बजट रिप्लाई में नज़र आया सिविल लाइन्स कूच और सुजानगढ कूच का नतीज़ा

बजट रिप्लाई में नज़र आया सिविल लाइन्स कूच और सुजानगढ कूच का नतीज़ा
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उर्दू तालीम और मदरसा तालीम से मुताल्लिक बजट रिप्लाई सराहनीय, लेकिन पूरी मांगें मानने तक आन्दोलन जारी रहेगा और उप चुनावों में कांग्रेस को हराने का प्रस्ताव भी हुबहू कायम रहेगा।
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। उर्दू तालीम और मदरसा तालीम को लेकर राजस्थान में चल रहा आन्दोलन वैसे के वैसे जारी रहेगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा 18 मार्च को बजट रिप्लाई में की गई घोषणाओं के बाद इस आन्दोलन से जुड़े हुए आन्दोलनकारियों ने आन्दोलन को जारी रखने की घोषणा की और कहा कि जब तक सभी मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक आन्दोलन जारी रहेगा और उप चुनावों में कांग्रेस को हराने का जो प्रस्ताव पास किया गया था, वो भी हुबहू कायम रहेगा।


राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष अमीन कायमखानी ने इस मुद्दे पर बताया कि इस आन्दोलन में राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ और राजस्थान मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ एवं इनके विभिन्न सहयोगी संगठनों व बुद्धिजीवियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 18 जनवरी को जयपुर कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन धरना लगाया था और फिर 22 जनवरी को सिविल लाइन्स कूच के नाम से रैली निकालकर मुख्यमंत्री निवास तक हम लोग पहुंचे और मुख्यमंत्री निवास का घेराव कर वहीं धरना लगा दिया था।


22 जनवरी को ही मुख्यमंत्री द्वारा अधिकृत किए गए उनके ज्वाइंट सेक्रेट्री शाहीन अली खान से आन्दोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल की हर बिन्दु पर मुख्यमंत्री कार्यालय में विस्तृत वार्ता हुई और फाइल मुख्यमंत्री के लिए पुटअप की गई। लेकिन कोई विशेष नतीजा निकलता नजर नहीं आया, तो 5 फरवरी को हम आन्दोलनकारियों ने सुजानगढ़ कूच के नाम से आंदोलन की नई कड़ी शुरू करने की घोषणा की और 11 फरवरी से 20 फरवरी तक तीन जिलों सीकर, चूरू और नागौर जिले के विभिन्न गांवों और कस्बों में करीब 45 छोटी बड़ी मीटिंग आयोजित की तथा 46वीं मीटिंग 21 फरवरी को आम सभा के तौर पर सुजानगढ़ के गांधी चौक में आयोजित की।


उल्लेखनीय यह है कि इन सभी मीटिंग और आम सभा में आन्दोलनकारियों ने अपनी मांगों को दोहराया और आम सभा में गहलोत सरकार को ललकारते हुए एक प्रस्ताव पास किया कि अगर राजस्थान की गहलोत सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती है तो हम चारों विधानसभा सीटों (सुजानगढ़, वल्लभनगर, सहाड़ा व राजसमंद) के उप चुनावों में जनता से कांग्रेस को हराने की अपील करेंगे। 


ऐसा प्रस्ताव इस आम सभा में पास किया गया। इसके बाद 15 मार्च को विद्यार्थी मित्र और पंचायत सहायकों द्वारा जयपुर के शहीद स्मारक पर एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया और इस धरने में मदरसा पैराटीचर्स भी शरीक हुए तथा इस धरने के जरिए फिर उन सभी मांगों को दोहराया गया, जिनकी फाइल मुख्यमंत्री के लिए 22 जनवरी को पुटअप की गई थी। इस प्रकार लगातार जो धरना प्रदर्शन चल रहा था और साथ में अधिकारियों से बातचीत भी चल रही थी। जिसका नतीजा यह निकला के गहलोत सरकार दबाव में आई और मुख्यमंत्री ने 18 मार्च को बजट रिप्लाई में कुछ मांगों को माना।


जिन मांगों को माना, उसमें उर्दू शिक्षकों की वैकेंसी को बढाकर 1000 कर दिया गया। पहली क्लास से पांचवी क्लास तक 20 बच्चों पर उर्दू टीचर लगाने की घोषणा कर दी गई और छठी क्लास से उच्च क्लासों तक 10 बच्चों पर उर्दू टीचर लगाने की घोषणा कर दी गई। मदरसा पैराटीचर्स का जो मानदेय था, उसको 10 फ़ीसदी बढ़ाने की घोषणा कर दी गई। साथ ही मदरसा आधुनिकीकरण के लिए 25 करोड़ रूपये का बजट तय कर दिया गया। आन्दोलन के दबाव में मुख्यमंत्री ने जो किया उसे आन्दोलनकारियों ने सराहनीय बताया, लेकिन इससे पूरी तरह से सन्तुष्ट नहीं हुए।

इसलिए उर्दू शिक्षक संघ, मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ और इस आंदोलन से जुड़े हुए अन्य संगठन एवं सहयोगियों ने अपनी मांगों को वापस दोहराते हुए कहा है कि जब तक हमारे मांग पत्र की समस्त मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक हम इन घोषणाओं से संतुष्ट नहीं हैं और हम हमारे आंदोलन को जारी रखेंगे और जिसमें उप चुनाव में कांग्रेस को हराने का जो प्रस्ताव पास किया था, उस पर हम आज भी कायम हैं।


खास बात यह भी रही कि आंदोलन के दौरान बार-बार उच्चाधिकारियों के फोन आंदोलनकारियों के पास आते रहे और सुजानगढ़ कूच के दौरान भी उच्चाधिकारियों ने यह बात कही कि आप आंदोलन को स्थगित करके जयपुर आकर वार्ता कर लीजिए। इस पर आंदोलनकारियों ने उच्चाधिकारियों को कह दिया था कि जो भी वार्ता होगी वो सुजानगढ़ कूच की आम सभा के बाद ही होगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट रिप्लाई में उर्दू तालीम और मदरसा तालीम से मुताल्लिक जो घोषणाएं की हैं, उसमें आन्दोलनकारियों के साथ में कुछ उच्चाधिकारियों व विधायकों का भी विशेष रोल रहा है।

इस घोषणा में विधायकों के तौर पर संयम लोढ़ा, पूर्व डीजीपी एवं विधायक हरीश मीणा, पूर्व मंत्री व विधायक राजेंद्र राठौड़, मुख्यमंत्री कार्यालय के उच्चाधिकारी, पुलिस हेड क्वार्टर के कुछ उच्चाधिकारी और वक्फ बोर्ड चेयरमैन डॉक्टर खानू खान बुधवाली आदि का विशेष रोल रहा है। सड़क पर आंदोलनकारियों ने धरना प्रदर्शन कर दबाव बनाया, तो सरकार पर अन्दरखाने दबाव व गुजारिश इन विधायकों, नेताओं और उच्चाधिकारियों की रही। इस आन्दोलन, दबाव व गुजारिश का परिणाम मुख्यमंत्री के बजट रिप्लाई में 18 मार्च को स्पष्ट नजर आया।
(18-03-2021)
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