आत्म निर्भर भारत ?

आत्म निर्भर भारत ?
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आलू 40, लोकी 60, हरी मिर्च और टमाटर 80 रूपये किलो !
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना लाॅकडाउन की शुरुआत में आत्म निर्भर भारत की बात कही, जिसे उन्होंने कई बार दोहराया भी है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि देश का कोई नागरिक यह चाहेगा कि देश आत्म निर्भर नहीं बने। लेकिन देश आत्म निर्भर कैसे बनेगा ? ईमानदारी, देश से वफादारी और कठोर मेहनत से या सिर्फ ज़बानी जमाखर्च के लफ्फाजी मन्त्रों से ? यकीनन ईमानदारी, देश से वफादारी और कठोर मेहनत से ही देश आत्म निर्भर बन सकेगा, ज़बानी जमाखर्च के लफ्फाजी मन्त्रों से तो नहीं।



हमारे देश का मजदूर और किसान दिन रात ईमानदारी से कठोर मेहनत भी करता है और देश का वफादार भी है। फिर भी देश का आत्म निर्भर बनना तो दूर की बात उसके बच्चों का पेट भी नहीं भरता है, जीवन जीने की अच्छी सुविधाओं की तो आप बात ही छोड़ दीजिए। अब यह भी एक सच्चाई है कि देश में 90 फीसदी से अधिक लोग मजदूर व किसान हैं, यानी देश की अधिकतर जनता ईमानदारी से कठोर मेहनत करती है और देश की वफादार भी है, तो फिर देश आत्म निर्भर क्यों नहीं बना ? 


जवाब सीधा सा है 10 फीसदी बचे हुए लोगों में बहुत से लोग चोर, लुटेरे और देश के गद्दार हैं। यह लुटेरे लोग कठोर मेहनत भी बेईमानी के लिए करते हैं, इनका एक ही काम है जनता का शोषण करना और लूट के माल को जमा करना। इनमें कोई राजनेता की शक़्ल में है, तो कोई अधिकारी या कर्मचारी की शक़्ल में, तो कोई व्यापारी की शक़्ल में, तो कोई पत्रकार, वकील व समाजसेवी की शक़्ल में है, तो कोई सन्त महात्मा की शक़्ल में, तो कोई एनजीओ व मानवाधिकार कार्यकर्ता की शक़्ल में है। यह लोग दशकों से देश को लूट रहे हैं और आत्म निर्भर तो दूर की बात देश की जड़ों को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं।


कोरोना लाॅकडाउन के दौरान अप्रैल मई में सब्जियां इतनी सस्ती हो गई थी कि किसानों की लागत नहीं निकल रही थी, तो बहुत से किसानों ने खड़ी फसल पर ट्रेक्टर चला दिए। टमाटर, हरी मिर्च और दूसरी सब्जियों की फसल को जमीन में दबा दिया, क्योंकि उन्हें थोक में यह सब्जियां सौ रूपये से लेकर पांच सौ रूपये क्विंटल बेचने को मजबूर होना पड़ रहा था। देश का किसान तब चौपट हो गया था। उन दिनों जयपुर में टमाटर पांच रूपये किलो, लोकी दस की तीन किलो, हरी मिर्च व आलू दस के एक किलो गली गली में बिक रहे थे। अगस्त-सितम्बर में आलू 40 रूपये किलो, लोकी 60, हरी मिर्च और टमाटर 80 रूपये किलो बिकने लग गया है। सवाल है ऐसा क्यों हुआ और यह पैसा कहाँ जा रहा है ?




कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार, लापरवाही, कालाबाजारी आदि की वजह से यह सब हुआ है। किसानों को बिचौलियों, पूंजीपतियों और अधिकारियों ने लूट लिया है। जरा सोचिए, जिस किसान ने फसल पर दो रूपये किलो में आलू व प्याज थोक में बेचे थे और 10 रूपये किलो लहसुन बेचा था, वो आज वापसी में 40 रूपये किलो आलू, 30 रूपये किलो प्याज और 120 रूपये किलो लहसुन खरीदने को मजबूर है, क्यों ? जवाब किसी के पास नहीं है, क्योंकि अधिकतर लोग जात, धर्म और तथाकथित राष्ट्रवाद की भट्टी में खुद के पांव देकर सत्ता की हाण्डी पका रहे हैं। फिर कैसे बनेगा देश आत्म निर्भर ? 
(12-09-2020)
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