आइये दीपावली और ईद मिलकर मनाएं !
आइये दीपावली और ईद मिलकर मनाएं !
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। विविधता में एकता वाला देश भारत, जिसे विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहा जाता है। हम ख़ुशनसीब हैं कि खुदा (ईश्वर) ने हमें इस मिट्टी में पैदा किया है। गंगा जमुनी तहजीब यानी मिलीजुली संस्कृति वाले इस देश में कोई कमी नहीं है, यहाँ सब कुछ ऊपर वाले ने दे रखा है। लेकिन कुछ लोगों को यह हंसता खेलता और गंगा जमुनी तहजीब की अलख जगाता मुल्क पसंद नहीं है। वे नफरत के जरिए सत्ता में रहना चाहते हैं और अपनी जहरीली विचारधारा के अनुसार मुल्क को चलाना चाहते हैं।
पिछले कुछ बरसों में सद्भाव का ताना बाना कमजोर हुआ है, लोगों में दूरियां बनी हैं। बिना बात लोग भड़काऊ मुद्दों पर एक दूसरे की जान लेने पर उतारू हो जाते हैं। इसलिए आज मुल्क को सबसे ज्यादा जरूरत सद्भाव की है, गंगा जमुनी तहजीब को मजबूत करने की है। इसके लिए एक देशव्यापी अभियान चलाने की जरूरत है। अब सवाल यह है कि इस अभियान को कैसे चलाया जाए ? यह अभियान एक दूसरे के त्यौहारों को मनाने, उनके सुख दुःख में शरीक होने से चलेगा। इसके लिए जरूरी नहीं है कि कोई केन्द्रीय नेतृत्व हो, कोई संगठन बने या किसी व्यक्ति विशेष की छत्रछाया में इसकी शुरुआत हो। यह अभियान हर व्यक्ति, हर परिवार अपने स्तर पर चला सकता है।
बहुत से लोग देश में हैं जो एक दूसरे के त्यौहारों पर शरीक होते हैं और उन्हें मिलकर मनाते हैं। इसलिए हम इस मिलीजुली संस्कृति को मजबूत करें, यह इस मुल्क की, यहाँ बसने वाली अवाम की सबसे बड़ी खिदमत होगी। इसके लिए जरूरी है कि हम दीपावली, ईद, क्रिसमस, गुरु नानक जयन्ती जैसे त्यौहार मिलकर मनाएं। इसको विशेष तौर पर इस दीपावली को मना सकते हैं, इस वर्ष दीपावली का त्यौहार संयोग से हिजरी सन के रबीउल अव्वल महीने आ रहा है। हिजरी सन् के इस पवित्र महीने की मुसलमानों में बड़ी अहमियत है। इस महीने की 12 तारीख को आखरी पैगम्बर हज़रत मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था। उनके जन्म दिन को पूरी दुनिया का मुसलमान ईद मीलादुन्नबी के तौर पर मनाता है।
दीपावली मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्र जी (राम जी) के लंका फतह कर अयोध्या आने की खुशी में मनाई जाती है। उर्दू के मशहूर शायर अल्लामा डाॅक्टर मुहम्मद इकबाल साहब ने श्रीरामचन्द्र जी को इमाम ए हिन्द कहा था, यानी हिन्दुस्तान का सरदार और रहबर। श्रीरामचन्द्र जी ने "अन्याय, अत्याचार और नफरत के खिलाफ जद्दोजहद करने की तालीम दी थी। आज उस तालीम पर अमल करने और अपने दिलो दिमाग से नफरत को उखाड़ फेंकने की जरूरत है।" हजरत मुहम्मद साहब के एक पवित्र कथन (हदीस) का मतलब है "तुम ज़मीन वालों पर रहम करो, आसमान वाला तुम पर रहम करेगा।" यह हदीस इकरा पत्रिका के सम्पादकीय पेज पर ऊपर ही ऊपर शुरू से ही प्रकाशित की जा रही है।
जमीन पर इन्सान, पशु, पक्षी, पहाड़, नदियाँ, पेड़ पौधे, समन्दर, खनिज सब हैं और सब अल्लाह की मखलूक (पैदा की हुई चीज) हैं। रहम का मतलब है इन्सान किसी भी इन्सान से भेदभाव और नफरत नहीं करे। सभी को अपना समझे, सबके साथ अच्छा बरताव करे, चाहे वो किसी भी जाति, पंथ, मस्लक, इलाके का हो और उसका रंग रूप व भाषा भी कैसी ही हो। इसके अलावा इन्सान अपनी जायज जरूरत के मुताबिक अल्लाह की दूसरी मखलूकों का इस्तेमाल करे, ताकि पर्यावरण भी सुरक्षित रहे !
महबूब ए इलाही आखरी पैगम्बर हज़रत मुहम्मद साहब का यह हुक्म है एक लाइन का, लेकिन बड़ा विस्तृत और गहराई वाला है। इसलिए आएं और इस अभियान से जुड़ें और इस अभियान के जरिए सद्भाव को मजबूत करें, ताकि मुल्क मजबूत हो और यहाँ से नफरत के बादल छंट जाएं तथा यहाँ की गंगा जमुनी तहजीब वाली खुशबू पूरी दुनिया को महका दे।
(08-11-2020)
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