काजी सय्यद अय्यूब साहब ; एक हंसमुख और खिदमत ए खल्क वाले शख्स का दुनिया से जाना

काजी सय्यद अय्यूब साहब ; एक हंसमुख और खिदमत ए खल्क वाले शख्स का दुनिया से जाना
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लाडनूं (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। साम्प्रदायिक सौहार्द्र और गंगा जमुनी तहजीब का सबक पढाते हुए इस दुनिया से एक और शख्स भी विदा हो गया। यह शख्स थे नागौर जिले के लाडनूं इलाके के शहर काजी सय्यद अय्यूब साहब। जिनका 16 सितम्बर को बीकानेर में इन्तकाल हो गया और 17 सितम्बर की सुबह उन्हें लाडनूं की दरगाह उमराव शरीफ़ कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। वे कुछ दिनों से बीमार थे और बीकानेर के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

काजी अय्यूब साहब जैसे आदमी आज की इस नफरती दुनिया और बढते साम्प्रदायिक माहौल के बीच बहुत कम हैं। वे एक हंसमुख शख्सियत के धनी थे। हर बात को गम्भीरता से सुनना और मुस्कुराते हुए कहना उनकी एक खास आदत थी। वे पूरी जिन्दगी क़ौमी एकता कहें या साम्प्रदायिक सौहार्द्र कहें या गंगा जमुनी तहजीब कहें, उसके लिए जिये। यानी उन्होंने लोगों की खिदमत की और दिलों को जोड़ने का काम किया। लाडनूं इलाके में शायद ही कोई सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम ऐसा हुआ हो, जहाँ काजी अय्यूब साहब को नहीं बुलाया गया हो। हर समाज के लोग उनसे मुहब्बत करते थे और अपने कार्यक्रमों में ससम्मान उन्हें आमन्त्रित करते थे।


उनसे लोगों की मुहब्बत देखिए कि ज्यों ही सोशल मीडिया के जरिए यह खबर 16 सितम्बर की रात को वायरल हुई कि काजी अय्यूब साहब का इन्तकाल हो गया है। लोगों ने उनके बारे में जो लफ्ज़ लिखकर खिराज ए अकीदत पेश की, वे लफ्ज़ यह साबित करते हैं कि वे एक मिसाली शख्सियत के मालिक थे। इकरा पत्रिका से उनका गहरा लगाव था, यह हमारे लिख फख्र की बात है। उनके इन्तकाल की खबर लाडनूं कस्बे में फैली तो लोगों के चेहरे पर उदासी छा गई, क्योंकि इस कस्बे से वो शख्स दुनिया से चला गया, जो सबसे मुहब्बत करता था। जब अगले दिन उनको दफन किया, तो लाडनूं के तमाम बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ था, व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बन्द रखे। यह मुहब्बत थी गंगा जमुनी तहजीब की, यह प्रभाव था साम्प्रदायिक सौहार्द्र व भाईचारे का।


यहाँ के तेली रोड बाजार, शहरिया बास, बड़ा बास, जावा बास आदि मोहल्लों की दुकानें व्यापारियों ने स्वेच्छा से बन्द कर काजी साहब को खिराज ए अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश की। काजी अय्यूब साहब शहरिया बास मस्जिद के इमाम भी थे। पूरी जिन्दगी इसी मस्जिद में इमामत की और लोगों की खिदमत कर उन्हें भाईचारे का पैगाम दिया। वे हर किस्म के मजहबी कट्टरपंथ, पाखण्ड और अन्धविश्वास से दूर थे और लोगों को इसके नुकसान के बारे में बताते थे। इस बार के नवाब कायम ख़ान डे (14 जून 2020 को) लाडनूं कार्यक्रम में भी वे शरीक हुए थे। इस कार्यक्रम में अजमेर डिविजन के एडिशनल कमिश्नर सत्तार खान साहब और कई अधिकारी व राजनेता भी शरीक हुए थे। इस कार्यक्रम में ब्लड डोनेशन कैम्प भी था, कार्यक्रम की फोटो सहित खबर थार न्यूज़ और इकरा पत्रिका में प्रकाशित भी हुई थी।

काजी अय्यूब साहब के इन्तकाल से इस इलाके में ख़ला (खालीपन) पैदा हो गया है, खुदा से दुआ है कि वो अपने तमाम नबियों, वलियों और महबूब बन्दों के सदके व तुफैल में काजी साहब की मग्फिरत करे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे और पूरे ख़ानदान को सब्र ए जमील अता करे और इस ख़ला को पुर (भरे) करे, आमीन।
(17-09-2020)
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