चेयरमैन साहब तुम बहुत याद आओगे !!

चेयरमैन साहब तुम बहुत याद आओगे !!
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पूर्व सभापति टोंक अजमल साहब नहीं रहे
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एक बेमिसाल शख्सियत के धनी, हर वक्त हंसी मजाक करने वाले, रात की महफिल के सरदार, दोस्तों पर जमकर खर्च करने वाले, एक हंसमुख चेहरा, हमारे सीनियर साथी अजमल साहब उर्फ चेयरमैन साहब हमारे बीच नहीं रहे। बड़े दुख के साथ यह जुमले लिख रहा हूँ। कोरोना ने पिछले एक साल में हमारे एक दर्जन से ज्यादा साथियों व बुजुर्गों को हम से छीन लिया, जिनको हम आज भी याद करके भावुक हो जाते हैं। इस पीड़ा में एक इजाफा आज (27 अप्रैल 2021 को) और हो गया। हमारे साथी अजमल साहब इस दुनिया से विदा हो गए। अजमल साहब टोंक नगर परिषद के सभापति भी रहे हैं। वे साथियों में चेयरमैन साहब के नाम से मशहूर थे।


हम अक्सर उनके साथ होटल फिरोज एम डी रोड जयपुर में बैठते थे। लेकिन बाबा रियाजुद्दीन कुरैशी (रियाज बाबा) साहब के इन्तकाल के बाद यहाँ बैठना कम हो गया था, क्योंकि इस महफिल की रौनक चली गई थी। रही कसर कमबख्त कोरोना ने पूरी कर दी और साल भर से यह महफिल और फीकी हो गई। देर रात तक चलने वाली इस महफिल में जिस दिन अजमल भाई (चेयरमैन साहब) आ जाते तो रौनक में चार चांद लग जाते थे। इस महफिल में शहर के कुछ बुद्धिजीवी, बिजनेस मैन, पत्रकार और राजनेता रोज बैठते थे तथा उनकी कई विषयों पर चर्चा होती थी। खूब हंसी मजाक भी होती थी। 


इस महफ़िल में जयपुर के ही नहीं बल्कि जयपुर के बाहर के राजनेता व बुद्धिजीवी भी अक्सर शरीक होते थे। इस महफ़िल में हर धर्म, जाति और राजनीतिक दल के लोग शरीक होते थे। जयपुर में रोज ऐसी महफ़िल कहीं भी नहीं होती थी। इस महफ़िल की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि सब लोग बढ चढ़ कर अपनी बात रखते थे, कई बार जमकर बहसबाजी भी होती थी, बाबा रियाजुद्दीन सबकी बात खामोशी से सुनते रहते थे, वे बहुत कम बोलते थे और चेयरमैन अजमल साहब खूब बोलते थे और कुछ भी बोल जाते थे, कई बार तो बात किसी और सन्दर्भ की हो रही होती थी और वे कुछ और ही सन्दर्भ में ले जाते थे, जिससे सब हंसते हुए लोट पोट हो जाते थे। 

इस महफिल में पूर्व चेयरमैन वक्फ बोर्ड शौकत अन्सारी साहब जोधपुर होते, उस दिन तो यह अपने शबाब पर होती थी। करीब ढाई साल पहले बाबा रियाजुद्दीन कुरैशी साहब के जाने के बाद अब यह महफ़िल भी एक तरह से खामोश हो गई, रही कसर कमबख्त कोरोना ने पूरी कर दी। कोरोना महामारी में कभी कभार होने वाली इस महफिल का अब अजमल साहब के जाने के बाद तो कोई मतलब ही नहीं रहा।

इस महफिल में भाजपा नेता अशोक पाण्डेय जी, मौलाना साहब दरगाह के गद्दीनशीन बादशाह मियां, सिकन्दर भाईसाहब नियाजी, रिटायर्ड आरएएस खान मोहम्मद साहब, मोनू जी जैन, गफ्फार साहब घाटगेट, अलीम पटेल साहब, इलियास पठान साहब, आफाक नकवी साहब, यूसुफ कुरैशी साहब, कदीर अन्सारी साहब, वसीम कुरैशी साहब, एडवोकेट सुभान साहब, शाहनवाज अली साहब, पिन्टू अग्रवाल साहब, अजीज भाई मोहल्ला पन्नीगरान, इमामुद्दीन जी ठेकेदार, बबलू भाई, सोमानी जी, खाकसार एम फारूक़ ख़ान, यूनानी काॅलेज के मरहूम प्यारे मियां, शकूर नकवी साहब वगैरह कई लोग यहाँ आते थे।

किसी को क्या पता था कि यह महफिल एक दिन इस कदर खामोश हो जाएगी। आज होटल फिरोज भी वहीं है और एम डी रोड भी वहीं है, नहीं हैं तो बाबा रियाज व अजमल भाई जैसे लोग नहीं हैं। याद रखें "महफ़िलें मकानों से नहीं इन्सानों से सजती हैं।" इस महफ़िल की रौनक और अजमल भाई जैसे लोग इतने जल्दी चले जाएंगे, यह तो कभी सोचा भी नहीं था। इन्हीं लफ्जों के साथ यह आखरी जुमला "चेयरमैन साहब तुम बहुत याद आओगे।" 

अल्लाह तआला से दुआ है कि वो अपने तमाम नबियों, वलियों और महबूब बन्दों के सदके व तुफैल में चेयरमैन साहब को जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे और ख़ानदान वालों व तमाम साथियों को सब्र ए जमील अता करे, आमीन। (27-04-2021)
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-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।

Comments

  1. Wakehi jo ak shaksiyat thi ap ke bich se chali ga e allah tala se us ke habib ke sadke me in ko jannatul firdos me ala se ala mukam ata kare aameen summa ameen

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  2. Ek bahtreen sakhsiyat ke haamil.
    Allah paak marhoom zannat me aala mukaam ataa farmae,
    Aameen.

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