सभा में गहलोत सरकार को ललकारते हुए चारों उप चुनावों में कांग्रेस को हराने का हुआ प्रस्ताव पास

उठ बांध कफन गाजी••••
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सुजानगढ में आयोजित हुई आम सभा, रूपाराम ने की सरपरस्ती और हवलदार यासीन खान ने की सदारत
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सभा में गहलोत सरकार को ललकारते हुए चारों उप चुनावों में कांग्रेस को हराने का हुआ प्रस्ताव पास
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सुजानगढ (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ और राजस्थान मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ एवं अन्य संगठनों के समर्थन से उर्दू तालीम और मदरसा तालीम की हिमायत में 21 फरवरी रविवार को एक आम सभा आयोजित की गई। यह सभा सुजानगढ के गांधी चौक में दोपहर बाद ढाई बजे आयोजित की गई। सभा को करीब दो दर्जन वक्ताओं ने सम्बोधित किया। इन वक्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गहलोत सरकार को जमकर ललकारा और मांगें नहीं मानी गई तो सुजानगढ सहित चारों विधानसभा उप चुनावों में कांग्रेस को हराने की लोगों से अपील की। उक्त सन्दर्भ में एक प्रस्ताव भी पास किया गया। जिसका उपस्थित सभी लोगों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। 

सभा को राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष अमीन कायमखानी, राजस्थान मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष समीर कुरैशी, उपाध्यक्ष जुल्फिकार अली खान, राजस्थान स्टेट औकाफ काॅन्सिल के जनरल सेक्रेटरी एम फारूक़ ख़ान, मदरसा पैराटीचर अब्दुर्रज्जाक खिलजी फलौदी, मदरसा पैराटीचर संघ सीकर के जिलाध्यक्ष जफर अली, सूबेदार जाफर खान खेड़ी राडान, एडवोकेट एजाज नबी खान जाजोद, एडवोकेट जावेद अली खान खींवासर, कांग्रेसी नेता व पार्षद मास्टर दाऊद अली, असलम खान भींचरी, एडवोकेट तिरलोक मेघवाल, समाजसेवी नूर खान पहाड़ियान, विजयपाल स्योराण सुजला संघर्ष समिति, शिक्षाविद रणजीत खान लाडनूं, एडवोकेट मोहम्मद दयान खान, अख्तर निम्बी जौधान, चीफ शहर काजी सुजानगढ मोहम्मद आरिफ, हाफिज़ अकरम आदि ने सम्बोधित किया।

सभा का आगाज़ तिलावत ए कुरआन से मुमताज़ अली कादरी ताल छापर ने किया और छात्र साहिल ने नआत शरीफ़ पढी। गंगा जमुनी तहजीब वाली उर्दू ज़बान को फरोग (बढावा) देने और देश प्रेम व भाईचारे को मजबूत करने के लिए उर्दू शायर गोपाल जाट "सुजानगढ" ने अपने कई शेयर पेश कर माहौल को बहुत ही सराहनीय बनाया। 


वक्ताओं ने उर्दू तालीम और मदरसा तालीम के साथ की जा रही अशोक गहलोत सरकार की नाइन्साफी को विस्तार से बिन्दुवार बताया और शिक्षा मन्त्री गोविन्द सिंह डोटासरा द्वारा किए गए उर्दू तालीम के खात्मे के आदेश और प्रयासों की जमकर निन्दा की तथा अशोक गहलोत एवं गोविन्द सिंह डोटासरा के खिलाफ़ जमकर नारेबाजी की। 


वक्ताओं ने बताया कि यह आन्दोलन हमारा बरसों से चल रहा है और पिछले दिनों 18 जनवरी को हमने जयपुर कलेक्टरेट पर अनिश्चितकालीन धरना भी लगाया था और फिर 22 जनवरी को सिविल लाइन्स कूच के नाम से मुख्यमंत्री निवास का घेराव भी किया था। लेकिन सरकार ने आज दिनांक तक हमारी एक भी मांग नहीं मानी है। यह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की खुली हठधर्मिता है। इसलिए मजबूर होकर हमने सुजानगढ में आम सभा रखी है, ताकि हमारी आवाज़ सुजानगढ की धरती से मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचे और मुख्यमंत्री की आंखें खुलें। यह भी बताया गया कि जो लोग यह कह रहे हैं कि मांगें मान ली गई हैं, वे लोग उर्दू तालीम और मदरसा तालीम के दुश्मन हैं, यह लोग गहलोत व डोटासरा के गुलाम हैं और यह लोगों को गुमराह कर रहे हैं।


सभा में बताया गया कि विधानसभा चुनाव 2018 का अध्ययन करने वाले एक मुस्लिम थिंक टैंक के मुताबिक मुस्लिम समुदाय ने 90 प्रतिशत या इससे अधिक वोट पोल किया था और यह समस्त वोट एकतरफा कांग्रेस को मिला था तथा कांग्रेस ने 200 सीटों में से जो 106 सीटें जीती थी, उनमें से 96 सीटें मुस्लिम वोटर के बलबूते जीती थी। इस थिंक टैंक का अध्ययन यह भी बताता है कि अगर मुस्लिम वोट 20 प्रतिशत कम पोल होते या प्रदेश की औसत पोलिंग के बराबर पोल होते तो कांग्रेस की 60 सीटें भी नहीं आती। यानी आज राजस्थान में गहलोत के नेतृत्व वाली जो कांग्रेस सरकार है, वो मुस्लिम वोटर की देन है। इसके बावजूद गहलोत सरकार सबसे अधिक भेदभाव मुसलमानों के साथ कर रही है। 


वक्ताओं ने बताया कि सुजानगढ आम सभा को हमने "सुजानगढ कूच" का नाम इसलिए दिया है कि यहाँ विधानसभा उप चुनाव हैं और हमारी मांगें नहीं मानी गई तो हम सुजानगढ सहित चारों सीटों (राजसमन्द, सहाड़ा व वल्लभनगर) पर कांग्रेस के खिलाफ़ वोट करने की मांग करेंगे। इस कूच के लिए हमने 11 फरवरी से तीन जिलों सीकर, चूरू और नागौर के विभिन्न गांवों व कस्बों का दौरा किया है। इस दौरे में हमने 45 छोटी बड़ी मीटिंग्स आयोजित की हैं। जिनमें सीकर, कासली, किरड़ोली, जाजोद, लक्ष्मणगढ़ ईदगाह मस्जिद, खीरवा, खेड़ी राडान, चूड़ी मियां, बलारां, खींवासर, बेसवा (दरगाह शरीफ़), भींचरी, भगासरा, बलोद भाखरा, बागड़दा, जलालसर, गारिन्डा, फतेहपुर मदनी मस्जिद, राजास, मगलूणा, शोभासर, कणवारी, बुधवाली, पड़िहारा, सुजानगढ होली धोरा, सुजानगढ जलेबी शाह चौक, सुजानगढ स्टेशन बास, सुजानगढ मोहम्मदी चौक, लाडनूं शहरिया बास, लाडनूं तेली रोड, लाडनूं बड़ा बास, लाडनूं जावा बास, निम्बी जौधान, हुडास, नागौर दरगाह सूफी साहब के पास, बीदासर इन्दिरा चौक आदि प्रमुख हैं।

सुजानगढ कूच नाम की इस आम सभा की सदारत (अध्यक्षता) वरिष्ठ समाजसेवी और रिटायर्ड आर्मी हवलदार यासीन खान शोभासर ने की। मंच पर सरपरस्ती यहाँ के गांधी चौक के पास 50 साल से बूट पॉलिश करने वाले रूपाराम और समाजसेवी अकबर खान मगलूणा ने की और मंच संचालन एम फारूक़ ख़ान ने किया। बुजुर्ग रूपाराम यहाँ गांधी चौक के आगे पिछले 50 साल से खुले आसमान के नीचे बूट पॉलिश कर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। सभा से पहले रूपाराम सहित फुटपाथ पर बैठकर काम करने वाले कई लोगों ने अपनी पीड़ा बताई, तो आयोजकों ने रूपाराम को मंच पर ससम्मान बुलाकर उनकी बात रखी और उनसे सभा की सरपरस्ती (संरक्षकता) करवाई। रूपाराम ने कहा कि यहाँ मंच पर मैं पहली बार बैठा हूँ और इस सम्मान से मुझे बहुत खुशी मिली है। मुझे खुशी हुई कि इस मंच से आज हम बूट पॉलिश करने वाले गरीब लोगों की भी पीड़ा उठाई गई है।


इस आम सभा में विभिन्न मांगों और मुद्दों के लिए एक प्रस्ताव रखा गया और उस प्रस्ताव का उपस्थित सभी लोगों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। प्रस्ताव इस बात का था कि अगर विधानसभा उप चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हमारी मांगें नहीं मानते हैं, तो चारों उप चुनावों में कांग्रेस को हराने के लिए जनता से अपील की जाएगी और हम गांव गांव, ढाणी ढाणी जाकर कांग्रेस को उप चुनाव में हराएंगे।


मंच से जो मांगें और मुद्दे बयान किए गए उनमें प्रमुख यह हैं :-

1 राजस्थान में करीब 65 हजार सरकारी स्कूल हैं और अगर 13 दिसम्बर 2004 के शिक्षा विभाग के आदेश की ईमानदारी से पालना की जाए तो इनमें से 25 हजार स्कूलों में उर्दू टीचर की आवश्यकता है, लेकिन सरकार ने करीब तीन हजार स्कूलों में ही उर्दू टीचर लगा रखे हैं, ऐसी नाइन्साफी क्यों ? इसलिए 13 दिसम्बर 2004 के प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक के अल्प भाषाओं से सम्बंधित दिशा निर्देशों की अक्षरशः पालना सुनिश्चित की जाए।


2 कक्षा 1 से 5 तक सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत उर्दू भाषी विद्यार्थियों हेतु अतिरिक्त विषय उर्दू की निशुल्क किताबें तत्काल उपलब्ध करवाई जाएं।


3 वर्ष 2019 तक कक्षा 1 से 5 तक अतिरिक्त विषय उर्दू संचालित रही, उस व्यवस्था को तत्काल बहाल किया जाए

4 मदरसा शिक्षा सहायक भर्ती 2013 के 6000 पदों हेतु की गई भर्ती का परिणाम तत्काल जारी कर पैराटीचर्स को नियमित किया।


5 वित्त वर्ष 2009 से 2013 के बीच की गई बजट घोषणा में 2500 मदरसा कम्प्यूटर पैराटीचर्स के भर्ती हेतु वर्ष 2013 में आवेदन लिए गए थे, लेकिन भाजपा सरकार ने इस भर्ती को रद्द कर दिया। इसलिए इस भर्ती का परिणाम तत्काल जारी कर आवेदकों को नियुक्ति दी जाए। 


6 मदरसा पैराटीचर्स को वार्षिक मानदेय वृद्धि (इन्क्रीमेंट) जो 400 रूपये प्रतिवर्ष दिया जाता था, वो वर्ष 2019 से बन्द कर दिया गया है, इसलिए इस इन्क्रीमेंट को बहाल करते हुए प्रतिवर्ष 1000 रूपये किया जाए।

7 प्रत्येक सरकारी मदरसे को एक रूपये टोकन मनी पर एक बीघा भूमि आवंटित की जाए। साथ ही रियायती दर पर आवंटित सरकारी भूमि में भेदभाव बरतने की बजाए मुस्लिम संस्थाओं को भूमि आवंटित की जाए।


8 सरकारी विभागों और कार्यालयों में बाकी वक्फ बोर्ड का करोड़ों रूपये किराया तत्काल वक्फ बोर्ड के अकाउंट में ट्रांसफर किया जाए और भविष्य में बाजार भाव से यह किराया तय किया जाए।




9 एएजी (अतिरिक्त महा अधिवक्ता) नियुक्ति, सरकारी एडवोकेट नियुक्ति, आरपीएससी नियुक्ति, सूचना आयोग नियुक्ति, कर्मचारी चयन आयोग नियुक्ति आदि में खुलेआम मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव किया गया है, ऐसा क्यों ? अब मुस्लिम समुदाय यह भेदभाव बर्दाश्त नहीं करेगा।


10 मुस्लिम अधिकारियों के साथ ट्रांसफर पोस्टिंग में गहलोत सरकार ने पूरी तरह से भेदभाव बरता है, क्यों ? राजस्थान में सिर्फ 21 मुस्लिम आरएएस अधिकारी हैं, जिनमें से चार को छोड़कर सबको बिना महत्व के पदों पर लगा रखा है। यही हाल दो दर्जन के करीब मुस्लिम आरपीएस अधिकारियों का है, जिनमें से तीन को ढंग की पोस्टिंग दे रखी है। बाकी को अधिकारियों की भाषा में बर्फ में लगा रखा है, यानी कोई खास पद नहीं दे रखे हैं। बात तहसीलदार, सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर जैसे अधिकारियों की करें, तो इनमें भी कुछ को छोड़कर बाकी को बिना महत्व की पोस्टिंग दे रखी है, ऐसा क्यों ? जिस चूरू जिले के सुजानगढ कस्बे में यह आम सभा हो रही है, उस जिले में एक भी थानाधिकारी मुस्लिम नहीं लगा रखा है, क्यों ? अब मुस्लिम क़ौम इस नाइन्साफी से नाक नाक आ चुकी है।


11 राजस्थान के एक मात्र मुस्लिम आईपीएस अधिकारी अरशद अली, जो एक काबिल अफसर हैं और जिला एसपी लगने के योग्य भी हैं, लेकिन उन्हें जिला एसपी नहीं लगाया गया। आज राजस्थान में एक भी जिला एसपी मुस्लिम नहीं है, क्यों ? इसी तरह से कमरूजमां चौधरी जो कि एक काबिल व युवा आईएएस अधिकारी हैं और उनके बैच के कुछ अधिकारियों को जिला कलेक्टर लगा दिया गया है, लेकिन उन्हें अभी तक जिला कलेक्टर नहीं लगाया गया है, क्यों ? बात आरएएस अधिकारियों की करें, तो वरिष्ठ आरएएस अधिकारी सत्तार खान जिनको चूरू जिला परिषद में सीईओ लगा रखा है, जबकि आठ साल पहले वे इसी चूरू जिले के अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) रह चुके हैं, ऐसा भेदभाव क्यों ? यही हाल शिक्षा विभाग के पदों का है, खासकर शिक्षा संकुल का, जहाँ आपको ढूंढने से ही शायद कोई मुस्लिम अधिकारी मिल जाए। बात राजधानी जयपुर के प्रमुख पुलिस स्टेशनों की करें तो वहाँ भी आपको ढूंढने से मुस्लिम पुलिस अधिकारी नहीं मिलेगा। राजधानी के प्रमुख पुलिस स्टेशन माणक चौक, रामगंज, कोतवाली, गलता गेट, विधायकपुरी, जालूपुरा, ब्रह्मपुरी, आदि में आज तक शायद ही कोई मुस्लिम थानाधिकारी लगाया हो, ऐसा भेदभाव क्यों ?


12 विधायक व सांसद कोटे के फन्ड से मुंह देखकर टीका निकालने वाली कहावत को चरितार्थ करना छोड़ें और मुस्लिम इलाकों व इदारों में भी यह फन्ड खर्च करें।

13 विभागीय जांच, भ्रष्टाचार के बेबुनियाद आरोप और सरकार के अन्यायपूर्ण रवैये का शिकार कुछ मुस्लिम अधिकारियों व कर्मचारियों क्यों बना रखा है ? इसे राजस्थान की मुस्लिम क़ौम अब बर्दाश्त नहीं करेगी। 

14 मदरसा बोर्ड, वक्फ बोर्ड, हज कमेटी आदि के अलावा जनरल बोर्ड/निगमों पर होने वाली चेयरमैन/अध्यक्ष की राजनीतिक नियुक्तियों में मुस्लिम समुदाय को 15 प्रतिशत पद दिए जाएं।

15 नवोदय की तर्ज पर अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय बनाने और छात्रावास खोलने की लफ्फाजी करने की बजाए सरकार प्रत्येक जिले में शीघ्रता से एक एक अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय (नवोदय की तर्ज पर बालक बालिकाओं के लिए अलग अलग) और इसी तरह प्रत्येक जिले में एक एक छात्रावास बनाए।

16 एससी/एसटी की तर्ज पर सभी अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को पहली कक्षा से उच्च शिक्षा तक स्काॅलरशिप दी जाए।

17 जस्टिस सच्चर कमेटी और जस्टिस मिश्रा कमिशन की उन सिफारिशों को जो राज्य सरकार लागू कर सकती है, शीघ्रता से लागू करे और जो केन्द्र सरकार के क्षेत्र की सिफारिश हैं उन्हें लागू करने के लिए गहलोत सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक सिफारिश पत्र लिखे।
(23-02-2021)
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