मिथुन चक्रवर्ती के बहाने••••✍
मिथुन चक्रवर्ती के बहाने••••✍
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"मैं असली कोबरा हूँ, डंस कर सबका काम तमाम कर दूंगा !" -मिथुन चक्रवर्ती
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"मैं असली कोबरा हूँ, डंस कर सबका काम तमाम कर दूंगा !" -मिथुन चक्रवर्ती
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। 7 फरवरी रविवार को कोलकाता के अन्दर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बंगाल चुनाव को लेकर आम सभा हुई। सभा बहुत विशाल थी, लेकिन पहली बार प्रधानमंत्री जी के भाषण में वो जोश नहीं था, जो आज तक की विभिन्न चुनावी सभाओं में होता है। वजह जो भी हो। शायद वजह बंगाल में नजर आती करारी हार भी हो सकती है। इस सभा में फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने भी प्रधानमंत्री के हाथों भाजपा ज्वाइन की। हमारे नजदीक मिथुन का भाजपा ज्वाइन करना कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। बहुत से फिल्म अभिनेता समय समय पर विभिन्न पार्टियों को ज्वाइन करते रहे हैं और छोड़ते भी रहे हैं।
हमारे नजदीक इस सभा में मिथुन द्वारा दिए गए भाषण में जो बात कही वो बड़ा मुद्दा है। इस सभा में मिथुन ने कहा कि मैं असली कोबरा हूँ, डंस कर सबका काम तमाम कर दूंगा। हालांकि उन्होंने यह बात अपनी फिल्म के एक डायलाॅग के तौर बोली। लेकिन हमारी तरह बहुतों को यह बात बहुत बुरी लगी। शायद प्रधानमंत्री जी को भी, क्योंकि ऐसी बातों से वोट मिलते नहीं बिगड़ते जरूर हैं।
अब मिथुन जी को क्या कहें, आदरणीय मिथुन जी या आदरणीय कोबरा जी ? मिथुन चक्रवर्ती ने बहुत सी फिल्म की हैं और उनमें उन्होंने पीड़ितों का मजबूती से पक्ष भी रखा है। हम भी उनके बहुत से किरदारों के हिमायती हैं। लेकिन इस सभा में उनके द्वारा बोली गई इस बात को कतई पसंद नहीं करते। जिसकी वजह यह है कि हमारे सियासी मैदान में कोबरा तो पहले से ही बहुत हैं और उनके जितना जहर मिथुन जी जैसे 100 कोबरों में भी नहीं हो सकता।
मिथुन जी आप सियासी मैदान में उतरे हैं, अच्छी बात है, लेकिन सियासी मैदान में उतरकर चुनाव जीतना होता है, जनहित के मुद्दे उठाना होता है और सत्ता में आने के बाद जनहित का काम करना होता है। आपको पता होना चाहिए कि जनता को जन हितैषी सत्ताधीश चाहिए ना कि डंसने वाला कोबरा। ऊपर वाले (ईश्वर) ने आपको इन्सान बनाया है, अच्छा इन्सान बनने की कोशिश कीजिए, कोबरा नहीं। वैसे हमारे देश के मतदाताओं ने बड़े बड़े कोबरों का फन कुचलने का हुनर भी सीख रखा है।
आपको पता होना चाहिए कि बहुत सी पार्टियों में कई छुटभैया व बड़भैया नेता ऐसे हैं, जो छंटे हुए कोबरा हैं। उन्होंने समाज में हर किस्म का जहर फैलाया है, नफरत फैलाकर समाज व देश को बरबाद किया है। उनकी काली करतूतों से देश में असंख्य दंगा फसाद हुए हैं। हजारों बेगुनाहों का खून बहा है, असंख्य महिलाओं व बच्चों ने इन दंगों में अपना सब कुछ बरबाद होते देखा है। असंख्य घरों और हंसती खेलती बस्तियों में इन कोबरा ब्रांड नेताओं ने कोहराम मचाया है और बहुत सी जगह आज भी आए दिन कोहराम मचाने की घिनौनी कोशिश करते रहते हैं। इसलिए कोबरा ब्रांड इन नेताओं के बीच में आप जैसे कोबरों की कोई अहमियत नहीं है, आप यहाँ कोबरा नहीं बल्कि सपौला भी नहीं बन पाएंगे, क्योंकि अगर आपने कोबरा बनने की कोशिश की तो पहले वाले कोबरा ही आपको निगलने की कोशिश करेंगे। इतिहास और वर्तमान इसका गवाह है।
(09-03-2021)
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