रहड़ ग्राम पंचायत के सरपंच सलीम खान कायमखानी का किया सम्मान
रहड़ ग्राम पंचायत के सरपंच सलीम खान कायमखानी का किया सम्मान
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कायमखानी महासभा की भीलवाड़ा इकाई ने घर पर जाकर किया सम्मान
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कायमखानी महासभा की भीलवाड़ा इकाई ने घर पर जाकर किया सम्मान
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सरपंच सलीम खान का एक ऐसा परिवार है, जिनके सदस्य दो ग्राम पंचायतों और शाहपुरा नगर पालिका से निर्वाचित पदाधिकारी रहे हैं, जिनके बारे में हर उस युवा को पढना चाहिए जो राजनीति के मैदान में उतरा हुआ है ?
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रहड़/शाहपुरा (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा पंचायत समिति की रहड़ ग्राम पंचायत के चौथी बार सरपंच निर्वाचित हुए सलीम खान कायमखानी का गत दिनों उनके निवास पर जाकर सम्मान किया गया। यह सम्मान राजस्थान कायमखानी महासभा की भीलवाड़ा जिला इकाई ने किया। जनवरी के अन्तिम सप्ताह में हुए चुनाव और मतगणना के बाद वे चौथी बार यहाँ के सरपंच निर्वाचित हुए थे। कायमखानी महासभा उनके सम्मान में बड़ा आयोजन करने की योजना बना चुकी थी, लेकिन कोरोना महामारी और लाॅकडाउन की वजह से यह आयोजन रद्द करना पड़ा और फिर गत दिनों उनके निवास पर जाकर सम्मान किया गया।
यहाँ की कायमखानी महासभा की एक परम्परा है कि वो हर निर्वाचित पदाधिकारी, रिटायर्ड होने वाले कायमखानी और क्षेत्र से गुजरने वाले किसी भी कायमखानी राजनेता व अधिकारी का सम्मान करती है। ऐसी परम्परा और अपनापन राजस्थान की अन्य जिला इकाइयों में कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। इसी कड़ी में सरपंच सलीम खान का सम्मान किया गया।
रहड़ ग्राम पंचायत के चौथी बार सरपंच निर्वाचित हुए सलीम खान कायमखानी इससे पहले तीन बार उप सरपंच भी रहे हैं। उनके वालिद साहब भूरे खां जी कायमखानी भी यहाँ के सरपंच और शाहपुरा पंचायत समिति के उप प्रधान रहे हैं। यह सब तब हुआ है, जब इस ग्राम पंचायत के करीब तीन हजार वोटों में से 100 वोट भी मुस्लिम नहीं हैं। यानी यह पंचायत कोई मुस्लिम बाहुल्य नहीं है। इनका गांव भीमपुरा नाहर सागर है। इनका परिवार करीब पांच दशक से क्षेत्र की जन प्रतिनिधि के तौर पर सेवा कर रहा है।
सभी क़ौमों में इनके परिवार की अच्छी पकड़, पहचान व आदर सम्मान है। यही वजह है कि इनके परिवार के सदस्य अपनी पंचायत के बाहर भी सरपंच निर्वाचित हुए हैं। सलीम खान के चाचा मरहूम शौकत खान कायमखानी पड़ौस की डोरिया ग्राम पंचायत से दो बार सरपंच निर्वाचित हुए थे, जबकि इस ग्राम पंचायत के करीब साढे तीन हजार वोटों में से दो वोट ही मुस्लिम के थे और वो भी शौकत खान व उनकी पत्नी का !
इनके दूसरे चाचा मरहूम हाजी उम्मेद खां जी दो बार शाहपुरा नगर पालिका के पार्षद और एक बार वाइस चेयरमैन रहे हैं। वे सहकारी समिति डोरिया के चेयरमैन भी रहे हैं। उम्मेद खां जी के पुत्र बरकत खान क्रय विक्रय सहकारी समिति शाहपुरा के चेयरमैन रहे हैं। सलीम खान के भाई रमजान खान की पत्नी चान्द बेगम पंचायत समिति शाहपुरा की सदस्य रही हैं। यह एक गौरो फिक्र करने वाली बात है कि भूरे खां जी के दो भाई, एक बेटा, एक बहू, एक भतीजा यानी छह लोग दो ग्राम पंचायतों, दो सहकारी समितियों, नगर पालिका और पंचायत समिति के निर्वाचित प्रतिनिधि रहे हैं। वर्तमान में भूरे खां जी के पुत्र सलीम खान अपने परिवार की परम्परा व सेवाभावी चरित्र को आगे बढा रहे हैं।
20 अगस्त को राजस्थान कायमखानी महासभा के पूर्व प्रदेश युवाध्यक्ष एवं कायमखानी कॉर्डिनेशन सेवा संस्थान भीलवाड़ा के अध्यक्ष इस्लाम खान (पूर्व प्रधान), भंवर खान पूर्व चेयरमैन सीसीबी, कायमखानी वेलफ़ेयर ट्रस्ट जयपुर के महासचिव मोहम्मद खान चित्तौड़गढ़, राजस्थान कायमखानी महासभा जिला भीलवाड़ा के अध्यक्ष सांवत खान पूर्व सरपंच राक्षी, युवा कायमखानी महासभा के जिलाध्यक्ष इमरान कायमखानी, वरिष्ठ समाजसेवी बरकत खान, रमजान खान, इक़बाल खान (पूर्व युवा प्रदेश उपाध्यक्ष कायमखानी महासभा एवं पूर्व पार्षद) ने क़ौम के अन्य मोअज्जिज लोगों की मौजूदगी में साफा बांधकर, शॉल ओढ़ाकर, माल्यार्पण कर, गुलदस्ते व स्मृति चिन्ह भेंट कर सरपंच सलीम खान को सम्मानित किया तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना की और उन्हें शुभकामनाएं दी।
सरपंच सलीम खान कायमखानी युवावस्था से ही जागरूक, मिलनसार, जन हितैषी और सेवाभावी रहे हैं तथा आपने अपने इसी व्यक्तित्व की पूंजी और पुरखों की बनाई हुई साख के बल पर जनता का दिल लगातार जीता है। इसीलिए जनता आपको लगातार चुनाव जीतवा रही है। इनकी पंचायत कोई मुस्लिम बाहुल्य नहीं है, लेकिन अपने सेवाभावी चरित्र और सभी के सुख दुःख में शरीक रहने की पारिवारिक परम्परा व सीख ने उन्हें इस मकाम तक पहुंचाया है। वे गंगा जमुनी तहजीब (मिलीजुली संस्कृति) के पैरोकार हैं और यही उनकी पूंजी है।
नई पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व से सीख प्राप्त करनी चाहिए, जो आज गैर जरूरी कट्टरपंथ की ओर बढती जा रही है तथा नई पीढ़ी को अपने पुरखों की मिलीजुली संस्कृति वाली परम्पराओं को कायम रखते हुए अपने जीवन को रोशन करना चाहिए। सलीम खान और उनका परिवार उन युवाओं के लिए खासतौर पर प्रेरणादायक है, जो राजनीति के मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे हैं।
(23-08-2020)
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