आईपीएस अरशद अली को जिला एसपी नहीं लगाने पर क्यों उठ रहे हैं फतेहपुर विधायक पर सवाल ?
आईपीएस अरशद अली को जिला एसपी नहीं लगाने पर क्यों उठ रहे हैं फतेहपुर विधायक पर सवाल ?
--------------------------------------------------
जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। राजस्थान क्षेत्रफल के हिसाब से देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहाँ 33 जिले हैं। कहने को यहाँ गांधीवादी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का शासन है। लेकिन एक भी जिले में उन्होंने मुस्लिम एसपी (जिला पुलिस अधीक्षक) नहीं लगा रखा है। इस समय राजस्थान में एसपी लगने की योग्यता वाले एकमात्र मुस्लिम आईपीएस अधिकारी अरशद अली हैं। अब सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उन्हें एसपी लगाना नहीं चाहते या कोई उन्हें लगने नहीं देना चाहता ?
इस सवाल का एक जवाब तो मुख्यमंत्री के रवैये से साफ जाहिर हो रहा कि मुख्यमंत्री मुस्लिम अधिकारियों व मुसलमानों के मुद्दों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे हैं। दूसरा जवाब कानाबाती के तौर पर यह मिल रहा है कि फतेहपुर विधायक हाकम अली खान ने मुख्यमंत्री के यहाँ इस बात का "वीटो" कर रखा है कि अरशद अली को एसपी नहीं लगाया जाए। अब सवाल यह है कि यह स्थिति कैसे पैदा हुई और इसका समाधान क्या है ?
हाकम अली खान फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और इसी विधानसभा क्षेत्र के एक कस्बे जैसे बड़े गांव बेसवा के आईपीएस अरशद अली निवासी हैं। अरशद अली की पत्नी जरीना खान बेसवा ग्राम पंचायत की लगातार दूसरी बार सरपंच हैं तथा जरीना खान ने बहुजन समाज पार्टी से हाकम अली खान के खिलाफ़ चुनाव लड़ा था। यानी यह एक राजनीतिक लड़ाई है, जिसकी किसने कब और किसने पहले शुरूआत की, यह एक पेचिदा व उलझा हुआ मुद्दा है।
आज की तारीख़ का पहला मुद्दा यह है कि हाकम अली खान विधायक हैं और उन्हें अगली बार फिर यहीं से चुनाव लड़ना है तथा चुनाव तय समय पर होंगे तो ढाई साल बाकी हैं। दूसरा मुद्दा यह है कि अरशद अली को हर हाल में एसपी लगना है, अगर कुछ महीने निकल जाएंगे तो वे फिर प्रमोशन में चले जाएंगे और एसपी नहीं लग पाएंगे तथा ऐसा हुआ तो राजस्थान में शायद वे पहले ऐसे आईपीएस होंगे, जो बिना एसपी बने ही रिटायर्ड हो जाएंगे। चुनाव आएगा, तो वही घोड़े और वही मैदान होगा। जाहिर सी बात है कि मात्र 860 वोटों के अन्तर से चुनाव जीतने वाले हाकम अली खान को नुकसान होगा।
इसलिए हाकम अली खान के शुभचिंतकों को अभी से इस बात की चिंता नजर आ रही है कि अगर इन पुरानी बातों को खत्म नहीं किया गया, तो इसका सीधा नुकसान हाकम अली खान को होगा। हाकम अली खान के शुभचिंतक और कायमखानी क़ौम के फिक्रमंद लोग यह चाहते हैं कि इन दूरियों और नाइत्तेफाकी को खत्म किया जाए तथा विधायक महोदय को अरशद अली का सहयोग करना चाहिए, अगर अरशद अली एसपी नहीं लग पाए, तो क़ौम समाज में सीधा सन्देश यह जाएगा कि विधायक ने उनको एसपी नहीं लगने दिया।
सियासी जानकार ऐसे मामलों में पूर्व उप राष्ट्रपति व पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत, पूर्व मन्त्री नाथूराम मिर्धा, पूर्व मन्त्री चन्दनमल वैद्य, पूर्व मन्त्री शीशराम ओला और पूर्व मन्त्री चौधरी तय्यब हुसैन जैसे नेताओं का उदाहरण भी देते हैं कि उन्होंने कैसे अपने राजनीतिक जीवन में बड़ा दिल रखा और विरोध करने वालों को भी सम्मान से नवाजा।
यहाँ भैरोंसिंह जी का एक वाकिया उदाहरण स्वरूप पेश किया जा रहा है। भैरोंसिंह जी 1977 में पहली बार जनता पार्टी सरकार के मुख्यमंत्री बने और रायसिंह नगर सुरक्षित सीट से दूलाराम जी कांग्रेस के विधायक बने। विधानसभा में सत्र के दौरान किसी बात को लेकर दूलाराम जी ने भैरोंसिंह जी को न सिर्फ भला बुरा कहा बल्कि गोली मारने की धमकी भी दे दी। इस मामले ने बड़ा विकराल रूप धारण कर लिया। कुछ दिनों बाद भैरोंसिंह जी डूंगरपुर जिले के दौरे पर गए, वहाँ जिले के सभी अधिकारियों का जब मुख्यमंत्री से परिचय करवाया जा रहा था, तो उनमें एक अधिकारी दूलाराम जी के दामाद भी थे। जब उनका नाम भैरोंसिंह जी ने सुना, तो सुनते ही पूछा, "कांईं थै दूलाराम जी रा पावणा हो ?" (क्या आप दूलाराम जी के दामाद हो ?), अधिकारी महोदय ने कहा हाँ साहब।
भैरोंसिंह जी ने अगला सवाल किया, क्या आपणी (स्वयं की) मर्जी से यहाँ हो ? अधिकारी ने कहा, साहब राज जहाँ नौकरी करवाए वहाँ करनी पड़ती है। भैरोंसिंह जी ने हंसते हुए कहा, राज तो जैपर (जयपुर) में भी नौकरी करवा सकता है। अधिकारी ने कहा, जैसा आपका हुक्म साहब। भैरोंसिंह जी ने अपने सेक्रेटरी को उसी समय यह बात नोट करवाई और फिर जब वे वापस जयपुर पहुंचे तब तक दूलाराम जी के दामाद का उनकी मर्जी के मुताबिक ट्रांसफर कर दिया गया।
मजेदार बात यह है कि कुछ दिनों बाद जब दूलाराम जी किसी कार्यक्रम में भैरोंसिंह जी को नजर आए और दूलाराम जी ने धन्यवाद देना तो दूर की बात उनसे नजर भी नहीं मिलाई, तो भैरोंसिंह जी ने उनसे जोर से मजाकिया अंदाज में कहा कि "थै जद चाहो मारै गोळी मार दियो, पण थानै शर्म कोनी आई पावणा जी मारै राज में इतणी दूर नौकरी करै, बे थारा ही नहीं म्हारा भी पावणा है। यानी आपको जब गोली मारनी है मेरे मार देना, लेकिन आपको शर्म नहीं आई दामाद जी मेरी सरकार में इतनी दूर नौकरी कर रहे थे, वे आपके ही नहीं मेरे भी दामाद हैं।
(23-03-2021)
-----------------------------------------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए।
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
A/c no. 613900 55000 00252
IKRA PATRIKA
IFSC:- PUNB 0613900
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR.
-----------------------------------------------------
➡️इकरा पत्रिका को सहयोग राशि आप Paytm, Phone Pay और Google Pay से भी भेज सकते हैं। फोन नम्बर 9414361522 पर (अकाउंट Farooq Ali Khan)
------------------------------------------------------
©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
------------------------------------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
09602992087, 09414361522
©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved.


Comments
Post a Comment