राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनाव में दो सियासी पार्टियां बहुत बड़ा उलट फेर करेंगी !
राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनाव में दो सियासी पार्टियां बहुत बड़ा उलट फेर करेंगी !
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इनमें एक पूर्व मुख्यमन्त्री वसुंधरा राजे की पार्टी होगी और दूसरी असदुद्दीन औवेसी की एमआईएम
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इनमें एक पूर्व मुख्यमन्त्री वसुंधरा राजे की पार्टी होगी और दूसरी असदुद्दीन औवेसी की एमआईएम
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार पहले दिन से ही एक तरह से अस्थिर है। जुलाई अगस्त में सचिन पायलट के हाथों तख्तापलट की नाकाम कोशिश हो चुकी है। अब सियासी गलियारों में यह चर्चा फिर शुरू हो गई है कि फरवरी मार्च या बंगाल चुनाव के बाद राजस्थान में सियासी हालात करवट लेंगे तथा एक बार फिर पूरी ताकत से कांग्रेस सरकार गिराने या मुख्यमंत्री बदलने की कोशिश होगी। इस बीच मध्यावधि चुनाव की भी चर्चा शुरू हो चुकी है। यानी राजस्थान में दिसम्बर 2023 के तय समय से पहले विधानसभा चुनाव हो सकते हैं।
इस चर्चा के बीच एक बड़ी चर्चा यह भी है कि राजस्थान में दो नई सियासी पार्टियां सभी स्थापित समीकरणों में बड़ा उलट फेर करेंगी। इनमें एक सम्भावित पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की होगी और दूसरी हैदराबाद सांसद असदुद्दीन औवेसी की एमआईएम। पहले नगर निगम चुनाव और फिर पंचायत समिति, जिला परिषद व नगर निकाय चुनाव में भाजपा नेतृत्व ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पूरी तरह से दूर रखा तथा टिकट वितरण या प्रचार में उनका कोई सहयोग नहीं लिया। यानी भाजपा नेतृत्व ने इन चुनावों में वसुंधरा राजे को पूछा तक नहीं। ऊपर से उनके धुर विरोधी घनश्याम तिवाड़ी को भाजपा में वापस शामिल कर लिया।
घनश्याम तिवाड़ी ने भाजपा में घर वापसी करने के बाद मीडिया से कहा कि "जिन मुद्दों के चलते मैं पार्टी से बाहर गया था, वे मुद्दे अब समाप्त हो चुके हैं।" साथ ही गत दिनों भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने एक इन्टरव्यू में कहा कि "राजस्थान में भाजपा को किसी भी बड़े चेहरे की जरूरत नहीं है।" इन सब बातों से सियासी पण्डितों का आकलन है कि राजस्थान की भाजपा में वसुंधरा राजे का अध्याय अब समाप्त हो चुका है।
उच्च सियासी चौपालों में चर्चा है कि वसुंधरा राजे भी अब समझ चुकी हैं कि या तो राजस्थान को छोड़कर दिल्ली जाना पड़ेगा या फिर खुद की पार्टी खड़ी करनी पड़ेगी। खबर है कि वसुंधरा राजे ने अपने कुछ निकट सहयोगियों को नई पार्टी बनाने की तैयारी में जुट जाने का इशारा कर दिया है और अगर चुनाव तक भाजपा का नेतृत्व वसुंधरा राजे के हाथ में नहीं आएगा तो उनका नई पार्टी बनाना तय है। जाहिर सी बात है कि वसुंधरा राजे की नई पार्टी मैदान में आते ही भाजपा व कांग्रेस दोनों को बड़ा नुकसान होगा, क्योंकि दोनों पार्टियों से बहुत से नेता वसुंधरा राजे की पार्टी में जाएंगे।
इसी तरह यह चर्चा भी आम है कि असदुद्दीन औवेसी राजस्थान आ रहे हैं और अगले विधानसभा चुनाव में वे अपनी पार्टी एमआईएम को मैदान में उतारेंगे। बिहार चुनाव की सफलता के बाद उन्होंने राजस्थान, बंगाल, यूपी जैसे कुछ राज्यों में पार्टी को विस्तार देने की योजना बना ली है। अगर ऐसा होता है तो राजस्थान में मुस्लिम वोटर की एक बड़ी तादाद एमआईएम की तरफ जानी तय है और उसका भारी नुकसान कांग्रेस को होना तय है। खबर यह भी है कि ओवैसी राजस्थान में हनुमान बेनीवाल की आरएलपी, बसपा, बीटीपी जैसी कुछ पार्टियों से गठबंधन करने के भी इच्छुक हैं। अगर ऐसा होता है तो सियासी समीकरण बड़े पैमाने पर बदल सकते हैं।
(24-12-2020)
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