शहादत के अपमान पर जिला कलेक्टर झुन्झुनूं की लीपापोती क्यों ?

शहादत के अपमान पर जिला कलेक्टर झुन्झुनूं की लीपापोती क्यों ?
--------------------------------------------------
कोलिंडा गांव के शहीद सैनिक मोहसिन खान कायमखानी की शहादत पर जिला प्रशासन का रवैया बड़ा अफसोसनाक रहा, लेकिन उससे बड़ा अफसोस कायमखानी क़ौम के रहनुमाओं, पूर्व सैनिकों और अधिकारियों के रवैये पर भी है !
********************************
जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका 09-08-2020)। ईद के दिन यानी एक अगस्त को झुन्झुनूं जिले के कोलिंडा गांव के शहीद सैनिक मोहसिन खान कायमखानी (मोहसिम खान) को पैतृक गांव में सेना की टुकड़ी द्वारा सलामी देकर सुपुर्द ए खाक किया गया। वे पहले दिन 31 जुलाई को जम्मू-कश्मीर में देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। लेकिन उनको आखरी विदाई देने के लिए जिलाधिकारी के तौर कोई भी शरीक नहीं हुआ, ना जिला कलेक्टर, ना एसपी और ना ही एडीएम, एसडीएम वगैरह। 22 वर्षीय इस शहीद सैनिक की शहादत के अपमान को लेकर पूरी कायमखानी क़ौम में रोष व्याप्त है। लेकिन उसके रहनुमा इस शहादत के अपमान पर कुछ बोलने की बजाए, बोलने वालों को ही खामोश करने में लगे हुए हैं, जैसे मानों उन्हें खामोश करने के लिए किसी सत्ताधीश या बड़े अधिकारी ने इशारा किया हो।


बड़ी बात यह रही कि हर छोटी मोटी घटना पर अपना बयान जारी करने वाले और श्रद्धांजलि व शुभकामनाएं देने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी अपने फेसबुक पेज पर इस शहीद के लिए दो शब्द लिखने की फुरसत नहीं मिली। हाँ, यह जरूर अच्छी बात रही कि अगले दिन 2 अगस्त को वक्फ बोर्ड चेयरमैन डाॅक्टर खानू खान बुधवाली कांग्रेस सैनिक प्रकोष्ठ के सूबेदार जाफर खान खेड़ी और कांग्रेस नेता एमडी चौपदार आदि के साथ मुख्यमंत्री का पत्र लेकर शहीद सैनिक के घर पहुंचे और पत्र परिजनों को सौंप कर शहीद की कब्र पर जाकर पुष्प चक्र चढाया और खिराज ए अकीदत पेश की। लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने फेसबुक पेज पर इस पत्र को जगह नहीं दी।


शहीद की आखरी विदाई में स्थानीय विधायक रीटा चौधरी, झुन्झुनूं लोकसभा प्रत्याशी श्रवण कुमार, झुन्झुनूं विधायक बृजेन्द्र ओला आदि कोई भी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नहीं पहुंचे। झुन्झुनूं सांसद नरेन्द्र खीचड़ सहित कुछ भाजपा नेता जरूर शरीक हुए। शहादत के इस अपमान की 3 अगस्त को थार न्यूज़ इकरा पत्रिका में विस्तृत स्टोरी की गई और सोशल मीडिया पर भी लोगों ने काफी रोष व्यक्त किया। तब जाकर जिला कलेक्टर और जन प्रतिनिधियों की आंखें खुली, लेकिन यह लेख लिखे जाने तक इनमें से कोई भी शहीद सैनिक के घर बैठने नहीं गया। यह सब तब हुआ जब जिला कलेक्टर के पद पर यूडी खान नामक एक अनुभवी प्रमोटी आईएएस लगे हुए हैं। 

शहादत के इस अपमान पर कायमखानी क़ौम के संगठनों ने रोष व्यक्त करते हुए जिला कलेक्टर और एसपी को तुरंत प्रभाव से हटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की और मांग पत्र मुख्यमंत्री को भिजवाया। उक्त सन्दर्भ में 7 अगस्त को राजस्थान कायमखानी महासभा की भीलवाड़ा जिला इकाई ने भी जिला कलेक्टर भीलवाड़ा के माध्यम से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ज्ञापन भेजा। 

इस बीच जिला कलेक्टर यूडी खान ने 7 अगस्त को कायमखानी क़ौम के प्रतिनिधि मण्डल को बुलाकर लम्बी बात की। इस प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व राजस्थान कायमखानी महासभा के संयोजक कर्नल शौकत खान ने किया। कर्नल शौकत खान ने इकरा पत्रिका को बताया कि जिला कलेक्टर ने खेद व्यक्त करते हुए काफी देर तक इस विषय पर बात की और कहा कि मुझे समय पर जानकारी नहीं मिली थी, मेरी और कोई गलत मन्शा नहीं थी। 

लेकिन अफसोसनाक बात यह है कि इतना विरोध और आक्रोश होने के बाद भी यह लेख लिखे जाने तक जिला कलेक्टर शहीद के घर नहीं पहुंचे, जबकि जिला मुख्यालय से शहीद का गांव कोलिंडा मात्र 20 किलोमीटर दूर है। यह शहादत का घौर अपमान नहीं तो और क्या है ? अफसोस इस बात का भी है कि कोलिंडा गांव के आस पास कई ऐसे गांव हैं जहाँ काफी संख्या में रिटायर्ड कायमखानी सैनिक रहते हैं, लेकिन उनमें से भी चन्द लोग ही शहीद की आखरी विदाई में पहुंचे।


कहने को यह कहा जा रहा है कि समय पर सूचना नहीं मिली थी, लेकिन सवाल यह है कि यह सूचना कौन देगा ? कोलिंडा गांव में भी कई रिटायर्ड सैनिक हैं और सोशल मीडिया का जमाना है, फिर सूचना समय पर लोगों तक नहीं पहुंचाना, अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है ? हालांकि सबसे पहले कैप्टन लियाकत खान धनूरी और मोहम्मद खान चित्तौड़गढ़ ने 31 जुलाई की शाम को ही यह खबर सोशल मीडिया पर चलाई थी, जो देर रात तक सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड हो रही थी, फिर भी जिला कलेक्टर का यह कहना कि समय पर सूचना नहीं मिली, अपने आप में एक सवाल है कि कलेक्टर महोदय फिर आप कैसा प्रशासन चला रहे हो ?

सवाल कायमखानी क़ौम के रहनुमाओं, संगठनों और अधिकारियों का भी है। राजस्थान कायमखानी महासभा, कायमखानी यूथ ब्रिगेड, कायम जकात फाउण्डेशन जैसे कई छोटे बड़े संगठन काम कर रहे हैं। इनके जिम्मेदार दिन रात सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। कोराना महामारी के लाॅकडाउन में इन संगठनों ने सूखे राशन और पके हुए भोजन के काफी संख्या में पैकेट वितरित किए थे। कायम रसोई के नाम से तीन चार स्थानों पर खाना बनाने की व्यवस्था की थी। जो एक सराहनीय काम था और कायमखानी क़ौम के भामाशाहों एवं जिम्मेदार लोगों ने इस काम में बढ चढ़ कर हिस्सा लिया था। रोज सोशल मीडिया पर खाना पकाने एवं वितरण करने की फोटो व वीडियो वायरल की जाती थी, लेकिन इस शहादत के अपमान पर इन भामाशाहों एवं जिम्मेदार लोगों में बहुतों ने मुंह खोलना भी उचित नहीं समझा, क्यों ? साथ ही कायमखानी क़ौम के जो अधिकारी हैं, उनमें भी अधिकतर का रवैया अफसोसनाक रहा।

इकरा पत्रिका ने उक्त सन्दर्भ में जिला कलेक्टर, सेक्रेटरी सैनिक कल्याण बोर्ड झुन्झुनूं सहित करीब 45 कायमखानी क़ौम के रहनुमाओं और कुछ चर्चित पूर्व सैनिकों को एक सन्देश भेजा कि शहादत के इस अपमान पर आप अपनी राय (वर्जन) देना चाहें तो हमें भेज दीजिए, हम इसकी विस्तृत स्टोरी प्रकाशित करने जा रहे हैं। अफसोस यह रहा कि करीब डेढ़ दर्जन लोगों का ही जवाब आया, रिमाइन्डर करवाने पर भी बाकी ने जवाब देना उचित नहीं समझा, यहाँ तक कि जिला कलेक्टर ने भी ? 

हो सकता यह लोग बहुत ज्यादा व्यस्त हों या हो सकता है कि इन्होंने कुछ कहना मुनासिब नहीं समझा हो, क्योंकि यह हर इन्सान का व्यक्तिगत अधिकार होता है कि वो कब, क्या, कैसे और किस विषय पर बोले या नहीं बोले। लेकिन एक 22 वर्षीय सैनिक की शहादत का मामला था इसलिए इन्हें बोलना चाहिए था, अपना वर्जन हमें भेजना चाहिए था ताकि हम उसे यहाँ प्रकाशित करते। जिन लोगों ने हमें अपना वर्जन भेजा, वो नीचे प्रकाशित है और जिन लोगों ने कोई भी जवाब नहीं दिया उनके नाम भी प्रकाशित हैं। 

यूडी खान जिला कलेक्टर झुन्झुनूं, विधायक हाकम अली खान फतेहपुर, डाॅक्टर खानू खान बुधवाली चेयरमैन राजस्थान वक्फ बोर्ड, जस्टिस भंवरू खान, यूनुस खान पूर्व मन्त्री, जीवण खान सभापति नगर परिषद् सीकर, जाकिर हुसैन जिला कलेक्टर हनुमानगढ, मेजर असलम खान बीकानेर, डाॅक्टर हबीब खान गौराण पूर्व चेयरमैन आरपीएससी, आईपीएस अरशद अली, रिटायर्ड आईएएस अशफाक हुसैन, एएसपी नाजिम अली खान, एएसपी रिटायर्ड मुमताज़ खान जोधपुर, डीवायएसपी इस्माईल खान चूरू, डीवायएसपी इरफान खान नूआं, डीवायएसपी इस्लाम खान बेसवा, डीवायएसपी महमूद खान, जाकिर खान कायमखानी वेलफेयर सोसायटी चूरू, सलीम खान ब्यावर, सूबेदार जाफर खान खेड़ी, जाकिर झुन्झुनूवाला, बहादुर खान डीडवाना, मुश्ताक खान महरामपुरा पूर्व प्रधान चाकसू, एडवोकेट अलादीन खान झोटवाड़ा, बशीर खान बीकानेर, शाहिद खान बीकानेर, कप्तान लियाकत खान किडवाना। इन लोगों ने हमें कोई वर्जन नहीं भेजा।

जिन्होंने वर्जन भेजे, उनके वर्जन निम्न हैं:-
---------------------------------------------------
"The report of Casualty from Army has not been received. On receipt of detail casualty report only we can take up necessary action as per regulation.
(सेना की ओर से हताहत की रिपोर्ट नहीं मिली है। हताहत की विस्तृत रिपोर्ट मिलने पर हम नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करेंगे)"

-परवेज़ हुसैन सेक्रेटरी 
सैनिक कल्याण बोर्ड झुन्झुनूं।
********************************

"हमें जिला कलेक्टर झुन्झुनूं ने बुलवाया था और लम्बी बात की और उन्होंने कहा कि मुझे इसकी समय पर खबर नहीं मिली थी, लेकिन फिर भी मुझे खेद है कि मैं आखरी विदाई में नहीं पहुंच सका। उन्होंने कहा कि शहीद सैनिक के नाम पर गांव की स्कूल का नामकरण करने एवं अन्य जो भी हो सकेगा जिला प्रशासन तत्परता से करेगा, ऐसा मैं आपको पुख्ता आश्वासन दे रहा हूँ। फिर भी हमने जिला प्रशासन की गलती और शहादत के अपमान पर क़ौम की नाराजगी से उन्हें अवगत करवा दिया है।"

-कर्नल शौकत खान संयोजक 
राजस्थान कायमखानी महासभा।
********************************

"एक सैनिक देश की रक्षा करते हुए अपनी जान कुरबान करता है और उसकी आखरी विदाई में जिले का कोई भी मुख्य अधिकारी नहीं पहुंचता है, तो यह बेहद अफसोसनाक बात है। यह शहादत का अपमान है और सरकार को चाहिए कि झुन्झुनूं जिले के कोलिंडा गांव के शहीद सैनिक मोहसिन खान कायमखानी की शहादत के अपमान पर जिलाधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई करे।"

-उम्मेद खान डीडवाना 
पूर्व सैनिक एवं पूर्व अध्यक्ष राजस्थान कायमखानी महासभा और सचिव कायम एज्यूकेशनल फाउंडेशन जयपुर।
********************************

"इस मामले में मुझे जो जानकारी है वो इतनी ही है कि शहीद की सूचना ज्यों ही घर वालों को मिली त्यों ही उनके परिवार के लोगों को सक्रिय होना चाहिए था। वे अपेक्षित सूचना नहीं कर पाए। जिला सैनिक अधिकारी के स्तर पर ही मुख्य कमी रही, शायद उन्हें नॉलेज बिल्कुल नहीं है। कलेक्टर के स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जो अपेक्षित थी। यदि किसी की सूचना आई भी होगी तो उन्होंने फोन उठाया भी नहीं होगा, उनका यह पक्ष बेहद कमजोर है। एक अगस्त को ईद भी थी, इस वजह से भी इस शहादत के आदर में खलल हुआ। उसके बाद जब सोशल मिडिया पर आलोचना हुई तब कलेक्टर की आंख खुली और उन्होंने कर्नल शौकत साहब (संयोजक राजस्थान कायमखानी महासभा) से सम्पर्क किया और एक डेलिगेशन से मिले। कलेक्टर ने प्रशासनिक ढिलाई को स्वीकार किया और भविष्य में अधिक सतर्कता का आश्वासन दिया तथा शहीद के नाम से स्कूल के नामकरण में पूरी मदद का आश्वासन भी दिया। यह सत्य है कि इस मामले में राणासर (चूरू) वाले शहीद सैनिक की शहादत के मुकाबले हर स्तर पर कमी रही।"

-जी खान, पूर्व संयोजक 
राजस्थान कायमखानी महासभा एवं 
पूर्व सदस्य राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग।
********************************

"जिस कौम का प्रथम विश्व युद्ध से लेकर अब तक देश के लिए शहादत देने में एक मिसाली योगदान रहा है। उस कौम के शहीद सैनिक की शहादत की अनदेखी करना बहुत बड़ा अपमान है।"

-शब्बीर हुसैन खान 
पूर्व महासचिव पीसीसी राजस्थान।
********************************

"शहीद वीर सैनिक मोहसिन खान ग्राम कोलिंडा को उनके जनाजे और सुपुर्दे खाक के आयोजन में सम्मान देने के लिए किसी जिलाधिकारी और राज्य सरकार के किसी भी प्रतिनिधि का नहीं पहुंचना देश पर कुर्बान हुए शहीद का अपमान ही नहीं, बल्कि इस हेतु बने राजकीय नियमों की घौर अनदेखी भी है। सम्बन्धित विभाग को संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी अपेक्षित है। शहादत की अनदेखी से सभी पूर्व सैनिकों और सैनिक संगठनों में आक्रोश व्याप्त है। यह हरकत सैन्य मनोबल को आघात पहुंचाने वाली है। जिस कायमखानी कौम के सैकड़ों लाडलों ने वतन पर अपनी जान कुर्बान की हो, उस कौम के लिए इस शहादत की यह अनदेखी दुखदायी है। सरकार को तुरन्त कदम उठाना चाहिए है। वीर शहीद को सम्मान भरा सैल्यूट।"

-सूबेदार अर्जुन सिंह राठौड़, संरक्षक 
एक्स सर्विसेज लीग जयपुर।
********************************

"शहीद ग्रेनेडियर मोहसिन खान की शहादत के बाद उनके अंतिम संस्कार (दफन के वक़्त) जिला प्रशासन झुन्झुनूं की तरफ से अवहेलना करना बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। कायमखानी शहीदों और पूर्व सैनिकों के मान सम्मान के मामले में झुन्झुनूं खासकर मलसीसर तहसील का नकारात्मक रवैया रहा है। प्रशासन को पता है कि चन्द लोग कुछ दिन शौर करके रह जाएंगे। कुछ जिम्मेदार हैं उनको बैठा कर बातचीत कर मामला रफा दफा कर देंगे। कौम के लोग जो महासभा के नाम पर दम भरते हैं, वो खुद एक अगस्त को कोलिंडा नहीं गए। हम सबको इसकी फिक्र होनी चाहिए। शहीद के नाम स्कूल इत्यादि का नामकरण अब इतना आसान नहीं है। यह सिर्फ भूल भुलय्या है। मोहसिन तो एक शहीद था जिसे दर किनार किया है, सरकारी आदेशनुसार साधारण पूर्व सैनिक की मृत्यु पर भी एडीएलआर लागू है। मेरा मानना है कि सीएम साहब को इसका संज्ञान लेना चाहिए। मामला रफा दफा नहीं होना चाहिए।"

-कप्तान लियाक़त अली खान धनूरी (रिटायर्ड) प्रेसिडेंट, वाॅइस ऑफ एक्ससर्विसमैन सोसाइटी, रजिस्टर्ड (एफिलिएटेड विद ऑल इंडिया वाॅइस ऑफ एक्ससर्विसमैन सोसाइटी।
********************************

"शहीद मोहसिन खान के अंतिम संस्कार में प्रशासन द्वारा जो लापरवाही की गई है, वह बहुत ही निंदनीय और बहुत ही बड़े दुख की बात है, कायमखानी समाज के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए। प्रशासन की यह औछी मानसिकता जो रही है उसकी समस्त जवाबदेही राजस्थान सरकार की भी बनती है। जिस शहीद के परिवार जनों को जो जख्म हुए हैं कम से कम हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी का भी दायित्व बनता है कि उस पर मरहम लगाने का काम करें, ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं हो। हमारे वीर शहीद ने देश के लिए कुर्बानी दी है और कायमखानी क़ौम का यह 206 वां शहीद है। बात मान सम्मान की है, शहीद होने के बाद जिसका बेटा गया है वो दोबारा नहीं आ सकता, लेकिन उनको सांत्वना देना व सैनिकों के परिवारों का हौसला अफजाई करना यह सरकार का दायित्व बनता है। जिसमें घौर लापरवाही रही है। जिले में शहीद की बॉडी आती है और कलेक्टर साहब बयान देते हैं कि मुझे अधिकृत सूचना नहीं मिली। अगर किसी भी हादसे की कलेक्टर को तुरन्त सूचना मिल जाती है, तालाब में बच्चे डूबने पर कलेक्टर मौके पर पहुंच जाते हैं, तब इस शहादत की सूचना क्यों नहीं मिली ? यह शहादत का अपमान है।"

-कामरेड उस्मान खान (सीपीएम) पूर्व प्रधान 
धौद पंचायत समिति (सीकर)
********************************

"शहीद मोहसिन खान को बार बार सैल्यूट। शहीद किसी एक जाति व धर्म का नहीं बल्कि सभी देशवसियों की धरोहर व सरताज होता है। देश का गौरव होता है। मोहसिन खान कायमखानी क़ौम का 206 वां शहीद है। कायमखानी क़ौम की परम्परा रही है कि देश की रक्षा के लिए हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहते हुए देश की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह नहीं करे। मोहसिन खान ने जान की कुर्बानी देकर कायमखानी क़ौम की परम्परा को दोहराया है। उन्हें सुपुर्द ए खाक करते वक़्त उच्च प्रशासनिक अधिकारी व जन प्रतिनिधियों का नहीं पहुंचना निंदनीय है। लेकिन जिला कलेक्टर झुन्झुनूं ने हमें बताया कि सूचना के अभाव में यह सब कुछ हुआ। इसका अफसोस जाहिर किया तथा कहा कि दुख की इस घड़ी में हम परिवार के साथ हैं। कायमखानी क़ौम द्वारा गांव कोलिंडा की सरकारी स्कूल का नाम शहीद के सम्मान में करने की मांग की गई। कलेक्टर साहब ने तमाम कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात स्कूल का नाम शहीद मोहसिन खान के नाम पर करने का आश्वासन दिया है।"

-उम्मेद खान गिडानिया 
जिला अध्यक्ष कायमखानी महासभा झुन्झुनूं।
********************************

"सैनिक मोहसिन खान की शहादत ने क़ौम और मुल्क को जो सुर्ख रूही बख्शी है, उसके लिए शहीद को सलाम। प्रशासन शहीद को सुपुर्द ए खाक करते वक़्त उचित सम्मान नहीं दे सका उसका देश प्रेमियों को एहसास है।"

-सिकन्दर खान नियाज़ी
महामंत्री, राजस्थान माइनॉरिटीज फोरम, जयपुर।
********************************

"देश के लिए अपनी जान कुरबान करने वाले शहीद के आखरी सफर में सरकार और प्रशासन से संवेदनशीलता अपेक्षित है। सरकार को इस सम्बन्ध में स्पष्ट नीति बनानी चाहिए, जिससे बिना किसी भेदभाव के हर शहीद को उसके हिस्से का मान सम्मान और उसके परिजनों को सम्बल मिले।"

-रजाक के. हैदर
एडवोकेट राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर।
********************************

"इसमें कोई सन्देह नहीं है कि झुन्झुनूं जिला प्रशासन ने शहीद मोहसिन खान कायमखानी की शहादत को लेकर घौर लापरवाही बरती है। जिसका सभी जगह विरोध हुआ है। लेकिन शहादत के इस अपमान के पीछे एक वजह हमारी क़ौम के सबसे पुराने संगठन राजस्थान कायमखानी महासभा का मजबूत नहीं होना भी है। इसलिए क़ौम को चाहिए कि स्थानीय छोटे मोटे संगठनों की बजाए महासभा को मजबूत करे, ताकि भविष्य में ऐसा नहीं हो। आप भीलवाड़ा को देखिए, वहाँ महासभा की जिला इकाई सक्षम व मजबूत है, यही वजह है कि वो हर मुद्दे पर पूरी क़ौम को एकजुटता के साथ खड़ी कर लेती है। इसलिए हर जिले में महासभा की इकाई को मजबूत करना आवश्यक है और यह जिम्मेदारी सम्बंधित जिले के सभी मोअज्जिज कायमखानी सरदारों की है।"

-मोहम्मद खान चित्तौड़गढ़
महासचिव, कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट, जयपुर।
********************************

"कुछ तुमको भी अजीज़ है अपने सभी उसूल,
कुछ हम भी इत्तेफाक से जिद के मरीज़ हैं !!
ऐसा नहीं कि पाव में छाले नहीं रहे,
तकलीफ है कि देखने वाले नहीं रहे !!"

-शौकत खान झारिया 
एडिशनल कमिश्नर रिटायर्ड।
********************************

"देश की सुरक्षा के लिए शहीद हुए मोहसिन खान जी की शहादत पर पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा था, मगर झुन्झुनूं जिला प्रशासन कुम्भकर्ण की नींद सो रहा था। मेरी राजस्थान सरकार से गुजारिश है कि उन सभी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करे, जिन्होंने लापरवाही बरती है और खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत साहब और जिला प्रशासन के लोग शहीद के परिजनों से माफी मांगें।"

-अय्यूब खान कायमखानी बीकानेर 
वरिष्ठ भाजपा नेता एवं 
प्रदेश सह संयोजक मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, राजस्थान।
********************************

"शहीद मोहसिन खान कायमखानी की आखरी विदाई में शामिल ना होकर, जिला प्रशासन झुन्झुनूं ने मोहसिन खान की शहादत के साथ उन सभी वीर सैनिकों का अपमान किया है जो देश की रक्षा के लिए सीमा पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मैं गहलोत सरकार से मांग करता हूँ कि झुन्झुनूं जिला कलेक्टर एवं एसपी को तुरन्त प्रभाव से हटाएं और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करें।"

-इमरान कायमखानी
युवा जिलाध्यक्ष राजस्थान कायमखानी महासभा भीलवाड़ा। 
********************************

"शहीदों के मामले में स्थानीय प्रशासन की बेरुखी से क़ायमखानी शहीद परिवार दुखी हैं और क़ायमखानी क़ौम में इस मुद्दे पर सरकार से काफी नाराजगी है। जिस सरकार को बनाने में अहम भूमिका निभाने व एकतरफा वोट के बाद भी शहीदों के साथ ऐसे व्यवहार से आमजन राज्य सरकार से नाराज है। क़ायमखानी यूथ ब्रिगेड सरकार के पटरी पर लौटते ही मुख्यमंत्री से मिलकर इस बाबत अपनी नाराजगी प्रकट करेगी।"

-जाबिर खान किरड़ोली 
कायमखानी यूथ ब्रिगेड सीकर।
********************************

"मीडिया ने मुल्क के लिए कुर्बान होने वालों में भी मजहब देखना शुरू कर दिया है। अगर शहीद सैनिक एक खास मजहब का है तो उसे मीडिया सैनिक की मृत्यु लिखता या बोलता है, जबकि अन्यों के लिए सैनिक शहीद हुए की खबर आती है। उसी के नतीजे में शहीद मोहसिन खान की शहादत को जिला प्रशासन ने भी दरकिनार किया है। सरकार को जिम्मेदार अफसरों को अतिशीघ्र निलम्बित करना चाहिए, ताकि आने वाले दिनों में किसी और शहीद का अपमान करने की गलती प्रशासन ना करे।"

-डाॅक्टर असलम नूर खान कायमसर (फतेहपुर)
********************************

"इस तरह शहीदों का अपमान होगा तो हमारी विश्व प्रसिद्ध राष्ट्र भक्त सेना का मनोबल गिरेगा तथा भारतीय इतिहास में एक मुख्य या महत्वपूर्ण पहचान रखने वाली कायमखानी कौम अपने आप को ठगा सा महसूस करेगी। शहीद मोहसिन खान की शहादत के अपमान में जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की मैं सख्त लफ्जों में मजम्मत करता हूँ।"

-हवलदार असलम खान अलीपुरा 
जिलाध्यक्ष कायमखानी विकास संस्थान अजमेर।
********************************
(09-08-2020)


--------------------------------------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए। 
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
A/c no. 613900 55000 00252 
IKRA PATRIKA 
IFSC:- PUNB 0613900
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR. 
***************************

©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
-------------------------------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
09602992087, 09414361522

©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved.

Comments

Popular posts from this blog

झुंझुनूं में रीटा चौधरी को कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनाने पर जबरदस्त रोष

चित्तौड़गढ़ अन्जुमन स्कूल में किया मुस्लिम शिक्षकों का सम्मान

कुरैशी समाज की नो दहेज, नो गार्डन, नो डिनर मुहिम के तहत सादगी से हुई शादी