राम मन्दिर बनाने की यात्रा : प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक ?
राम मन्दिर बनाने की यात्रा : प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक ?
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राम मन्दिर बनाने का रास्ता कांग्रेस ने तैयार किया, भाजपा ने तो सिर्फ सत्ता की फसल काटी ?
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राम मन्दिर बनाने का रास्ता कांग्रेस ने तैयार किया, भाजपा ने तो सिर्फ सत्ता की फसल काटी ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। 5 अगस्त 2020 के दिन भारतीय इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जाएगा। इस दिन अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण की नींव रखी जाएगी। नींव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रखेंगे। विध्वंस की गई बाबरी मस्जिद की जगह को गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में राम मन्दिर को दे दी थी। खैर, सुप्रीम का फैसला था, जो सबको मानना था, लेकिन मुसलमान इस फैसले से मायूस हुए, क्योंकि उन्हें ऐसे फैसले की कतई उम्मीद नहीं थी।
भाजपा का घोषित एजेंडा था बाबरी मस्जिद की जगह राम मन्दिर बनाने का और वो इस एजेंडे में सफल हो गई। साथ ही उसे राम मन्दिर आन्दोलन ने सत्ता के शीर्ष पर पूर्ण बहुमत से पहुंचा दिया। राम मन्दिर बनाने के नाम की सियासी फसल किसी पार्टी ने काटी है तो उसका नाम भाजपा है और जिस पार्टी की एकछत्र सत्ता का महल भरभरा कर गिरा है तो उसका नाम कांग्रेस है। लेकिन सच इतना ही नहीं है। सच का एक पहलू और भी है।
वो यह है कि राम मन्दिर बनाने का रास्ता कांग्रेस ने तैयार किया था और वो भी सेक्यूलरिज्म का मुखौटा ओढ कर। इस लेख में पहली फोटो प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू की है, जिनके शासनकाल में 1949 की एक रात में ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद में मूर्ति रखी गई और केन्द्र की नेहरू सरकार और राज्य में उन्हीं के साथी पण्डित गोविन्द बल्लभ पंत की सरकार मस्जिद में से मूर्ति नहीं हटा सकी और मस्जिद के ताला लगा दिया गया।
दूसरी फोटो राजीव गांधी की है, जो पण्डित नेहरू के नवासे थे और देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। राजीव गांधी के शासनकाल में उन्हीं के कर कमलों से अयोध्या में राम मन्दिर का शिलान्यास हुआ और बाबरी मस्जिद का ताला खुलवा दिया गया और पूजा पाठ शुरू करवा दिया गया। तीसरी फोटो पी वी नरसिम्हाराव की है, जो कांग्रेस पार्टी से देश के प्रधानमंत्री रहे हैं और इन्हीं की सोची समझी साजिश के तहत 6 दिसम्बर 1992 को दिन के उजाले में बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर दिया गया। विध्वंस करने में आरएसएस और इसके अन्य संगठनों का खुला हाथ था।
यह मस्जिद का विध्वंस नहीं हुआ था, बल्कि भारतीय सेक्यूलरिज्म और संवैधानिक व्यवस्था की इमारत को सरेआम जमींदोज किया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री राव ने उसे बचाने की कोई कोशिश नहीं की थी। राम मन्दिर की यह यात्रा कल 5 अगस्त को पूरी हो रही है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसकी नींव रखेंगे। लेकिन यह यात्रा शुरू नेहरू के शासनकाल में हुई और राजीव गांधी व नरसिम्हाराव ने इसका रास्ता आसान बनाया। यह है कांग्रेस का सेक्यूलरिज्म ?
चाहे कोर्ट के जरिए मन्दिर बने या आरएसएस के आन्दोलन से या नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने की वजह से, यह भव्य मन्दिर बन जाएगा। लेकिन इस पूरी यात्रा से देश के करोड़ों लोगों के दिल टूट भी जाएंगे। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इन करोड़ों लोगों में 99 फीसदी मुसलमान होंगे। बाकी किसी का दिल नहीं टूटेगा, क्योंकि बाकी ने तो सिर्फ सत्ता के लिए सेक्यूलरिज्म का मुखौटा पहन रखा है ! (04-08-2020)
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