कांग्रेस को जयपुर शहर के मुस्लिम नेताओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए ?
कांग्रेस को जयपुर शहर के मुस्लिम नेताओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। जयपुर शहर का मतलब परकोटा और उसके आसपास बसे बाहर के गली मोहल्ले। बाकी शहर में तो अधिकतर वो लोग आबाद हैं जो मूल रूप से इस शहर के नहीं हैं। जयपुर शहर में प्रदेश का सबसे अधिक मुस्लिम वोटर करीब साढ़े चार लाख है और इसमें से करीब चार लाख परकोटे और उसके बाहर के गली मोहल्लों में निवास करता है। यह वोटर एकतरफा कांग्रेस के खाते में जाता है, इसीलिए यहाँ के चारों विधायक कांग्रेस से हैं और परकोटे का हैरिटेज नगर निगम भी कांग्रेस के पास है।
इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व शहर के मुस्लिम नेताओं को लगातार नजरअंदाज करता जा रहा है। जिसका नतीजा यह है कि नई पीढ़ी व कांग्रेस से नाराज़ पार्टी के पुराने घराने असदुद्दीन ओवैसी को उम्मीद की किरण मान रहे हैं। यानी जिस दिन ओवैसी की पार्टी एमआईएम राजस्थान में आएगी या ओवैसी जयपुर में मीटिंग करेंगे, तो शहर का मुस्लिम वोटर सैलाब की तरह कांग्रेस को छोड़कर उधर डायवर्ट हो जाएगा। ऐसी चर्चा इन दिनों शहर की सियासी चौपालों पर चल रही है।
शहर के मुस्लिम वोटर या कांग्रेसी मुस्लिम घरानों की पार्टी से नाराज़गी की पहली बड़ी वजह यह है कि विधानसभा चुनाव में दोनों सीटों (आदर्श नगर व किशनपोल) से जिन मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारा, वे दोनों मूल रूप से जयपुर शहर के नहीं हैं। हालांकि इसके बावजूद मुस्लिम समुदाय ने 90 फीसदी से ऊपर वोट डालकर इन दोनों के साथ साथ हवामहल व सिविल लाइन्स सीट भी जीताकर कांग्रेस की झोली में डाली। पहली बार पुराने शहर की चारों सीटें कांग्रेस ने जीती हैं।
नाराज़गी की दूसरी वजह यह है कि पीसीसी के पदों और राजनीतिक नियुक्तियों में भी शहर के मुस्लिम नेताओं को एक तरह से नजरअंदाज किया गया। हालांकि अब पीसीसी भंग हो चुकी है और शीघ्र ही नई बनने वाली है। नाराज़गी की तीसरी वजह यह है कि गत दिनों नगर निगम चुनाव में पुराने शहर के हैरिटेज नगर निगम में मुस्लिम पार्षदों की मेज्योरिटी थी और बहुमत भी कांग्रेस का था। कांग्रेस के आधे से अधिक पार्षद मुस्लिम थे, इसके बावजूद मेयर मुस्लिम को नहीं बनाया गया। इसका बड़े पैमाने पर विरोध भी हुआ था।
अब पीसीसी के गठन और राजनीतिक नियुक्तियों की चर्चा तेजी से शुरू हो गई है तथा खबर है कि दिसम्बर जनवरी में यह नियुक्तियां होंगी। इसी उम्मीद को लेकर शहर के कांग्रेसी मुस्लिम नेता पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं। जिनके परिवार कई दशक से कांग्रेस को सींच रहे हैं। कांग्रेस के खैरख्वाह लोगों की मांग है कि कांग्रेस को पीसीसी के पदों और राजनीतिक नियुक्तियों में जयपुर शहर के कांग्रेसी घराने वाले मुस्लिम नेताओं को सम्मानजनक संख्या में भागीदारी देनी चाहिए, अगर इस बार भी इन्हें नजरअंदाज किया गया, तो फिर शहर से कांग्रेस की जड़ें उखड़ जाएंगी और पुराने शहर में कांग्रेस का वही हाल हो जाएगा, जो परकोटे के बाहर की चार पांच विधानसभा सीटों में आज है।
(24-12-2020)
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ReplyDeleteIs se ye spasht hogaya ki Congress BJP ke sath Mili hui hai aur donon ek hi sikke ke do rukh he
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