गहलोत साहब जरा फुरसत है, तो राशन वितरण प्रणाली को भी देख लें, जहाँ आपके संरक्षण में लूट मची हुई है ?
गहलोत साहब जरा फुरसत है, तो राशन वितरण प्रणाली को भी देख लें, जहाँ आपके संरक्षण में लूट मची हुई है ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत साहब आप पिछले एक सप्ताह से अपनी सरकार को बचाने और विधायकों की बाड़ेबन्दी करने में व्यस्त हैं। मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं है, हर सत्ताधीश अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए ऐसे हरबे और ड्रामे करता रहता है। लेकिन आपने अपने विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप लगाया है और आपके खासमखास नेता यानी मुख्य सचेतक डाॅक्टर महेश जोशी ने विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर एसीबी को पत्र लिखा है।
यह अच्छी बात है, लेकिन मेरा इस लेख का मुद्दा है सरकार की राशन वितरण प्रणाली का, जिसमें बरसों से लूट मची हुई है। यह लूट आपके पिछले दो कार्यकालों में भी व्यवस्थित अन्दाज़ से चल रही थी और आज भी चल रही है तथा वसुंधरा जी के तथाकथित सुराज में भी चल रही थी। यानी राशन वितरण की चोर गैंग के आपके और वसुंधरा जी दोनों के शासन में मजे थे और आज भी यह गैंग गरीबों के पेट पर पूर्व की भांति लात मार रही है। गहलोत साहब बेहतर होता कि आप एक पत्र राशन वितरण को लेकर जो लूट मची हुई है उसकी जांच के लिए भी एसीबी को लिखवा देते ?
आपको यह अच्छी तरह से पता है कि कोरोना महामारी में जनता किस कदर परेशान है और आपकी सरकार ने राशन भी जनता को उपलब्ध करवाया है। लेकिन इस राशन वितरण में जमकर धांधली हुई है और इस धांधली व हेराफेरी के खेल से सम्बंधित अधिकारियों और अन्यों ने मोटा माल भी बनाया है। यानी पहले से सार्वजनिक राशन वितरण व्यवस्था में जो लूट का खेल चल रहा था, वो कोरोना महामारी में भी जारी रहा और आज भी जारी है। मतलब यह है कि राशन वितरण व्यवस्था से जुड़े हुए अधिकारियों, कर्मचारियों और डीलरों को कोरोना महामारी की पीड़ा में भी जनता पर रहम नहीं आया। ऐसा भी नहीं है कि आप इस सच्चाई से वाकिफ नहीं हैं, आपको और आपके चेलों को पूरी खबर है कि राशन वितरण व्यवस्था में कैसे लूट चल रही है और माल कैसे बनाया जा रहा है और उसका ईमानदारी से बंटवारा किन किन के बीच हो रहा है ?
अब मैं बात कर रहा हूँ आपकी विशेष योजना की। जिसका आपने 25 मई को अखबारों में एक विज्ञापन प्रकाशित करवाया। यह योजना है खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में नहीं आने वाले लोगों के लिए जो कोरोना लाॅकडाउन की वजह से परेशान हैं। इन लोगों के लिए आपने एकबारीय खाद्य सुरक्षा देने की बात उक्त विज्ञापन में कही। इस योजना में रजिस्ट्रेशन करवाने की आखरी तारीख़ थी 31 मई। लेकिन न सरकार की सम्बंधित वेबसाइट ढंग से चल रही थी और ना ही एप। लोग दुखी थे, इस ई-मित्र से उस ई-मित्र धक्के खा रहे थे। अधिकारियों के पास आश्वासन की पुड़िया थी जो सबको बांट रहे थे। बहरहाल जनता की परेशानी को देखकर इसकी तारीख़ 5 जून कर दी गई। लेकिन लोग वेबसाइट प्रोब्लम की वजह से दर दर ठोकरें खाते रहे। ठोकरें खाने के बाद कुछ को सफलता मिल गई रजिस्ट्रेशन करवाने की और कुछ हार थक कर घर बैठ गए।
अब आया 11 जून का दिन। इस दिन गहलोत साहब आपने अपने फेसबुक पेज पर एक खबर प्रकाशित की, जो हुबहू मैं यहाँ अटैच कर रहा हूँ। आपने इस खबर में लिखा कि "कोरोना महामारी के कारण उपजे संकट की घड़ी में जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न सुरक्षा देने के लिए एक और बड़ा निर्णय किया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे में नहीं आने वाले 3 लाख 57 हजार से अधिक जरूरतमंद परिवारों और निराश्रित व्यक्तियों को दो माह तक प्रति व्यक्ति प्रतिमाह पांच किलो गेहूं और प्रति परिवार एक किलो चना के हिसाब से 10 किलो गेहूं और 2 किलो चना के निशुल्क वितरण के प्रस्ताव को आज स्वीकृति दी है।"
मुख्यमंत्री जी आपने इस खबर में आगे लिखा है, "उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी के कारण प्रदेश में रिक्शा चलाने वाले, दिहाड़ी मजदूरों, थड़ी ठेला चलाने वाले फुटकर विक्रेताओं आदि के परिवारों की आजीविका पर गहरा संकट आ गया था। ऐसे करीब 31 लाख लोगों को संबल देने के लिए एक मुश्त 2 हजार 500 रूपए की अनुग्रह राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। अब इन परिवारों में से सर्वे के बाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे में नहीं आने वाले 3 लाख 57 हजार 258 परिवारों के 14 लाख 44 हजार 982 व्यक्तियों को यह खाद्यान्न सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कराने की भी स्वीकृति दी है। इसके तहत इन परिवारों के प्रत्येक व्यक्ति को 10 किलोग्राम निशुल्क गेहूं और प्रत्येक परिवार को निशुल्क 2 किलोग्राम चना दिया जाएगा। राज्य सरकार इस पर करीब 36.44 करोड़ रूपए की राशि व्यय करेगी।"
मुख्यमंत्री जी आपने इस खबर को फेसबुक पर डालकर जमकर वाहवाही लूट ली। लोग आपको जन नायक और राजस्थान का गांधी कह कर बधाई देने लग गए। लेकिन इस योजना ने गरीबों को कितने धक्के और दुत्कार खिलाई उसका आपको ज्ञान है ? अगर आप गांधी होते, अगर आप वाकई जन नायक होते तो इन धक्कों और दुत्कार का ज्ञान जरूर होता। मैं दावे के साथ कह रहा हूँ कि अगर आज महात्मा गांधी जिन्दा होते तो आपकी चोर राशन वितरण व्यवस्था और उसमें गरीबों को मिल रहे धक्कों व दुत्कार को लेकर वे आपकी सरकार के खिलाफ़ अनशन कर रहे होते !
गहलोत साहब जिस दिन आपने उक्त खबर फेसबुक पर डाली उसी दिन 11 जून को उक्त नई योजना में जिन लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ और जिन्हें अनाज देने की घोषणा हुई, उनके मोबाइल में दो सन्देश आए। जिनका स्क्रीन शाॅट इस लेख में अटैच है। जो हुबहू निम्न हैं, पहला सन्देश "राजस्थान सरकार द्वारा 12 से 17 जून को आपके परिवार के लिए राशन वितरित किया जाएगा। राशन में परिवार के लिए दो किलो दाल एवं प्रति सदस्य दस किलो गेंहूँ वितरित किया जाएगा। कृपया राशन की दुकान पर जाकर अपना राशन प्राप्त करें। राशन प्राप्त करने के लिए अपना जन आधार नंबर अथवा आधार नंबर अवश्य साथ लेकर जाएं।"
दूसरा सन्देश, "कोविड-19 महामारी के देखते हुए राजस्थान सरकार के द्वारा समय-समय पर जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान की जा रही है सरकार द्वारा आपके परिवार के लिए 2 महीनों का राशन वितरण किया जा रहा है। कृपया मास्क पहने एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।" अब होती है असल कहानी शुरू। अगले दिन आपकी सरकार के आदेश का सन्देश लेकर इस योजना के चयनित लोग राशन वितरण की दुकानों को ढूंढने लग जाते हैं। वो इसलिए कि इन्होंने पहले कभी सरकारी राशन लिया नहीं, इसलिए यह बेचारे उचित मूल्य की दुकान भी नहीं जानते।
कोड में खाज वाली कहावत यह भी चरितार्थ हुई कि बहुत सी दुकानों के पते और मोबाइल नम्बर भी बदल गए, जो राशन कार्ड में दर्ज थे। यह पीड़ा जयपुर शहर की है, जिसे राजस्थान की राजधानी कहा जाता है। यह पीड़ा उस शहर की है जहाँ आप निवास करते हैं और अधिकतर बड़े अधिकारी भी इसी शहर में विराजमान हैं। यह पीड़ा उस शहर की है, जो पूरे विश्व में पिंक सिटी के नाम से मशहूर है। पीड़ा यह है गहलोत साहब कि गरीब जनता जयपुर की गलियों में उचित मूल्य की दुकानें ढूंढती दर दर ठोकरें खा रही थी और कोई दुकान के ताला लटका मिला और कोई दुकान बन्द थी और मालूम हुआ कि वो कहीं और सिफ्ट हो गई। कोई डीलर लोगों को दुत्कार रहा था और कोई थोड़ी तमीज दिखाकर कल या परसों आने का आश्वासन दे रहा था।
जब इस पीड़ा की खबर हमें मिली, तो मैंने कुछ दुकानों का हाल जाना। मैं आधा दर्जन दुकानों पर गया। पहली दुकान पर डीलर बैठा मिला और अनाज रखा हुआ था, लेकिन लोग धक्के खा कर वापस जा रहे थे। डीलर से पूछा तो उसने कहा कि "इस नई योजना का अनाज नहीं आया है।" मैंने कहा सरकार ने सबको सन्देश भेजा बता रहे हैं, तो जवाब मिला, "सरकार का क्या वो तो वाहवाही लूटने के लिए कुछ भी सन्देश भेज सकती है।" इस डीलर ने अगली बात और भी पीड़ादायक कही, बोला "श्रीमान यह मुस्लिम इलाका है और यहाँ सप्लाई देने में आनाकानी बरती जाती है और सरकार के जो कर्मचारी यहाँ आने हैं, वो भी नहीं आते, क्योंकि यह मुसलमानों का एरिया है।"
सीएम साहब यह बात सुनकर मैं सन्न रह गया, मुझे नहीं मालूम था कि आप जैसे व्यक्ति के शासन में भी ऐसा हो रहा है। क्योंकि आपको तो बहुत से लोग राजस्थान का गांधी कहते हैं। जिस जगह यह दुकान है, वो मोहल्ला पूरी तरह से मुस्लिम इलाका भी नहीं है, मेरी जानकारी के अनुसार इस मोहल्ले में 30 फीसदी से कम मुस्लिम परिवार हैं। जब इस मोहल्ले का यह हाल है तो मुस्लिम बाहुल्य मोहल्लों का क्या हाल होगा, जरा फुरसत से इस सवाल का जवाब तलाशिए ? अगली दुकान बन्द मिली और उसके अगली दुकान भी बन्द मिली, लेकिन यहाँ पड़ौस में पूछने पर मालूम चला कि यह फलां जगह सिफ्ट हो गई है।
चौथी दुकान पर पहुंचा तो वहाँ जमकर भीड़ लगी हुई थी और सोशल डिस्टेंसिंग को डीलर व ग्राहकों दोनों ने ताक पर रख रखा था। डीलर के आदमी लोगों को दुत्कार रहे थे, पता नहीं वे डीलर के कर्मचारी थे या आस पास के कोई दलाल। मैं कुछ देर दूर खड़ा इस दुत्कार फटकार की पीड़ा को देखता रहा। फिर रहा नहीं गया, तो आगे बढ़कर पूछा कि इस दुकान के रजिस्ट्रेशन नम्बर कितने हैं और डीलर कौन है ? तो एक ने मुझे भी टेढ़ी नज़र से देखते हुए पूछा, क्यों क्या काम है ? मैंने कहा उनसे बात करनी है, तो दूसरा आ धमका और बोला क्या करना है डीलर से हमसे बात करो ? मैंने कहा आज 13 जून हो गया इन लोगों को राशन क्यों नहीं दे रहे हो ? वो बन्दा बोला "इस नई स्कीम का राशन अभी आया नहीं है, 17 जून के बाद आएगा।" मैंने कहा "चलो कोई बात नहीं, आप इनके पर्चे पर 17 जून की तारीख़ लिख दो।" अब उसके हाथ कांप गए, बोला, "डीलर मैं नहीं हूँ, वो उधर बैठे एन्ट्री कर रहे हैं, वो डीलर हैं।"
अब मैंने डीलर के पास जाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ज्यादा और कोरोना महामारी का खतरा अलग। मैंने उनको आवाज लगाई, इतने में वो किसी ग्राहक से बदतमीजी पर उतर आए और उसको धमकाते हुए बोले कि "अभी पुलिस को फोन कर राज कार्य में बाधा के मुकदमे में अन्दर और करवा दूंगा।" अब सीएम साहब अपन से नहीं रहा गया, क्योंकि मुझ में एक कमी है किसी की पीड़ा देखने के बाद बरदाश्त नहीं होता है। मैंने जोर से चिल्ला कर कहा कि आप कौन हैं यहाँ और इस दुकान का मालिक कौन है ? तो जवाब मिला मैं ही हूँ आपको क्या काम है ? मेरे से बात करते समय उसने आप शब्द शायद इसलिए बोला कि वो मेरे लहजे को समझ गया कि यह कोई बड़ी आफत है।
मैंने कहा इस गरीब का क्या अपराध है, जो आप इसे राज कार्य में बाधा के मुकदमे में अन्दर करवाने की धमकी दे रहे हैं ? डीलर खामोश हो गया और सिर्फ यह बोला कि आपका क्या काम है ? मैंने पूछा इन लोगों को राशन क्यों नहीं दे रहे हो ? जवाब मिला कि यह नई स्कीम वाले हैं और इनका अनाज 15 जून के बाद आएगा, तब मिलेगा। मैंने एक ग्राहक से उसका पर्चा लेकर डीलर को कहा कि इस पर यह लिख दें ? तो वो इधर उधर की बात करके टरकाने लगा और बोला यह पर्चा तो दूसरी दुकान का है।
अब मैं अगली दुकान पर पहुंचा, तो यही हाल वहाँ था। डीलर बोला, 17 के बाद अनाज आएगा। मैंने कहा तब तो सरकारी सन्देश की तारीख़ निकल जाएगी। उसके पास इसका कोई जवाब नहीं था। बस यह कहा जिसने सन्देश भेजा, उससे मालूम करो। अगली दुकान बन्द मिली, पड़ौस में पूछा तो बताया गया कल खुलेगी। दुकान पर डीलर का नाम, मोबाइल नम्बर और खुलने का समय 9 से एक बजे लिखा हुआ था। मैं यहाँ 12 बजे पहुंचा था। दुकान पर यह भी लिखा हुआ था कि नई योजना वालों को सामान आने पर सरकारी कर्मचारी की मौजूदगी में दिया जाएगा।
मैंने डीलर से बात की तो उसने कहा अभी तक अनाज नहीं आया है और जयपुर के 80 प्रतिशत डीलरों के पास नहीं आया है। मैंने कुछ और पूछने की कोशिश की तो उसने फोन काट दिया। यहाँ दो महिलाएं दुकान पूछती पूछती पहुंची और मायूस होकर लौट गईं। यह हाल है गहलोत साहब आपकी सरकारी राशन वितरण व्यवस्था का। आपके सन्देश का समय समाप्त हो गया, यानी 17 जून तक गरीब लोग इन दुकानों पर धक्के व दुत्कार खाने के बावजूद खाली हाथ लौटते रहे। यह तो राजधानी का हाल है, बाकी प्रदेश का क्या होगा ? जहाँ तक सम्बंधित अधिकारियों से बात करने की बात है तो अव्वल तो कोई फोन उठाता नहीं है और जो उठाता है उसके पास सिर्फ आश्वासन की पुड़िया के कुछ होता नहीं है।
मुख्यमंत्री जी आपने 25 मई को जो विज्ञापन प्रकाशित करवाया था, उसमें ऊपर ही ऊपर लिखा था कि "कोई भूखा न सोये की दिशा में एक और प्रयास।" आज 17 जून है यानी 24 दिन हो गए गरीब लोगों को धक्के खाते हुए। अब आप बताएं कि आपके विज्ञापन के उक्त वाक्य की सार्थकता क्या है ? ऐसा नहीं है कि आपको इस लूट खसोट, हेराफेरी और अव्यवस्था के खेल की जानकारी नहीं है। आपको पूरी जानकारी है और आपको यह भी मालूम है कि राशन वितरण व्यवस्था में कौन कौन अधिकारी लगे हुए हैं और वे किस किस विधायक की सिफारिश से आपने लगाए थे और इनमें कौन कितना प्रतिशत चोर है और वो इस चोरी के माल को ऊपर कहाँ कहाँ तक भेजता है ?
मुझे यकीन है कि गरीबों के पेट पर लात मारने वाले डीलर और अधिकारी इस चोरी के माल को आपके पास कतई नहीं भेजते हैं, क्योंकि आप जैसा ईमानदार आदमी गरीबों के राशन पर डाका थोड़े ही डालता है ? लेकिन गहलोत साहब जिस राजनेता को तीसरी बार तिकड़म से मुख्यमंत्री बनना पसंद हो, जिस राजनेता को अपनी सत्ता बनाने और बचाने के लिए निर्दलीय और छोटी पार्टी के विधायकों से सांठ गांठ करनी पसंद हो, जिस राजनेता को खुद के हाथ से खुद की पीठ थपथपाना पसंद हो, जिस राजनेता को अपने समर्थकों से खुद को जन नायक और गांधी कहलवाना पसंद हो, उसे यह भी देखना चाहिए कि उसके शासन में गरीब जनता के साथ क्या हो रहा है ? उसे यह भी देखना चाहिए कि उसके आदेशों की समय पर अक्षरशः पालना हो रही है या नहीं ? अन्त में गहलोत साहब आपसे सिर्फ यह निवेदन कि जरा फुरसत है, तो राशन वितरण प्रणाली को भी देख लें, जहाँ आपके संरक्षण में लूट मची हुई है ?
(17-06-2020)
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