दुनिया को अलविदा कह गई हमारी नजमा आपा

दुनिया को अलविदा कह गई हमारी नजमा आपा
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जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। जयपुर की मशहूर और माअरूफ इल्मी व समाजी शख्सियत नजमा आपा जो हंसमुख बेगम के नाम से भी जानी जाती हैं, जिनका 3 मई की रात को इन्तकाल हो गया। इल्मी हल्के में नजमा आपा सबकी "आपा" थीं, छोटे से लेकर बड़ों तक सबकी आपा। लोग आपा कह कर ही उन्हें बुलाते थे। वे सबकी आपा थीं और एक लाजवाब शायरा (कवयित्री) भी थीं। खुदा की अज़ीम कुदरत है कि वो हर वक्त हंसते मुस्कुराते रहती थीं, इसीलिए "हंसमुख बेगम" के नाम से मशहूर थीं। अब सिर्फ उनकी यादें बाकी रह गईं हैं।


उन्होंने आकाशवाणी पर कई कार्यक्रम किए हैं। मीठी जुबान और अदबो एहतराम की मालिक नजमा आपा अपने आप में एक अलग ही शख्सियत की धनी थीं। जिनकी मिसाल मिलना बेहद मुश्किल है। उनके बेटे नदीम भाई हर साल बहुत ही अदबो एहतराम के साथ आपा का जन्म दिन मनाते थे। उन्होंने 6 अक्टूबर 2019 को आपा का 80 वां यौम ए पैदाइश का प्रोग्राम जयपुर के मोती डूंगरी रोड पर स्थित मुस्लिम मुसाफिरखाने में आयोजित किया था। जिसमें आपा से मुहब्बत करने वाले शहर के कई मोअज्जिज लोग शरीक हुए थे। 


आपा की मुझ खाकसार (एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका) पर खास मेहरबानी व सरपरस्ती थीं। वे अक्सर मुझे फोन करतीं थीं, मैं फ्री होता तो उनसे खूब लम्बी बात करता था, अगर बिजी होता और फोन नहीं उठा पाता, तो फ्री होने के बाद काफी देर तक आपा से बात करता था। आपा इस बात की दूसरों को शिकायत भी करती थीं कि "आप मेरा फोन नहीं उठाते हो और बात नहीं करते हो, फारूक़ ख़ान तो मुझ से खूब लम्बी बात करता है।" 


आपा मुझे बहुत दुआएं देती थीं और मैं भी लम्बी बातें जिसमें हंसी मजाक भी होता था, इसलिए करता था कि वे एक माँ, बहन और दोस्त जैसी जिम्मेदार व तालीम याफ्ता बुजुर्ग औरत थीं, जिनकी बातों से ही सही जितनी सरपरस्ती व मुहब्बत मिल जाए वो कम है। वे घर परिवार व रिश्तेदारों सबकी बातें मुझ से शेयर करती थीं। नजमा आपा एक लाजवाब शख्सियत थीं। वे मुझे अपने बेटे की तरफ मानती थीं।


नजमा आपा मेरी बेबाक लेखनी और गंगा जमुनी तहजीब को बढावा देने वाले लेखों को बहुत पसंद करती थीं और इकरा पत्रिका को कई दिन सम्भाल कर रखती थीं और जो लेख उनको पसंद आते थे, वे अपने जानने वालों को भी पढाया करती थीं। वे हर साल 26 जनवरी के प्रोग्राम में मुझे सम्मानित करते हुए कुछ गिफ्ट दिया करती थीं। आखरी गिफ्ट 26 जनवरी 2020 को उन्होंने मुझे दिया, जो लाजवाब था। उन्होंने एक छोटे बच्चे की तरफ मुझे सम्मानित किया। 


उन्होंने सम्मानित करते हुए मुझे एक फाइल फोल्डर दिया, जिसमें एक कैलेन्डर, एक कागज जिस पर गणतंत्र दिवस के बारे में खुद की लिखी हुई नज्म, एक कार्ड फोल्डर जिसमें खुद का लगा कार्ड और खास बात यह है कि यह चीज़ें इस शर्त के साथ दी कि यह मेरी यादगार हैं, इसे सम्भाल कर रखना। मैंने उनको काम में नहीं लिया और आपा की यादगार के तौर पर उसी दिन सम्भाल कर रख दिया था। साथ ही एक लिफाफा दिया जिसमें 200 रूपये, लेकिन इस लिफाफे के ऊपर मुझ खाकसार की शान में जो जुमले आपा ने लिखे थे, वे लाजवाब हैं। इस सम्मान सामग्री में एक "पोपकोर्न" का पैकेट भी था, क्योंकि मैं तो उनके लिए एक बच्चा था।


कमबख्त कोरोना महामारी व लाॅकडाउन के चलते उनसे साल भर में कोई मुलाकात नहीं हुई, सिर्फ फोन पर बातें होती थी। इस बार 26 जनवरी के प्रोग्राम में सम्मानित करने के लिए आपा का फोन आया, लेकिन उनकी तबीयत नासाज होने की वजह से वे नहीं आ पाईं। उनके बेटे नदीम भाई और बेटी सीमा बाजी से बस यही गुजारिश है कि अदबी दुनिया में आपा की यादों को हमेशा जिन्दा रखिए।

आखिर में अल्लाह से दुआ कि वो अपने तमाम नबियों, वलियों और महबूब बन्दों के सदके व तुफैल में नजमा आपा की मग्फिरत करे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे और पूरे ख़ानदान को सब्र ए जमील अता करे, आमीन।
(05-05-2021)
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-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
09602992087, 09414361522

Comments

  1. She was a Unique Personality and will be remembered for her deeds.

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  2. If I remember well, she's the mother of my school friend Salim Shahzad...if so I feel a vacuum in the literature world. She & her father Janab Inam ul Haq sb were our mentor. May Allah tãala bless her a highest place in Jannah. Āameen.
    Dr Abdul Mannan Khan

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    1. Her father's name was Janab Ikram ul Haq Saheb.

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  3. My mother had a great personality.Her name will be illuminated in the world of literature .May Allah bless her a highest place in Jannah.
    Seema Bano

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