मैं मोहम्मद अली जौहर•••आपसे सवाल कर रहा हूँ !

मैं मोहम्मद अली जौहर•••आपसे सवाल कर रहा हूँ !
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। मैं मोहम्मद अली जौहर, जिसे हिन्दुस्तान की तारीख (इतिहास) में मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम से जाना जाता है। मैं अपने जमाने का कद्दावर सहाफी (पत्रकार) था। मैंने मेरी पूरी जिन्दगी और सलाहियत (योग्यता) मुल्क की आजादी और गंगा-जमुनी तहजीब के फरोग (बढावे) में लगाई। क्योंकि मैं इस मुल्क की मिट्टी और यहाँ के भाईचारे से मुहब्बत करता था।


आपको पता है कि मैं मेरे मुल्क वतन ए अजीज हिन्दुस्तान की आजादी का ख्वाब देखते हुए और इसको हासिल करने की जद्दोजहद करते हुए इस दुनिया से रुख़सत हो गया था। वो मैं ही था, जिसने इंग्लैंड की जमीन पर अंग्रेजी हुकूमत को ललकार कर कहा था कि "मैं यहाँ मेरे मुल्क की आजादी का परवाना (ऑर्डर) लेने आया हूँ और आप जब तक मेरे मुल्क को आजाद नहीं करेंगे, मैं यहाँ से जाने वाला नहीं हूँ।"

वो मैं ही था, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की चौखट इंग्लैंड में जाकर हिलाई थी और कहा था कि "अगर मेरा इन्तकाल हो जाए तो मुझे अंग्रेजों की गुलामी वाले मुल्क की बजाए किसी आजाद मुल्क में दफन करना, मेरा उन्हीं दिनों इन्तकाल हो गया और मुझे फलस्तीन में दफन किया गया।"


मैं आजादी की सुबह नहीं देख सका, लेकिन आजादी के बाद हुकूमत ए हिन्द और यहाँ के इदारों ने मुझे पूरे अदबो एहतराम के साथ याद किया। तारीख़ में मुझे मौलाना जौहर और अली बन्धु के नाम से पढाया गया। लेकिन कुछ लोग और उनकी नफरती सोच लगातार यह कोशिश कर रही थी कि मेरा नाम तारीख़ के पन्नों से फाड़ कर फेंक दिया जाए। यह वो लोग थे, जिनके वैचारिक पुरखे अंग्रेजों की मुखबिरी किया करते थे और जिन्होंने जंग ए आजादी में अपनी अंगुली भी नहीं कटवाई थी।

मेरे नाम पर डाक टिकट जारी हुए। मेरे नाम से मुलायम सिंह यादव की सरकार ने यूपी के रामपुर में यूनिवर्सिटी बनाई। आज उस यूनिवर्सिटी को नफरती सोच को परवान चढ़ाने के लिए तबाहो बरबाद किया जा रहा है। क्योंकि वो मेरे नाम पर है और मैं मुसलमान हूँ। मैंने जंग ए आजादी हिन्दू या मुसलमान के नाम पर नहीं लड़ी, बल्कि एक सच्चे हिन्दुस्तानी होने के नाते और अपनी मिट्टी से मुहब्बत करने वाला होने के नाते लड़ी थी।

मैं पूछना चाह रहा हूँ मुल्क के उन खैरख्वाहों से, जिन्होंने मेरे नाम के डाक टिकट जारी किए। मैं पूछना चाह रहा हूँ मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव से कि आपने मुझे यह सम्मान क्यों दिया ? मैं पूछना चाह रहा हूँ आज़म खान से कि आपने मेरे नाम को याद रखने के लिए इतनी मेहनत करके यह यूनिवर्सिटी क्यों खड़ी की ? क्या आपको पता नहीं था कि एक दिन नफरत को फरोग देने वाले मेरे नाम पर बनी यूनिवर्सिटी की ईंटें उखाड़ देंगे ?

अब मैं उन लोगों से सवाल कर रहा हूँ जो मुल्क की जम्हूरियत और यहाँ के दस्तूरी इन्तजामात (संवैधानिक व्यवस्था) को बनाए रखना चाहते हैं, जिनके बाप दादाओं ने कुर्बानियां देकर मुल्क को आजाद करवाया था कि आप कब तक खामोश रहोगे ? मेरा नाम उखाड़ कर फेंक दीजिए, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन आपको प्यारे वतन की मिट्टी की कसम है, आप अपनी खामोशी तोड़ दीजिए, नहीं तो एक दिन बहुत कुछ उखाड़ दिया जाएगा और आप कुछ नहीं कर पाएंगे। मुल्क में बढती नफरत और टूटते गंगा-जमुनी तहजीब के ताने-बाने के लिए आपको कोई भी फ्रीडम फाइटर माफ नहीं करेगा, जिन्होंने अपना सब कुछ इस प्यारे वतन की आजादी के लिए कुरबान कर दिया था।

आपका हमदर्द और वतन ए अजीज हिन्दुस्तान का खैरख्वाह
-मौलाना मोहम्मद अली जौहर
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नोट:- मौलाना मोहम्मद अली जौहर साहब का काल्पनिक लेख इकरा पत्रिका की जुबान में।
(10 अगस्त 2021)
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