इस्लाम खां प्रधान जी के साहबजादे ताज मोहम्मद ख़ान को बनाया भीलवाड़ा युवा कायमखानी महासभा का जिलाध्यक्ष

इस्लाम खां प्रधान जी के साहबजादे ताज मोहम्मद ख़ान को बनाया भीलवाड़ा युवा कायमखानी महासभा का जिलाध्यक्ष
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14 जून को "नवाब कायम ख़ान डे" पर करवाया गया पदभार ग्रहण
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जयपुर/भीलवाड़ा (थार न्यूज़-इकरा पत्रिका)। भीलवाड़ा जिले का मेघरास गांव जिसकी पहचान प्रधान जी इस्लाम खां जी कायमखानी थे, जो 24 सितम्बर 2020 को इस दुनिया से चले गए। वे मेवाड़ इलाके में कायमखानी क़ौम के मजबूत स्तम्भ थे, जिनका सभी क़ौमों में अच्छा खासा रसूख था। वे एक सेवाभावी और मिलनसार शख्स थे, जिन्होंने क़ौमी खिदमत में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके बड़े साहबजादे ताज मोहम्मद ख़ान कायमखानी को राजस्थान कायमखानी महासभा के संयोजक कर्नल शौकत अली खान की अनुमति से महासभा की भीलवाड़ा इकाई के जिलाध्यक्ष सांवत खान बेसकलाई (पूर्व सरपंच) ने युवा जिलाध्यक्ष मनोनीत किया है।


उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा युवा कायमखानी महासभा के जिलाध्यक्ष इमरान कायमखानी ने अपनी राजनीतिक व्यस्तता के चलते 15 मई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने दस साल के कार्यकाल में सामाजिक कार्यों में बढ चढ कर हिस्सा लिया और उन्होंने समाज के विकास व जागरूकता के लिए लगातार प्रयास किए। इसलिए इस इस्तीफे के बाद 07 जून को ताज मोहम्मद खान कायमखानी को भीलवाड़ा युवा कायमखानी महासभा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है।


ताज मोहम्मद खान का परिवार मेवाड़ इलाके की कायमखानी क़ौम का एक प्रतिष्ठित परिवार है और यह परिवार सामाजिक कार्यों के साथ साथ राजनीति में भी सक्रिय है। इनके पिता मरहूम इस्लाम खां प्रधान जी ग्राम पंचायत मेघरास के सरपंच रहे हैं और बरसों तक इस ग्राम पंचायत में सरपंच इन्हीं के परिवार का सदस्य रहा है। इस्लाम जी दो बार सरपंच, एक बार बनेड़ा पंचायत समिति के उप प्रधान तथा कार्यवाहक प्रधान भी रहे हैं। वे राजस्थान युवा कायमखानी महासभा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे हैं। साथ ही कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट जयपुर के ट्रस्टी, राजस्थान कायमखानी शोध संस्थान जोधपुर के संस्थापक सदस्य और राजस्थान कायमखानी महासभा के संरक्षक सदस्य भी रहे हैं। इसके अलावा वे कायमखानी काॅर्डिनेशन सेवा संस्थान भीलवाड़ा के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे हैं। ताज मोहम्मद खान के दादा मरहूम शकरू खां जी राजस्थान कायमखानी महासभा के अध्यक्ष रहे हैं। पूरी कायमखानी क़ौम में इस परिवार की प्रतिष्ठा है।

इस्लाम खां प्रधान जी के नेतृत्व में कायमखानी काॅर्डिनेशन सेवा संस्थान भीलवाड़ा ने कायमखानी क़ौम में सामूहिक विवाह सम्मेलन करने की शुरुआत की थी। प्रधान जी के नेतृत्व में उनकी टीम ने सात सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किए और कई अन्य छोटे बड़े सामाजिक व शैक्षणिक प्रोग्राम भी किए। यह सामूहिक विवाह सम्मेलन दो वर्ष के अन्तराल पर आयोजित किए जाते थे, जिनमें काफी संख्या में अमीर व ग़रीब हर कायमखानी परिवार ने अपने बच्चे बच्चियों की शादी की है।

इस्लाम खां जी ने भीलवाड़ा जिले के कायमखानी सरदारों को साथ लेकर करीब एक दशक पहले 2006 में सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करने के लिए कायमखानी काॅर्डिनेशन सेवा संस्थान भीलवाड़ा की स्थापना की थी। इस संस्थान ने 23 अप्रेल 2017 को सातवाँ सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया था। शाहपुरा में आयोजित यह सम्मेलन एक आलीशान रिसोर्ट मणीयार काॅटेज होटल एण्ड रिसोर्ट में आयोजित किया गया था। जिसमें मुख्य अतिथि तत्कालीन कैबिनेट मंत्री यूनुस खान थे। इस सम्मेलन में कौम के प्रतिष्ठित समाजसेवी मोहम्मद खां चित्तौड़गढ़ और डीवायएसपी महमूद खां के पुत्रों की भी शादी हुई थी।

एक सितम्बर को राजस्थान कायमखानी महासभा के पूर्व संयोजक जी खान साहब का इन्तकाल हो गया था, इस खबर से प्रधान जी बहुत दुखी हुए थे और उन्होंने 04 सितम्बर को मेघरास स्थित खुद के फार्म हाउस में जी खान साहब के लिए खिराज ए अकीदत का प्रोग्राम आयोजित किया था। छह सितम्बर को वे खुद जयपुर के कायमखानी गेस्ट हाउस में जी खान साहब की याद में आयोजित किए गए प्रोग्राम में आए थे। दोनों जगह उन्होंने शानदार भाषण दिया था। वे पूरी तरह से तंदरुस्त और एक्टिव थे, लेकिन पता नहीं कब कोरोना की चपेट में आए और 58 साल की उम्र में 24 सितम्बर 2020 की रात करीब 10 बजे उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

प्रधान जी हमेशा अपने भाषण में एक दोहा या शेअर बोलते थे, "बोल सको तो मीठा बोलो, कटु बोलना मत सीखो। लगा सको तो बाग लगाओ, आग लगाना मत सीखो।" यह पंक्तियां उन्होंने उक्त दोनों कार्यक्रमों में भी बोली थी और वे इन पंक्तियों को पूरी तरह से अपनी जिन्दगी में ढाले हुए थे। वे कभी किसी से तोड़ कर नहीं रखते थे, बल्कि हर मीठी और कड़वी बात को हंस कर टाल देते थे।

शकरू खां जी हाथीखानी का यह परिवार कायमखानी क़ौम के साथ दूसरी क़ौमों में भी आदर व सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, क्योंकि यह परिवार सभी के सुख दुःख में हर वक्त खड़ा रहता है। शकरू खां जी मेवाड़ इलाके के एक प्रतिष्ठित समाजसेवी व राजनेता रहे हैं। वे 1956 में पहली बार गांव मेघरास के सरपंच बने और छह बार सरपंच रहे। उनकी पत्नी अशरफ बाई हुसैनखानी भी सरपंच रही हैं। जिनका का 7 जनवरी 2018 को करीब 97 साल की उम्र में इन्तकाल हो गया था। शकरू खां जी का अपने इलाके की सभी कौमों में बड़ा मान सम्मान था, वे सभी कौमों में लोकप्रिय थे, क्योंकि वे सभी कौमों के सुख दुःख में शरीक रहते थे तथा वे गंगा जमुनी तहजीब के एक मजबूत पैरोकार थे। यही कारण था कि उन्हें कई वर्षों तक सरपंच बनने का पंचायतवासियों ने अवसर प्रदान किया। उनकी इसी प्रतिष्ठा के कारण उनके बड़े पुत्र याकूब खां भी मेघरास के सरपंच रहे हैं।

शकरू खां जी की प्रतिष्ठा और मिलनसारिता के कारण इस परिवार को पूरे इलाके में सम्मान की नजर से देखा जाता है तथा इसी वजह से इनकी पुत्रवधु और इस्लाम खां प्रधान जी की पत्नी भंवर बानो को भी सभी कौमों के सहयोग व समर्थन से एक बार अपनी ग्राम पंचायत का सरपंच और एक बार पंचायत समिति सदस्य (ब्लाॅक मेम्बर) बनने का अवसर मिला था। इनके अलावा शकरू खां जी की एक पोत्र वधु शबनम बानो पत्नी ताज मोहम्मद खान को भी पंचायत समिति सदस्य बनने का मौका मिला था। कुल मिलाकर यह है कि इस परिवार के तीन पुरूषों एवं तीन महिलाओं को क्षेत्र की सेवा करने के लिए जन प्रतिनिधि बनने का मौका जनता ने दिया है। विशेष बात यह है कि ताज मोहम्मद खान के दादाजी, दादीजी, पिताजी, माताजी और ताऊजी यानी परिवार के पांच लोग मेघरास ग्राम पंचायत के सरपंच रहे हैं।

शकरू खां जी को उनकी ईमानदार, समाजसेवी और इन्साफ पसंद छवि के कारण कायमखानी कौम ने उन्हें राजस्थान कायमखानी महासभा का अध्यक्ष बनाया। उल्लेखनीय यह है कि शकरू खां जी जब राजस्थान कायमखानी महासभा के अध्यक्ष थे, तब उनके जनरल सेक्रेटरी कौम के प्रतिष्ठित सरदार डीडवाना के हैडमास्टर भंवरू खां जी गौराण थे, जो पूरी कौम में हैडमास्टर साहब के नाम से आज भी मशहूर हैं। इस टीम में कोषाध्यक्ष उम्मेद खां जी डीडवाना थे, जो बाद में महासभा के अध्यक्ष भी बने। इस पूरी टीम ने कम संसाधन होते हुए भी प्रदेश भर में कायमखानी इलाकों का दौरा किया और कौम में सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक और आर्थिक जागरूकता फैलाने में भरपूर कामयाबी हासिल की।

शकरू खां जी और इस्लाम खां प्रधान जी आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी पहचान व काम को उनके परिवार ने पूरे इलाके में जिन्दा कर रखा है। इस्लाम खां जी जो छोटी सी उम्र में गत वर्ष चल बसे थे। उनकी कमी कायमखानी क़ौम के लिए भारी नुकसान साबित हुई है। उनकी कमी को पूरा करने और मेवाड़ इलाके में प्रधान जी का बदल पैदा करने के लिए क़ौम के संजीदा सरदारों ने उनके साहबजादे ताज मोहम्मद खान को भीलवाड़ा युवा कायमखानी महासभा का जिलाध्यक्ष बनाया है। ताज मोहम्मद खान के दो छोटे भाई फय्याज खान और डाॅक्टर रियाज खान हैं। ताज मोहम्मद खान को विधिवत पद ग्रहण 14 जून को नवाब कायम ख़ान डे पर करवाया गया। इस दिन हर वर्ष कायमखानी क़ौम अपने प्रथम पुरुष नवाब कायम ख़ान साहब का शहादत दिवस "नवाब कायम ख़ान डे" मनाती है। इस वर्ष नवाब कायम ख़ान साहब का 602 वां शहादत दिवस मनाया गया।
(16-06-2021)
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