दो मई के बाद देश में बहुत कुछ नया होगा !
दो मई के बाद देश में बहुत कुछ नया होगा !
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दो मई को बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का परिणाम आएगा। इसके बाद सियासी तौर पर देश में बहुत कुछ नया होगा, कुछ मजबूरी में नया होगा और कुछ अति उत्साह व लालच में नया होगा। यह दिन यह भी तय कर देगा कि देश में सेक्यूलरिज्म जिन्दा रहेगा या फासीवाद और तेजी से मजबूत होगा।
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दो मई को बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का परिणाम आएगा। इसके बाद सियासी तौर पर देश में बहुत कुछ नया होगा, कुछ मजबूरी में नया होगा और कुछ अति उत्साह व लालच में नया होगा। यह दिन यह भी तय कर देगा कि देश में सेक्यूलरिज्म जिन्दा रहेगा या फासीवाद और तेजी से मजबूत होगा।
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। दो मई को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पांडिचेरी के विधानसभा चुनाव की मतगणना होगी। मतगणना के दिन किसी की हार और किसी की जीत होती है। लेकिन इस बार हार जीत के अलावा बहुत कुछ नया भी होगा। यह नया विशेष रूप से बंगाल के परिणाम के कारण होगा। बंगाल को लेकर जिस तरह से भाजपा और टीएमसी ने माहौल बनाया है, उससे बाकी राज्यों का चुनावी माहौल देशभर में ज्यादा चर्चा का विषय नहीं बना है। सब जगह बंगाल चुनाव और उसके परिणाम पर ही चर्चा हो रही है।
सबसे पहले चर्चा करें असम की। यहाँ भाजपा की सरकार है और चुनाव में कांग्रेस गठबंधन से उसका सीधा मुकाबला था। चर्चा दोनों की हार जीत की हो रही है। भाजपा की सत्ता वापसी की बातें भी सियासी गलियारों में हो रही हैं, तो कांग्रेस गठबंधन की जीत की दलील देने वाले भी खूब हैं। तमिलनाडु में डीएमके की जीत की चर्चा ज्यादा है। यानी यहाँ अन्ना डीएमके व भाजपा गठबंधन की हार बताई जा रही है। केरल में में कम्युनिस्ट गठबंधन एलडीएफ की सत्ता वापसी की चर्चा है। यहाँ कांग्रेस नेतृत्व वाले प्रमुख विपक्षी गठबंधन यूडीएफ की जीत की दावेदारी कमजोर लग रही है। पांडिचेरी में भाजपा गठबंधन के सत्ता में आने की चर्चा है।
केरल को लेकर एक विशेष चर्चा और है कि यहाँ कांग्रेस गठबंधन को रोकने के लिए भाजपा ने कुछ सीटों पर अपने वोट कम्युनिस्ट गठबंधन एलडीएफ को ट्रांसफर किए हैं। इस बीच अगर भाजपा कुछ सीटें जीतकर यहाँ सत्ता बनाने में मदद करने जैसी स्थिति में आ जाती है, तो फिर वो पूरी तोड़ फोड़ व सौदेबाज़ी करेगी। यह चर्चा भी सियासी जानकारों के बीच हो रही है। कुल मिलाकर भाजपा हर सम्भव प्रयास यह करेगी कि केरल जैसे राज्य में कांग्रेस की सरकार किसी भी सूरत में नहीं बने।
अब बात बंगाल की। यहाँ मुख्य मुकाबला ममता बनर्जी की टीएमसी और भाजपा के बीच है। तीसरी ताकत के तौर पर कांग्रेस व कम्युनिस्ट गठबंधन भी मैदान में है। यहाँ के मामले में भी एक विचित्र चर्चा है कि ममता बनर्जी को रोकने के लिए कम्युनिस्ट वोट कुछ सीटों पर भाजपा की तरफ ट्रांसफर हुआ है।
भाजपा ने इन चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण बंगाल के चुनाव को बनाया है। भाजपा ने बंगाल को जीतने के लिए पूरी ताक़त झौंक रखी है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जैसे बड़े नेताओं के भाषण में वो उत्साह नहीं देखा गया, जैसा अन्य चुनावों में देखा गया था। इससे राजनीतिक जानकार कयास लगा रहे हैं कि भाजपा का पक्ष कमजोर तो नहीं है ? यहाँ के बारे में चर्चा यह है कि भाजपा को बहुमत नहीं मिला, तो भी वो जोड़ तोड़ कर सरकार बनाएगी। अब यह जोड़ तोड़ तब होगा, जब भाजपा सौ से ऊपर सीट ले और ममता बनर्जी को स्पष्ट बहुमत से कम सीटें मिलें।
ममता बनर्जी की टीम के बारे में चर्चा यह है कि वो हर हाल में भाजपा को 70 सीटों तक समेटना चाहती है और टीएमसी को 170 से अधिक सीटें दिलवाना चाहती है, ताकि भाजपा कर्नाटक व मध्यप्रदेश वाला खेल यहाँ नहीं खेल सके। यहाँ अगर ममता बनर्जी अपनी सरकार बचाने में सफल हो जाती है, तो देश में एक बड़ा सन्देश जाएगा। मोदी व शाह की जोड़ी से मुकाबला कर उन्हें पछाड़ खिलाने वाली योद्धा के तौर पर ममता की गिनती होगी। भाजपा विरोधी देशभर का तमाम वोटर ममता बनर्जी को मोदी के खिलाफ़ प्रधानमंत्री पद का मजबूत उम्मीदवार मानेगा। ममता बनर्जी भी जीत की खुशी बांटने के लिए देशभर में दौरे करेगी और विपक्ष को खुद के नेतृत्व में एकजुट करने का प्रयास करेगी।
बंगाल की हार के बाद मोदी व शाह की जोड़ी के खिलाफ़ आरएसएस व भाजपा में भी सवाल खड़े होंगे। राजनाथ सिंह, नीतिन गडकरी, वसुंधरा राजे जैसे नेता मजबूती से लामबन्द होंगे तथा हो सकता है कि बात प्रधानमंत्री या गृहमंत्री को बदलने तक की हो जाए। अगर भाजपा आसानी से बंगाल में सरकार बना लेती है, तो फिर उसके लिए कोई चीज़ मायने नहीं रखेगी तथा मोदी व शाह की जोड़ी और मजबूत होगी। वसुंधरा राजे जैसे नेताओं को पूरी तरह से किनारे लगा दिया जाएगा।
बंगाल जीत के बाद भाजपा महाराष्ट्र व राजस्थान में सरकार गिराने का प्रयास करेगी और जानकारों का मानना है कि वो इस बार विफल नहीं होगी। साथ ही विपक्ष की पूरी तरह से कमर टूट जाएगी। अगर बंगाल में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला या उसने दूसरी पार्टियों में तोड़ फोड़ कर सत्ता हथियाने की कोशिश की, तो ममता बनर्जी अपनी टीम के साथ सड़कों पर होगी तथा खुदा ना करे यह दृश्य बहुत भयावह होगा। ऐसी स्थिति में बंगाल अराजकता व राष्ट्रपति शासन की तरफ जा सकता है।
दो मई के दिन अगर बंगाल में ममता बनर्जी चुनाव हार जाती है, तो इस दिन यह भी तय हो जाएगा कि अब देश में सेक्यूलरिज्म का जिन्दा रहना इतना आसान नहीं है, देश को तेजी से फासीवाद की तरफ धकेला जाएगा। ऐसी स्थिति में बिहार की राजनीति में भी उलट फेर हो सकता है, भाजपा यहाँ जेडीयू और आरजेडी में तोड़ फोड़ कर नीतीश कुमार की छुट्टी कर सकती है। साथ ही कांग्रेस को पूरी तरह से हाशिये पर लगा दिया जाएगा तथा साल 2022 के यूपी चुनाव आने से पहले विपक्ष में आखरी योद्धा अखिलेश यादव होगा। जिसका फैसला यूपी का चुनावी रण करेगा कि वो मोदी, योगी व शाह को हराकर विजयीश्री का मुकुट पहनता है या सेक्यूलर भारत के सियासी मैदान का आखरी शहीद होता है।
(24-04-2021)
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