सिविल लाइन्स कूच और दबाव की रणनीति के आगे झुकी कांग्रेस, पहली बार एक दर्जन से अधिक बनाए मुस्लिम चेयरमैन व सभापति

सिविल लाइन्स कूच और दबाव की रणनीति के आगे झुकी कांग्रेस, पहली बार एक दर्जन से अधिक बनाए मुस्लिम चेयरमैन व सभापति
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में 07 फरवरी को चेयरमैन व सभापति का चुनाव हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी की रणनीति इस कदर फ़ेल हुई कि उसे नाकों चने चाब कर करीब एक दर्जन चेयरमैन व सभापति मुस्लिम समुदाय से बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह सब 22 जनवरी को निकाले गए सिविल लाइन्स कूच (मुख्यमंत्री निवास का घेराव) और दबाव की रणनीति से हुआ।

राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ, मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ और अन्य संगठनों का 18 जनवरी से अनिश्चितकालीन धरना जयपुर कलेक्टरेट पर शुरू हुआ। यह धरना उर्दू तालीम और मदरसा तालीम के विभिन्न मुद्दों को लेकर था। लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत धरनार्थियों की बात सुनने के लिए तैयार नहीं हुए, तो 22 जनवरी को जुमे की नमाज के बाद मुख्यमंत्री निवास सिविल लाइन्स की तरफ आन्दोलनकारियों ने कूच किया। इस दिन केरल के लिए रवाना होते मुख्यमंत्री काफी देर तक रुके रहे और जब तक आन्दोलनकारी वार्ता करने के लिए तैयार नहीं हुए मुख्यमंत्री ने उड़ान नहीं भरी। मुख्यमंत्री ने अपने ज्वाइंट सेक्रेटरी शाहीन अली खान को वार्ता के लिए अधिकृत किया और आन्दोलनकारी वार्ता के लिए राजी हुए उसके बाद शाम करीब 6 बजे मुख्यमंत्री के चार्टर प्लेन ने केरल के लिए टेक ऑफ किया। यह धरना प्रदर्शन व सिविल लाइन्स कूच पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।


इस दिन रात आठ बजे तक आन्दोलनकारियों के प्रतिनिधि मण्डल ने शासन सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री द्वारा अधिकृत किए गए अधिकारी से हर बिन्दु पर विस्तृत वार्ता की और फाइल मुख्यमंत्री के लिए पुटअप करवाने के बाद अपना धरना समाप्त किया। जब तक वार्ता चलती रही तब तक धरना मुख्यमंत्री निवास के आगे सिविल लाइन्स फाटक पर चलता रहा। इस बीच विशेष बात यह भी रही थी कि जब आन्दोलनकारी अपने बोरिया बिस्तर धरना स्थल जयपुर कलेक्टरेट से उठा कर मुख्यमंत्री निवास सिविल लाइन्स की तरफ कूच के लिए रवाना हुए, तो आनन फानन में शिक्षा मन्त्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने अपने निवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर घोषणा की कि अल्प भाषाओं (उर्दू, सिन्धी, पंजाबी, गुजराती) के शिक्षकों के लगभग 500 अतिरिक्त पदों का आवंटन होगा तथा जिस स्कूल में अल्प भाषा पढने के इच्छुक 10 या 10 से अधिक विद्यार्थी होंगे, वहाँ अल्प भाषा का अतिरिक्त पद मिलेगा।


उल्लेखनीय यह है कि एकतरफा वोट देने और कांग्रेस की राजस्थान में सरकार बनवाने के बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दो साल से मुस्लिम समुदाय को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रखा है और उनके राज में सरकारी स्कूलों में एक तरह से उर्दू को खत्म किया जा रहा है। विचित्र बात यह भी है कि वे उर्दू तालीम, मदरसा तालीम और मुस्लिम समुदाय के अन्य मुद्दों पर बात सुनने के लिए भी तैयार नहीं हैं, जिससे मुस्लिम समुदाय में गहलोत के प्रति कड़ा रोष व्याप्त है। इस रोष का नतीज़ा यह रहा कि इस चरण के नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत 90 में से सिर्फ 19 सीटों पर ही मिला। हालांकि जोड़ तोड़ कर कांग्रेस ने आधे से अधिक चेयरमैन व सभापति बना लिए। लेकिन साथ ही मुसलमानों की नाराज़गी दूर करने व चार विधानसभा उप चुनावों को जीतने के लिए दबाव में आकर कांग्रेस ने करीब एक दर्जन से अधिक चेयरमैन व सभापति मुस्लिम समुदाय से भी बनाए।


सिविल लाइन्स कूच और दबाव की रणनीति के आगे कांग्रेस इस कदर झुकी कि उसे नागौर, सीकर, चूरू और झुन्झुनूं जिले में करीब सौ किलोमीटर के दायरे में नौ चेयरमैन व सभापति मुस्लिम समुदाय से बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। यहाँ तक कि उप चुनाव होने वाली सुजानगढ विधानसभा सीट की सुजानगढ नगर परिषद में भी कांग्रेस को मुस्लिम सभापति बनाना पड़ा। खास बात यह भी रही कि सिविल लाइन्स कूच की टीम ने 05 फरवरी की शाम को यह घोषणा कर दी थी कि उर्दू तालीम और मदरसा तालीम के मुद्दे पर 21 फरवरी को सुजानगढ कूच (आमसभा) किया जाएगा और इससे पहले 11 फरवरी से तीन दिन का दौरा सीकर, चूरू व नागौर जिले के विभिन्न गांवों व कस्बों का किया जाएगा। ज्यों ही इस घोषणा का सन्देश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, कांग्रेस के रणनीतिकारों की सारी रणनीति धरी की धरी रह गई और उन्हें मजबूरन करीब एक दर्जन चेयरमैन व सभापति मुस्लिम समुदाय से बनाने पड़े। 

जिन लोगों को सीकर, चूरू, झुन्झुनूं व नागौर जिलों से चेयरमैन या सभापति बनाया गया है, उनमें सुजानगढ से नीलोफर गौरी, लाडनूं से रावत खान, कुचामन सिटी से आसिफ खान, लक्ष्मणगढ़ से मुस्तफा कुरैशी, फतेहपुर से मुश्ताक नजमी, नवलगढ़ से शोएब खतरी, खण्डेला से याकूब खान मलकाण, लोसल से शम्मू बानो और तारानगर से प्रियंका बानो हैं। इन्हें कांग्रेस ने करीब सौ किलोमीटर के दायरे की विभिन्न नगर निकायों में चेयरमैन व सभापति बनाए हैं। इनके अलावा हनुमानगढ जिले की भादरा नगर पालिका से हाजी दाऊद कुरैशी को चेयरमैन बनाया है। साथ ही प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी नगर पालिका से फतिमा बोहरा को चेयरमैन बनाया है।

सीकर, चूरू, झुन्झुनूं और नागौर जिलों की पांच नगर निकायों में चेयरमैन व सभापति पहले से ही मुस्लिम समुदाय से सम्बंधित लोग बने हुए हैं। इनमें सीकर नगर परिषद से सभापति जीवण खान, झुन्झुनूं नगर परिषद से सभापति नगमा बानो, बिसाऊ नगर पालिका से चेयरमैन मुश्ताक खान, राजगढ़ नगर पालिका से चेयरमैन रजिया और मकराना नगर परिषद से सभापति समरीन भाटी हैं। यानी सीकर, चूरू, झुन्झुनूं और नागौर जिलों की नगर निकायों नौ चेयरमैन व सभापति इस चरण के चुनाव में बनाए हैं और पांच पहले के चरणों में बनाए थे। इस प्रकार चारों जिलों में कुल 14 मुस्लिम चेयरमैन व सभापति कांग्रेस ने मुस्लिम वोट बैंक खिसकने के डर से मजबूरी में बनाए हैं। 

सिविल लाइन्स कूच और दबाव की रणनीति ने कांग्रेस के रणनीतिकारों की सारी रणनीति पर पानी फेर दिया तथा पहली बार कांग्रेस को वोट खिसकने के डर ने डराया और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सुजानगढ उप चुनाव में हार की तस्वीर साफ नजर आई। इसलिए गहलोत एक साथ एक दर्जन से ज्यादा चेयरमैन व सभापति मुस्लिम समुदाय से बनाने को मजबूर हुए। ऐसा पहली बार हुआ है, क्योंकि इन चारों जिलों में कांग्रेस ने कभी भी एक साथ चार पांच से अधिक चेयरमैन व सभापति मुस्लिम समुदाय से नहीं बनाए हैं। 
(08-02-2021)
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