एक बुरी खबर : जी खान साहब का इन्तकाल 😭

एक बुरी खबर : जी खान साहब का इन्तकाल 😭
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आज इकरा पत्रिका के एक और सरपरस्त दुनिया से चले गए
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सुबह-सुबह पानी पीने से भी पहले एक बुरी खबर सुनने को मिली, जी खान साहब दुनिया में नहीं रहे। उनके परिजनों के लिए तो यह खबर व पीड़ा दर्दनाक है ही, मेरे लिए भी बहुत पीड़ादायक है। क्योंकि मेरा दिली रिश्ता उनके साथ था। वे मुझे एक दादा, बाप, बड़े भाई, दोस्त और गुरू की तरह गाइड करते थे। उनका सैकड़ों बार मुझे कहा गया यह जुमला "फारूक साहब आप मुझे असलम व सलीम के बराबर लगते हो।" और मैं कहता था कि "यकीनन, लेकिन बराबर नहीं ज्यादा, क्योंकि मुझे तो लगता है कि आप अपने सगे पुत्रों से ज्यादा मुझे चाहते हो।"


वे इकरा पत्रिका के सरपरस्त थे, जो आज सुबह हमें छोड़कर चले गए। इकरा पत्रिका ने आज सुबह एक सरपरस्त और खो दिया। इससे पहले इसी साल की शुरुआत में हमारे सरपरस्त आईजी लियाकत खान साहब का इन्तकाल हो गया था और उनसे पहले शब्बीर भाईजान (पूर्व अध्यक्ष मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी और फाउंडर मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी जोधपुर), फिर अब्दुल अजीज बहलीम साहब जोधपुर (लीडर मुस्लिम लीग) और कुछ दिनों पहले सीए अलाद्दीन खान साहब (सीकर) का इन्तकाल हो गया और आज हमें हमारे सरपरस्त जी खान साहब भी छोड़कर इस दुनिया से रुख़सत हो गए।


जी खान साहब राजस्थान कायमखानी महासभा के संयोजक रहे हैं और राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भी रहे हैं। कायमखानी क़ौम को उन्होंने अपने टीम वर्क व क़ौम के सहयोग से कायमखानी गेस्ट हाउस (जयपुर) और ददरेवा (चूरू) स्थित नवाब कायम ख़ान स्मारक दिया है। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अगर जी खान साहब नहीं होते तो न जयपुर में कायमखानी गेस्ट हाउस बनता और ना ही ददरेवा का नवाब कायम ख़ान स्मारक बनता। 


जी खान साहब के साथ आखरी सफर आईजी लियाकत साहब की फातिहा में नूआं जाने का किया था, उनके साथ कई सफर और मीटिंग की हैं। बहुत ही सराहनीय यादगार हैं, जिन्हें कभी बाद में लिखूंगा। खासतौर पर शहीद सीआई फूल मोहम्मद साहब के लिए निकाली गई "न्याय यात्रा" बहुत यादगार है। हम जी खान साहब को दादोजी और बापू जी के नाम से संबोधित करते थे और यह दोनों ही आदरपूर्वक नाम मैंने दिए थे। जिनमें "बापू जी" तो बहुत फेमस हो गया और बहुत से लोग उन्हें आदर से बापू जी ही कहते हैं।

फेसबुक पर सराहनीय और पाॅजिटिव पोस्ट डालना उनकी जिन्दादिल का सबूत है। वे पूरे लाॅकडाउन में ऐसी-ऐसी पोस्ट डालते रहे, जिससे लोगों की हिम्मत बढे और वे कुछ पल हंसने को मजबूर हो जाएं। आखरी पोस्ट उन्होंने 19 अगस्त को सुबह सात बजकर दो मिनट पर डाली थी, जो एक वीडियो है। (जिसे इस लिंक में आप जरूर देखिए https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1217808461950937&id=100011653846302 यकीनन आप हंसने को मजबूर हो जाएंगे। इस वीडियो पर मैंने जो कमेन्ट किया और उसका उन्होंने जो जवाब दिया, वो भी स्क्रीन शाॅट के तौर पर यहाँ अटैच है, उसे भी जरूर पढिए)। इसके अगले दिन 20 अगस्त को जी खान साहब को अटैक आया था और वे अस्पताल में भर्ती थे। आज सुबह-सुबह वे इस दुनिया से रुख़सत हो गए। उन्हें झोटवाड़ा (जयपुर) कब्रिस्तान में आज एक सितम्बर को दोपहर दो बजे सुपुर्द ए खाक किया जाएगा।


अल्लाह तआला से दुआ है कि वो अपने तमाम नबियों, वलियों व महबूब बन्दों और खासतौर पर यह मुहर्रम का महीना है, इसलिए शौहदा ए करबला के सदके व तुफैल में जी खान साहब की मग्फिरत करे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे और पूरे ख़ानदान को सब्र ए जमील अता करे, आमीन।🤲
(01-09-2020)
😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।



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