कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट के महासचिव मोहम्मद खान का 54 वां जन्म दिन

कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट के महासचिव मोहम्मद खान का 54 वां जन्म दिन
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सादगी से मनाया जन्म दिन और कायमखानी हाॅस्टल भीलवाड़ा की चारदीवारी निर्माण के लिए दिए 54 हजार रूपये
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जयपुर/भीलवाड़ा/चित्तौड़गढ़ (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। कायमखानी क़ौम के समाजी खिदमतगार और सबके सुख दुःख में शरीक रहने वाले मोहम्मद खान (चित्तौड़गढ़) का 30 जुलाई को जन्म दिन मनाया गया। हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने जन्म दिन पूरी तरह सादगी से मनाया। इस बार कोरोना महामारी की वैश्विक पीड़ा के कारण और अधिक सादगी से सिर्फ नाममात्र का मनाया गया। इस बार उनका 54 वां जन्म दिन था और उनके परिजनों ने इस खुशी के मौके पर 54 हजार रूपये कायमखानी महासभा भीलवाड़ा को डोनेशन के दिए हैं।


उनके बड़े भाई सरदार खान, भतीजे रमजान खान, बेटे जावेद खान, हबीब खान टीपू (इनाया बिल्डकाॅन), खलील खान, बेटी जन्नत, पत्नी, बहुओं, पोते, पोती, नवासे वगैरह ने सादगी से घर पर जन्म दिन की खुशी मनाई और सबने 54 हजार रूपये निर्माणाधीन कायमखानी हाॅस्टल भीलवाड़ा की चारदीवारी निर्माण के लिए दिए। इससे पहले इस हाॅस्टल की जमीन की रजिस्ट्री करवाने के लिए भी इन्होंने 50 हजार रूपये दिए थे। मोहम्मद खान साहब मेवाड़ इलाके के भीलवाड़ा जिले में आयोजित कायमखानी सामूहिक विवाह सम्मेलन, नवाब कायम खान डे, प्रतिभा सम्मान समारोह आदि कार्यक्रमों में भी तन, मन और धन से पूरी तरह शरीक रहते हैं। 


गत वर्ष अगस्त में भीलवाड़ा कायमखानी महासभा और कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट ने एक लाजवाब प्रतिभा खोज प्रतियोगिता कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें बच्चों से ओएमआर शीट पर परीक्षा ली गई और उसी दिन उनका परिणाम घोषित कर एक मोटिवेशन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया था। इस कार्यक्रम के रूहे रवां भी मोहम्मद खान साहब ही थे। कायमखानी गेस्ट हाउस जयपुर का निर्माण हो या ददरेवा (चूरू) में बने नवाब कायम ख़ान स्मारक हो, सब कामों में उन्होंने बढ चढ़ कर हिस्सा लिया है। ददरेवा स्मारक निर्माण में तो वे करीब दो महीने लगातार जंगल में दिन रात सांप बिच्छुओं के बीच रहे। इस स्मारक के निर्माण के लिए उन्होंने चित्तौड़गढ़ से ददरेवा करीब 600 किलोमीटर तक कई सफर किए हैं। इसके अलावा कायमखानी ओबीसी रिजर्वेशन मूवमेंट में भी वे हर वक्त सक्रिय रहे और क़ौम के रहनुमाओं ने उन्हें जो भी काम सौंपा वो पूरी जिम्मेदारी से उन्होंने किया।

मोहम्मद खान साहब ने इकरा पत्रिका को बताया कि उनके दिल में समाजी खिदमत का जज़्बा बचपन से ही था, लेकिन इस जज़्बे को पंख लगाने वाले पूर्व मन्त्री यूनुस खान साहब और राजस्थान कायमखानी महासभा के पूर्व संयोजक जी खान साहब हैं। जब मैं करीब 22 साल पहले इनसे मिला तो इनके काम व टीम वर्क को देखकर बहुत प्रभावित हुआ और फिर मैंने भी इनकी विशेष प्रेरणा से जो बन सका या मैं जो कर सका, वो मैंने किया। लेकिन मैं कभी भी पर्दे के सामने नहीं आया, क्योंकि पर्दे के सामने आकर खिदमत करना मुझे पसंद नहीं है। 

उन्होंने बताया कि अभी मृत्यु भोज पर सरकार ने जो पाबंदी लगाई है, उसके बारे में भी हम पूरी क़ौम को जागरूक कर रहे हैं और इसका परिणाम भी बहुत सराहनीय आ रहा है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि कोरोना महामारी से पूरी दुनिया की अर्थ व्यवस्था तहस नहस हो गई है। अब बेरोजगारी बढेगी, लेकिन इसका एक इलाज है सहकारिता। सहकारिता (को-ऑपरेटिव वर्क) से हम समाज को न सिर्फ तरक्की की बुलंदियों तक ले जा सकते हैं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, व्यापार, संस्कार, सहयोग आदि हर क्षेत्र में अपनी आने वाली नस्लों को पैरों पर खुशहाली से खड़ा देख सकते हैं।


उनके जन्म दिन की मुबारकबाद देते हुए राजस्थान कायमखानी महासभा के संयोजक कर्नल शौकत अली खान साहब ने बताया कि "मोहम्मद खान साहब एक बेहतरीन समाजी खिदमतगार हैं, पिछले एक दशक से मैंने उनके साथ कई प्रोग्राम अटेंड किए हैं। उनके साथ लाजवाब प्रोग्राम शाहपुरा (भीलवाड़ा) में आयोजित अप्रेल 2017 का सामूहिक विवाह सम्मेलन था, वैसा प्रोग्राम कायमखानी कौम ने आज तक आयोजित नहीं किया। एक खास बात यह भी है कि मोहम्मद खान साहब किसी प्रोग्राम में खुद को कभी हाईलाईट नहीं करते, बल्कि वो पूरी टीम को आगे रखते हैं और खुद कभी मंच की शोभा नहीं बनते, यह एक बड़ी बात है। मोहम्मद खान साहब के परिजनों ने उनके 54 वें जन्म दिन पर कायमखानी हाॅस्टल भीलवाड़ा की चारदीवारी निर्माण के लिए जो 54 हजार रूपये दिए हैं, वो एक सराहनीय काम है, इससे दूसरों को भी सबक लेना चाहिए।"

राजस्थान कायमखानी महासभा के पूर्व संयोजक एवं कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट जयपुर के चीफ एडवाइजर जी खान साहब ने उन्हें मुबारकबाद देते हुए इकरा पत्रिका को बताया कि "मोहम्मद साहब कौम का एक लाजवाब हीरा हैं और उन्होंने हर वक्त क़ौम की खिदमत की है, चाहे कोई भी मौका व प्रोग्राम हो। वे जब से हमें मिले हैं और हमने उन्हें किसी भी प्रोग्राम के लिए कोई इशारा किया तो उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ऐसे खिदमतगार (समाजसेवी) मिलना और लगातार खिदमत करते रहना और हमेशा पर्दे के पीछे रहकर ही खुश रहना क़ौम के लिए बहुत बड़ी फख्र की बात है। हमारी दुआ है कि वे हमेशा खुश रहें और इसी जज़्बे के साथ क़ौम की खिदमत करते रहें।"
(30-07-2020)


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