्तान को करारी मात दी थी। तब पाकिस्तान में जनरल अय्यूब का सैन्य शासन था और भारतीय अखबारों ने कैप्टन अय्यूब साहब की वीरता को "भारतीय अय्यूब और इण्डियन अय्यूब" जैसे शब्दों के साथ शीर्षक बनाकर फ्रंट पेज पर कवरेज़ दी थी। उन्हें इस बेमिसाल वीरता के लिए भारत सरकार ने "वीर चक्र" जैसे सम्मान से सम्मानित किया था।

मरहूम कैप्टन अय्यूब साहब दो बार झुन्झुनूं से लोकसभा सांसद और केन्द्रीय मन्त्री भी रहे थे। उनका प्रधानमंत्री राजीव गांधी बहुत सम्मान करते थे, वे कभी भी उनका नाम लेने की बजाए "वीर चक्रा" कह कर आदर से उन्हें सम्बोधित करते थे। ऐसे ही कायमखानी विधायक भी अपने पार्टी नेतृत्व के नजदीकी रहे हैं और कायमखानी विधायकों का हमेशा उनके नेताओं ने बहुत सम्मान किया है। जिसकी वजह एक तो कायमखानी क़ौम पूरी तरह से गंगा जमुनी तहजीब की पैरोकार है और दूसरी वजह जब भी किसी कायमखानी को किसी ओहदे पर काम करने का मौका मिलता है तो वो पूरी ईमानदारी व वफादारी से उसे अन्जाम देता है।



बहरहाल यही वजह है कि राजस्थान सरकार ने कमोबेश सभी कायमखानी अधिकारियों को कोरोना महामारी के खात्मे के लिए फ्रंट लाइन वाॅरियर के तौर पर मैदान में उतार रखा है और जहाँ यह तैनात हैं वहाँ बहुत ही सराहनीय परिणाम सामने आ रहे हैं। कायमखानी कोरोना योद्धाओं में सर्व प्रथम हनुमानगढ जिला कलेक्टर आईएएस जाकिर हुसैन का नाम लिया जा सकता है, जहाँ उनकी काबिलियत और टीम वर्क से कोरोना पूरी तरह से नियंत्रित हो चुका है, यहाँ चन्द मरीज मिले थे, वो भी ठीक हो गए हैं। जाकिर हुसैन झुन्झुनूं जिले के नूआं गांव के निवासी हैं और मरहूम आईजी लियाकत साहब के छोटे भाई हैं। इनके बड़े भाई अशफाक हुसैन भी आईएएस और दौसा कलेक्टर रहे हैं।

अगली कड़ी में आईपीएस अरशद अली का नाम प्रमुख है, जिन्हें मुख्यमंत्री ने अपने गृह नगर जोधपुर में कोरोना से लड़ने के लिए तैनात किया है। जो कोरोना हाॅट स्पाॅट बन चुका है। अरशद अली पहले भी जोधपुर में अपनी सेवा अन्जाम दे चुके हैं, इसलिए इस शहर के चप्पे-चप्पे से वे पूरी तरह से वाकिफ हैं। वे एक काबिल पुलिस अधिकारी हैं और उन्हें जहाँ भी काम करने का मौका मिला, अपनी ड्यूटी को बखूबी निभाया है। वे राजस्थान कायमखानी महासभा के पूर्व संयोजक और रिटायर्ड अधिकारी जी खान के दामाद हैं और उनकी पत्नी जरीना खान सीकर जिले की बेसवा ग्राम पंचायत की सरपंच हैं। जरीना खान ने अपनी पंचायत में लाजवाब विकास कार्य करवाए हैं।


कोरोना योद्धा के तौर पर मैदान में तैनात तीसरे महत्वपूर्ण कायमखानी अधिकारी आरएएस सत्तार खान हैं, जो वर्तमान में एडिशनल डिवीजन कमिश्नर अजमेर के पद पर कार्यरत हैं और सरकार ने उन्हें विशेष रूप से नागौर जिले कोरोना प्रभावित क्षेत्रों में लगा रखा है। यहाँ का बासनी कस्बा विशेष रूप से कोरोना से प्रभावित है, जहाँ सत्तार खान के प्रयास एवं सूझ बूझ से कोरोना पूरी तरह से नियन्त्रित हुआ है और बासनी माॅडल की खुद मुख्यमंत्री ने प्रशंसा की है। डिवीजन कमिश्नर एरिया के तौर पर भीलवाड़ा और टोंक भी अजमेर डिवीजन के अन्तर्गत ही आते हैं और इन दोनों जिलों में भी कोरोना के खिलाफ़ जो प्रभावी जंग लड़ी गई, उसमें सत्तार खान का भी विशेष योगदान रहा है।

सत्तार खान जिस भी पोस्ट पर रहे हैं, वहाँ बहुत ही सराहनीय अन्दाज़ में अपनी सेवा अन्जाम दी है। वे अल्पसंख्यक मामलात विभाग में रहे, जहाँ विभिन्न योजनाओं और मदरसा पैराटीचर्स की भर्ती का काम उन्हीं के टीम वर्क और काबिलियत से सम्पन्न हुआ था। वे परिवहन विभाग और राजस्थान वक्फ बोर्ड में भी रहे हैं। वक्फ बोर्ड में सीईओ रहते हुए किराया पाॅलिसी उन्होंने ही तैयार की थी और बोर्ड के खर्चों को भी पूरी तरह से नियंत्रित किया था। वे राजस्थान पाठ्य पुस्तक मण्डल में भी रहे हैं और कायमखानी वीर चक्र प्राप्त सैनिकों के नाम पाठ्य पुस्तकों में जुड़वाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। सत्तार खान ने एडीएम चूरू रहते हुए कायमखानी छात्रावास के लिए तीन बीघा भूमि सरकार से आवंटित करवा कर कौम को दिलवाई थी।


इसके अलावा वे अपनी पहली पोस्टिंग में सरदारशहर रहे, जहाँ आस पास के गांवों में कब्रिस्तान के लिए जमीन आवंटित करवाई थी। सत्तार खान की एक खूबी यह भी है कि उन्होंने राजस्थान के समस्त अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारियों और कर्मचारियों को जनहित से जोड़ने के लिए संगठित करवाया और राजस्थान अल्पसंख्यक अधिकारी कर्मचारी महासंघ बनवाया, जिसके संरक्षक वे खुद हैं और इस संगठन के बनने के बाद इन अल्पसंख्यक अधिकारी व कर्मचारियों ने जनहित के कई विशेष कार्य किए हैं।

कोरोना महामारी में भीलवाड़ा माॅडल पूरे विश्व में चर्चित हुआ है, जहाँ शुरूआत में कोरोना तेजी से फैला था। लेकिन स्थानीय अधिकारियों की तत्परता, योग्यता एवं कार्यशैली ने इस जिले को कोरोना मुक्त कर दिया है। इस काम के लिए जिला कलेक्टर, एसपी और सीएमएचओ की पूरे देश में प्रशंसा हो रही है। यहाँ सीएमएचओ कायमखानी अधिकारी डाॅक्टर मुश्ताक खान हैं। जिनके काम की तारीफ़ उनके विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं। डाॅक्टर मुश्ताक खान ने कोरोना की जंग में कोई रियायत नहीं बरती और किसी का भी फोन आया, उसको अनसुना कर पूरी तरह से गाइडलाइन का पालन किया और जांच एवं क्वारेंटाइन के मामले में पूरी तरह से सख्ती बरती, जिसका नतीजा यह निकला कि मार्च के अन्त में जिस भीलवाड़ा जिले को कोरोना सीटी कह कर पूरे देश में बदनाम करने की कोशिश की, वो जिला आज कोरोना मुक्त हो गया है और पूरी दुनिया में भीलवाड़ा माॅडल की तारीफ़ हो रही है।



जोधपुर में कार्यरत एएसपी मुमताज़ खान भी कोरोना योद्धा के तौर पर मैदान में डटे हुए हैं। मुमताज़ खान अलग तरह के पुलिस अधिकारी हैं, वे सामाजिक जागरूकता और मोटिवेशन के तौर पर अधिक जाने जाते हैं। उनके पास कोई भी जाता है, तो उसे दो ही फार्मूले बताते हैं बेहतरीन तालीम हासिल करना और हर किस्म की फिजूलखर्ची को छोड़ कर पूरी ताकत शिक्षा, व्यापार और नौकरी हासिल करने पर लगाना। एएसपी मुमताज़ खान और आरएएस सत्तार खान कायमखानी कौम के वो हीरे हैं, जो ख्वाज़ा गरीब नवाज़ (केजीएन) हाॅस्टल झोटवाड़ा, जयपुर की बुनियाद हैं। इन जैसे दर्जन भर कायमखानी युवाओं ने 1990 में केजीएन बनाने का सपना देखा था, जो आज सबके सामने है। इसमें पूर्व मन्त्री यूनुस खान का भी विशेष योगदान रहा है, जो विधायक बनने से पहले इन्हीं की टीम का हिस्सा थे।



कोरोना योद्धा के तौर पर जयपुर में भी कई कायमखानी अधिकारी सरकार ने लगा रखे हैं, जो ऑल्ड सिटी में हाॅट स्पाॅट रामगंज, घाटगेट, माणक चौक, कोतवाली क्षेत्र आदि में लगे हुए हैं। इनमें प्रमुख हैं एडिशनल डीसीपी नाजिम अली, एसीपी इस्लाम खान, डिप्टी इरफान अली नूआं, आरएएस सलीम खान, आरएएस असलम शेर खान, आरएएस अकील खान, आरएएस अबू सफियान वगैरह। इनके अलावा अल्पसंख्यक मामलात मन्त्री के सेक्रेटरी आरएएस जावेद खान, आरपीएस इस्माईल खान सीओ गंगानगर, अय्यूब खान एएसपी खेतड़ी, नवाब खान डिप्टी नीमराणा, फारुक खान नायब तहसीलदार रतनगढ़ आदि कई कायमखानी अधिकारी कोरोना महामारी में बेहतरीन अन्दाज़ में अपनी सेवा अन्जाम दे रहे हैं और जनता की दिन रात सेवा कर रहे हैं। इन अधिकारियों की कार्यशैली की इनके उच्चाधिकारी भी प्रशंसा कर चुके हैं और इनके काम करने के अन्दाज़ को मीडिया कवरेज भी अच्छा मिल रहा है।



अधिकारियों के अलावा काफी संख्या में कायमखानी डाॅक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पुलिसकर्मी और अन्य सरकारी कर्मचारी भी कोरोना योद्धा के तौर पर इस महामारी से जंग लड़ रहे हैं। इनमें डाॅक्टर राशिद खान भींचरी (जयपुर में) डाॅक्टर रूबीना खान भींचरी, डाॅक्टर मोहम्मद आरिफ खान बेसवा, डाॅक्टर इमरान अली खान चूड़ी मियां (पीबीएम हाॅस्पिटल बीकानेर में), डाॅक्टर मोहम्मद आरिफ जलालसर (असिस्टेंट प्रोफेसर मेडिकल कॉलेज चूरू में), डाॅक्टर इदरीस खान राणासर (इन्चार्ज सीएचसी बेसवा), डाॅक्टर मारूफ खान जाबासर (जेएलएन मेडिकल कॉलेज अजमेर), डाॅक्टर आरिफ खान राणासर (पीबीएम हाॅस्पिटल बीकानेर), डाॅक्टर इकराज अहमद (बीडीके हाॅस्पिटल झुन्झुनूं) आदि कोरोना योद्धा के तौर पर जनता की सेवा कर रहे हैं। इनके अलावा भी कई कायमखानी अधिकारी और डाॅक्टर कोरोना योद्धा के तौर पर जनता की सेवा कर रहे हैं। लेकिन हमारे पास उनकी जानकारी नहीं आई, जितनी आई है वो इस एपिसोड/लेख में शामिल की गई है। बचे हुए लोगों की जानकारी अगले एपिसोड/लेख में शामिल की जाएगी।


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अन्य मुस्लिम अधिकारियों का भी सराहनीय योगदान
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उक्त कायमखानी मुस्लिम अधिकारियों के अलावा अन्य मुस्लिम अधिकारियों का भी कोरोना योद्धा के तौर पर बहुत ही सराहनीय योगदान है। इनमें झुन्झुनूं कलेक्टर आईएएस यूडी खान, जिनके अथक प्रयास और टीम वर्क से झुन्झुनूं जिला कोरोना मुक्त हो चुका है। आईपीएस हैदर अली जैदी एसपी भरतपुर का कोरोना को नियंत्रित करने में और वक्फ बोर्ड के सीईओ आरएएस मुकर्रम शाह का इस महामारी में जनता की सेवा करने में बहुत ही प्रशंसनीय योगदान है। इन सभी मुस्लिम अधिकारियों ने कोरोना महामारी के दौरान यह साबित कर दिया है कि सरकार इनको मुख्य जिम्मेदारी देती है, तो यह अपनी काबिलियत, सूझ बूझ और सेवाभावी मिज़ाज से उसे निभाने में पूरी तरह से सक्षम हैं।
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-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
09602992087, 09414361522

Comments

  1. Proud to be a KAYAMKHANI.
    देशहित व जनहित के प्रत्येक काम में कायमखानी कौम ने बहादुरी व जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाई है निभाते रहेंगें... इंशाअल्लाह ।
    जय हिन्द

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    1. Masha Allaha bahut khushi ki bat h Allaha in tammam hastiyo ko or kamyabi de
      Or ye jankari dene k liye ikra patrika la dil se shukriya Allaha ap sab ko ajar de

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