जी खान साहब को समर्पित करते हुए "कायम सहकार योजना" को क्रियान्वित करने की योजना

जी खान साहब को समर्पित करते हुए "कायम सहकार योजना" को क्रियान्वित करने की योजना 
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जयपुर/भीलवाड़ा (थार न्यूज़- इकरा पत्रिका)। राजस्थान कायमखानी महासभा के पूर्व संयोजक और सहकारिता (को-ऑपरेटिव) क्षेत्र में लम्बा अनुभव रखने वाले जी खान साहब सितम्बर की पहली तारीख़ को दुनिया छोड़कर चले गए। वे को-ऑपरेटिव सर्विस के अधिकारी थे और एडिशनल रजिस्ट्रार पद से रिटायर्ड हुए थे। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और टीम वर्क से कायमखानी क़ौम को ददरेवा स्थिति नवाब कायम ख़ान स्मारक और जयपुर में कायमखानी गेस्ट हाउस बनाकर दिया। साथ ही कायमखानी क़ौम को राजस्थान में ओबीसी आरक्षण दिलवाया। उनकी एक तमन्ना थी कि कायमखानी क़ौम में एक को-ऑपरेटिव सोसायटी (सहकारी समिति) स्थापित हो, जो क़ौम का हर क्षेत्र में विकास करे।


इसकी शुरुआत की तैयारी भी एक तरह से मुकम्मल हो गई थी। लेकिन कुछ बरसों पहले जी खान साहब की ब्रेन सर्जरी होने की वजह से यह योजना अटक गई थी। पूरी तरह से तंदरुस्त होने के बाद उन्होंने अपनी भीलवाड़ा टीम को इसकी शुरुआत करने के लिए कहा, ताकि एक जिले में सफल होने के बाद इस कायम सहकार योजना को पूरे राजस्थान में फैलाया जाए। भीलवाड़ा कायमखानी महासभा की टीम ने इस योजना को साकार करने के लिए दो तीन साल से विभिन्न स्तर पर इसकी रूपरेखा बनाई और इस साल यानी 2020 में इसे क्रियान्वित करके क़ौम के सामने पेश करने की तैयारी कर ली थी। लेकिन इस साल की शुरुआत में आई कोरोना महामारी के कारण अभी तक यह योजना अमलीजामा नहीं पहन सकी।


लाॅकडाउन खुलने के बाद सितम्बर-अक्टूबर में इस योजना को फाइनल कर क्रियान्वित करने की तैयारी हुई, इस बीच एक सितम्बर को जी खान साहब का इन्तकाल हो गया और एक बार फिर यह योजना अटक गई। अब भीलवाड़ा इलाके के क़ौम के फिक्रमंद कायमखानी सरदारों ने इस योजना को जी खान साहब को समर्पित करते हुए क्रियान्वित करने की तैयारी की है, ताकि जी खान साहब की कायमखानी सहकार योजना वाली दिली तमन्ना पूरी हो सके। अभी यह योजना सिर्फ भीलवाड़ा इलाके के कायमखानियों के लिए ही शुरू होगी और इसकी सफलता के बाद इसे अन्य जिलों में भी क्रियान्वित किया जाएगा।

सहकार (को-ऑपरेट) क्या है ?
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सहकार (को-ऑपरेट) के बारे में सबको पता है। इसका सीधा सा मतलब है कि एक दूसरे के सहयोग से किया गया कोई संगठित काम। जिसका लाभ और हानि सभी सहयोगियों को मिले। अमूमन सहकारिता में कभी हानि नहीं होती है, लाभ ही होता है। सहकारिता का एक नारा होता है, "एक सबके लिए, सब एक के लिए।" यानी एक आदमी की योग्यता, क्षमता, कार्य कुशलता, संसाधन आदि का सबको लाभ मिले और इसी तरह से सबका एक को लाभ मिले। यानी सब मिलकर काम करें और समाज व देश का हर क्षेत्र में विकास करें। इसको इस उदाहरण से भी समझा जा सकता है कि 20 किलो वजन की एक पोटली एक आदमी आसानी से उठा सकता है, लेकिन 100 किलो की नहीं, परन्तु चार आदमी मिलकर 100 किलो वजन की पोटली को आसानी से उठा सकते हैं। यही सहकार है।

कोरोना महामारी से दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी है। अर्थ व्यवस्था, शैक्षणिक व्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था सब में बहुत बड़ा बदलाव आ चुका है। रोजगार, व्यापार और शिक्षा सब चौपट हो चुके हैं। ऐसे में सहकारिता ही एक ऐसा उपाय है जो बढती बेरोजगारी को रोक सकता है, जो चौपट होते व्यापार को बढावा दे सकता है। जो महंगी और आधुनिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर सस्ते में दे सकता है। बस इसके लिए एकजुट होकर सहकारिता के क्षेत्र में कदम बढाना है।

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यहाँ हमें इन्सानियत के मसीहा आखरी पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहि वसल्लम के उस पवित्र आदेश पर गौर करना चाहिए, जो उन्होंने अपनी उम्मत (अनुयायियों) को दिया है, "तुम ज़मीन वालों पर रहम करो, आसमान वाला (खुदा) तुम पर रहम करेगा।" इस पवित्र आदेश (हदीस) की व्याख्या आप जैसे करना चाहो आपकी मर्जी है, लेकिन इसकी एक व्याख्या यह भी हो सकती है कि जिसके पास दूसरों पर रहम (दया) करने का सामान (ब्रेन पाॅवर, मनी पाॅवर और मैन पाॅवर) होगा वही रहम कर सकेगा और यह सामान हर आदमी के पास होता है, बस फर्क इतना है कि किसी के पास यह तीनों सामान होते हैं और किसी के पास दो या एक। लेकिन जब सभी लोग एकजुट होकर सहकारिता के फार्मूले पर दूसरों पर रहम करने लग जाएं, तो समाज व देश को पूरी तरह से हर क्षेत्र में विकसित व सम्पन्न बनाया जा सकता है, यही सहकार या सहकारिता है।
(22-09-2020)
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Comments

  1. बेशक
    "जी खान साहब" के द्वारा बताई गई कोऑपरेटिव सोसाइटी (सहकारी समितियो की योजना) को हर स्तर पर मुस्लिम बाहुल्य वह कायमखानी बाहुल्य क्षेत्रों में प्रयास करके गठन किया जाए तो, यही "जी खान साहब" को हम सब की तरफ से सच्ची खिराजेअकीदत (श्रद्धांजलि) होगी ......
    वैसे समाज के लिए "जी खान साहब" ने वह काम कर दिखाए हैं, वह हमें मरते दम तक राह दिखाते रहेंगे........ इंशा अल्लाह

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