चन्द जज़्बाती व जुनूनी दीवानों के ऐतिहासिक आन्दोलन और सिविल लाइन्स कूच ने गहलोत सरकार को चबाए नाको चने !

चन्द जज़्बाती व जुनूनी दीवानों के ऐतिहासिक आन्दोलन और सिविल लाइन्स कूच ने गहलोत सरकार को चबाए नाको चने !
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उर्दू टीचर्स और मदरसा पैराटीचर्स का अनिश्चितकालीन धरना और सिविल लाइन्स कूच सफलता से सम्पन्न
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आन्दोलनकारियों की विभिन्न मांगों के लिए मुख्यमंत्री द्वारा अधिकृत किए गए अधिकारी से हुई मीटिंग
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हर बिन्दु पर प्रतिनिधि मण्डल से चर्चा कर फाइल सीएम के लिए पुटअप होने के बाद धरना हुआ समाप्त
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ और मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ का पांच दिन से चल रहा धरना 22 जनवरी को मुख्यमंत्री निवास सिविल लाइन्स कूच करने और हर बिन्दु पर मुख्यमंत्री द्वारा अधिकृत किए गए अधिकारी ज्वाइंट सेक्रेटरी सीएम शाहीन अली खान से विस्तृत चर्चा के बाद समाप्त कर दिया गया।


उक्त दोनों संगठन कई महीनों से उर्दू टीचर्स, मदरसा पैराटीचर्स, मदरसा तालीम और उर्दू तालीम से सम्बंधित विभिन्न मांगों को लेकर सरकार का दरवाजा खटखटा रहे थे, लेकिन सरकार इनकी बात सुनने और उसको मानने के लिए कतई गम्भीर नहीं थी। कई बार यह संगठन अपनी मांगों को लेकर शिक्षा मन्त्री गोविन्द सिंह डोटासरा, अल्पसंख्यक मामलात मन्त्री सालेह मोहम्मद और सम्बंधित अधिकारियों से मिलते रहे, लेकिन काम कुछ भी नहीं हुआ तथा एक ही बात सुनने को मिली कि यह काम मुख्यमंत्री जी के स्तर के हैं और वही इन पर निर्णय करेंगे। 

मजबूर होकर उक्त दोनों संगठनों ने 18 जनवरी को जयपुर कलेक्टरेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया और एक ही मांग सरकार के सामने रखी कि हमें मुख्यमंत्री जी से मिलना है और उनसे हमारी मांगों पर हाँ या ना का जवाब लेना है। इस धरने को विभिन्न जन संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी समर्थन दिया। पहले दिन एक आठ सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल तैयार किया गया और उसे अधिकारियों ने सीएमओ में ज्वाइंट सेक्रेटरी ललित कुमार से चर्चा करवाई, लेकिन प्रतिनिधि मण्डल लम्बी वार्ता करने के बाद असंतुष्ट होकर बिना ज्ञापन दिए वापस धरना स्थल पर आ गया। इस बीच विभिन्न अधिकारियों से एक दर्जन से ज्यादा बार चर्चा हुई, लेकिन प्रतिनिधि मण्डल अपनी मांग पर अड़ा रहा।


इस बीच 19 जनवरी की रात को आदर्श नगर विधायक रफीक खान धरना स्थल आए और करीब दो घण्टे रुके एवं उन्होंने हर मुद्दे पर बात की और मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाने का समय मांगा। अगले दिन 20 जनवरी को विधायक रफीक खान फिर धरना स्थल आए और काफी देर रुके व फिर सीएमओ जाने की कह कर चले गए। शाम तक सीएमओ से कोई भी सन्देश नहीं आया, तो 20 जनवरी की रात को धरनार्थियों ने घोषणा कर दी कि 22 जनवरी को जुमे की नमाज के बाद हम सिविल लाइन्स स्थित मुख्यमंत्री निवास के लिए कूच कर घेराव करेंगे। 


इसके बाद 21 जनवरी को डीसीपी जयपुर आईपीएस प्रदीप मोहन धरना स्थल वार्ता करने आए और काफी देर हर मुद्दे पर चर्चा करने के बाद वे प्रतिनिधि मण्डल को जयपुर कलेक्टर के ऑफिस में लेकर गए और वहाँ एक घण्टे तक सभी अधिकारियों के बीच जिला कलेक्टर अन्तर सिंह नेहरा ने वार्ता की और जिला कलेक्टर ने प्रमुख बिन्दुओं का मुख्यमंत्री के लिए नोट तैयार किया। लेकिन प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री से ही वार्ता कर धरना उठाने की बात कही, जिस पर जिला कलेक्टर और अन्य अधिकारियों ने कहा कि यह कोरोना की वजह से सम्भव नहीं है, क्योंकि मुख्यमंत्री जी काफी दिनों से किसी भी प्रतिनिधि मण्डल से नहीं मिल रहे हैं और सुबह केरल दौरे पर जा रहे हैं। इस पर प्रतिनिधि मण्डल ने कहा कि फिर मुख्यमंत्री जी किसी अधिकारी को वार्ता के लिए अधिकृत करें, जिससे हम वार्ता करें।


अगले दिन 22 जनवरी को तय वक्त बाद नमाज ए जुमा तीन बजे धरना स्थल जयपुर कलेक्टरेट से अपने रजाई गद्दे कन्धों पर रखकर धरनार्थियों ने सिविल लाइन्स की ओर कूच किया। यह कूच बहुत ही शालीन और क़ानून कायदे के दायरे में गहलोत सरकार के खिलाफ़ जबरदस्त नारेबाजी करते हुए आगे बढा। जयपुर कलेक्टरेट से खासा कोठी, एम आई रोड होते हुए पुलिस कमिश्नर ऑफिस के सामने स्थित शहीद स्मारक पर पहुंचा। यह स्मारक 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों की याद में बनाया गया है, जिस पर राजस्थान के सभी शहीद सैनिकों के नाम दर्ज हैं। तय कार्यक्रम के तहत यहाँ आन्दोलनकारियों ने कूच को स्थगित किया और पुष्पांजलि व खिराज ए अकीदत पेश की। 

इस शहीद स्मारक पर दर्ज नामों में तीन दर्जन से ज्यादा मुस्लिम सैनिकों के भी नाम हैं। यहाँ दुर्च्या बैटल के हीरो वीर चक्र विजेता शहीद मेजर एम एच खान साहब और 14 ग्रेनेडियर की कम्पनी के कमान्डर शहीद सूबेदार ताज मोहम्मद खान साहब और अन्य शहीदों को विशेष रूप से याद किया गया। जिनके बारे में इकरा पत्रिका के सम्पादक एम फारूक़ ख़ान ने बताया। फिर राष्ट्रगान हुआ और इसके बाद गहलोत सरकार के खिलाफ़ बाबुलंद आवाज में नारे लगाते हुए आन्दोलनकारी वापस सिविल लाइन्स की तरफ आगे बढे। सी स्कीम, सरदार पटेल मार्ग होते हुए यह कूच मुख्यमंत्री निवास के पहले सिविल लाइन्स फाटक पर रोक दिया गया। जहाँ पुलिस का भारी जाप्ता और बेरिकेटस लगे हुए थे। यहाँ सभी आन्दोलनकारी वापस धरने पर बैठ गए और अपनी मांग पर अड़े रहे। 

अधिकारियों से काफी देर तक चर्चा हुई और उन्होंने हमारी मांग सीएमओ तक पहुंचाई। फिर यह बताया गया कि मुख्यमंत्री जी ने ज्वाइंट सेक्रेटरी सीएमओ शाहीन अली खान को धरनार्थियों के प्रतिनिधि मण्डल से वार्ता करने और चर्चा का नोट बनाने के लिए अधिकृत किया है। इसके बाद आन्दोलनकारियों का आठ सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल पुलिस की गाड़ियों में बैठकर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) पहुंचा। जहाँ शाहीन अली खान से मांग पत्र के हर बिन्दु पर विस्तार से चर्चा हुई और उन्होंने अपनी कलम से हर बिन्दु को लिखा और उसका नोट तैयार कर उसके साथ आन्दोलनकारियों का मूल मांग पत्र संलग्न कर फाइल मुख्यमंत्री के लिए पुटअप की।

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बारे में भी शाहीन अली खान से चर्चा हुई, इस पर उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी की वजह से वे किसी भी प्रतिनिधि मण्डल से नहीं मिल रहे हैं और जब मिलना शुरू करेंगे तो आपको मिलवाने का निवेदन मुख्यमंत्री जी से करेंगे। जब तक यह कार्य हुआ तब तक धरना सिविल लाइन्स पर जारी रहा। सीएमओ में प्रतिनिधि मण्डल ने उच्चाधिकारी सीएम देवाराम सैनी और दिनेश शर्मा से भी मुलाकात की और अपनी मांगों के बारे में उन्हें भी बताया।

रात आठ बजे के करीब प्रतिनिधि मण्डल शासन सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय से धरनास्थल मुख्यमंत्री निवास सिविल लाइन्स आया और उक्त वार्ता के बारे में बताकर धरना समाप्त करने की घोषणा की। प्रतिनिधि मण्डल में उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष अमीन कायमखानी, मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सय्यद मसूद अख्तर, राजस्थान स्टेट औकाफ काॅन्सिल के जनरल सेक्रेटरी एम फारूक़ ख़ान, मुस्लिम प्रोग्रेसिव फेडरेशन के संयोजक सय्यद अनवर शाह, एडवोकेट एजाज नबी खान जाजोद, एडवोकेट जावेद अली खान खींवासर, पिंक सिटी हज वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल सलाम जौहर और सादिया टोंक शामिल थे।

इस बीच विशेष बात यह भी रही कि जब आन्दोलनकारी अपने बोरिया बिस्तर धरना स्थल जयपुर कलेक्टरेट से उठा कर मुख्यमंत्री निवास सिविल लाइन्स की तरफ कूच के लिए नारेबाजी करते हुए चल रहे थे, तो बीच रास्ते ही खबर मिली कि शिक्षा मन्त्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने अपने निवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर घोषणा की कि अल्प भाषाओं (उर्दू, सिन्धी, पंजाबी, गुजराती) के शिक्षकों के लगभग 500 अतिरिक्त पदों का आवंटन होगा तथा जिस स्कूल में अल्प भाषा पढने के इच्छुक 10 या 10 से अधिक विद्यार्थी होंगे, वहाँ अल्प भाषा का अतिरिक्त पद मिलेगा। सिविल लाइन्स कूच का दबाव देखिए कि बीच रास्ते में शिक्षा मन्त्री ने यह घोषणा नगर निकाय चुनाव आचार संहिता के बावजूद की, शायद ऐसा पहली बार हुआ है। यह चट्टान की तरह मजबूत आन्दोलनकारियों की खुली जीत है, लेकिन आन्दोलनकारियों ने घोषणा कर दी कि हम ऊंट के मुंह में जीरा वाली इस घोषणा से कतई खुश नहीं हैं, क्योंकि अकेले अल्प भाषा उर्दू के कम से कम 10 हजार पद बनते हैं, जिन्हें शिक्षा मन्त्री को शीघ्र घोषित करना चाहिए।

इस धरने प्रदर्शन व सिविल लाइन्स कूच की खास बात यह भी रही कि जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के सभी अधिकारियों और पुलिस के जवानों का पूरा सहयोग रहा तथा सभी ने आन्दोलनकारियों की बात को गम्भीरता से सुना और इसे जायज बताया। आन्दोलनकारियों ने अपनी सेवा करने व सुरक्षा करने के लिए सभी पुलिस अधिकारियों व जवानों का शुक्रिया अदा किया। इस पूरे आन्दोलन में बनीपार्क थानाधिकारी नरेश जी, सब इंस्पेक्टर नरेन्द्र सिंह शेखावत, इलाके के डिप्टी नवाब खान, सिविल लाइन्स इलाके के डिप्टी पुलिस सुहैल राजा और उनकी टीम के सहयोग व सकारात्मकता की भी आन्दोलनकारियों ने प्रशंसा की और इनका विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

आन्दोलन में सबसे सराहनीय योगदान जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, बीकानेर, सीकर, टोंक, सवाई माधोपुर इलाके के पैराटीचर्स का रहा। इनमें मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ के उपाध्यक्ष जुल्फिकार अली खान सिन्धीनगर, समीर कुरैशी डीडवाना कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, अलताफ हुसैन फतेहपुर, अब्दुर्रशीद खींवासर नागौर, अब्दुल रज्जाक खिलजी फलौदी, अजीज मेहर फलौदी, इल्मुद्दीन खिलजी उपाध्यक्ष बीकानेर, इकबाल बागावास बालोतरा, नसीर बागावास, गाजी खान पाटौदी, हंसताराम प्रधानाध्यापक मौलाना आजाद मदरसा बालोतरा, शेर मोहम्मद बागावास, बाबू खान घड़ोई, हबीब कल्याणपुर, छोटूलाल मेघवाल डीडवाना, याकूब खान नसवाण डीडवाना, जफर जिलाध्यक्ष सीकर, अब्दुल अजीज सीकर, नदीम अख्तर जिलाध्यक्ष टोंक, दिलशाद खान मारना डूंगर, कलाम खान सवाई माधोपुर, अकरम कुरैशी बालोतरा आदि प्रमुख हैं।

इनके अलावा शाहबाज़ खान आमेर, इरफान चाकसू, आमीन मौजमाबाद, शरफुद्दीन नरैना, जाकिर झोटवाड़ा, नदीम झोटवाड़ा, इकबाल भट्टा बस्ती जयपुर, यूसुफ भट्टा बस्ती, अकबर शाह भट्टा बस्ती, शफीक भट्टा बस्ती, रईस नाहरी का नाका, साबिर नाहरी का नाका जयपुर का भी खास योगदान रहा। प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता के तौर मैमूना नर्गिस आमेर, अख्तर नेता घाटगेट व मुराद खान छोटी बेरी का भी सराहनीय योगदान रहा। इनके अलावा चन्दन राय ई-रिक्शा चालक जो अनजान सहयोगी बना, जिसके रिक्शे पर आन्दोलनकारियों ने अपने बचे हुए रजाई गद्दे रखे और उसने कूच के आगे अपना रिक्शा रखा और देर रात तक रिक्शे को लेकर सिविल लाइन्स धरने पर जमा रहा, आन्दोलनकारियों ने उसे इनाम देकर साथ में फोटो खिंचवा कर विदा किया।

इस आन्दोलन की सबसे बड़ी सफलता यह थी कि पूरा सरकारी तन्त्र एक्टिव था। आन्दोलन को फेल करने के लिए एक विधायक के यहाँ एक तरह का कन्ट्रोल रूम बनाया गया था। अधिकतर कांग्रेसी नेता खासकर मुस्लिम विधायकों व मुस्लिम नेताओं ने इस आन्दोलन को फ़ेल करने और आन्दोलनकारियों में फूट डालने के लिए सारे घोड़े खोल दिए, लेकिन आन्दोलनकारियों की मजबूत टीम व बुलन्द इरादों के आगे यह तमाम सत्ताधारी मैनेजर फ़ेल हो गए और आन्दोलनकारियों ने जो मजबूत योजना बनाई थी वो सफल हुई और कूच मुख्यमंत्री निवास सिविल लाइन्स तक पहुंचा तथा आन्दोलनकारियों की शर्तों पर बात तय हुई। 

दिलचस्प खबर यह भी है कि जयपुर से केरल के लिए रवाना होते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अधिकारियों ने कहा कि यह आन्दोलनकारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और किसी अधिकारी को अधिकृत किए बिना किसी से वार्ता नहीं करेंगे और ना ही अपना धरना प्रदर्शन स्थगित करेंगे। अधिकारियों की इस राय को मुख्यमंत्री ने गम्भीरता से लिया और फिर अपने ज्वाइंट सेक्रेटरी शाहीन अली खान को वार्ता के लिए अधिकृत किया। इस कूच का मुख्यमंत्री गहलोत पर दबाव इस कदर था कि जब तक आन्दोलनकारी वार्ता के लिए तैयार नहीं हुए तब तक उन्होंने केरल के लिए उड़ान नहीं भरी और आन्दोलनकारियों की हाँ का इन्तजार करते रहे, ज्यों ही आन्दोलनकारी शाहीन अली खान से वार्ता के लिए तैयार हुए सीएम गहलोत ने केरल के लिए उड़ान भर ली !
(25-01-2021)
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