कोरोना महामारी की गाइडलाइन के तहत मनाएं नवाब कायम ख़ान डे
कोरोना महामारी की गाइडलाइन के तहत मनाएं नवाब कायम ख़ान डे
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कायमखानी महासभा के संयोजक कर्नल शौकत अली खान की क़ौम से गुजारिश
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बहादुर, जांबाज, वतनपरस्त, वफादार और ईमानदार कायमखानी क़ौम के बानी (प्रथम पुरुष) दादा नवाब कायम ख़ान साहब (रहमतुल्लाह अलैह) के 602 वें यौम ए शहादत को मनाने के लिए राजस्थान कायमखानी महासभा के संयोजक व क़ौम के खादिम होने की हैसियत से मैं (लेफ्टिनेंट कर्नल शौकत अली खान रिटायर्ड) क़ौम से कुछ खास गुजारिश कर रहा हूँ। जो निम्न हैं:-
(1) पिछले तीन-चार साल में हम "नवाब कायम ख़ान डे" को बड़े कार्यक्रम के तौर पर नहीं मना पाए, क्योंकि शुरूआत के तीन साल तो 14 जून रमजान में आया और पिछली साल कोरोना महामारी के बीच आया। फिर भी गए साल काफी संख्या में छोटे बड़े प्रोग्राम क़ौम ने कोरोना गाइडलाइन के तहत आयोजित किए। इस बार भी हमें कोरोना महामारी की गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन करते हुए यह दिन मनाना है।
(2) इस साल 14 जून 2021 सोमवार को कायमखानी क़ौम अपने दादा का 602 वां यौम ए शहादत मनाएगी। नवाब साहब की जन्म स्थली ददरेवा (जिला चूरू) स्थित नवाब कायम ख़ान स्मारक के साथ-साथ जहाँ-जहाँ कायमखानी आबाद हैं, उन गांवों, कस्बों व शहरों में यह दिन मनाया जाएगा। इसके लिए हमें कोई भी भीड़-भाड़ नहीं करनी है, कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए दादा को खिराजे अक़ीदत पेश कर उनकी मग्फिरत की दुआ करनी है। साथ ही उन तमाम बुजुर्गान ए दीन के लिए भी दुआ करनी है, जो इस दुनिया से जा चुके हैं। इसके अलावा देश में, प्रदेश में, कौम में, रिश्ते नातों में, घर परिवार में मोहब्बत, अमन-चैन व भाईचारा कायम रहे की दुआएँ भी हमें खुदा से करनी हैं, जो हर साल हम करते हैं।
(3) हमें हर साल की तरह इस बार भी शहीद कायमखानी सैनिकों के लिए भी दुआ करनी है, जो वीरता के साथ देश की रक्षा करते हुए विभिन्न युद्धों व सैन्य ऑपरेशनों में शहीद हुए हैं। यह शहीद सैनिक क़ौम व मुल्क का फख्र हैं।
(4) इस दिन हमें हमारे उन बुजुर्गों को भी खासतौर पर याद करना है, जिन्होंने क़ौम व मुल्क की खिदमत की। साथ ही हमारी विभिन्न कायमखानी रियासतों के नवाबों, जागीरदारों और क़ौम के सरदारों को भी याद करना है, जिनके हम वारिस हैं।
(5) हमें इस बात पर फख्र करना चाहिए कि उस महान योद्धा और वली सिफ़्त इंसान (नवाब कायम ख़ान साहब) का खून हमारी रगों में दौड़ रहा है, जिनके देश प्रेम, बहादुरी और वफादारी के किस्से इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हैं। हम उस कौम के वंशज हैं, जो अपनी पुरातन परम्पराओं एवं संस्कृति के बल पर साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है, हम उस कौम के वंशज हैं, जिसने वतनपरस्ती में अपने प्राणों की आहुति दी है। हमें इस दिन अपनी कौम के वकार और इक़बाल को बुलन्द करने के लिए हमारे दादा नवाब कायम ख़ान साहब की शिक्षाओं व आदर्शों को आत्मसात करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का प्रण लेना चाहिए।
(6) पिछली साल नवाब कायम ख़ान डे पर कुरआनख्वानी, फातिहाख्वानी, ब्लड डोनेशन कैम्प, ज़रूरतमंदों की मदद, गौ शालाओं में चारा वितरण आदि कार्यकम आयोजित किए थे। यह कार्यक्रम क़ौम के विभिन्न संगठनों और इदारों ने आयोजित किए थे। जिनमें कायमखानी क़ौम के साथ साथ दूसरी क़ौमों ने भी सहयोग किया था। इस बार भी हमें इस दिन आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में भरपूर सहयोग करना है। इन कार्यक्रमों को आयोजित करने वाले तमाम संगठनों, संस्थाओं, ट्रस्ट व सोसाइटीज का हम तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हैं।
(7) ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इस बार कोरोना लाॅकडाउन की वजह से आर्थिक व्यवस्था बहुत कमजोर हो गई है, बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगारी का शिकार हो गए हैं, इसलिए इस दिन हमें अपने अपने इलाके में दिल खोलकर ज़रूरतमंदों की आर्थिक मदद करनी है।
(8) इस मुक़द्दस दिन सब गिले शिकवे भूल कर अपने गांव में, कस्बे में, शहर में कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए फिजीकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दादा नवाब कायम ख़ान साहब की जीवनी, कायमखानी क़ौम की उत्पत्ति, देश की रक्षा में कायमखानी सरदारों का योगदान एवं बलिदान, कायमखानी संस्कृति और परम्पराओं के बारे में बच्चों एवं युवाओं को अवगत करवाएं।
(9) यह बात हमें खासतौर पर याद रहनी चाहिए कि यह जो हम नाम के पीछे "कायमखानी" सरनेम (जाति) लिख कर गौरवान्वित होते हैं, हमें वो गौरव देने वाले सिर्फ हमारे दादा नवाब कायम ख़ान साहब (रहमतुल्लाह अलैह) ही हैं। फ़ख्र कीजिए कि हम जिंदा क़ौम कायमखानी से ताल्लुक रखते हैं। जिसका अतीत गौरवशाली है तो वर्तमान भी इतिहास रचने का माद्दा रखता है।
(10) आखरी गुजारिश सिर्फ क़ौम की नई पीढ़ी (युवक, युवतियां और बच्चों) से। आपको इस बात पर फ़ख़्र होना चाहिए कि हम भारतीय मुसलमान होने के साथ कायमखानी भी हैं। आपको पता है कि नई नस्ल और नौजवान खून क़ौमों का सरमाया होता है। इसलिए आपको हर किस्म की बुराई तथा बीड़ी, सिगरेट, गुटखे आदि के नशे से खुद को बचाना है। साथ ही पारिवारिक रिश्तों में आ रही दरारों को बढाने की बजाए उन्हें पाटने की कोशिश करनी है। आपको तालीम के मैदान में झण्डे गाड़ने हैं, कॉम्पिटिशन के इस बढते दौर में अपने आपको हर लिहाज़ से मजबूत करना है, ताकि आप अपने पुरखों की तरह इलाके और मुल्क की खिदमत कर क़ौम का सिर फख्र से ऊंचा कर सकें। (07-06-2021)
@लेफ्टिनेंट कर्नल शौकत अली खान (रि•)
संयोजक, राजस्थान कायमखानी महासभा।
9983510845, 9667200763

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