जयपुर में दो मन्त्री और कुल पांच कांग्रेसी विधायक फिर भी राशन वितरण व्यवस्था की चक्की में पिसती गरीब जनता ?
जयपुर में दो मन्त्री और कुल पांच कांग्रेसी विधायक फिर भी राशन वितरण व्यवस्था की चक्की में पिसती गरीब जनता ?
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सबसे बुरा हाल हवा महल, किशनपोल, आदर्श नगर और सिविल लाइन्स विधानसभा क्षेत्रों का है, जहाँ बहुत से मोहल्ले-काॅलोनियों में ग़रीब लोग निवास करते हैं तथा यहाँ के विधायक सियासी चौंचलों और पब्लिसिटी में व्यस्त हैं।
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सबसे बुरा हाल हवा महल, किशनपोल, आदर्श नगर और सिविल लाइन्स विधानसभा क्षेत्रों का है, जहाँ बहुत से मोहल्ले-काॅलोनियों में ग़रीब लोग निवास करते हैं तथा यहाँ के विधायक सियासी चौंचलों और पब्लिसिटी में व्यस्त हैं।
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। जयपुर राजस्थान की राजधानी है और पहली बार यहाँ आठ में से पांच विधायक कांग्रेसी हैं। इनमें से एक प्रताप सिंह खाचरियावास कैबिनेट मंत्री हैं और दूसरे डाॅक्टर महेश जोशी विधानसभा में मुख्य सचेतक हैं। बाकी तीन किशनपोल से अमीन कागजी, आदर्श नगर से रफीक खान और बगरू से गंगा देवी विधायक हैं। प्रदेश में राज भी कांग्रेस का है। फिर भी जनता की कोई सुनवाई नहीं है, खासकर गरीबों की। जिनकी थोड़ी बहुत सुनवाई होती है, वो या तो इन विधायकों के चेले, चमचे हैं या फिर कांग्रेस पार्टी के गली मोहल्ले के नेता व कार्यकर्ता। बाकी गरीब जनता किसी भी काम के लिए उसी तरह दर दर की ठोकरें खा रही है, जैसी भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार में खा रही थी।
जहाँ तक इन आदरणीय विधायकों की बात है, तो अव्वल तो यह किसी का फोन नहीं उठाते, रिप्लाई फोन करना या मैसेज का जवाब देना तो शायद इन्होंने सीखा ही नहीं है। अगर कैसे भी इनसे कोई बात करने में सफल हो जाता है, तो उन्हें यह मीठी गोली देकर टरका देते हैं और यह कहते हैं कि अभी अधिकारियों से बात करता हूँ। ताजा समस्या राशन वितरण व्यवस्था की है, जो समस्या तो पुरानी है, लेकिन राज बदलने के डेढ़ साल बाद भी बदस्तूर जारी है। कोरोना लाॅकडाउन के चलते सरकार ने राशन वितरण करवाया और इस राशन वितरण में जमकर धांधली, हेराफेरी और भाई भतीजावाद हुआ है और आज भी हो रहा है।
अब ऐसा तो हो नहीं सकता कि राशन वितरण व्यवस्था की हेराफेरी की जानकारी इन विधायकों के पास नहीं है और अगर नहीं है, तो फिर यह पूरी तरह से अन्धेरे में हैं और अगर इनको जानकारी है, तो फिर इनकी या इनके चेलों की या इनके चहेते अधिकारियों की या इनके आकाओं की हेराफेरी वाले इस खेल में मिलीभगत है। विचित्र बात यह भी है कि राजधानी में चल रही राशन वितरण की इस धांधली और लूट खसोट पर प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा भी खामोशी की चादर ओढ कर सो रही है। लगता है कि वो इस मुद्दे पर अपना मुंह खोलना भी पाप मानती है, क्योंकि भाजपा के राज में उसके नेता भी इस लूट खसोट और गरीबों के पेट पर लात मारने वाले खेल में शामिल थे।
अब बात करें सरकार की राशन वितरण वाली विशेष योजना की। जिसका सरकार ने 25 मई को अखबारों में एक विज्ञापन प्रकाशित करवाया था। यह योजना है खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में नहीं आने वाले लोगों के लिए, जो कोरोना लाॅकडाउन की वजह से परेशान हैं। इन लोगों के लिए एकबारीय खाद्य सुरक्षा देने की बात उक्त विज्ञापन में कही थी। इस योजना में रजिस्ट्रेशन करवाने की आखरी तारीख़ थी 31 मई। लेकिन न सरकार की सम्बंधित वेबसाइट ढंग से चल रही थी और ना ही एप। लोग दुखी थे, इस ई-मित्र से उस ई-मित्र धक्के खा रहे थे। अधिकारियों के पास आश्वासन की पुड़िया थी जो सबको बांट रहे थे। बहरहाल जनता की परेशानी को देखकर इसकी तारीख़ 5 जून कर दी गई। लेकिन लोग वेबसाइट प्रोब्लम की वजह से दर दर ठोकरें खाते रहे। ठोकरें खाने के बाद कुछ को सफलता मिल गई रजिस्ट्रेशन करवाने की और कुछ हार थक कर घर बैठ गए।
11 जून के दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने फेसबुक पेज पर एक खबर प्रकाशित की, इस खबर में कोरोना महामारी के कारण उपजे संकट की घड़ी में जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न सुरक्षा देने की स्वीकृति की बात कही गई थी। साथ ही जिन जरूरतमंद लोगों का इस नई योजना में रजिस्ट्रेशन हुआ था, उनके मोबाइल पर दो सन्देश भी आए थे।जिनका लब्बोलुआब यह था कि "राजस्थान सरकार 12 से 17 जून को आपके परिवार को राशन वितरित करेगी। राशन में परिवार के लिए दो किलो चना दाल एवं प्रति सदस्य दस किलो गेंहूँ वितरित किया जाएगा। कृपया राशन की दुकान पर जाकर अपना राशन प्राप्त करें। राशन प्राप्त करने के लिए अपना जन आधार नंबर अथवा आधार नंबर अवश्य साथ लेकर जाएं। कोरोना महामारी में आपके परिवार के लिए 2 महीनों का राशन वितरण किया जा रहा है। कृपया मास्क पहने एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।"
इस सन्देश के पहुंचते ही अगले दिन यानी 12 जून को गरीब जनता की पीड़ा में जो इजाफा होता है, वो बहुत दर्दनाक है। सरकारी आदेश के सन्देश को लेकर इस योजना के चयनित लोग राशन वितरण की दुकानों को ढूंढने लग गए। वो इसलिए कि इनमें बहुतों ने पहले कभी सरकारी राशन लिया नहीं था, इसलिए यह बेचारे उचित मूल्य की दुकान भी नहीं जानते। गरीब लोगों ने दुकान ढूंढते हुए दर दर की ठोकरें खाने के अलावा जो दुकान खुली मिली उस पर धक्के और दुत्कार फ्री में खाई। वो इसलिए कि घोषित राशन दुकानों पर पहुंचा ही नहीं और जिन दुकानों पर राशन पहुंचा उनके मालिकों (डीलरों) ने लोगों को दुत्कार कर भगा दिया।
यह दुत्कार फटकार और दर दर ठोकरें खाने का दर्दनाक एपिसोड 20 जून तक चलता रहा। डीलर यह कहते रहे कि जब राशन आएगा तब मिलेगा, सरकार का क्या है वो तो वाहवाही लूटने के लिए कोई भी सन्देश भेज सकती है। कोड में खाज वाली कहावत यह भी चरितार्थ हुई कि बहुत सी दुकानों के पते और मोबाइल नम्बर भी बदल गए, जो राशन कार्ड में दर्ज थे। यह पीड़ा जयपुर शहर की है, जिसे राजस्थान की राजधानी कहा जाता है। यह पीड़ा उस शहर की है, जो पूरे विश्व में पिंक सिटी के नाम से मशहूर है। यह पीड़ा जयपुर के उस पुराने शहर यानी परकोटे के अन्दर और उसके आस पास बसे मोहल्ले काॅलोनियों की है, जहाँ अधिकतर गरीब लोग निवास करते हैं। यह पीड़ा जयपुर के चार विधानसभा क्षेत्रों की है, हवा महल, किशनपोल, आदर्श नगर और सिविल लाइन्स की।
इन सीटों के रामगढ़ रोड क्षेत्र, करबला के इलाके की काॅलोनियां, बेनीवाल कांटा, बास बदनपुरा, ईदगाह, वन विहार, गलता गेट इलाका, आमागढ, ट्रांसपोर्ट नगर, आज़ाद नगर, विवेकानंद काॅलोनी, एकता मार्ग, श्मशान चौराहा, भौमिया जी की छतरी, धोबियों का मोड़, धन्नादास की बगीची, मोती डूंगरी रोड इलाका, मोहल्ला कुरैशियान, घाटगेट क्षेत्र, तोपखाना हुजूरी, पहाड़गंज, मोहल्ला महावतान, मोहल्ला अन्सारियान, सूरजपोल क्षेत्र, रामगंज, चार दरवाजा, गंगापोल, सुभाष चौक, मोहल्ला पन्नीगरान, मोहल्ला बिसायतियान, ब्रह्मपुरी, पठान चौक, पुरानी बस्ती, नाहरी का नाका, भट्टा बस्ती, लंकापुरी, शास्त्री नगर, शहीद अब्दुल हमीद नगर, जालूपुरा, चान्दपोल, बोड़ीकोठी, हसनपुरा, हटवाड़ा आदि इलाकों के वे गरीब लोग जो इस नई योजना में रजिस्टर्ड हुए हैं, यह लेख लिखे जाने तक दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं और उन्हें झूठे आश्वासन और दुत्कार फटकार के अलावा कुछ नहीं मिला है।
इस बीच राज्यसभा चुनाव को लेकर राजस्थान के कांग्रेसी विधायकों की खरीद फरोख्त की खबरें सरकार की तरफ से आईं और कांग्रेसी विधायकों की बाड़ेबन्दी कर दी गई। मुख्य सचेतक डाॅक्टर महेश जोशी ने विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर एसीबी को पत्र लिखा। जो अच्छी बात है, लेकिन क्या महेश जोशी जयपुर की राशन वितरण व्यवस्था में जो धांधली और हेराफेरी हो रही है, उसके लिए भी एक पत्र एसीबी को लिखेंगे ? विधायकों की इस बाड़ेबन्दी में जयपुर के विधायक भी शामिल थे। उनकी फुटबॉल खेलते, क्रिकेट खेलते, सामूहिक भोजन करते आदि एन्जॉय की फोटो और वीडियो बाहर आती रही। जिनको उनके समर्थक वायरल करते रहे और बधाई देते रहे। दूसरी तरफ गरीब जनता चन्द किलो गेहूं और दो किलो चना दाल के लिए रोज दुत्कार और फटकार खाती रही।
क्या यही लोकतंत्र है ? क्या इसीलिए यह लोग विधायक बने थे ? जब किसी तिकड़म या जुगाड़ से यह लोग टिकट लेकर आए थे, तब तो बड़ी बड़ी बातें कह रहे थे, जैसे हम चुनाव जीतने के लिए नहीं आपकी सेवा करने के लिए आए हैं, हम तो पूरा जीवन जनता की सेवा में लगाना चाहते हैं, हम 24 घण्टे आपकी सेवा में हाजिर रहेंगे, आप आधी रात को कोई समस्या बताएंगे तो हम तुरंत उसका समाधान करेंगे, वगैरह वगैरह, ऐसी लफ्फाजी इन्होंने चुनाव के दौरान की थी और आज ?
इन आदरणीय विधायकों की एक खास बात और है, यह सियासी चौंचलों और पब्लिसिटी का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देते। पब्लिसिटी करना कोई अपराध नहीं है। लेकिन पब्लिसिटी से ज्यादा जरूरी है जनता की पीड़ा सुनना और उसका समाधान करना। राजधानी होने की वजह से कांग्रेस के बड़े नेताओं का आवागमन हो या मुख्यमंत्री का कोई कार्यक्रम। अमूमन हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना यह पुण्य समझते हैं। कहीं एयरपोर्ट के बाहर तो कहीं किसी कार्यक्रम में मंच के नजदीक बड़े नेताओं के आगे पीछे धक्के खाते हुए इनके फोटो वीडियो वायरल होते रहते हैं। जैसे इसी उपस्थित से मन्त्री बना जा सकता है और इस उपस्थित के बिना इनको किसी औहदे से हटाया भी जा सकता है।
इन्होंने जो सीट चुनी हैं या अपने आकाओं के विशेष आशीर्वाद से इन सीटों का टिकट लेकर आए थे, वहाँ परम्परागत रूप से कांग्रेस को वोट देने वाले लोगों की संख्या अधिक है। यही वजह है कि इन्होंने इन खास सीटों से टिकट लेने का तिकड़म या जुगाड़ किया। अगर इनको इस गरीब जनता की पीड़ा से कोई लेना देना नहीं, जो कांग्रेस को हर चुनाव में वोट देती है, तो फिर इनको इन सीटों की बजाए शहर की मालवीय नगर और सांगानेर जैसी सीटों से चुनाव लड़ना चाहिए था, ताकि पता चल जाता कि यह कितने कद्दावर कांग्रेसी नेता हैं और कितने हजार के अन्तर से चुनाव जीत कर आज यह विधायक होते ?
(21-06-2020)
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