कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद की सरपरस्ती में राजस्थान के मुसलमानों ने जयपुर में किया "शक्ति प्रदर्शन"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद की सरपरस्ती में राजस्थान के मुसलमानों ने जयपुर में किया "शक्ति प्रदर्शन"
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सबसे मिलने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सलमान खुर्शीद को नहीं दिया मुलाकात का वक्त 
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जनप्रतिनिधियों के सम्मान के नाम पर पूर्व मन्त्री दुर्रू मियां ने अपने बंगले पर आयोजित किया यह कार्यक्रम 
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गहलोत सरकार के रवैये से राजस्थान के मुसलमानों में कड़ा रोष
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राजनीतिक नियुक्तियों और राज्यसभा सीट को लेकर भी हो रही है कार्यक्रम पर टीका टिप्पणी
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान की राजधानी जयपुर में मुख्यमंत्री निवास से तीन बंगले दूर सिविल लाइन्स स्थित पूर्व मन्त्री दुर्रू मियां के बंगले पर मुसलमानों का एक "शक्ति प्रदर्शन" जैसा कार्यक्रम 21 मार्च को आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम पूर्व केन्द्रीय मन्त्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद की सरपरस्ती में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम रखा तो मुस्लिम जनप्रतिनिधियों के सम्मान के नाम पर था, लेकिन अधिकतर मुस्लिम जनप्रतिनिधियों और विधायकों ने कार्यक्रम से दूरी बनाई और वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नाराज़गी के डर से इस सम्मान समारोह में शरीक नहीं हुए। इसलिए जो जनप्रतिनिधि आए उनका भी मंच से सम्मान नहीं किया गया।


विचित्र बात यह रही कि करीब आठ घण्टे लगातार जयपुर में रूकने के बाद भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सलमान खुर्शीद को मिलने का वक्त नहीं दिया और मुख्यमंत्री कार्यालय से जवाब यह मिला कि मुख्यमंत्री जी की तबीयत खराब है, जबकि इस दौरान वे दो प्रतिनिधि मण्डलों से मिले और इस खबर को मुख्यमंत्री ने अपने फेसबुक पेज पर भी लगाई। क्या इससे यह मतलब निकाला जाए कि गहलोत ने जानबूझकर सलमान खुर्शीद को वक्त नहीं दिया ? या यह मतलब निकाला जाए कि सलमान खुर्शीद के साथ जाने वाले प्रतिनिधि मण्डल से मुख्यमंत्री मिलना नहीं चाह रहे थे ? या यह मतलब निकाला जाए कि गहलोत यह चाहते हैं कि राजस्थान के मुसलमान सिर्फ मेरी गुलामी में रहें और किसी बड़े नेता की सरपरस्ती या शक्ति प्रदर्शन के जरिए मेरे ऊपर दबाव डालने की कोशिश नहीं करें ? या यह समझा जाए कि वे मुसलमानों की शक़्ल देखना ही नहीं चाहते, इसीलिए एक लम्बा अर्सा हो गया है, वे किसी भी मुस्लिम प्रतिनिधि मण्डल से नहीं मिले हैं ?


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 21 मार्च को दो प्रतिनिधि मण्डलों से मिले, जिनकी जानकारी उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लगाई है। उन्होंने लिखा है, "प्रदेश बजट में की गयी घोषणाओं के लिए उदयपुर संभाग से आए प्रतिनिधि मण्डल ने निवास पर मिलकर आभार व्यक्त किया। इस दौरान विधायक श्री दयाराम परमार, श्री दिनेश खोड़निया, श्री नगराज मीणा सहित वरिष्ठ कांग्रेस जन उपस्थित रहे।" दूसरी मुलाकात की जानकारी में मुख्यमंत्री ने लिखा है कि "फार्मासिस्टों के डेलीगेशन ने यहाँ निवास पर मिलकर फार्मासिस्ट के कैडर गठन के निर्णय हेतु आभार जताया। इस दौरान राजस्थान फ़ार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष डॉक्टर ईश मुन्जाल, रजिस्ट्रार महेंद्र सिंह शेखावत, पीसीआई सदस्य नवीन संघी, उपाध्यक्ष महावीर सौगानी, फार्मासिस्ट नेता आनंद सुरा व डॉक्टर प्रवीण सेन उपस्थित रहे।"


जाहिर सी बात है इस दिन मुख्यमंत्री की राजकीय कार्यों के लिए कुछ उच्चाधिकारियों और मन्त्रियों से भी मुलाकात हुई होगी। यानी यह सब मुलाकातें हुईं, लेकिन सलमान खुर्शीद और मुस्लिम प्रतिनिधि मण्डल के मिलने की बात आई तो तबीयत खराब हो गई। मुख्यमंत्री ने पहले दिन यानी 20 मार्च को जिस प्रतिनिधि मण्डल के मिलने की जानकारी फेसबुक पेज पर अटैच की है, वो इस प्रकार है, "ईडब्ल्यूएस आरक्षण में भी अन्य वर्गों के समान आयु सीमा व फीस में छूट प्रदान करने की घोषणा के लिए यहां निवास पर आए विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि मण्डलों ने मिलकर आभार व्यक्त किया। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, मंत्री श्री गोविन्द सिंह डोटासरा, डाॅक्टर रघु शर्मा एवं श्री प्रताप सिंह खाचरियावास, श्री धर्मेंद्र राठौड़, श्री दिनेश खोड़निया, पूर्व एमएलए श्री प्रदीप कुमार सिंह एवं सेवादल अध्यक्ष श्री हेमसिंह शेखावत उपस्थित रहे।" इन तीन खबरों को पढकर भी अगर आप यह नहीं कहेंगे कि वे मुसलमानों से मिलना ही नहीं चाहते, तो फिर और क्या कहेंगे ?


मुख्यमंत्री गहलोत के इस रवैये से पहले से नाराज़ मुसलमानों में और अधिक रोष व्याप्त हुआ है तथा दुर्रू मियां के यहाँ आयोजित कार्यक्रम में कानाबाती के तौर पर हर मुस्लिम कांग्रेसी जो बातें कह रहा था, उसका एक ही लब्बोलुआब था कि "कांग्रेस नेतृत्व और खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जिस अन्दाज़ में आज हमें एक तरह से धक्के मार रहे हैं, यह कांग्रेस के लिए ही भारी पड़ेगा।"


सलमान खुर्शीद की सरपरस्ती में दुर्रू मियां ने अपने बंगले पर जो कार्यक्रम आयोजित किया, वो स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में विजयी हुए मुस्लिम जनप्रतिनिधियों के सम्मान के तौर पर आयोजित किया। लेकिन मंच से किसी भी जनप्रतिनिधि का माल्यार्पण या पगड़ी पहनाकर सम्मान नहीं किया गया। नगर निकाय प्रमुखों में शायद भादरा चेयरमैन हाजी दाऊद कुरैशी के अलावा कोई नहीं आया। पार्षद, सरपंच और उप नगर प्रमुख जरूर कुछ आए थे। खबर है कि यह गहलोत की नाराज़गी से डरते हुए नहीं आए। लेकिन इसके बावजूद यह कार्यक्रम बहुत ही शानदार तरीके से आयोजित हुआ और इसमें राजस्थान के कोने कोने से मुस्लिम कांग्रेसी और मुस्लिम तन्जीमों के जिम्मेदारान शरीक हुए।


शक्ति प्रदर्शन के तौर पर आयोजित इस कार्यक्रम में करीब चार घण्टे सलमान खुर्शीद लोगों से मिलते रहे और लोगों की हर समस्या को सुनते रहे। खाना खाने से पहले नवाब दुर्रू मियां और सलमान खुर्शीद दो का ही मंच से भाषण हुआ। प्रेस काॅन्फ्रेंस हुई और सलमान खुर्शीद ने हर सवाल का खुलकर जवाब दिया। सलमान खुर्शीद और दुर्रू मियां की बातों में तीन बातें साफ तौर पर नज़र आई। पहली हर हाल में कांग्रेस को मजबूत करना है और साम्प्रदायिक ताकतों की साज़िश का शिकार नहीं होना है। दूसरी बात, उनका इशारा पूरी तरह से एमआईएम जैसी पार्टी के खिलाफ़ था, जिसके मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के जल्द राजस्थान में आने और पार्टी को कायम करने की चर्चा है। तीसरी बात यह नजर आई कि कांग्रेस मुसलमानों को नजरअंदाज कर रही है और कांग्रेस का यह सलूक कांग्रेस के साथ ही मुल्क के लिए भी नुकसानदेह है।


सलमान खुर्शीद ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति केनेडी की बात का हवाला देते हुए कहा कि मिस्टर केनेडी ने अपने मुल्क की अवाम से कहा था कि "यह मत पूछो कि मुल्क ने हमारे लिए क्या किया, बल्कि आज आप यह कहें हम मुल्क के लिए क्या कर सकते हैं ?" आज हमारी भी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम मुल्क और मुआशरे को कम्यूनल ताकतों से बचाएं। तारीख़ (इतिहास) गवाह है कि मुसलमानों ने हिन्दुस्तान के लिए क्या किया ? हमें यह कहना कि तुम पाकिस्तान चले जाओ, तो उन लोगों को मालूम होना चाहिए कि हमें पाकिस्तान पसंद नहीं था, इसीलिए यहाँ रहे। हमारे पुरखों ने गंगा और जमुना का हवाला देकर हमें यहाँ रूकने का कहा था, जिनके पानी से उन्होंने वुज़ू किया था। इसलिए आज जो सवाल उठाए जा रहे हैं वो बेहद दर्दनाक हैं।



उन्होंने कहा कि आज कहा जा रहा है कि हमें (मुसलमानों को) हुकूमत से बेदखल कर दिया या हमारी जरूरत के बिना हुकूमत बना दी गई। याद रखें हिन्दुस्तान में एक ही निजाम (शासन व्यवस्था) रह सकता है, जो गंगा जमुनी तहजीब वाला निजाम है। दूसरा कोई भी निजाम यहाँ कायम करने की कोशिश की, तो उससे मुल्क का मुस्तकबिल नहीं बन सकता और ऐसा निजाम कभी कामयाब नहीं होगा। हमें हर हाल में गंगा जमुनी तहजीब वाले निजाम को बचाना है। उन्होंने कहा कि अगर मुल्क का सेक्यूलर किरदार जिन्दा रहेगा, तो हम सब जिन्दा रहेंगे। अगर यह किरदार नहीं बचेगा, तो कोई नहीं बचेगा।

उन्होंने कहा कि आपने (मुसलमानों ने) आज तक हुकूमत से मांगा ही क्या है ? बस उर्दू और वक्फ का भला हो जाए वगैरह वगैरह, आपकी मांग को सुनना चाहिए। जहाँ हमारी हुकूमतें बची हैं, वो आपकी बदौलत बची हैं, इसलिए हमारी हुकूमतों को आपकी बात सुननी चाहिए (उनका यह इशारा साफ तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तरफ था)। उन्होंने कहा कि राजस्थान की नुमाइन्दगी तब कामयाब है, जब दुर्रू मियां कामयाब हैं और राजस्थान में हमारी नुमाइन्दगी के लिए दुर्रू मियां सबसे बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री ने मिलने का वक्त दिया, तो जरूर आपकी बातें उनके सामने पेश करूंगा।


उन्होंने कहा कि मुसलमानों की बात गैर मुस्लिम करें तो ज्यादा बेहतर है, इससे चार चान्द लगते हैं। हमने बाबरी मस्जिद के फैसले को सही बताया और एक लेख लिखा, तो हमारे गैर मुस्लिम साथी सीनियर वकीलों ने कहा कि सलमान साहब आपकी बात सही नहीं है, यह फैसला गलत हुआ है और इन साथी वकीलों के सरनेम द्विवेदी, त्रिवेदी, शर्मा, वर्मा वगैरह हैं। यह हमारे मुल्क की खूबसूरती है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें हमारे मुद्दे उठाने चाहिए, लेकिन सावधानी से, क्योंकि कई बार देखा है कि हम आवाज़ उठाते हैं तो उस बात को पकड़ कर साम्प्रदायिक ताकतें सियासी ध्रुवीकरण करती हैं। हमें साम्प्रदायिक ताकतों को ऐसा मौका नहीं देना चाहिए।

अपने खिताब में पूर्व मन्त्री एमादुद्दीन अहमद खान उर्फ दुर्रू मियां (लुहार नवाब) ने सलमान खुर्शीद और तमाम जनप्रतिनिधियों और मुस्लिम तन्जीमों व इदारों के जिम्मेदारान का इस्तकबाल किया। उन्होंने कहा कि काफी दिनों से कई साथी यह गुजारिश कर रहे थे कि एक गेट टू गेदर रखा जाए, लेकिन कोरोना और कुछ दूसरी वजहों से यह प्रोग्राम देर से रखा गया, जो आज आप लोगों के तआवुन व मुहब्बत से आयोजित किया गया है। मैं तमाम लोगों का शुक्रगुजार हूँ कि मेरी दावत पर आप यहाँ तशरीफ़ लाए।

दुर्रू मियां ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए कहा कि 77 साल की इस उम्र में मैं नसीहत ही दे सकता हूँ, लेकिन आज मुल्क में जो हालात बनाए जा रहे हैं और उसमें खासतौर पर हमें (मुसलमानों को) हाशिये पर लगाया जा रहा है, इससे लोगों में बड़ी बेचैनी है। हालात राजस्थान से लेकर दिल्ली तक सब जगह एक जैसे हैं। उन्होंने गहलोत व पायलट का नाम लिए बगैर कहा कि सलमान साहब हाथियों के दंगल में चींटियां पिसती हैं। इसलिए आप हमारी यह बात दिल्ली (कांग्रेस आलाकमान) तक पहुंचाएं।

उन्होंने गहलोत सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड एक्ट बनाने और दूसरी योजनाओं की तारीफ़ की तथा कहा कि जब क़ौम का फायदा होगा, तो पूरे मुल्क का फायदा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे प्रोग्राम पूरे राजस्थान में करने हैं और मुल्क में जो हालात बनाए जा रहे हैं, उनका मजबूती से हमें मुकाबला करना है। 

कार्यक्रम के दौरान और बाद में बहुत से लोग इस प्रोग्राम पर सवाल भी उठा रहे थे कि यह प्रोग्राम राजनीतिक नियुक्तियों और राज्यसभा सीट को लेकर रखा गया है। लेकिन काफी लोग ऐसे भी हैं जो इस प्रोग्राम से बेहद खुश थे और उन्होंने कहा कि नवाब साहब ने बहुत सही किया है, यह प्रोग्राम बहुत पहले हो जाना चाहिए था, हम कांग्रेस को 99 फीसदी वोट देते हैं और फिर भी सरकार हमें पूरी तरह से नजरअंदाज करती है, इस रवैये को अब बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। कार्यक्रम में लोगों ने एक दूसरे से बातचीत के दौरान गहलोत सरकार व कांग्रेस के रवैये पर खुलकर नाराज़गी का इजहार किया तथा लोगों की पीड़ा व भावनाओं को सुनकर ऐसा लग रहा था कि राजस्थान के मुसलमान गहलोत सरकार से नाक नाक आ चुके हैं और उन्हें कोई अच्छा विकल्प मिल गया, तो वे कांग्रेस को सियासी तलाक देते देर नहीं लगाएंगे।

कार्यक्रम में आदर्श नगर विधायक रफीक खान, किशनपोल विधायक अमीन कागजी, फतेहपुर विधायक हाकम अली खान, पूर्व मन्त्री नसीम अख्तर, पूर्व मन्त्री हमीदा बेगम, पूर्व मन्त्री हबीबुर्रहमान, पूर्व विधायक अलाउद्दीन आजाद, पूर्व विधायक मकबूल मण्डेलिया, पूर्व विधायक कय्यूम खान मसूदा, पूर्व सांसद अश्क अली टाक, पूर्व चीफ सेक्रेटरी एस अहमद, आरपीएससी के पूर्व चेयरमैन डाॅक्टर हबीब खान गौराण, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन डाॅक्टर निजाम खानज़ादा, वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सलावत खान, पीसीसी के पूर्व महासचिव शब्बीर हुसैन खान, कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेशाध्यक्ष आबिद कागजी, भादरा चेयरमैन हाजी दाऊद कुरैशी, पूर्व प्रधान चौहटन गफूर अहमद, प्रधान शमां खान, कांग्रेस नेता जाकिर गुडएज, मुस्लिम प्रोग्रेसिव फेडरेशन के सह संयोजक सय्यद अनवर शाह, राजस्थान बार काउंसिल के चेयरमैन एडवोकेट सय्यद शाहिद हसन, मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारी मोहम्मद अतीक, जमीअत उलमा ए हिन्द के हाफिज़ मन्जूर अली खान, राजस्थान यूनानी मेडिकल कॉलेज के सेक्रेटरी डाॅक्टर परवेज़ वारसी, मिल्ली काॅन्सिल राजस्थान के जनरल सेक्रेटरी एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर, मुस्लिम मुसाफिरखाना कमेटी जयपुर के सदर शब्बीर खान, कांग्रेस नेता इलियास कुरैशी, प्रोफेसर अय्यूब खान जोधपुर, डाॅक्टर इनामुर्रहमान, डाॅक्टर शोएब अहमद, अलीम पटेल, आदिल खान, पीसीसी के पूर्व सचिव अय्यूब खान श्यामगढ, पार्षद उम्र दराज, पार्षद लियाकत चुगनी, अब्दुल लतीफ़ आरको, पार्षद अय्यूब खान, रज्जाक भाटी, भंवर खान पूर्व पार्षद भादरा, अब्दुल हमीद खोखर पूर्व चेयरमैन चाकसू, पार्षद राबिया गुडएज, शाहिद गुडएज, खल्लाक खान, इस्माईल गंगापुर, नफीस अहमद पूर्व वाइस चेयरमैन हिण्डोन सिटी, जियाउद्दीन जालूपुरा, पार्षद नफीस कुरैशी, एडवोकेट सुभान खान सहित काफी तादाद में पूरे राजस्थान से मुस्लिम क़ौम के मोअज्जिज लोग शरीक हुए।
(23-03-2021)
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Comments

  1. पत्रकार जी यह नूरा कुश्ती है, कांग्रेस छोड़कर भाग रहे मुसलमानों को रोकने के लिए यह कथा लिखी गई है ! और ज्यादा कुछ नहीं है ! इसके बाद मुसलमानों के इन नेताओं के खाते में आएगा, वक्फ, भाषाई अल्पसंख्यक मामलात और उर्दू आदि ! बस:
    और विभाग तो उन्हें मिलते है जो मुसलमानों के वोट पर जीतकर आते है !

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