प्रधानमंत्री जी आपसे देश ने, ख़ासकर आपके समर्थकों ने यह उम्मीद कतई नहीं की थी !
प्रधानमंत्री जी आपसे देश ने, ख़ासकर आपके समर्थकों ने यह उम्मीद कतई नहीं की थी !
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आप पिछले छह साल में हर मोर्चे पर विफल हुए, सातवीं साल में कोरोना महामारी और चीनी मुठभेड़ को लेकर तो आपकी पूरी तरह से पोल खुल गई। अभी भी मौका है जब जगे तभी सवेरा, सभी देशवासियों का भरोसा जीतिए, लोगों की पीड़ा और भावना को सुनिए, अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाइए तथा देश को एक नई दिशा और ताकत देकर दोबारा मौका मिले तो चीन की ऐसी ठुकाई कीजिए कि उसकी सात नहीं 70 पीढियाँ याद रखें, अगर यह हिम्मत नहीं है तो फिर कुर्सी छोड़ दीजिए ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। कोई माने या न माने लेकिन मेरा यह मानना है कि भविष्य में जब भारतीय इतिहास के सबसे असफल शासकों पर कलम चलाई जाएगी, तो उस फहरिस्त (सूची) में सबसे ऊपर नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का होगा। मोदी जी का शासन पिछले छह साल में हर मोर्चे पर विफल साबित हुआ है। इस विफलता के लिए दूसरा कोई जिम्मेदार नहीं है, न कोई मन्त्री और ना ही अधिकारी। क्योंकि यह शासन सिर्फ और सिर्फ मोदी जी का है और उनकी सरकार का हर पत्ता उनकी मर्जी के बगैर नहीं हिलता है। इसलिए इस विफलता का ठीकरा दूसरों के सिर फोड़ना बहुत बड़ा अन्याय होगा।
छह साल में देश का सदियों पुराना भाईचारा यानी साम्प्रदायिक सद्भाव तहस नहस कर दिया गया। अर्थ व्यवस्था की गाड़ी को अनाड़ी चालक की तरह चला कर उसके परखच्चे उड़ा दिए। किसानों, मजदूरों, दस्तकारों, व्यापारियों आदि को खून के आंसू रूलवा दिया। शिक्षित प्रशिक्षित युवक युवतियों के सपने ताश के पत्तों की तरह बिखेर दिए। विदेश नीति को चौपट कर दिया। सातवीं साल की शुरुआत में कोरोना महामारी और चीनी दरिन्दगी ने तो प्रधानमंत्री जी आपकी शासन व्यवस्था की पूरी पोल खोल कर रख दी।
प्रधानमंत्री जी मेरे हिसाब से देश में चार तरह के लोग हैं, एक आपके कट्टर समर्थक, दूसरे आपकी बातों में आकर अच्छे दिन आने की उम्मीद करने वाले, तीसरे वे लोग जो एकाध मुद्दे पर आपका समर्थन करने वाले और चौथे आपके कट्टर विरोधी। कोरोना लाॅकडाउन के दौरान दूसरी और तीसरी कैटेगरी समाप्त सी हो गई है, इसके समापन की घोषणा होनी बाकी थी, जो चीनी दरिन्दगी पर शुरुआत में आपकी खामोशी और फिर इस विषय पर बोलने के अन्दाज़ के बाद हो गई। यानी अब देश में दो कैटेगरी के लोग बचे हैं, एक आपके समर्थक और दूसरे विरोधी।
समर्थक ऊहापोह के शिकार हैं, उन्हें आपसे यह उम्मीद कतई नहीं थी कि आप एक के बाद एक हर मोर्चे पर विफल हो जाएंगे और उनको आपके समर्थन में खड़े होने या मुंह खोलने में शर्मिंदगी महसूस होगी। यही वजह है कि लाॅकडाउन लागू होने के बाद सोशल मीडिया पर आपके समर्थन में वो आवाज़ और तर्क गायब हैं, जो इससे पहले दूसरों को ट्रोल किया करते थे। आपके आनन फानन में बिना तैयारी के किए गए लाॅकडाउन ने देश की कमर तोड़ दी, लोग बरबाद हो गए और जो लोग बरबाद हुए हैं उनमें आपके समर्थकों की भी अच्छी खासी संख्या है। इसीलिए लाॅकडाउन से बरबाद हुए आपके समर्थक अब आपकी नीतियों और निर्णयों की खुली आलोचना कर रहे हैं। यह दीवार पर लिखी हुई सच्चाई है।
चीनी दरिन्दगी और हमारे वीर सैनिकों की शहादत के बाद पहले आपकी चुप्पी और फिर तीसरे दिन बिना चीन का नाम लिए सख्त भाषा का इस्तेमाल न करने से आपके समर्थक और सदमें में आ गए हैं, क्योंकि वे उस मोदी के समर्थक हैं, जो गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए चीन को लाल आंख करके जवाब देने की बात करता था। वे उस मोदी के समर्थक हैं, जो पाकिस्तान का नाम लेकर खरी खौटी सुनाता है और सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान को धूल चटाता है। यह समर्थक चीनी दरिन्दगी के बाद आपसे यही उम्मीद कर रहे थे कि आप चीनी दरिन्दों को भी धूल चटा देंगे, लेकिन आपने इनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
खैर, जब जगे तभी सवेरा भी एक कहावत है। आपको देश ने 2014 में तीस साल बाद पूर्ण बहुमत की सरकार का मुखिया बनाया था, फिर 2019 में दोबारा प्रधानमंत्री बनाया। यह तब जब आप किसी स्थापित सियासी घराने के नहीं हैं और एक गरीब परिवार के बेटे हैं। इसलिए अभी भी मौका है अगर आप चाहें तो ? इसके लिए आपको कुछ नहीं करना पड़ेगा, सिर्फ दिल बड़ा करना पड़ेगा। सबसे पहले खुद को बदलना पड़ेगा। इसके लिए बिना सिर पैर की उलूल जुलूल बातें करनी छोड़नी होंगी और प्रधानमंत्री के पद की गरिमा वाली बातें करनी होंगी।
वोटों का ध्रुवीकरण और चुनाव में साम्प्रदायिक खेमे बना कर चुनाव जीतना आपका आपकी नजर में सत्ता स्थापित करने का हुनर हो सकता है, लेकिन आपके इस हुनर ने देश को दशकों पीछे धकेल दिया है। यह आपका हुनर नहीं बल्कि भारत माँ के बेटे बेटियों के दिलों में दरार डालने की औछी मानसिकता है। इसलिए अब यह काम छोड़ दीजिए, क्योंकि हो सकता है कि इस मानसिकता से आप तीसरी बार प्रधानमंत्री तो बन जाएंगे, लेकिन तब तक देश बहुत कुछ खो चुका होगा।
प्रधानमंत्री जी पाकिस्तान हमारा दुश्मन है, चीन भी हमारा दुश्मन है और नेपाल के रवैये से अब स्पष्ट हो चुका है कि वो भी दुश्मन देशों के खेमे में जाकर खड़ा हो गया है। इसलिए हमें मजबूत रणनीति बनाकर देश को हर मोर्चे पर शक्तिशाली बनाना होगा, ताकि कोई हमारे देश की तरफ बुरी नजर से देखे तो उसको उसी की भाषा में फ़ौरन मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। लेकिन इसके लिए पहले आपको पूरी तरह से खुद को बदलना होगा। आप सभी देशवासियों का भरोसा जीतिए, जो आपने नहीं जीत रखा है। लोगों के दिलों को और तोड़ने की बजाए, जो पहले से टूटे हुए दिल हैं उनको जोड़िए, लोगों की पीड़ा और भावना को सुनिए, सत्ता का विकेन्द्रीकरण कीजिए, सम्बंधित क्षेत्र के एक्सपर्ट लोगों को फ्री हैंड दीजिए, अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाइए, पीड़ित लोगों के आंसू पौंछिए तथा देश को एक नई दिशा और ताकत दीजिए। फिर दोबारा मौका मिले तो दरिन्दे चीन की ऐसी ठुकाई कीजिए कि उसकी सात नहीं 70 पीढियाँ याद रखें, अगर यह हिम्मत नहीं है तो फिर कुर्सी छोड़ दीजिए ? यानी अपनी पार्टी से कह दीजिए कि मैं देश चलाने में विफल हो चुका हूँ और कोई नया प्रधानमंत्री बना लीजिए ! (23-06-2020)
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