सियासत और लोकतंत्र में किसी कौम का वजूद खत्म होते ही उसे रोहिंग्या बनते देर नहीं लगती है !
सियासत और लोकतंत्र में किसी कौम का वजूद खत्म होते ही उसे रोहिंग्या बनते देर नहीं लगती है !
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"खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है ?"
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जयपुर (टीम थार न्यूज़)। सियासत और लोकतंत्र, तथा इन दोनों में किसी कौम का वजूद क्या है ? इस विषय पर गम्भीरता से चिन्तन मन्थन करें। फिर समझ में आएगा कि क्या करना चाहिए ? अगर लोकतंत्र में किसी कौम को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाए तथा इसके बावजूद वो कौम नजरअंदाज करने वालों की हिमायत में नारे लगाती रहे, तो वो एक दिन अपने लोकतांत्रिक अधिकार भी खो देती है और उसकी हैसियत वो हो जाती है जो म्यांमार में रोहिंग्याओं की हुई है !
इसलिए कांग्रेस की गुलामी का पट्टा गले में आजीवन डाले रखने और भाजपा से खौफ खाकर कांग्रेस को वोट देते रहने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सियासी मैदान में अपना वजूद बनाने से मसला हल होगा। एक और बात जो लोग यह समझ रहे हैं कि कांग्रेस का विरोध करने वाले लोग अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को फायदा पहुंचाते हैं, तो ऐसे लोगों को नादान व नासमझ समझना चाहिए। भाजपा और कांग्रेस में कोई विशेष अंतर नहीं है। इतिहास में जाएंगे, तो मालूम चलेगा कि कांग्रेस ने आरएसएस को पैदा किया और आरएसएस ने भाजपा को।
जिन लोगों ने कांग्रेस का राज देखा है या उस राज के भुगत भोगी हैं, उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि कांग्रेस और भाजपा में कितना फर्क है ? कांग्रेस के राज में भी शोषितों के साथ वही अन्याय, भेदभाव और अत्याचार हुआ है, जो भाजपा के राज में हो रहा है। असंख्य दंगे फसाद और बेगुनाहों को जेलों में ठूंसना कांग्रेस की तारीख (इतिहास) रही है। आज देश की जो दुर्दशा हो रही है, उसके लिए कांग्रेस कोई कम जिम्मेदार नहीं है। जिन लोगों ने हक और इन्साफ के लिए कांग्रेस राज में जद्दोजहद की, उनके साथ कांग्रेस ने क्या सलूक किया ? इसका जवाब सबको मालूम है, जिसके विस्तार में जाने की यहाँ गुंजाइश नहीं है।
सच्चाई यह है कि आज जो लोग यह बात कह रहे हैं कि कांग्रेस का विरोध करना सही नहीं है, इससे भाजपा मजबूत होगी, यह वही लोग हैं जो कांग्रेस के राज में मजे करते थे, या तो यह खुद सत्ता का हिस्सा हुआ करते थे या कांग्रेसी सत्ताधीशों के फेंकें हुए टुकड़ों पर इनकी जिंदगी बसर होती थी। जब कांग्रेस के राज में ज़ुल्म व अन्याय होता था, तब यह लोग सत्ता के मजे ले रहे थे और खामोशी का लिबादा ओढ कर सो रहे थे, आज यह कह रहे हैं कि कांग्रेस की मुखालफत (विरोध) नहीं करनी चाहिए, शर्म आनी चाहिए इनको। यह लोग किसी के खैरख्वाह नहीं हैं, यह सिर्फ सत्ता और सियासत की मण्डी के दलाल हैं !
सियासत और जम्हूरीयत (लोकतंत्र) का एक उसूल होता है, इसमें जिस कौम का वजूद खत्म हो जाता है, वो पहले हाशिये पर धकेल दी जाती है और फिर उसकी हालत म्यांमार के रोहिंग्याओं जैसी बना दी जाती है। डाॅक्टर अल्लामा मुहम्मद इकबाल साहब ने एक शेअर कहा था, जिस पर गौर कीजिए "खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है ?" इस शेअर का मतलब खुद समझिये और दूसरों को समझाने की कोशिश कीजिए तथा कांग्रेस की गुलामी करने और भाजपा से खौफ खाने की बजाए अपना सियासी रास्ता तय कीजिए। लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जद्दोजहद कीजिए, ताकि कामयाब होकर आप भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजा ले सकें और मजलूमों (पीड़ितों) को उनका जायज हक भी दिलवा सकें !
(#सम्पादन:- एम फारूक़ ख़ान)




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