शहंशाह ए हिन्द सुलतान अलाउद्दीन खिलजी : जिसने भारत को बनाया विशाल देश और जनहित में किए कई कार्य

शहंशाह ए हिन्द सुलतान अलाउद्दीन खिलजी : जिसने भारत को बनाया विशाल देश और जनहित में किए कई कार्य
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लेखक:- एम ताहिर ख़ान✍
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जयपुर। सुलतान अलाउद्दीन खिलजी हमारे देश के एक प्रसिद्ध शासक हुए हैं। सलतनत काल के इस मशहूर शासक की कुछ इतिहासकारों ने गलत तस्वीर पेश करने की कोशिश की है, यह वही इतिहासकार हैं जो हर मुस्लिम शासक की गलत तस्वीर पेश करते हैं और उसके द्वारा किए गए अच्छे कार्यों को नफरत की चादर ओढा देते हैं। दूसरी तरफ बहुत से ऐसे इतिहासकार भी हैं, जिन्होंने खिलजी द्वारा किए गए जनहित के कई कार्यों पर भी अपनी कलम चलाई है और इन कार्यों का प्राथमिकता से उल्लेख किया है। 


इसमें कोई शक नहीं कि शहंशाह ए हिन्द सुलतान अलाउद्दीन खिलजी एक मजबूत और सक्षम शासक, प्रशासक और सेनानायक थे, साथ ही वे जन हितैषी व्यक्तित्व के धनी भी थे। रही बात खिलजी के किसी अत्याचार और शासन पर काबिज होने की, तो ऐसी बातें बहुत से शासकों से जुड़ी हुई हैं, यानी बहुत से शासकों ने अपने राज को बनाने एवं उसे बरकरार रखने के लिए विभिन्न प्रकार के अत्याचार किए हैं। फिर भी आज उनके कसीदे पूरी ताक़त से पढे जाते हैं।


अलाउद्दीन खिलजी ने जो अत्याचार किए हैं अपने राज को बनाने या बरकरार रखने के लिए वो भी इतिहास की एक सच्चाई है। लेकिन इन अत्याचारों के कारण उनके द्वारा किए गए जनहित के कार्यों पर परदा डालना इतिहास के साथ बहुत बड़ी नाइन्साफी और बेईमानी होगी। इसलिए हम इस लेख के माध्यम से यह बताना चाह रहे हैं कि अलाउद्दीन खिलजी ने हमारे देश भारत को एक विशाल देश किस तरह बनाया और उन्होंने देश की एकता, अखण्डता, विस्तार, स्वतंत्रता एवं जनहित के लिए क्या-क्या कार्य किए थे ? 

शहंशाह ए हिन्द सुलतान अलाउद्दीन खिलजी द्वारा किए गए देश हित और जनहित के कार्य निम्न हैं :-

1:- महंगाई नियन्त्रण और मण्डी व्यवस्था की जिस सफलता से शहंशाह खिलजी ने स्थापना की वैसी उससे पहले इतिहास में कोई नहीं कर पाया, जिससे आमजन (किसान, मजदूर, गरीब आदि) का जीवन यापन आसान हुआ।

2:- देश की सुरक्षा के लिए एक व्यवस्थित और मजबूत स्थाई केन्द्रीय सेना का गठन किया, जो मण्डी व्यवस्था को नियंत्रित करने में भी मददगार बनी।

3:- प्रत्येक वस्तु का मूल्य तय किया और पूरे देश में वो उसी रेट में मिलती थी। ऐसा इतिहास में दूसरा उदाहरण नहीं है। 

4:- देश में एक मजबूत खुफिया तंत्र विकसित किया, जो देश के लिए पैदा होने वाले सम्भावित आन्तरिक और बाहरी खतरों की बड़ी बारीकी से सूचना एकत्रित कर केन्द्रीय सत्ता तक पहुंचाता था। 

5:- अलाउद्दीन खिलजी अपने पीछे इतना बड़ा सफल, शान्त, खुशहाल और नियन्त्रित भारत छोड़कर गया था, जितना अगले तीन सौ साल तक किसी भी शासक ने नहीं बनाया। 

6:- टैक्स, अन्य शासकों की तुलना में कम लेता था और व्यापारियों को पूर्ण सुरक्षा एवं पूरे देश में व्यापार करने की अनुमति दी, जिससे व्यापार तेजी से बढा। साथ ही सुलतान खिलजी व्यापारियों के घाटे की राजकोष से पूर्ति करता था। इस कारण कारोबारी लोग भी खुश रहते थे और जनता भी।

7:- किसानों की फसल की सरकार द्वारा तय की गई कीमत (समर्थन मूल्य) समय पर दिलवाता था और इस सन्दर्भ में कोई व्यापारी या अफसर किसानों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय व ठगी करता तो उसको सख्त सजा मिलती थी। किसान जितना अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में खुशहाल था, उतना खुशहाल शायद ही किसी अन्य के शासनकाल में रहा होगा।



8:- अफगानिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक विशाल भारत को एक राष्ट्र बनाया और कानून व्यवस्था को मजबूत किया।

9:- नियन्त्रित व मजबूत शासन व्यवस्था स्थापित करने के लिए कई नए विभाग बनाए और देश का विभिन्न सूबों, तहसीलों आदि में शासकीय व्यवस्था हेतु बंटवारा किया।

10:- सेना के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में छावनियां स्थापित की और शहरों, कस्बों, मण्डियों व मुख्य मार्गों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा चौकियां स्थापित की।

11:- सक्षम व समय पर सूचना पहुंचाने वाली डाक व्यवस्था स्थापित की। 

12:- देश को बाहरी आक्रमण से सुरक्षित करने के लिए बाॅर्डर एरिया को हर तरह से मजबूत किया, वहाँ अतिरिक्त राजस्व खर्च किया।

13:- जिन विश्व विजेता मंगोलों ने पूरी दुनिया में आतंक मचाया और बेशुमार लोगों का खून बहाया तथा जिन देशों में उन्होंने आक्रमण किया, उन्हें लूटमार कर पूरी तरह से बरबाद कर दिया, उन आतंकी मंगोलों के आक्रमण से सुलतान अलाउद्दीन खिलजी ने देश को कई बार बचाया।

14:- शिक्षण संस्थानों की स्थापना की और सन्तों, विद्वानों, कवियों, गुरूजनों, लेखकों आदि का सम्मान किया और जनहित व देशहित में उनकी सेवाएं ली। 

15:- और यह सब कार्य सिर्फ 20 साल के शासनकाल में उस जमाने में किए, जब न गाड़ी थी, न कोई हवाई जहाज और न फोन-मोबाईल !!!
 
                     लेखक:-एम ताहिर ख़ान ✍

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