राजस्थान वक्फ बोर्ड चेयरमैन का एक साल ; कितना सफल, कितना असफल ?

राजस्थान वक्फ बोर्ड चेयरमैन का एक साल ; कितना सफल, कितना असफल ?
************************************
जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डाॅक्टर खानू खान बुधवाली के कार्यकाल को एक साल पूरा हो गया है। 25 नवम्बर 2019 को वक्फ बोर्ड चेयरमैन के उप चुनाव में उन्हें चेयरमैन निर्वाचित किया गया था। क्योंकि वक्फ बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन अबू बकर नकवी और दो अन्य सदस्यों को अयोग्य मानते हुए हाईकोर्ट ने बरखास्त कर दिया था। इस उप चुनाव में खानू खान बुधवाली के साथ दो अन्य सदस्यों की नियुक्ति कर बोर्ड को पूर्ण रूप से गठित किया गया था।


डाॅक्टर खानू खान बुधवाली के चेयरमैन बनने पर वक्फ जायदाद से जुड़े हुए लोगों में एक खुशी की लहर पैदा हुई थी, वो इसलिए कि पहली बार पीएचडी किया हुआ एक उच्च शिक्षित युवा बोर्ड का चेयरमैन बना। जिससे वक्फ जायदाद से हमदर्दी रखने वाले लोगों को यह उम्मीद जगी कि करीब तीन साल से जूतम पैजार, निलम्बन, बर्खास्तगी और लूट खसोट का अखाड़ा बने वक्फ बोर्ड के अब शीघ्र ही अच्छे दिन आएंगे। इन लोगों को यह उम्मीद भी जगी कि वक्फ कमेटियों में लम्बे समय से और भाजपा राज के समय से जो लोग जमे हुए हैं, उन्हें अब हटाया जाएगा और नए व कर्मठ लोगों की कमेटियां बनाई जाएंगी, जो वक्फ जायदाद की हिफाजत और डवलपमेंट का काम करेंगी। लेकिन धीरे धीरे इन लोगों की उम्मीदों पर पानी फिरने लगा और सालभर में यह लोग एक तरह से नाउम्मीद हो गए। 

चेयरमैन बनने के बाद डाॅक्टर खानू खान बुधवाली ने इकरा पत्रिका को बताया था कि हम एक टीम भावना के साथ वक्फ जायदाद की हिफाजत और डवलपमेंट का काम करेंगे। हम उन लोगों को यह बात समझाएंगे जिन्होंने बरसों से वक्फ जायदाद पर कब्ज़ा कर रखा है कि यह जायदाद अल्लाह की हैं और बन्दों की भलाई के लिए हैं, लिहाजा आप कब्जा खाली करें और वक्फ की हिफाजत और डवलपमेंट में बोर्ड का सहयोग करें। अगर समझाने से कब्जे नहीं हटेंगे तो हम अवैध कब्जेधारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि बोर्ड में आज तक जो हुआ वो हो गया, अब बोर्ड पूरी तरह से पारदर्शिता के साथ काम करेगा। इसके अलावा दक्षिण के राज्यों में जिस तरह से वक्फ जायदाद का विकास किया गया है, उसी तरह से हम राजस्थान में विकास करेंगे। यहाँ हम स्कूल, काॅलेज, हाॅस्टल आदि बनाएंगे, ताकि कौम के बच्चों का भला हो सके और कौम तरक्की कर सके।

इन बातों को उन्होंने कई बार विभिन्न मंचों पर और अपने दौरों में प्रेस के सामने दोहराया। इनसे पहले अल्पसंख्यक मामलात विभाग के कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद ने भी मन्त्री बनते ही ऐसी बातें की थी। जिनमें उन्होंने अपने फतेहपुर दौरे में स्पष्ट कहा था कि "वक्फ बोर्ड की जमीनों पर जिन्होंने कब्जे कर रखे हैं वो खाली कर दें, वरना फिर हम खाली करा लेंगे, चाहे कब्जेधारी कोई भी हों।" लेकिन कब्जे हटाने और वक्फ जायदाद का विकास करने के नाम पर ज़बानी व कागजी काम ज्यादा हुआ और हकीकत में सिर्फ खानापूर्ति की गई। दो साल सालेह मोहम्मद को मन्त्री बने हो गए और एक साल खानू खान बुधवाली को चेयरमैन बने हो गया।

25 नवम्बर को डाॅक्टर खानू खान बुधवाली ने अपने कार्यकाल के एक साल पूरा होने के दिन प्रेस कांफ्रेंस रखी थी, लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के इन्तकाल की वजह से यह प्रेस कांफ्रेंस रद्द कर दी गई और फिर यह प्रेस कांफ्रेंस 7 दिसम्बर को आयोजित की गई। इस प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां बताई। जाहिर सी बात है कि हर सत्ताधीश अपनी सत्ता सालगिरह पर उपलब्धियों को बताता है और उन्हें ऐसा करना भी चाहिए, ताकि लोगों को पता चले कि उन्होंने एक साल में क्या किया है और आगे उनका क्या लक्ष्य है। 

इस प्रेस कांफ्रेंस में वक्फ बोर्ड चेयरमैन ने पत्रकारों को बताया कि वक्फ बोर्ड की आमदनी बढाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए कुछ वक्फ जायदादों पर पेट्रोल पम्प स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए पेट्रोलियम कम्पनियों से अनुबंध कर पेट्रोल पम्प स्थापित करेंगे और ऐसी 15 वक्फ जायदादों का चयन किया गया है। साथ ही अन्य जायदादों का विकास कर व्यवसायिक गतिविधियों के जरिये आय बढाने का काम तेज गति से किया जाएगा। इससे वक्फ जायदादों को खुर्द बुर्द होने से बचाया जाएगा और बोर्ड को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। 

चेयरमैन वक्फ बोर्ड ने बताया कि पिछले एक साल में जयपुर, अजमेर, नागौर, भरतपुर, दौसा, भीलवाड़ा, सीकर, झुन्झुनूं और अन्य जिलों में बोर्ड की महत्वपूर्ण जायदादों को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया और साथ ही 19 हजार वक्फ जायदादों के रिकाॅर्ड का डिजिटलीकरण का काम पूरा किया गया। इसके अलावा उन्होंने पूर्व की अपनी विभिन्न हाॅस्टल, हाॅस्पिटल और जवाहरात काॅम्पलेक्स निर्माण की योजना व घोषणा को भी दोहराया। साथ ही राज्य सरकार की तरफ से दिए गए 5 करोड़ रूपए और बकाया अंशदान के पेटे वसूले गए 57 लाख रूपये का भी जिक्र किया।

यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है कि उनके कार्यकाल में बोर्ड की सिर्फ एक मीटिंग हुई है। जो 6 फरवरी 2020 को आयोजित हुई थी। नियमानुसार और भी मीटिंग होनी चाहिए थी, लेकिन कोरोना महामारी या कुछ अन्दरूनी वजहों से यह लेख लिखे जाने तक बोर्ड की मीटिंग नहीं हुई है। छह फरवरी को बोर्ड की जो मीटिंग हुई थी, उसमें काफी चीज़ें तय हुई थी और कुछ खास घोषणाएं भी हुई थी। जिनमें बहुतों का क्रियान्वयन सिर्फ ज़बानी व कागजी हुआ है। इस मीटिंग के बाद बोर्ड चेयरमैन ने जो घोषणाएं की थीं, उनमें प्रमुख निम्न हैं। "अब वक्फ जायदाद की ऑन लाइन माॅनिटरिंग होगी। वक्फ कमेटी बनाने और किरायेदारी तय करने के लिए चेयरमैन की अध्यक्षता में दो कमेटियां गठित होंगी। आधा दर्जन अनियमितता करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने का निर्णय लिया गया है। जयपुर के मुस्लिम मुसाफिरखाने के विकास के लिए वक्फ डवलपमेंट कमेटी गठित की जाएगी। जयपुर में तीन और फतेहपुर में एक हाॅस्टल बनाने का निर्णय लिया गया है, वगैरह वगैरह।" 

इस मीटिंग के बाद चेयरमैन ने यह भी कहा था, "वक्फ कमेटियों को अपनी आय व्यय का ब्यौरा आॅन लाइन पेश करना होगा, ताकि इससे कमेटियों के काम काज में पारदर्शिता आए और शिकायतों का निस्तारण भी शीघ्रता से हो पाए। वक्फ कमेटियों की कार्यशैली एवं खर्च के मामलों में लगातार विवादास्पद स्थितियां सामने आईं हैं, जिसको लेकर यह निर्णय लिया गया है कि सभी कमेटियों को प्राप्त होने वाली आय मय दस्तावेज़ों के साथ आॅन लाइन पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। साथ ही किसी भी प्रकार के खर्च से पहले वक्फ एक्ट के नियमानुसार कार्रवाई सम्पन्न कर बोर्ड की पूर्वानुमति भी प्राप्त करनी होगी। इस पोर्टल पर वक्फ जायदादों का किराया और बोर्ड को मिलने वाले अंशदान का पूरा रिकाॅर्ड दर्ज होगा।"

उन्होंने तब यह भी कहा था कि "बोर्ड ने यह निर्णय लिया है कि चेयरमैन की अध्यक्षता में दो कमेटियां गठित की जाएंगी, जिनमें से एक कमेटी वक्फ कमेटियां गठित करेगी और दूसरी कमेटी किरायेदारी से सम्बन्धित मामलों पर निर्णय लेगी। इसके अलावा जयपुर के मुस्लिम मुसाफिरखाने के विकास से सम्बन्धित एक वक्फ डवलपमेंट कमेटी गठित की जाएगी, जो मुसाफिरखाने का सम्पूर्ण विकास कार्य देखेगी। उन्होंने तब बताया था कि जयपुर में बाहर के छात्र छात्राओं को अध्ययन करने के लिए बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए जयपुर की विभिन्न वक्फ जायदादों पर गर्ल्स और बाॅयज के लिए तीन हाॅस्टल निर्मित किए जाएंगे।"

अब इन घोषणाओं का कितना क्रियान्वयन हुआ, यह तो सबके सामने है। वक्फ बोर्ड में बातें ज्यादा हुई और काम कम। हाॅस्टल के नाम का पत्थर जहाँ तक हमारी जानकारी है, कहीं नहीं रखा गया। चेयरमैन के दौरे खूब हुए और अतिक्रमण हटाने के नाम की पब्लिसिटी भी खूब हुई। लेकिन कुछ जायदादों को छोड़ दें, तो बाकी वैसे ही अतिक्रमण की शिकार हैं, जैसे एक साल पहले थीं। वक्फ कमेटियों का गठन न के बराबर हुआ है। आज भी बरसों से ऐसे लोग वक्फ जायदादों की कमेटियों में काबिज हैं, जिन्होंने जमकर वक्फ जायदादों को खुर्द बुर्द किया है और आज भी बेधड़क ऐसा कर रहे हैं।

यह सच है कि कई जायदादों से अतिक्रमण हटाया गया है, लेकिन यह भी सच है कि इस अतिक्रमण को हटाने में भेदभाव बरता गया है। बाबा कमरूद्दीन शाह साहब की दरगाह शरीफ़ (झुन्झुनूं) के मामले को देखें, तो वहाँ कुछ अतिक्रमण पर बुलडोज़र चलाया गया। लेकिन इसमें अतिक्रमण हटाने से ज्यादा द्वेषता और भेदभाव वाला नजरिया सामने आया। क्या ऐसा अतिक्रमण झुन्झुनूं शहर व जिले की दूसरी जायदादों पर नहीं है ? अगर हाँ, तो फिर वहाँ पर बुलडोज़र क्यों नहीं चलाया गया ? क्या ऐसा अतिक्रमण जयपुर शहर की वक्फ जायदादों पर नहीं है, जिस शहर में बोर्ड का ऑफिस है और चेयरमैन व सभी बोर्ड अधिकारी इसी शहर में बैठते हैं ? अगर हाँ, तो फिर यह बुलडोज़र जयपुर में क्यों नहीं चलाया गया ?

यही बात वक्फ जायदाद के अतिक्रमियों या खुर्द बुर्द करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। जिन लोगों पर कार्रवाई हुई है, वो सही है और हर अतिक्रमी पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन क्या इन लोगों के अलावा किसी ने अतिक्रमण नहीं कर रखा है ? अगर कुछ और लोगों ने भी अतिक्रमण कर रखा है या उन्होंने वक्फ जायदादों को खुर्द बुर्द किया है, तो फिर उनके खिलाफ़ कार्रवाई कब होगी और उन्हें अभी तक क्यों बचाया गया ? यही बात वक्फ कमेटियों को लेकर है। क्या सभी वक्फ कमेटियां और मुतवल्ली सही काम कर रहे हैं ? अगर नहीं, तो फिर उन्हें आज तक बरखास्त क्यों नहीं किया गया ?

अब बात वक्फ जायदादों के किराये की। सरकार ने 5 करोड़ रूपये दिए, यह चेयरमैन का सराहनीय काम है, क्योंकि यह रूपये इसलिए मिले, क्योंकि चेयरमैन डाॅक्टर खानू खान बुधवाली मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी समझे जाते हैं और मुख्यमंत्री उनकी बातों पर गम्भीरता से गौर करते हैं। लेकिन विभिन्न सरकारी ऑफिस जो वक्फ जायदादों पर बने हुए हैं या जिन जायदादों पर सरकार कब्जा किए बैठी है, जिनका करोड़ों रूपये किराया बाकी है, उसमें से कितना किराया आया और कितना आना बाकी है ?

चेयरमैन वक्फ बोर्ड की सफलताओं में सबसे बड़ी सफलता यह है कि उन्होंने वक्फ बोर्ड को पूरा टाइम दिया और व्यवस्था को पटरी पर लाने का पूरा प्रयास किया। साथ ही पहले कई महीनों तक बोर्ड कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं मिलती थी, क्योंकि बोर्ड के पास पैसा ही नहीं होता था, उस व्यवस्था को सुधारा और समय पर तनख्वाह देनी शुरू की। चेयरमैन ने काफी दौरे किए और वो भी कोरोना महामारी के बावजूद। इसके अलावा उनका सबसे शानदार काम कोरोना लाॅकडाउन में पीड़ित जनता की जिस तरह से खाने के पैकेट और राशन किट वितरित करवा कर उन्होंने जो खिदमत की, उसकी तारीफ़ पूरे प्रदेश में की गई। 
(09-12-2020)
-----------------------------------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए। 
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
A/c no. 613900 55000 00252 
IKRA PATRIKA 
IFSC:- PUNB 0613900
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR. 
***************************

©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
-------------------------------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
09602992087, 09414361522

©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved. 

Comments

  1. खानु खान जी पंचायत चुनाव में डूँगरपुर प्रभारी रहे उनके नेतृत्व में डुंगरपुर में भाजपा कोंग्रेस में समझौता हुआ इससे शर्मनाक बात क्या हो सकती है खानु खा को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

झुंझुनूं में रीटा चौधरी को कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनाने पर जबरदस्त रोष

चित्तौड़गढ़ अन्जुमन स्कूल में किया मुस्लिम शिक्षकों का सम्मान

कुरैशी समाज की नो दहेज, नो गार्डन, नो डिनर मुहिम के तहत सादगी से हुई शादी