फीस एक्ट की पालना करवाने की बजाए निजी स्कूलों को संरक्षण दे रहा है राजस्थान का शिक्षा विभाग : संयुक्त अभिभावक संघ
फीस एक्ट की पालना करवाने की बजाए निजी स्कूलों को संरक्षण दे रहा है राजस्थान का शिक्षा विभाग : संयुक्त अभिभावक संघ
***********************************
***********************************
जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था की क्या स्थिति है इसका स्पष्टीकरण कहीं से प्राप्त करने की आवश्यकता अब बची नहीं है। आज जिस प्रकार राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और कानून पर निजी स्कूल संचालक हावी हैं, इसका प्रमाण राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के टीसी मामले पर "यू - टर्न" लेने से ही साबित होता है। संयुक्त अभिभावक संघ ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के इस फैसले पर 14 जुलाई को कहा कि अभिभावकों के प्रति राज्य सरकार और शिक्षा विभाग जवाबदेह है, किन्तु जिस प्रकार निजी स्कूल संचालक हठधर्मिता दर्शा रहे हैं, उसके चलते राज्य सरकार और विभाग ने अपने घुटने टेक दिए हैं।
प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि प्रदेश के निजी स्कूल संचालक फीस के चलते छात्र-छात्राओं के जीवन और भविष्य से खिलवाड़ करने पर उतारू हो गए हैं। उनको ना छात्रों की परवाह है और ना ही शिक्षा की परवाह है तथा ना ही अभिभावकों की स्थिति की परवाह है। उन्हें केवल फीस से मतलब है। टीसी को लेकर जो संशोधित आदेश प्रस्तावित है वह 3 माह में टीसी जमा करवाने का है, क्या राज्य सरकार व शिक्षा विभाग यह तय कर पाएंगे कि अगर कोई टीसी जमा नहीं करवा पायेगा तो क्या उसे या उनके बच्चों को पढ़ने का कोई अधिकार नही है ? जिन बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई पिछले 3 महीनों से रुकी हुई है अब 3 महीने का समय टीसी के लिए निर्धारित किया जा रहा है। इस दौरान जब बच्चा पढ़ाई ही नहीं करेगा तो वह किस बात की फीस जमा करवाएगा ? इन सब सवालों के अलावा अनगिनत सवाल हैं जो अभिभावकों ने निजी स्कूलों, सरकार और विभाग से पूछे हैं, किंतु अभिभावकों के प्रति जवाबदेह राज्य सरकार और शिक्षा विभाग निजी स्कूलों का संरक्षण कर रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि टीसी को बेवजह फसाद बनाया हुआ है। अगर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग सख्ती के तहत कार्य कर सुप्रीम कोर्ट के 03 मई 2021 के आदेश और फीस एक्ट 2016 की पालना सुनिश्चित करने के आदेश करती है और एक्शन लेती है तो ना टीसी पर कोई फसाद होगा और ना ही फीस पर कोई विवाद होगा। किन्तु राज्य सरकार और शिक्षा विभाग निजी स्कूलों के धनबल के आगे घुटने टेके बैठी हैं और निजी स्कूलों को अभिभावकों को लूटने की खुली छूट दे रखी है, जिसके चलते ना सुप्रीम के आदेश का सम्मान हो रहा है और ना ही कानून का राज स्थापित किया जा रहा है।
प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज शर्मा ने कहा कि शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा फीस को लेकर अपना स्टेटमेंट तो दे रहे हैं, निजी स्कूलों की फीस वसूली में उनके एजेंट बनकर एक सत्र की फीस वसूली की बात भी बोल रहे हैं, किंतु क्या शिक्षा मंत्री का प्रदेश के लिए यही कर्तव्य है, वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश और फीस एक्ट 2016 पर क्यों कोई बयानबाजी नहीं करते हैं? क्यों स्कूलों पर कार्यवाही सुनिश्चित नहीं कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री को अपने पद की जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ना कि निजी स्कूलों का संरक्षण कर उनकी गुलामी करनी चाहिए।
(15-07-2021)
----------------------------------------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए।
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
A/c no. 613900 55000 00252
IKRA PATRIKA
IFSC:- PUNB 0613900
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR.
-----------------------------------------------------
➡️इकरा पत्रिका को सहयोग राशि आप Paytm, Phone Pay और Google Pay से भी भेज सकते हैं। फोन नम्बर 9414361522 पर (अकाउंट Farooq Ali Khan)
------------------------------------------------------
©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
------------------------------------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
09602992087, 09414361522
©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved.

Comments
Post a Comment