दफदार करीम खां जी नसवाण : जोधपुर महाराजा हनुवन्त सिंह जी के उस्ताद
दफदार करीम खां जी नसवाण : जोधपुर महाराजा हनुवन्त सिंह जी के उस्ताद
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। उसूल पसंदी, वफादारी और ईमानदारी का इनाम जरूर मिलता है। सल्तनत काल से लेकर मुगल काल, नवाबी काल और अंग्रेजी काल के शासन में कई नामी कायमखानी सरदार हुए हैं। जिन्होंने अपनी उसूल पसंदी, वफादारी और ईमानदारी का इनाम पाया है। नागौर जिले का सतावनी इलाका (डीडवाना क्षेत्र) जो तीन सौ साल पहले कायमखानी नवाबों की एक रियासत हुआ करता था। इसी सतावनी इलाके के निम्बी खुर्द गांव में दफदार करीम खां जी नसवाण नाम के एक नामी कायमखानी सरदार हुए हैं। जो तत्कालीन जोधपुर रियासत के महाराजा हनुवन्त सिंह जी के उस्ताद रहे हैं।
करीम खां जी के उस्ताद बनने का वाकिया भी बड़ा अजीबोग़रीब है। वे राजकुमार हनुवन्त सिंह जी को घुड़सवारी सीखा रहे थे। हनुवन्त सिंह जी घोड़े को कन्ट्रोल नहीं कर पाए, तो गुस्से में आकर करीम खां जी ने राजकुमार की पीठ पर खींच कर चाबुक मार दिया और फटकार लगाते हुए कहा कि "जब तू घोड़े को नियन्त्रित नहीं कर पा रहा है तो इतनी बड़ी मारवाड़ रियासत (जोधपुर) को कैसे नियन्त्रित करेगा ?" जवानी की दहलीज को छू रहे राजकुमार हनुवन्त सिंह जी ने चाबुक के दर्द व उस्ताद की फटकार की शिकायत अपनी माँ रानी साहेबा से कर दी और रानी साहेबा ने यह शिकायत महाराजा उम्मेद सिंह जी से कर दी।
इस बात की खबर जब करीम खां जी को लगी, तो साथियों ने कहा कि तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी, अब राजा साहब तेरे को इसकी सजा देंगे। यह सुनकर करीम खां जी ने ट्रेन पकड़ी और अपने गांव निम्बी खुर्द आ गए। महाराजा उम्मेद सिंह जी ने पुत्र व पत्नी की शिकायत सुनने के बाद राजकुमार से पूछा कि "क्या सच में करीम खां ने तेरे को चाबुक मारा है ?" राजकुमार ने हाँ में जवाब दिया, तो महाराजा ने करीम खां जी को पेश करने का हुक्म दिया, तो उन्हें बताया गया कि वे जोधपुर छोड़ कर गांव चले गए हैं। महाराजा साहब ने हुक्म दिया कि दो सिपाही निम्बी खुर्द जाकर करीम खां को लेकर आओ और साथ में मेरा यह हुक्म भी उनको बता देना।
जब रियासत के दो सिपाही करीम खां के गांव पहुंचे और उनसे कहा कि राजा साहब ने आपको पेश होने का हुक्म दिया है, तो करीम खां जी ने कहा कि "मैं नहीं जाऊंगा, क्योंकि मैंने रियासत के फायदे के लिए राजकुमार के चाबुक मारा है और राजा साहब दरबार में मुझे कुछ कहेंगे तो मेरे यह बरदाश्त नहीं होगा। मैं मेरी बेइज्ज़ती करवाने के लिए दरबार में हाज़िर नहीं हो सकता।" सिपाहियों ने कहा आपको राजा साहब ने ससम्मान बुलाया है, वे आपको सजा नहीं देंगे, बल्कि सम्मानित करेंगे। यह सुनकर करीम खां जी उनके साथ जोधपुर आ गए।
जब वे महाराजा उम्मेद सिंह जी की सेवा में पेश हुए, तो राजा साहब ने राजकुमार हनुवन्त सिंह को बुला कर फिर पूछा कि इन्होंने तुम्हारे चाबुक मारा था ? राजकुमार ने हाँ में उत्तर दिया, तो महाराजा उम्मेद सिंह जी ने कहा कि करीम खां ने अगर चाबुक मारा है तो तेरे फायदे के लिए मारा है और आज से तेरे उस्ताद करीम खां ही होंगे। क्योंकि करीम खां बहुत वफादार व समझदार उस्ताद हैं, यह तेरे को कभी भी नुकसान नहीं पहुंचा सकते। इसके बाद राजा साहब ने दफदार करीम खां जी को राजकुमार हनुवन्त सिंह जी का उस्ताद नियुक्त कर दिया। हनुवन्त सिंह जी वर्तमान जोधपुर महाराजा गज सिंह जी के पिताजी हैं। यह वाकिया हमें रिटायर्ड एडिशनल एसपी मुमताज़ ख़ान साहब जोधपुर ने बताया है।
(06-08-2021)
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