स्टूडेंट्स के लिए विशेष काॅलम : संविधान की पाठशाला (1)

स्टूडेंट्स के लिए विशेष काॅलम : संविधान की पाठशाला (1)
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"संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों ना हो, यदि वे लोग जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौंपा जाएगा खराब निकले, तो निश्चित रूप से संविधान खराब सिद्ध होगा।"

-बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर
अध्यक्ष
प्रारूप समिति, संविधान सभा।
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संविधान सभा की सर्वाधिक महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य

नियम समिति
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1 डाॅक्टर राजेन्द्र प्रसाद सभापति(देश के प्रथम राष्ट्रपति, देश के पहले राष्ट्रपति जिन्होंने लगातार 2 कार्यकाल का निर्वहन किया। संविधान सभा के अध्यक्ष भी रहे। भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में 1946 और 1947 में कृषि और खाद्य मंत्री का दायित्व भी निभाया)

2 जगजीवन राम (इन्हें बाबूजी के नाम से लोकप्रियता प्राप्त थी, भारत के प्रथम दलित उप प्रधानमंत्री थे। भारत सरकार में रक्षा, श्रम, रेल और संचार मंत्री के रूप में भी अपना दायित्व निभाया। रेल मंत्री के रूप में 5 साल तक रेल किराया नहीं बढ़ाया। संचार मन्त्री के रूप में गांव-गांव डाकखानों का जाल बिछाया। श्रम मंत्री के रूप में बहुत उल्लेखनीय काम किया। दो प्रमुख कानून जिनके बिना आज भी काम चलना कठिन है एक एम्प्लाइज स्टेट इन्श्योरेंस एक्ट-1948, दूसरा प्रोविडेंट फंड एक्ट 1952। भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 और बांग्लादेश निर्माण के समय वे देश के रक्षा मंत्री थे। वे दो बार देश के रक्षा मंत्री रहे हैं। इनकी पुत्री मीरा कुमार ने भी भारत सरकार में मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष का दायित्व भी बखूबी निर्वहन किया है)

3 शरत चन्द्र बोस (बाद में इनकी सदस्यता समाप्त हो गई थी), 4 फ्रेंक ऐन्थनी, 5 ए के अय्यर, 6 बख्शी टेकचंद, 7 रफ़ी अहमद क़िदवई (आजादी के पूर्व जब कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव में महात्मा गांधी के पसंदीदा उम्मीदवार डॉक्टर पट्टाभि सीतारमैया के खिलाफ जब नेताजी सुभाषचन्द्र बोस खड़े हुए तब रफ़ी अहमद क़िदवई ने सुभाषचंद्र बोस का समर्थन किया। विजयी उम्मीदवार सुभाषचंद्र बोस थे। यह अलग बात है कि बड़े नेताओं का विशेषकर महात्मा गांधी का सहयोग प्राप्त नहीं होने के कारण नेताजी सुभाषचंद्र बोस को अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा था। 1949 में सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रत्याशी पुरषोत्तम दास टण्डन के विरुद्ध डॉक्टर पट्टाभि सीतारमैया का समर्थन किया, विजयी प्रत्याशी सीतारमैया थे। आप उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। साथ ही भारत सरकार में खाद्यान्न व कृषि, संचार, नागरिक उड्डयन मंत्री के रूप में भी उल्लेखनीय कार्य किया) 

8 जोसेफ़ अल्बन डिसूजा, 9 एन जी आयंगर, 10 पुरषोत्तम दास टण्डन (इन्हें महात्मा गांधी ने राजऋषि की उपाधि दी थी, हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिलाने के लिए इनका सर्वाधिक योगदान रहा है। 1961 में आपको "भारत रत्न" की उपाधि प्रदान की गई, 1950 में कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए) 

11 गोपीनाथ बोरदोलोई, 12 पट्टाभि सीतारमैया, 13 के एम मुंशी, 14 मेहरचंद खन्ना, 15 हरनाम सिंह, 16 श्रीमती जी दुर्गाबाई, 17 किरन शंकर राय, 18 सत्यनारायण सिन्हा, 19 एम ए आयंगर, 20 एस एन माने, 21 दीवान चमन लाल, 22 के एम मुंशी।
(सौजन्य : संवैधानिक मूल्य पालन समिति)

संविधान क्या है ?
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1 एक लिखित दस्तावेज जिसमें हमें किसी देश के नियम मिलते हैं, संविधान कहलाता है।
2 संविधान कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो समाजों के भीतर निर्णय लेने को नियंत्रित करते हैं
3 भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों में शामिल हैं:- समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के खिलाफ अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार, संवैधानिक उपचार का अधिकार।

                 -वंश रुहेला, विद्याधर नगर, जयपुर

संविधान एक किताब है जिसको बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने लिखा था। पूरा देश इस किताब में लिखी बातों के अनुसार चलता है। इस किताब में लिखी बातें छोटे-बड़े, अमीर-गरीब सब पर लागू होती हैं।


                         -परिना वर्मा 

संविधान हमें गरिमा पूर्ण जीवन जीने का अधिकार देता है। जीवन के अधिकार का अर्थ है कि व्यक्ति को आश्रय और आजीविका का भी अधिकार हो। क्योंकि इसके बिना कोई व्यक्ति जिंदा नहीं रह सकता।


                              -फरीदा खातून

किसी भी व्यवस्था के संचालन के लिए कुछ नियम और कानूनों की जरूरत होती है, जिसे उस समाज में रहने वाले लोगों को मानना जरूरी होता है। देश के इसी नियम और कानून को संविधान के नाम से जाना जाता है। हर देश में नियम और कानूनों का होना जरूरी होता है।


                           -समृद्धि शर्मा

संविधान की पाठशाला का उद्देश्य
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संविधान की पाठशाला का उद्देश्य आम नागरिकों को विशेषकर बच्चो तक संविधान व संवैधानिक मूल्यों के महत्व को पहुंचाना है। मेरे अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूँ कि देश की आबादी के बड़े हिस्से को अभी तक यह भी पता नहीं है कि संविधान क्या है ? संवैधानिक मूल्यों का महत्व तो बहुत दूर की बात है। संविधान क्या है, किसी भी देश के लिए संविधान क्यूँ जरूरी है ? इसकी जानकारी प्राप्त करने के साथ ही संवैधानिक मूल्यों को जीवन में आत्मसात करके ना केवल हम एक बेहतर देश बल्कि बेहतर दुनिया जिसमें किसी भी प्रकार की गैरबराबरी ना हो के सपने को साकार करने की दिशा में छोटा सा कदम उठा सकते हैं। संविधान की पाठशाला उसी छोटे से कदम का एक हिस्सा है।
-बसन्त हरियाणा
समन्वयक
संवैधानिक मूल्य पालन समिति
(09-08-2021)
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