यूपी पंचायत चुनाव में सपा ने दिखाई ताकत : अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, गोरखपुर सहित कई जगह भाजपाई किला हुआ ध्वस्त !

यूपी पंचायत चुनाव में सपा ने दिखाई ताकत : अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, गोरखपुर सहित कई जगह भाजपाई किला हुआ ध्वस्त !
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काले कृषि क़ानूनों के मुद्दे पर भाजपा व केन्द्र सरकार की हठधर्मिता, कोरोना महामारी से निपटने में सरकारी तन्त्र की विफलता तथा बेरोजगारी व नफरती माहौल से नाक-नाक आ चुकी जनता ने बंगाल के साथ ही यूपी में भी दिया जनमत संग्रह।
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यह हार भाजपा व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस की भी हुई है, जिन्होंने पंचायत चुनावों को जीतने के लिए पूरी ताक़त लगा दी थी।
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लखनऊ/जयपुर (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। गत दिनों उत्तर प्रदेश (यूपी) में पंचायती राज के चुनाव हुए, जिसमें प्रमुख विपक्षी पार्टी यानी सपा पर लोगों ने भरोसा किया और उसने कई जगह फतेह का झण्डा फहराया। वहीं अयोध्या, वाराणसी, मथुरा व गोरखपुर सहित कई जगह भाजपा के मजबूत किले ध्वस्त हो गए। अगले साल की शुरुआत में यूपी विधानसभा चुनाव हैं, यानी विधानसभा चुनावों के करीब आठ महीने बाकी हैं। इससे पहले सत्ताधारी भाजपा को इस तरह की पटकनी जनता देगी, इसकी सम्भावना कम थी। क्योंकि अमूमन पंचायत राज और नगरीय निकाय के चुनाव सत्ताधारी पार्टी ही जीतती है।


इन चुनावों में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने जो जीत दर्ज की है, उससे ऐसा लग रहा है कि उन्होंने विधानसभा चुनाव के फाइनल मैच से पहले पंचायत चुनाव के रूप में सेमीफाइनल जीत लिया है। पंचायत चुनाव के इन नतीजों ने सत्तारूढ़ भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है और खबर यह है कि इस हार से पार्टी नेतृत्व और आरएसएस के कान खड़े हो गए हैं, उनको लग रहा है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार जनता की नजर में फ़ेल हो चुकी है, अगर यही हाल रहा तो विधानसभा चुनाव में यूपी का हाथ से निकलना तय है। कोरोना महामारी में राज्य सरकार की विफलता और पंचायती राज चुनाव में हार के बाद सियासी सुगबुगाहट मुख्यमंत्री बदलने की भी है। लेकिन योगी आदित्यनाथ ने भी काफी विधायक अपने समर्थन में जुटा रखे हैं, इसलिए उनको बेदखल करना भाजपा व आरएसएस नेतृत्व के लिए आसान काम नहीं है।


इस हार के पीछे जाहिर है प्रमुख कारण जनता की नाराज़गी रही है। तीन काले कृषि क़ानूनों के मुद्दे पर भाजपा व केन्द्र सरकार की हठधर्मिता और कोरोना महामारी से निपटने में सरकारी तन्त्र की विफलता ने भाजपा की पूरी तरह से पोल खोल दी है। साथ ही विकास को लेकर भाजपाई नेताओं की लफ्फाजी, बढती बेरोजगारी व नफरती माहौल से जनता का एक बड़ा वर्ग नाक नाक आ चुका है और उसने बंगाल की तरह यूपी में भी भाजपा को हरा दिया है। यह हार भाजपा व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों के साथ साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस की भी हुई है, जिन्होंने पंचायत चुनावों को जीतने के लिए पूरी ताक़त लगा दी थी। यहाँ यह कहें तो गलत नहीं होगा कि बंगाल विधानसभा चुनाव और यूपी पंचायत चुनावों की हार भाजपा के लिए एक जनमत संग्रह साबित हुआ है।


खबर है कि इन चुनावों में समाजवादी पार्टी समर्थित 760 उम्मीदवार जिला पंचायत वार्डों में विजयी हुए हैं, जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार 750 सीटों पर ही सफल हुए हैं। वहीं बसपा ने 381 सीटें जीती हैं, तो कांग्रेस को 76 सीटें मिली हैं। हालांकि निर्दलीय प्रत्याशियों ने सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं, जारी आंकड़ों के अनुसार करीब 1083 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई है। 

इन चुनावों के परिणाम पर सपा और भाजपा दोनों ने ही अपनी जीत का दावा किया है। जनसत्ता के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा है कि पंचायत चुनावों में योगी सरकार की नीतियों की वजह से भाजपा को जीत मिली है। थ्री टायर (त्रिस्तरीय) चुनावों में भाजपा के 45 हजार समर्थित उम्मीदवार ग्राम प्रधान का चुनाव जीतकर आए हैं और 60 हजार से ज्यादा भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने क्षेत्र पंचायतों में जीत हासिल की है। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भाजपा के 918 उम्मीदवार जीते हैं।

टीवी-9 हिन्दी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना बुधवार 5 मई को संपन्‍न हुई। सभी पार्टियों ने अपने अपने समर्थित उम्मीदवारों की जीत का दावा किया है। प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए पिछले महीने चार चरणों में मतदान हुआ था। इस दौरान 15, 19, 26 और 29 अप्रैल को वोट डाले गए थे तथा मतगणना का काम दो मई को शुरू हुआ था। इस दौरान 8 लाख 69 हजार से ज्यादा सीटों पर निर्वाचन हुआ है। इनमें ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य की सात लाख 32 हजार से ज्यादा सीटें, ग्राम प्रधानों की 58 हजार 176 सीटें, क्षेत्र पंचायत सदस्यों (ब्लाॅक मेम्बर) की 75 हजार 852 सीटें तथा जिला पंचायत सदस्य की 3,050 सीटें शामिल हैं। इन चुनावों में 12 लाख 89 हजार से ज्यादा प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। इस बीच भाजपा, सपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी तथा अन्य विभिन्न दलों ने पंचायत चुनाव में अपनी जबरदस्त जीत का दावा किया है।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने दावा किया है कि उनकी पार्टी द्वारा समर्थित प्रत्याशियों ने जिला पंचायत सदस्य की 800 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की है। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर में भी भाजपा को हार का स्वाद चखना पड़ा है। राजधानी लखनऊ में भी भाजपा का यही हश्र हुआ है, साथ ही सपा ने अयोध्या में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी के समर्थित प्रत्याशियों ने जिला पंचायत सदस्य की तीन हजार से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा और उनमें से ज्यादातर पर जीत हासिल हुई है। पंचायत चुनाव में भाजपा की पराजय के विपक्ष के दावे बेबुनियाद हैं। जिला पंचायत सदस्य की 918 सीटें जीतने के अपने पूर्व के दावे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अभी कुछ कहा नहीं जा सकता, हो सकता है कि इसमें कुछ कमी रह जाए।

कांग्रेस ने पंचायत चुनाव में अपने प्रदर्शन को संतोषजनक करार देते हुए दावा किया है कि उसके द्वारा समर्थित 270 उम्मीदवारों ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने दावा किया है कि पार्टी द्वारा समर्थित 270 उम्मीदवारों ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता है। वहीं 571 सीटों पर उसके प्रत्याशी दूसरे स्थान पर तथा 711 सीटों पर तीसरे स्थान पर रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों ने क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान (सरपंच) तथा ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड पंच) की सीटों पर जीत हासिल की है।

दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने पंचायत चुनाव में मिली कामयाबी से उत्साहित होकर दावा किया है कि इस सफलता के साथ वह राज्य में कांग्रेस से आगे निकल गई है। आप के राज्यसभा सदस्य एवं प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा है कि उनकी पार्टी 88 जिला पंचायत सदस्यों, 300 ग्राम प्रधानों तथा 232 ग्राम पंचायत सदस्यों को जिताकर प्रदेश में कांग्रेस से आगे निकल गई है। उन्होंने दावा किया है कि आप उत्तर प्रदेश में भाजपा, सपा और बसपा के बाद चौथे नंबर की पार्टी बन गई है। कांग्रेस का वोट बैंक लगातार आम आदमी पार्टी से जुड़ रहा है। गौरतलब है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सभी प्रत्याशी खुद को समर्थन देने वाली पार्टी के निशान के बजाए चुनाव आयोग द्वारा दिए गए व्यक्तिगत चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरे थे।

अमर उजाला के मुताबिक गोरखपुर जिले में भाजपा ने जिस उम्मीद के साथ चुनाव मैदान में प्रत्याशी उतारे थे नतीजा वैसा नहीं आया है। पार्टी नेताओं का दावा है कि 68 में से 20 सीटों पर ही भाजपा को जीत मिली है। यह संख्या बहुमत से 15 कम है। हालांकि भाजपा नेता भाजपा के चार और हिंदू युवा वाहिनी के एक बागी को अपना बता रहे हैं। ऐसा हुआ तो संख्या 25 हो जाएगी। इसके बावजूद बहुमत के लिए 10 जिला पंचायत सदस्यों का समर्थन लेना पड़ेगा, तभी जिला पंचायत अध्यक्ष (जिला प्रमुख) की कुर्सी पर काबिज हुआ जा सकेगा। भाजपा ने 68 जिला पंचायत वार्डों से प्रत्याशी उतारे थे। खूब प्रचार प्रसार भी किया था। दावा था कि इस बार जिला पंचायत में बहुमत की सरकार बनाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पार्टी के कई दिग्गज प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है।

नव भारत टाइम्स के अनुसार उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव के नतीजों से सत्तारूढ़ योगी आदित्यनाथ सरकार को बड़ा झटका लगा है। सूबे की भाजपा सरकार के एजेंडे में शामिल तीन जिलों वाराणसी, अयोध्या और मथुरा में भाजपा की हार हुई है। योगी सरकार के चार सालों के कार्यकाल में इन तीनों जिलों पर विशेष फोकस रहा है। पंचायत चुनाव के नतीजे भाजपा सरकार के लिए झटका देने वाले साबित हुए हैं।

सबसे पहले वाराणसी की बात करें तो विधान परिषद के चुनाव के बाद अब पंचायत के चुनाव में भी भाजपा को यहाँ शिकस्त मिली है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संसदीय क्षेत्र में जिला पंचायत की 40 में से सिर्फ 8 सीटें ही भाजपा के खाते में आई हैं। वहीं सपा के खाते में 14 सीटें और बसपा के खाते में 5 सीटें आई हैं। यहाँ अपना दल (एस) को 3 सीटें, आम आदमी पार्टी और सुभासपा को एक एक सीटें मिली हैं। वहीं 3 निर्दलीय कैंडिडेट को भी जीत मिली है।

इसी तरह मथुरा में भी भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। यहाँ मायावती की बसपा ने 12 और चौधरी अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोकदल ने 9 सीटों पर परचम लहराया है। भाजपा की झोली में 8 सीटें आईं हैं। वहीं सपा ने मात्र एक सीट से अपना खाता ही खोला है। यहाँ कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल सका और 3 निर्दलीय प्रत्याशी भी जीते हैं।

विचित्र बात यह भी हुई कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा किए गए तमाम प्रयासों के बावजूद अयोध्या में पंचायत चुनाव के परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं रहे और जिले की 40 जिला पंचायत सीटों में से भाजपा को महज आठ सीटें ही मिली हैं। विपक्षी समाजवादी पार्टी का दावा है कि पंचायत चुनावों में उसे अयोध्या में सबसे ज्यादा फायदा हुआ है और उसके समर्थन वाले उम्मीदवारों ने जिला स्तर पर 22 सीटें जीती हैं। वहीं बसपा का दावा है कि उसके उम्मीदवारों ने अयोध्या में जिला पंचायत की चार सीटें जीती हैं। पूरे राज्य में सफलता के भाजपा के दावे के विपरीत अयोध्या इकाई ने यह स्वीकार किया है कि उनका प्रदर्शन आशा के अनुरुप नहीं रहा है। अयोध्या जनपद में करीब एक दर्जन भाजपा नेताओं ने टिकट ना मिलने की वजह से बगावत भी कर दी थी।

भाजपा के जिला प्रवक्ता दिवाकर सिंह ने पीटीआई को बताया कि परिणाम निराशाजनक रहे हैं। अयोध्या जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के विधायक होने के बावजूद हमें 40 में से सिर्फ आठ जिला पंचायत सीटों पर जीत मिली है। भाजपा का चुनाव परिणाम खास तौर से सोहावल उप जिले में ज्यादा खराब रहा है, जहाँ उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर केन्द्र सरकार ने मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ भूमि आवंटित की है। न्यायालय ने राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले का 2019 में फैसला सुनाते हुए मस्जिद के लिए जमीन देने को कहा था। वहीं सपा ने दावा किया है कि यहाँ पांच में से चार सीटें उसके हिस्से में आयी हैं, जबकि पांचवीं सीट निर्दलीय उम्मीदवार के पास है। 

अयोध्या, मथुरा व काशी (वाराणसी) तीनों ही जिले भाजपा के सियासी एजेंडे में हमेशा से प्रमुख तौर पर शामिल रहे हैं। इनके नाम पर ही भाजपा सियासत करती आ रही है। देश और प्रदेश दोनों ही जगहों पर भाजपा की ही सरकार है। अयोध्या में राममंदिर का निर्माण भी हो रहा है, जिसका पूरा श्रेय भाजपा खुद ले रही है। वाराणसी भी लगातार दो बार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। अयोध्या के बाद अब भाजपा ने मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि और वाराणसी की ज्ञानव्यापी मस्जिद मुद्दे पर भी अपने कदम बढ़ा दिए हैं। इसके बावजूद तीनों जगह भाजपा हार गई है। आठ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव के सेमीफाइनल में मिली यह शिकस्त योगी सरकार के साथ साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और आरएसएस के लिए भी बहुत बड़ा झटका है।
(09-05-2021)
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